Motivation

कभी तो सोच के देखो।
एक व्यक्ति का घर शहर से दूर एक छोटे से गाँव में था। उसके घर में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। लेकिन फिर भी वो खुश नहीं रहता था। उसे लगता था की शहर की जिंदगी अच्छी है। इसलिए एक दिन उसने गाँव के घर को बेचकर शहर में घर लेने का फैसला किया। अगले ही दिन उसने शहर से अपने दोस्तों को बुलाया। जो रियल स्टेट में काम करता था।
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बिज़नेस में सफलता का राज़ – Business Motivational Story in Hindi for Success
अचानक एक दिन रास्ते में दो बहुत पुराने दोस्त रवि और वरुण की मुलाकात हो गई। दोनों को एक- दूसरे को देखकर बहुत खुशी हुई, आखिर दोनों ने बचपन से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई साथ जो की थी। फिर नौकरी और बिजनेस की वजह से दोनों अलग- अलग हो गए। काफी दिनों बाद मिले दो दोस्तों ने अपना सारा काम छोड़कर आज की शाम एक- दूसरे के साथ बिताने का सोचा। पिछली पुरानी सारी बातों के बाद दोनों ने एक- दूसरे के आर्थिक स्थिति पर बात शुरू कर दी। बातों- बातों में पता चला कि रवि अपनी जिंदगी में एक सफल इंसान बन गया है तो वरुण अबतक असफल था। ऐसे में वरुण ने रवि से पूछा कि ‘तुम कैसे सफल हुए? आखिर कैसे तुम जो भी काम करते हो, उसमें सफल हो जाते हो। मुझे भी बताओ क्योंकि मैं भी सफल होना चाहता हूं।
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मिट्टी का खिलौना – ये मोटिवेशनल कहानी हर किसी को पढ़नी चाहिए
एक गांव में एक कुम्हार रहता था, वो मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाया करता था, और उसे शहर जाकर बेचा करता था। जैसे तैसे उसका गुजारा चल रहा था, एक दिन उसकी बीवी बोली कि अब यह मिट्टी के खिलोने और बर्तन बनाना बंद करो और शहर जाकर कोई नौकरी ही कर लो, क्यूँकी इसे बनाने से हमारा गुजारा नही होता, काम करोगे तो महीने के अंत में कुछ धन तो आएगा। कुम्हार को भी अब ऐसा ही लगने लगा था, पर उसको मिट्टी के खिलोने बनाने का बहुत शौक था, लेकिन हालात से मजबूर था, और वो शहर जाकर नौकरी करने लगा, नौकरी करता जरूर था पर उसका मन अब भी, अपने चाक और मिट्टी के खिलोनों मे ही रहता था।
समय बितता गया, एक दिन शहर मे जहाँ वो काम करता था,उस मालिक के घर पर उसके बच्चे का जन्मदिन था। सब महंगे महंगे तोहफे लेकर आये, कुम्हार ने सोचा क्यूँ न मै मिट्टी का खिलौना बनाऊ और बच्चे के लिए ले जाऊ, वैसे भी हम गरीबों का तोहफा कौन देखता है। यह सोचकर वो मिट्टी का खिलौना ले गया. जब दावत खत्म हुई तो उस मालिक के बेटे को और जो भी बच्चे वहा आए थे सबको वो खिलोना पंसद आया और सब जिद करने लगे कि उनको वैसा ही खिलौना चाहिए। सब एक दूसरे से पूछने लगे की यह शानदार तोहफा लाया कौन, तब किसी ने कहा की यह तौहफा आपका नौकर लेकर आया.

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Face problems in life
We are very hurt by the opposite environment we have created against ourselves, even after hard work, when a large company manager is removed from his post due to his team's average outcome, in such a situation, Is going to take in. More
हिंदी कहानी 'घमण्ड का पुतला' Posted by Rudra yadav - Lucknow
बरसात में सरयू नदी इस जोर-शोर से चढ़ी कि हज़ारों गांव बरबाद हो गए, बड़े-बड़े तनावर दरख्त़ तिनकों की तरह बहते चले जाते थे। चारपाइयों पर सोते हुए बच्चे-औरतें, खूंटों पर बंधे हुए गाय और बैल उसकी गरजती हुई लहरों में समा गए। 
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जीवन में आने वाली समस्याओ का सामना
हम अपने खिलाफ निर्मित हुए विपरीत माहौल से बहुत आहत हो जाते है, बहुत मेहनत करने के बाद भी जब कोई बड़ी कंपनी के मैनेजर को अपनी टीम के औसत परिणामों की वजह से उसके पद से हटा दिया जाता है ऐसे में हमारे लिए ये दौर घोर निराशा में ले जाने वाला होता है।
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कौन है डॉ. गोविंदप्पा वेंकटस्वामी
डॉ वी को मोतियाबंद दूर करने में विशेषज्ञता प्राप्त थी जो नेत्रहीनता के प्रमुख कारणों में से एक है. गूगल ने उन पर लिखे गए एक ब्लॉग पोस्ट में बताया है कि डॉ वी एक दिन में 100 सर्जरी कर सकते थे. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में आंखों के इलाज के लिए शिविर लगाए, नेत्रहीनों के लिए एक पुनर्वास केंद्र खोला.
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"अटल जी" एक महायुग का अवसान
राष्ट्रपति में अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री में शास्त्री जी और "अटल जी" का नाम अमर रहेगा। अटल जी सार्वजनिक जीवन पर इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी वे सामान्य जन के प्रति बेहद संवेदनशील थे. 'वो वजीर-ए-आजम नहीं, हिंदुस्‍तान के दिलों के मालिक थे.'
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श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के अनमोल विचार
मैं अटल हूं.....मैं बिहारी भी हूं। पेड़ के ऊपर चढ़ा आदमी; ऊंचा दिखाई देता है। जड़ में खड़ा आदमी, नीचा दिखाई देता है। न आदमी ऊंचा होता है, न नीचा होता है; न बड़ा होता है, ना छोटा होता है। आदमी सिर्फ आदमी होता है।
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श्री अटल बिहारी वाजपेयी "एक अनन्त व्यक्तित्व"
अटल बिहारी वाजपेयी भारत के दसवें प्रधानमंत्री थे। वे हिन्दी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के ५ साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने २४ दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें ८१ मन्त्री थे।
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