हिंदू धर्म के अनुसार मृत्य के बाद का अनुभव


हिंदू धर्म के अनुसार मृत्य के बाद का अनुभव

जिसने भी इस धरती पर किसी भी रूप में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन इस शरीर को छोड़ कर मृत्यु को गले लगाना ही है। आखिर मृत्यु के बाद होता क्या है ?

शाश्वत सत्य

जिसने भी इस धरती पर किसी भी रूप में जन्म लिया है, उसे एक न एक दिन इस शरीर को छोड़ कर मृत्यु को गले लगाना ही है, यह इस संसार का शाश्वत सत्य है। हम सभी कभी न कभी यह जरूर सोचते होंगे की आखिर मृत्यु के बाद होता क्या है। खैर, अभी तक इस प्रश्न का उत्तर किसी को नहीं मिला है, हाँ यह जरूर है की पूरी दुनिया के वैज्ञानिक अपने अपने स्तर पर इसका जवाब खोजने में लगे हुए हैं, और थोड़ी सी ही सही लेकिन कुछ जानकारी जरूर हमें प्राप्त हुयी है।

एक सबसे बड़े medical studies में वैज्ञानिकों ने मौत से नजदीकी अनुभव और शरीर के बाहर का अनुभव होने की खोज की है, जिसमे उन्होंने साबित किया हैं की इन्सान के मृत्यु के बाद उसका दिमाग पूरी तरह बंद हो जाता है लेकिन तब भी उसके अन्दर की चेतना और जागृतता जारी रहती है।  वैज्ञानिकों ने 4 साल तक 2000 जितने लोगो की जांच की है और उन्होंने देखा की इनमे से 40% लोग ऐसे थे जो मर चुके थे और थोड़े समय के बाद इनका दिल फिर से धडकने लगा था। इस जीवन और मृत्यु के समय के दौरान लोगों ने किसी तरह की जागृतता अनुभव करने का वर्णन किया है।

कई लोगों ने मृत्यु के बाद अपने शरीर को पूरी तरह से छोड़ने के बाद खुद के ही शरीर को Room के किसी एक corner से देख सकने का का अनुभव किया। उन्होंने अनुभव किया की वे room में उनके शरीर से थोड़ी ऊंचाई पर स्थित हैं और doctors उनका ईलाज कर रहे हैं। वे लोग अपने आप को देख सकते थे। इलाज के वक्त कुछ लोगों ने 3-5 मिनट तक मर चुके होने के बावजूद उस वक्त के दौरान उस room में होती हुई प्रत्येक activities का वर्णन किया। उसमें उन्होंने Nursing staffs के लोगों के काम का वर्णन किया और machines की आवाजें सुनी। ज्यादातर मामले में दिल धडकना बंद हो जाने के बाद 20-30 सेकंड के अंदर दिमाग काम करना बंद कर देता है, लेकिन इन मामलों में दिल धडकना बंद हो जाने के 3-5 मिनिट तक वहाँ पर शरीर में जागृतता मौजूद थी।
 
कुछ लोगों ने असामान्य रूप से शांति की भावना का अनुभव किया तो कुछ लोगों ने समय बहुत धीरे से चलने का या बहुत ही तेजी से चलने का अनुभव किया। कुछ लोगों ने सूरज के जैसी सुनहरे रंग की बहुत चमकदार रोशनी को देखने की बात कही तो कुछ लोगों ने किसी अनजान डर का अनुभव किया और कुछ लोगों ने खुद को गहरे पानी में डूबने का या गहराई में घसीटे जाने का अनुभव किया। कुछ लोगों को चमकदार रौशनी की tunnel दिखती हैं जिसमे वे light की ओर तेजी से जाने लगते हैं।

69% मामलों में लोग अपने आसपास एक असामान्य प्यार की मौजूदगी होने का अनुभव करते हैं, वहाँ पर उन्हें कुछ इन्सान के आकार के रोशनी से भरपूर कुछ प्राणी दिखते हैं, कईयों का मानना है की यह प्राणी उनके मरे हुए प्रियजन थे। कुछ लोग ऐसी जगह पर पहुँच जाते हैं जहाँ पर उन्हें बहुत सारा प्यार और ख़ुशी महसूस होती है। उन्हें पृथ्वी के जीवन से यहाँ का जीवन ज्यादा असली लगता है। उनको लगता है की मानव शरीर वाला जीवन एक सपना था लेकिन यह सच्चाई है। कुछ लोग भगवान से मिलकर वापस आने की बात करते हैं। कुछ लोगो का कहना है की उनको दिखनेवाले रोशनीवाले प्राणी उनसे कहा है की तुम्हारा अभी यहाँ पर आने का वक़्त नहीं हुआ है, तुम्हे अभी बहुत काम करने बाकी है इसलिए तुम्हे वापस जाना पड़ेगा। कुछ लोग भविष्य की झलक देखने का दावा करते हैं तो कुछ लोग असीमित ज्ञान प्राप्त कर लेने का दावा करते हैं।

वैसे वैज्ञानिक अभी इस विषय पर पूरी तरह से सही निष्कष तक नहीं पहुँच पाए हैं। कुछ वैज्ञानिकों का दावा हैं की ऐसे अनुभव लोगों के भ्रम भी हो सकते हैं या फिर दिमाग के अन्दर होती कोई chemical reactions का परिणाम हो सकते हैं, लेकिन मौत से नजदीकी अनुभव करने वाले लोगों ने जो देखा उस पर पूरा भरोसा रखते हैं। खैर, सच्चाई चाहे जो भी हो लेकिन science एक न एक दिन इस विषय पर से पर्दा जरुर उठाएगा।
हिंदू धर्म के अनुसार मृत्यु के बाद क्या होता है? 

मृत्यु के बाद क्या होता है? 

दुनिया के इस सबसे मुश्किल सवाल का सरल जवाब ये है कि मृत्यु के बाद या तो हमारा पुनर्जन्म होता है और हम फिर से जीवन का अनुभव करते हैं या फिर हमें पुनर्जन्म के चक्र (संसार) से मुक्ति मिल जाती है। हालांकि, यदि हम इसे भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से देखें तो इस सवाल का जवाब थोड़ा और अधिक जटिल है। मृत्यु के बाद क्या होता है? दुनिया भर में इस सवाल को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। पहला ऐसे लोग जो मानते हैं कि आप केवल एक बार जन्म लेते हैं और दुसरा ऐसे लोग जो विश्वास करते हैं कि मनुष्य कई जन्म लेता है। 

मौत के बाद क्या होता है? इस विषय में अलग-अलग बातें और मान्यताएं प्रचलित हैं। इन मान्यताओं और धारणाओं को वास्तविक नहीं माना जा सकता क्योंकि इनमें से अधिकतर काल्पनिक,मनघढ़ंत एवं झूठी होती हैं। ऐसे लोग जो मानते हैं कि मनुष्य का जन्म केवल होता हैं। ऐसे लोगों के तर्क को समय-समय पर दुनिया भर में जन्म लिए तत्वज्ञानियों एवं योगियों ने जीवन काल की इस गुत्थी को सुलझाया है। ऐसे आत्मज्ञानी महापुरुष समाधि के समय सभी बंधनों से मुक्त होकर कालातीत में चले जाते हैं।


इस अवस्था में वो जानने की कोशिश करते हैं कि मृत्यु से पहले जीवन क्या था? और मृत्यु के बाद जीवन क्या होगा? ऐसे ही कुछ सिद्ध योगियों ने इस बात का दावा किया है कि मृत्यु की तरह ही जीवन भी अनन्त है। दोनों एक दुसरे के पूरक हैं। अगर मृत्यु होगी तभी जन्म होगा। और अगर जन्म होगा तो मृत्यु भी अवश्य होगी। व्यक्ति हर क्षण जाग्रत, स्वप्न और फिर सुषुप्ति अवस्था में जिता है। 
आत्मा शरीर में रहकर चार स्तर से गुजरती है :  
    1. जाग्रत 
    2. स्वप्न 
    3. सुषुप्ति 
    4. तुरीय अवस्था।
जन्म एक जाग्रति है और जीवन एक स्वप्न तथा मृत्यु एक गहरी सुषुप्ति अवस्था में चले जाना है, लेकिन जिन लोगों ने जीवन में नियमित 'ध्यान' किया है उन्हें मृत्यु मार नहीं सकती। ध्यान की एक विशेष दशा में व्यक्ति तुरीय अवस्था में चला जाता है। तुरीय अवस्था को हम समझने की दृष्टि से पूर्ण जागरण की अवस्था कह सकते हैं, लेकिन यह उससे कहीं अधिक बड़ी बात है।

उक्त चारों स्तरों के उपस्तर भी होते हैं जैसे कोई व्यक्ति जागा हुआ होकर भी सोया-सोया-सा दिखाई देता है। आँखें खुली है किंतु कई लोग बेहोशी में जीते रहते हैं। जीवन कब गुजर गया उन्हें पता ही नहीं चलता तब जन्म और मृत्यु का क्या भान रखेंगे। जैसे सुबह उठकर हम कुछ सपने भूल जाते हैं और कुछ हमें याद रहते हैं उसी तरह शैशवकाल की कुछ यादें ही शेष रह जाती है वह भी धुंधली-सी।जिस तरह सुषुप्ति से स्वप्न और स्वप्न से हम जाग्रति में जाते हैं उसी तरह मृत्युकाल में हम जाग्रति से स्वप्न और स्वप्न से सु‍षुप्ति में चले जाते हैं फिर सुषुप्ति से गहन सुषुप्ति में।

आखिर मृत्यु के बाद कहां जाती है आत्मा 

जीवन और मृत्यु का रहस्य के रहस्य को लेकर दुनिया के हर इंसान के मन में प्रश्र उठते ही रहते हैं। मृत्यु के विषय में दुनियाभर में अलग-अलग तरह की बातें और मान्यताएं प्रचलित हैं। दरअसल, व्यक्ति रोज मरता है और रोज पैदा होता है, लेकिन उसे इस बात का आभास नहीं होता। पहले तीन स्तरों का अनुभव प्रत्येक मनुष्य को होता ही है, लेकिन चौथे स्तर का अनुभव केवल ‍आत्मवान या मोक्ष को प्राप्त कर चुके इंसान को ही होता है। गरूड़ पुराण के मुताबिक जब आत्मा शरीर छोड़ती है तो उसे लेने दो यमदूत आते हैं। 

अगर मरने वाला सज्जन या पुण्यात्मा है तो उसके प्राण निकलने में कोई पीड़ा नहीं होती, लेकिन अगर वो दुराचारी या पापी है तो उसे अधिक पीड़ा सहनी पड़ती है। गरूड़ पुराण के मुताबकि मृत्यु के बाद आत्मा को 24 घंटों के दौरान उसने पाप और पुण्य का हिसाब दिखाया जाता है। जिसके बाद आत्मा को फिर मृत्यु वाली जगह पर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद 13 दिनों तक वह वहीं रहती है और 14 वें दिन यमलोक की यात्रा करती है।

मृत्युकाल में 'यम' नामक वायु में कुछ काल तक आत्मा स्थिर रहने के बाद पुन: गर्भधारण करती है। यह क्रम चलता रहता है। यह तो बात हुई जन्म और मृत्यु के चक्र की अब देंखे कि यही क्रम हमारे साथ जीवनभर दिन और रात में चलता रहता है। इस चक्र से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है ध्यान द्वारा मोक्ष को उपलब्ध हो जाना। दूसरा कोई उपाय नहीं है।


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