दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण


दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण

बीते कुछ सालों से सर्दी के दस्तक देते ही दिल्ली गैस की चेंबर में तब्दील हो जाती है. इस बार फिर दिल्ली के प्रदूषण के स्तर में जिस तरह के बढ़ोतरी देखी जा रही है, उससे स्पष्ट होने लगा है कि एक बार फिर से दिल्ली वाले प्रदूषण की मार झेलने वाले हैं। हो सकता है कि आगामी दिनों में यह और भी गंभीर रूप ले ले।

दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण

बारिश का सिलसिला थमने और मौसम के बदलने के साथ दिल्ली में प्रदूषण की समस्या फिर सिर उठाने लगी है. राजधानी में हवा की गुणवत्ता में कमी आने लगी है. हवा की दिशा बदलने से दिल्ली में शुक्रवार को वायु की गुणवत्ता ‘खराब श्रेणी’ में आ गई. अधिकारियों ने बताया कि अब इसने प्रदूषित भारत-गांगेय मैदानी इलाकों से चलना शुरू कर दिया है. इसमें कहा गया कि आनंद विहार, मुंडका, नरेला द्वाराका सेक्टर-आठ, नेहरू नगर और रोहिणी इन सभी में ‘बहुत खराब' वायु गुणवत्ता रही और ये धीरे-धीरे गंभीर प्रदूषण स्तर की ओर बढ़ रहे हैं. शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा' माना जाता है, 50 से 100 के बीच ‘संतोषजनक', 101 से 200 के बीच ‘मध्यम' श्रेणी का, 201 से 300 के बीच ‘खराब', 301 से 400 के बीच ‘बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच एक्यूआई ‘गंभीर' माना जाता है. मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ के ताजा रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो दिल्ली में प्रदूषण के पांच कारण बताए गये हैं. 

पहला कारण: 

दिल्ली के प्रदूषण में अहम योगदान बाहरी राज्यों से आने वाली करीब 45 लाख गाड़ियों (प्राइवेट कार और ऑल इंडिया टैक्सी, साथ ही बाहर की टैक्सियां ओला-ऊबर भी शामिल हैं) और दिल्ली में जरुरी सामान पहुंचाने वाले ट्रकों का है. चूंकि ज्यादातर गाड़ियां डीजल या पेट्रोल से चलती हैं इसलिए इनका योगदान ज्यादा है. दिल्ली की 1 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के साथ बाहरी राज्यों की गाड़ियों का योगदान 40 फीसदी प्रदूषण दिल्ली में फैलाते हैं. दिल्ली की सड़कों की औसत रफ्तार 30 से 40 किमी प्रति घंटे से घटकर 20 से 22 किमी प्रति घंटा रफ्तार होने से गाड़ियां ज्यादा प्रदूषण फैला रही है. 2010 में 30 फीसदी प्रदूषण गाड़ियों के चलते होता था जो अब बढ़कर 40 फीसदी हो चुका है.

दूसरा कारण: 

दिल्ली के प्रदूषण में दूसरा योगदान दिल्ली में उद्योग और लैंडफिल साइट का है जिनके चलते करीब 23 फीसदी प्रदूषण होता है. इसमें अकेले भलस्वा, गाजीपुर और ओखला के लैंडफिल साइट से निकलने वाले धुंआ, उड़ता कचरा और कचरे से बिजली बनाने वाले कारखाने का योगदान करीब 10 फीसदी है.

तीसरा कारण: 

प्रदूषण का तीसरा कारण दिल्ली की हवा है. जिनके चलते करीब 19 फीसदी प्रदूषण होता है. इसमें दूसरे राज्यों का धूल धुंआ और प्रदूषण शामिल है. दिल्ली की भलस्वा लैंडफिल साइट पर फिर से आग फैल रही है. आसपास के पूरे इलाक़े में वायु-प्रदूषण का ख़तरा बढ़ता जा रहा है. ज़हरीले धुएं की वजह से लोग परेशान हैं. 

चौथा कारण: 

चौथा कारण दिल्ली में चलने वाला कंस्ट्रक्शन, लोगों के जलाने वाले कूड़े, शवदाह, यानि विभिन्न स्रोतों का है. इनसे दिल्ली में करीब 12 फीसदी प्रदूषण होता है. 

पांचवा कारण: 
प्रदूषण का पांचवा कारण दिल्ली के रिहायशी इलाके हैं, जहां रसोई से निकलने वाले धुंए, DG सेट जैसी चीजों से करीब 6 फीसदी प्रदूषण होता है. 2010 में रिहायशी इलाकों से 18 फीसदी प्रदूषण होता है लेकिन कैरोसिन के इस्तेमाल पर पाबंदी और शतप्रतिशत LPG होने से इस प्रदूषण में कमी आयी है.

हाईकार्ट ने कहा, लगता है जैसे 'गैस चैंबर' में रह रहे हैं

दिल्ली उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का वर्तमान स्तर 'चिंताजनक' स्थिति तक पहुंच गया है और यह 'गैस चैंबर में रहने' जैसा है। अदालत ने साथ ही केन्द्र और दिल्ली सरकार को इससे निपटने के लिए विस्तृत कार्य योजनाएं पेश करने का भी निर्देश दिया। न्यायमूर्ति बदर दुरेज अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार द्वारा दायर कार्य योजनाओं के बारे में कहा कि ये विस्तृत नहीं हैं, क्योंकि इनमें हर प्राधिकरण की स्पष्ट जिम्मेदारी तथा इन्‍हें करने के लिए समयसीमा नहीं है। पीठ ने उन्हें 21 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख पर विस्तृत कार्य योजनाएं देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के दो प्रमुख कारण धूल कण और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। अदालत ने केन्द्र तथा दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पहले कम से कम धूल सुनिश्चित किए बगैर किसी इमारत या सड़क का निर्माण नहीं हो।

अदालत ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश के अनुसार, लोगों द्वारा खुले में कूड़ा और पत्तियां नहीं जलाई जाएं। पीठ ने शहर प्रशासन को प्रिंट, ऑडियो और विजुअल मीडिया के जरिए इस तरह के क्रियाकलापों पर प्रतिबंध के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया।

फिर 'गैस चैंबर' बन रही दिल्ली

बीते कुछ सालों से सर्दी के दस्तक देते ही दिल्ली गैस की चेंबर में तब्दील हो जाती है. इस बार फिर दिल्ली के प्रदूषण के स्तर में जिस तरह के बढ़ोतरी देखी जा रही है, उससे स्पष्ट होने लगा है कि एक बार फिर से दिल्लीवाले प्रदूषण की मार झेलने वाले हैं. दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर के लिए कभी गाड़ियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो कभी पड़ोसी राज्यों में जलने वाले पराली को. हालांकि, दिल्ली में प्रदूषण को लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहले ही आगाह कर चुके हैं कि दिल्ली एक बार फिर से भयानक प्रदूषण की चपेट में आने वाली है. 

उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पर्यावरण सुरक्षा नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की स्थिति पर चर्चा करने के लिए राज्य सरकारों एवं दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की थी. ईपीसीए के एक सदस्य ने शुक्रवार को बताया कि स्थिति का जायजा लेने के बाद फैसला लिया गया कि उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां वायु गुणवत्ता ‘खराब' या ‘बेहद खराब' देखी गई.  पीएम2.5 (हवा में 2.5 माइक्रोमीटर से कम मोटाई के कणों की मौजूदगी) 147 पर पहुंच गया. पीएम10 के मुकाबले पीएम 2.5 जिन्हें “बारीक कण” भी कहा जाता है, स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं. केंद्र द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान प्रणाली के आंकड़े के अनुसार पीएम 10 का स्तर दिल्ली में 276 रहा. पीएम10 वे कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर होता है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि शहर ‘‘जल्द ही गैस चैंबर'' में बदल जाएगा क्योंकि केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकारों ने पराली जलाने वाले किसानों के लिए कुछ नहीं किया है. 

दिवाली से पहले ही पूरे उत्तर भारत समेत दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा खराब होने लगी है। देशभर में 70 शहरों में प्रदूषण के मामले में शुक्रवार को फरीदाबाद सबसे ऊपर यानी पहले पायदान और गुरुग्राम दूसरे पायदान पर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक का औसत 381 दर्ज किया गया, इसके पीछे 378 अंक के साथ गुरुग्राम दूसरे नंबर पर रहा। हालांकि राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता 361 दर्ज की गई लेकिन आनंद विहार इलाके में यह सूचकांक 409 तक पहुंच गया यानि यहां फरीदाबाद से भी ज्यादा वायु प्रदूषण रहा।

फिर लगाई NGT ने केजरी सरकार को फटकार

एनजीटी ने लगाया 50 करोड़ का जुर्माना

इस बार की सर्दी में दिल्ली एनसीआर और आसपास की आबोहवा संतुलित रहे, इसके लिए सरकार ने पर्याप्त उपाय नहीं किए हैं। हैरानी इस बात पर है कि पिछले साल दिल्ली के प्रदूषण को लेकर इतनी लोगों को हुई असहनीय परेशानी के बाद भी दिल्ली सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए एक बार फिर आप सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने विशेष आदेश के बावजूद रिपोर्ट तलब न करने में केजरीवाल सरकार के नाकाम रहने की कड़ी निंदा की है।

दिल्ली में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। ऐसे में एनजीटी ने प्रदूषण को रोकने में नाकाम दिल्ली सरकार पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया है। यह जुर्माना नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के मुताबिक दिल्ली की करीब 62 बड़ी यूनिट्स पर लगाम नहीं लगा पाने के कारण लगाया गया है। एनजीटी ने कहा कि हमारे बार-बार दिए गए आदेशों का पालन नहीं किया गया है। डीपीसीसी ने अब तक हलफनामा तक नहीं दिया कि इन यूनिट्स के लिए बिजली और पानी के कनेक्शन क्यों दिए गए हैं। 

मुख्य सचिव और पर्यावरण सचिव का हालही में तबादला होने का तथ्य देते हुए सरकार ने कहा कि उनको कार्रवाई योजना दाखिल करने के लिए और वक्त चाहिए। बता दें कि एनजीटी ने सरकार को अगले 48 घंटों के भीतर एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश दिया।

एनजीटी ने आप को फटकारते हुए कहा,'आपकी कार्रवाई योजना कहां है? आपने इसे क्यों नहीं सौंपा? अगर आप हर किसी को बदलते रहेंगे, तो हम क्या कर सकते हैं? यदि लोग आपके साथ बने नहीं रहना चाहते हैं तो यह हमारी समस्या नहीं है। आप बैठकें करते रहे हैं लेकिन हमें बताइए कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पिछले चार दिनों में आपने कोई काम किया, या कदम उठाया।' एनजीटी ने कहा,'हर अखबार की हेडलाइन में था कि इस हफ्ते वायु प्रदूषण का स्तर अधिक होने जा रहा। फिर भी आपने कोई कार्रवाई नहीं की। आप दो पहिया वाहनों के लिए छूट चाहते हैं लेकिन आप दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर रहे कि ये 60 लाख वाहन सबसे ज्यादा प्रदूषण की वजह हैं।'

वायु प्रदूषण कम करने के निर्देशों का कितना पालन हुआ: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा है कि वह हलफनामा दायर कर बताएं कि वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ है। न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने केंद्र व दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सरकार से पूछा है कि पराली और पटाखे जलाने पर रोक लगाने में वे कितना सफल हुए हैं।  

प्रदूषण रोकने में फेल हुई दिल्ली सरकार

दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण रोकना है तो पंजाब के किसानों को देना होगा मुआवजा 

  • पंजाब में धान की पराली जलाने से दिल्ली में जो दम घोंटने वाला प्रदूषण हो रहा है, उसका इलाज मिल गया है, मगर वह थोडा सा महंगा है, इसके लिए केंद्र सरकार को अपनी जेब ढीली करनी होगी, यह इलाज एम्स के किसी डॉक्टर या आईआईटी के विशेषज्ञ ने नहीं, बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने खोजा है।
  • उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धान की पराली न जलाने की एवज में पंजाब के किसानों को उनकी फसल पर सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मुआवजा दे दें। उन्होंने गुरुवार को अपना यह प्रपोजल प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष रखा है।
  • कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर उनसे कहा, पराली जलाने की समस्या का समाधान हो सकता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को 100 रुपए प्रति क्विंटल मुआवजा देना होगा। उन्होंने मोदी को बताया कि कटाई की ॠतु खत्म होने पर राज्य सरकार अपने स्तर पर पराली को जलाने से रोकने के लिए कदम उठाती है, लेकिन इसके बावजूद पराली जलाने की समस्या कम नहीं हो पा रही है। 
  • हो सकता है कि आगामी दिनों में यह और भी गंभीर रूप ले ले। यही वजह है कि इस समस्या को तत्काल प्रभाव से हल करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा, मोदी ने किसानों की समस्या के प्रति हमदर्दी व्यक्त की है। पराली जलाने की वजह से सर्दियों में विशेषकर दिवाली के आसपास दिल्ली की आबोहवा खराब हो जाती है। पंजाब-हरियाणा सरकारें पराली जलाने का दावा करती हैं, लेकिन यह समस्या खत्म नहीं हो पा रही है।
  • हरियाणा में पराली जलाने के अभी तक 65 मामले सामने आए हैं। इस बाबत करीब तीन दर्जन मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। सीपीसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल भी अक्तूबर में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कमी होनी शुरू हो गई थी और तीसरे हफ्ते तक स्थिति भयावह थी।
  • नासा के अध्ययन में भी सामने आया है कि दिल्ली के प्रदूषण का पंजाब व हरियाणा में जलने वाली पराली के बीच सीधा संबंध है। पराली जलाए जाने से दिल्ली की हवा जहरीली हो रही है और यह अपने घातक स्तर पर पीएम 2.5 स्तर पर पहुंच रही है। अकसर मानसून के बाद और सर्दी शुरू होने से पहले दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है जिससे लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्या फसलों को जलाने को लेकर पूर्ण प्रतिबंध काफी है ? 

नए कृषि मंत्री ने पिछले दिनों फसलों को जलाने को लेकर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही है. निगरानी पर भी कोई खास जोर नहीं है. 20 करोड़ की आबादी वाले सबसे बड़े राज्य में सिर्फ 11 मॉनिटरिंग स्टेशन है. जबकि 1.8 करोड़ की दिल्ली में 23 जगहों से वायु प्रदूषण पर नज़र रखी जाती है. यूपी सरकार का कहना है कि वो खूंटियों से बायो इंधन बनाने की लंबी योजना पर काम कर रही है.  सरकार ये भी कहती है कि वो दिल्ली से सटे 8 जिलों में 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों पर रोक लगाने वाली है.  पर बड़ा सवाल बाकी है कि क्या इतना ही काफी है.

गाजियाबाद से लेकर वाराणसी तक प्रदूषण का स्तर बेहद खराब

दिल्ली में प्रदूषण की बात हर जगह हो रही है लेकिन ऐसा नहीं है कि बाकी शहरों का हाल ठीक है. बात करें उत्तर प्रदेश की तो लखनऊ, आगरा, वाराणसी में वायु प्रदूषण से हाल बुरा है. आगरा में तो पीएम 2.5 का स्तर खतरे की सीमा को पार कर चुका है. वहीं गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर में भी जहरीली हवा फैली हुई है. केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के आंकड़ों की मानें तो बीते 12 दिनों में गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा है. इससे पहले जून 2016 की आई रिपोर्ट में भी वायुप्रदूषण के लिहाज से इस शहर को देश के सबसे प्रदूषित औद्योगिक इलाके में शुमार किया जा चुका है. बीते एक साल में, खासकर इन तीन दिनों में एक दिन गाजियाबाद में पीएम 2.5 का स्तर 91 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और 48 दिन बेहद खतरनाक स्तर के पार रहा. पर्यटन स्थल का केंद्र वाराणसी और आगरा का भी बुरा हाल है.

सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी शुक्रवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर था. बीते 365 दिनों में शहर में पीएम 2.5 का स्तर हर चौथे दिन खतरनाक रहा और हर चार में से तीन दिन हालत बेहद बुरी रही. आगरा में इस साल तीन में से एक दिन पीएम 2.5 का स्तर बहुत ही खराब रहा.

टॉप 10 प्रदूषित शहरों में 7 उत्तर प्रदेश के

गाजियाबाद सबसे ऊपर 

भारत के 94 शहरों में पीएम (पर्टिकुलेट मैटर) 10 तेजी से बढ़ रहा है। इनमें उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद नंबर वन जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली चौथे नंबर पर है। टॉप 10 प्रदूषित शहरों में 7 उत्तर प्रदेश के हैं। साथ ही देश के 5 शहरों में नाइट्रोजनडाईऑक्साइड तेजी से फैल रहा है और इस मामले में राजधानी दिल्ली टॉप पर है। उसके बाद क्रमश: बादलपुर, पुणे, उल्हास नगर और कोलकाता हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 3 वर्षों की निगरानी कर इस संबंध में रिपोर्ट बनाई है। सीपीसीबी ने पिछले सप्ताह सभी राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के चेयरमैन व सदस्य सचिवों की एक कांफ्रेंस में यह रिपोर्ट साझा की। 

तैयार किया 42 सूत्रीय एक्शन प्लान
इस रिपोर्ट के साथ-साथ स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया गया 42 सूत्रीय एक्शन प्लान भी अधिकारियों को बताया गया। प्लान में वाहनों का प्रदूषण कम करने, एक अप्रैल 2020 में बीएस छह लागू करने, सड़कों पर उडऩे वाली धूल को नियंत्रित करने व खुले में आग जलाने और बहुत अधिक प्रदूषण हो जाने की स्थिति में डीजल चालित वाहनों पर रोक लगाने जैसे विभिन्न उपाय सुझाए गए हैं। सीपीसीबी ने दिल्ली- एनसीआर के 22 जिलों की यातायात पुलिस और स्थानीय निकाय प्रमुखों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने के लिए पत्र भी लिखा है।

सर्वाधिक प्रदूषित शहर

1. गाजियाबाद, 2. इलाहाबाद, 3. बरेली, 4. दिल्ली, 5. कानपुर, 6. फिरोजाबाद, 7. आगरा, 8. अलवर, 9. गजरौला, 10. जयपुर

पीएम 10 बढऩे के प्रमुख कारण
पीएम (पर्टिकुलेट मैटर) 10 का इंडेक्स वाहनों से निकलने वाले धुएं से सबसे ज्यादा बढ़ता है। इसके अलावा भवन निर्माण से उडऩे वाली धूल, वाहनों के चलने से उडऩे वाली धूल और रेगिस्तानी इलाकों से उडऩे वाली हवा में शामिल धूल कण भी इसके प्रमुख कारण हैं।

गाजियाबाद निकला देश का सबसे 'गंदा' शहर

शुक्रवार को शहर का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 482 पर पहुंच गया, जिससे गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर हो गया। वहीं शहर में कंस्ट्रक्शन साइटों पर निर्माण कार्य अब भी चालू है। गाजियाबाद की डीएम रितु माहेश्वरी का कहना है कि प्रदूषण को देखते हुए नगर निगम और नगरपालिकाओं की तरफ से सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। अगर आज भी स्थिति कंट्रोल में नहीं आती है तो कंस्ट्रक्शन साइट पर निर्माण कार्य बंद करवाया जाएगा।

कंस्ट्रक्शन साइटों पर अब भी काम

एक तरफ प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता जा रहा है, वहीं प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। एनसीआर के अन्य शहरों में कंस्ट्रक्शन साइट पर निर्माण कार्य पर रोक लग चुकी है, जबकि गाजियाबाद में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। डीएम अब भी मौसम के ठीक होने का इंतजार कर रहीं हैं।

आगे भी बनी रहेगी ऐसी स्थिति
शुक्रवार को देश के 59 शहरों के आंकड़े में जिला गाजियाबाद की हवा सबसे खराब रही। इसमें पीएम-10 का स्तर  सबसे अधिक रहा। एनसीआर में दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव और नोएडा की स्थिति भी बुरी रही। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ए.के. तिवारी ने बताया कि राजस्थान से आ रही हवा की वजह से दिक्कत हो रही है। इसलिए पीएम-10 का स्तर बढ़ा हुआ है। मौसम विज्ञान विभाग दिल्ली के डायेक्टर डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव का कहना है कि आने वाले दो दिन तक राजस्थान से चलने वाली हवाओं का प्रकोप बना रहेगा। इसके बाद ही कुछ राहत की उम्मीद है।

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