लखनऊ एक जीवंत शहर एवं दर्शनीय स्थल


लखनऊ एक जीवंत शहर एवं दर्शनीय स्थल

आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। लखनऊ हिन्दी फिल्म उद्योग की आरंभ से ही प्रेरणा रहा है। लखनऊ की प्रगति दिल्ली, मुंबई, सूरत एवं गाजियाबाद से कहीं कम नहीं है। 
लखनऊ भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ों तथा चिकन की कढ़ाई के काम के लिये जाना जाता है। लखनऊ उस क्ष्रेत्र मे स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ को नवाबों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। 

लखनऊ शहर और आस-पास

पुराने लखनऊ में चौक का बाजार प्रमुख है। यह चिकन के कारीगरों और बाजारों के लिए प्रसिद्ध है। चौक में नक्खास बाजार भी है। यहां का अमीनाबाद दिल्ली के चाँदनी चौक की तरह का बाज़ार है जो शहर के बीच स्थित है। अमीनाबाद लखनऊ का एक ऐसा स्थान है जो पुस्तकों के लिए मशहूर है। यहां थोक का सामान, महिलाओं का सजावटी सामान, वस्त्राभूषण आदि का बड़ा एवं पुराना बाज़ार है। दिल्ली के ही कनॉट प्लेस की भांति यहां का हृदय हज़रतगंज है। प्रदेश का विधान सभा भवन भी यहीं स्थित है। इसके अलावा हज़रतगंज में जी पी ओ, कैथेड्रल चर्च, चिड़ियाघर, उत्तर रेलवे का मंडलीय रेलवे कार्यालय (डीआरएम ऑफिस), लाल बाग, पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय (पीएमजी), परिवर्तन चौक, बेगम हज़रत महल पार्क भी काफी प्रमुख़ स्थल हैं। इनके अलावा निशातगंज, डालीगंज, सदर बाजार, बंगला बाजार, नरही, केसरबाग भी यहां के बड़े बाजारों में आते हैं। 
यहां के आवासीय इलाकों में सिस-गोमती क्षेत्र में राजाजीपुरम, कृष्णानगर, आलमबाग, दिलखुशा, आर.डी.एस.ओ.कालोनी, चारबाग, ऐशबाग, हुसैनगंज, लालबाग, राजेंद्रनगर, मालवीय नगर, सरोजिनीनगर, हैदरगंज, ठाकुरगंज एवं सआदतगंज आदि क्षेत्र हैं। ट्रांस-गोमती क्षेत्र में गोमतीनगर,इंदिरानगर, महानगर, अलीगंज, डालीगंज, नीलमत्था कैन्ट, विकासनगर, खुर्रमनगर, जानकीपुरम एवं साउथ-सिटी (रायबरेली रोड पर) आवासीय क्षेत्र हैं।

लखनऊ की अर्थ व्यवस्था

खनऊ की प्रगति दिल्ली, मुंबई, सूरत एवं गाजियाबाद से कहीं कम नहीं है। लखनऊ उत्तरी भारत का एक प्रमुख बाजार एवं वाणिज्यिक नगर ही नहीं, बल्कि उत्पाद एवं सेवाओं का उभरता हुआ केन्द्र भी बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी होने के कारण यहां सरकारी विभाग एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बहुत हैं। यहां के अधिकांश मध्यम-वर्गीय वेतनभोगी इन्हीं विभागों एवं उपक्रमों में नियुक्त हैं। सरकार की उदारीकरण नीति के चलते यहां व्यवसाय एवं नौकरियों तथा स्व-रोजगारियों के लिए बहुत से अवसर खुल गये हैं। इस कारण यहां नौकरी पेशे वालों की संख्या निरंतर बढ़ती रहती है। लखनऊ निकटवर्ती नोएडा एवं गुड़गांव के लिए सूचना प्रौद्योगिकी एवं बीपीओ कंपनियों के लिए श्रमशक्ति भी जुटाता है। यहां के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लोग बंगलुरु एवं हैदराबाद में भी बहुतायत में मिलते हैं। 

फिल्मों की प्रेरणा

लखनऊ हिन्दी फिल्म उद्योग की आरंभ से ही प्रेरणा रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति ना होगा कि लखनवी स्पर्श के बिना, बॉलीवुड कभी उस ऊंचाई पर नहीं आ पाता, जहां वह अब है। अवध से कई पटकथा लेखक एवं गीतकार हैं, जैसे मजरूह सुलतानपुरी, कैफ़े आज़मी, जावेद अख्तर, अली रज़ा, भगवती चरण वर्मा, डॉ॰कुमुद नागर, डॉ॰अचला नागर, वजाहत मिर्ज़ा (मदर इंडिया एवं गंगा जमुना के लेखक), अमृतलाल नागर, अली सरदार जाफरी एवं के पी सक्सेना जिन्होंने भारतीय चलचित्र को प्रतिभा से धनी बनाया। लखनऊ पर बहुत सी प्रसिद्ध फिल्में बनी हैं जैसे शशि कपूर की जुनून, मुज़फ्फर अली की उमराव जान एवं गमन, सत्यजीत राय की शतरंज के खिलाड़ी और इस्माइल मर्चेंट की शेक्स्पियर वाला की भी आंशिक शूटिंग यहीं हुई थी। बहू बेगम, मेहबूब की मेहंदी, मेरे हुजूर, चौदहवीं का चांद, पाकीज़ा, मैं मेरी पत्नी और वो, सहर, अनवर और बहुत सी हिन्दी फिल्में या तो लखनऊ में बनी हैं, या उनकी पृष्ठभूमि लखनऊ की है। गदर फिल्म में भी पाकिस्तान के दृश्यों में लखनऊ की शूटिंग ही है। इसमें लाल पुल, लखनऊ एवं ला मार्टीनियर कालिज की शूटिंग हैं।

खानपान : अवधी व्यंजन

अवध क्षेत्र की अपनी एक अलग खास नवाबी खानपान शैली है। इसमें विभिन्न तरह की बिरयानियां, कबाब, कोरमा, नाहरी कुल्चे, शीरमाल, ज़र्दा, रुमाली रोटी और वर्की परांठा और रोटियां आदि हैं, जिनमें काकोरी कबाब, गलावटी कबाब, पतीली कबाब, बोटी कबाब, घुटवां कबाब और शामी कबाब प्रमुख हैं। शहर में बहुत सी जगह ये व्यंजन मिलेंगे। ये सभी तरह के एवं सभी बजट के होंगे। जहां एक ओर १८०५ में स्थापित राम आसरे हलवाई की मक्खन मलाई एवं मलाई-गिलौरी प्रसिद्ध है, वहीं अकबरी गेट पर मिलने वाले हाजी मुराद अली के टुण्डे के कबाब भी कम मशहूर नहीं हैं।इसके अलावा अन्य नवाबी पकवानो जैसे 'दमपुख़्त', लच्छेदार प्याज और हरी चटनी के साथ परोसे गय सीख-कबाब और रूमाली रोटी का भी जवाब नहीं है। लखनऊ की चाट देश की बेहतरीन चाट में से एक है। और खाने के अंत में विश्व-प्रसिद्ध लखनऊ के पान जिनका कोई सानी नहीं है।

लखनऊ के अवधी व्यंजन जगप्रसिद्ध हैं। यहां के खानपान बहुत प्रकार की रोटियां भी होती हैं। ऐसी ही रोटियां यहां के एक पुराने बाज़ार में आज भी मिलती हैं, बल्कि ये बाजार रोटियों का बाजार ही है। अकबरी गेट से नक्खास चौकी के पीछे तक यह बाजार है, जहां फुटकर व सैकड़े के हिसाब से शीरमाल, नान, खमीरी रोटी, रूमाली रोटी, कुल्चा जैसी कई अन्य तरह की रोटियां मिल जाएंगी। सुबह नौ से रात नौ बजे तक गर्म रोटी खरीदी जा सकती है। लखनऊ के व्यंजन विशेषज्ञों ने ही परतदार पराठे की खोज की है, जिसको तंदूरी परांठा भी कहा जाता है। लखनऊ वालों ने भी कुलचे में विशेष प्रयोग किये। कुलचा नाहरी के विशेषज्ञ कारीगर हाजी जुबैर अहमद के अनुसार कुलचा अवधी व्यंजनों में शामिल खास रोटी है। लखनऊ के गिलामी कुलचे यानी दो भाग वाले कुलचे उनके परदादा ने तैयार किये थे।

खाना

  • लखनऊ दशेरी आमों के लिए भी जाना जाता है, जो विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं।
  • लखनऊ में खाने में सबसे प्रसिद्ध व्यंजनों में टिक्का और कबाब है। सड़क के किनारे, अमीनाबाद और पुराने चौक के पास में स्थित कई सारे होटलों में आपको सस्ते में कई अनोखे व्यंजन खाने को मिल सकते हैं। हजरतगंज में तुलसी सिनेमाघर के पास आपको कई मांसाहारी व्यंजन मिल जाएगा।
  • कम पैसों में
  • अल्जाइका - आपको यहाँ बहुत अच्छा मांसाहारी भोजन मिलेगा, इसमें मुख्यतः चिकन है।
  • बाजपई कचौरी भंडार - लखनऊ के बहुत अच्छे कचौरी यहाँ मिलते हैं।
  • हाजी साहिब दुकान
  • जय दुर्गमा होटल
  • प्रकाश चाय कुल्फी
पीना
  • आपको शराब ढूंढने में कोई परेशानी नहीं होगा, लेकिन कई होटलों में आपको शराब तो मिल जाएगा लेकिन उन होटलों में से कई ऐसे हो सकते हैं, जिन्हें शराब बेचने की अनुमति ही प्राप्त नहीं हुई है। अतः पाँच सितारा होटल या भोजनालय से शराब लेना आपके लिए ठीक रहेगा।
  • अच्छा पानी पीने के लिए आपको आसानी से बोतल में बंद पानी किसी भी दुकान में मिल जाएगा। इसके अलावा आप अच्छे होटल में जा सकते हैं या घर में ही पानी गर्म कर पी सकते हैं। इनमें से लगभग सभी विकल्प उपलब्ध होता ही है, लेकिन आप चाहें तो आम का रस, गन्ने, संतरे आदि का रस भी पी सकते हैं। कई स्थानों में इस तरह के फलों के रस निकालते समय अधिक सफाई नहीं की जाती है, तो आप किसी ऐसे जगह से फलों के रस ले सकते हैं, जहाँ अच्छी तरह से सफाई होती हो।
सोना
  • अंबेडकर पार्क का रात का दृश्य
  • कम पैसों में
  • होटल मानसी गंगा - पंडरीबा सड़क पर, चारबाग, खालसा अस्पताल के पास में है।
  • लखनऊ होमस्टे
  • शर्मा होटल - यहाँ दो शर्मा होटल है, एक 30 वर्ष पुराना भी है। नया वाला चारबाग रेलवे स्टेशन के सामने, दूसरा भी वहीं है।
  • मध्यम पैसों में
  • आरिफ कासल्स - राणा प्रताप मार्ग में
  • करल्टन - राणा प्रताप मार्ग में
  • कम्फर्ट इन - विभूति खंड, गोमती नगर
  • होटल गोमती - हजरतगंज के पास
  • होटल मन्दाकिनी - गौतम बुध मार्ग
  • होटल सागर
  • पार्क इन - हजरतगंज के पास
  • अधिक पैसे में
  • क्लार्क्स अवध - परिवर्तन चौक, महात्मा गांधी मार्ग, बेगम हजरत महल बाग के सामने में है।
  • दयाल पैराडाइज - विपुल खंड 5, गोमती नगर में।
  • पिक्काडिली होटल - कानपुर सड़क, बारा बिरवा में, लखनऊ हवाई अड्डे से तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

मीडिया / प्रेस 

लखनऊ इतिहास में भी पत्रकारिता का एक प्रमुख केन्द्र रहा है। भारत के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले आरंभ किया गया समाचार पत्र नेशनल हेराल्ड लखनऊ से ही प्रकाशित होता था। इसके तत्कालीन संपादक मणिकोण्डा चलपति राउ थे। शहर के प्रमुख अंग्रेज़ी समाचार-पत्रों में द टाइम्स ऑफ़ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, द पाइनियर एवं इंडियन एक्स्प्रेस हैं। इनके अलावा भी बहुत से समाचार दैनिक अंग्रेज़ी, हिन्दी एवं उर्दू भाषाओं में शहर से प्रकाशित होते हैं। हिन्दी समाचार पत्रों में स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एवं आई नेक्स्ट हैं। प्रमुख उर्दू समाचार दैनिकों में जायज़ा दैनिक, राष्ट्रीय सहारा, सहाफ़त, क़ौमी rathe~  एवं आग हैं। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया एवं यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के कार्यालय शहर में हैं, एवं देश के सभी प्रमुख समाचार-पत्रों के पत्रकार लखनऊ में उपस्थित रहते हैं।
रेडियो

ऑल इंडिया रेडियो के आरंभिक कुछ स्टेशनों में से लखनऊ केन्द्र एक है। यहां मीडियम वेव पर प्रसारण करते हैं। इसके अलावा यहां एफ एम प्रसारण भी २००० से आरंभ हुआ था। शहर में निम्न रेडियो स्टेशन चल रहे हैं:.
९१.१  ;मेगा हर्ट्ज़ रेडियो सिटी
९३.५ मेगा हर्ट्ज़ RED एफ़.एम
९८.३ मेगा हर्ट्ज़ रेडियो मिर्ची
१००.७ मेगा हर्ट्ज़ एआईआर एफ़एम रेनबो
१०५.६ मेगा हर्ट्ज़ ग्यानवाणी-एजुकेशनल

इंटरनेट

शहर में इंटरनेट के लिए ब्रॉडबैण्ड इंटरनेट कनेक्टिविटी एवं वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध हैं। प्रमुख सेवाकर्ता भारत संचार निगम लिमिटेड, भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशन्स, टाटा कम्युनिकेशन्स एवं एसटीपीआई का बृहत अवसंरचना ढांचा है। इनके द्वारा गृह प्रयोक्ताओं एवं निगमित प्रयोक्ताओं को अच्छी गति का ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होता है। शहर में ढेरों इंटरनेट कैफ़े भी उपलब्ध हैं।

लखनऊ शहर के पर्यटन स्थल

शहर और आसपास कई दर्शनीय स्थल हैं। इनमें ऐतिहासिक स्थल, उद्यान, मनोरंजन स्थल एवं शॉपिंग मॉल आदि हैं। यहां कई इमामबाड़े हैं। इनमें बड़ा एवं छोटा प्रमुख है। प्रसिद्ध बड़े इमामबाड़े का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस इमामबाड़े का निर्माण आसफउद्दौला ने १७८४ में अकाल राहत परियोजना के अन्तर्गत करवाया था। यह विशाल गुम्बदनुमा हॉल 50 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा है। यहां एक अनोखी भूल भुलैया है। है। इसके अलावा छोटा इमामबाड़ा, जिसका असली नाम हुसैनाबाद इमामबाड़ा है मोहम्मद अली शाह की रचना है जिसका निर्माण १८३७ ई. में किया गया था। इसे छोटा इमामबाड़ा भी कहा जाता है।
सआदत अली का मकबरा बेगम हजरत महल पार्क के समीप है। इसके साथ ही खुर्शीद जैदी का मकबरा भी बना हुआ है। मकबरे की शानदार छत और गुम्बद इसकी खासियत हैं। ये दोनों मकबरे जुड़वां लगते हैं। बड़े इमामबाड़े के बाहर ही रूमी दरवाजा बना हुआ है। यहां की सड़क इसके बीच से निकलती है। इस द्वार का निर्माण भी अकाल राहत परियोजना के अन्तर्गत किया गया था। नवाब आसफउद्दौला ने यह दरवाजा १७८२ ई. में अकाल के दौरान बनवाया था ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। जामी मस्जिद हुसैनाबाद इमामबाड़े के पश्चिम दिशा स्थित है। इस मस्जिद का निर्माण मोहम्मद शाह ने शुरू किया था । मोती महल गोमती नदी की सीमा पर बनी तीन इमारतों में से प्रमुख है। इसे सआदत अली खां ने बनवाया था।

लखनऊ रेज़ीडेंसी के अवशेष ब्रिटिश शासन की स्पष्ट तस्वीर दिखाते हैं। १८५७ के स्वतंत्रता संग्राम के समय यह रेजिडेन्सी ईस्ट इंडिया कम्पनी के एजेन्ट का भवन था। यह ऐतिहासिक इमारत हजरतगंज क्षेत्र में राज्यपाल निवास के निकट है। लखनऊ का घंटाघर भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर है। हुसैनाबाद इमामबाड़े के घंटाघर के समीप १९वीं शताब्दी में बनी एक पिक्चर गैलरी है। यहां लखनऊ के लगभग सभी नवाबों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं।

कुकरैल फारेस्ट एक पिकनिक स्थल है। यहां घड़ियालों और कछुओं का एक अभयारण्य है। यह लखनऊ के इंदिरा नगर के निकट, रिंग मार्ग पर स्थित है। बनारसी बाग वास्तव में एक चिड़ियाघर है, जिसका मूल नाम प्रिंस ऑफ वेल्स वन्य-प्राणी उद्यान है। यहां के हरे भरे वातावरण में जानवरों की कुछ प्रजातियों को छोटे पिंजरों में रखा गया है। इस उद्यान में एक संग्रहालय भी है।

  • इनके अलावा रूमी दरवाजा, छतर मंजिल, हाथी पार्क, बुद्ध पार्क, नीबू पार्क मैरीन ड्राइव और इंदिरा गाँधी तारामंडल भी दर्शनीय हैं। लखनऊ-हरदोइ राजमार्ग पर ही मलिहाबाद गांव है, जहां के दशहरी आम विश्व प्रसिद्ध हैं। लखनऊ का अमौसी हवाई अड्डा शहर से बीस किलोमीटर दूर अमौसी में स्थित है। शहर से ९० किलोमीटर की दूरी पर ही नैमिषारण्य तीर्थ है। इसका पुराणों में बहुत ऊंचा स्थान बताया गया है। यहीं पर ऋषि सूतजी ने शौनकादि ऋषियों को पुराणों का आख्यान दिया था। लखनऊ के निकटवर्ती शहरों में कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, फैजाबाद, बाराबंकी, हरदोई हैं।
  • अंबेडकर स्मारक एक नया, लगभग 107 एकड़ इलाके में विकसित किया गया स्मारक है जो डाक्टर भीमराव अंबेडकर की स्मृतियों को समर्पित है। पत्थरों की कारीगरी का सुंदर नमूना है। यहाँ पत्थरों से बनी सुंदर मूर्तियाँ और फव्वारे बहुत ख़ूबसूरती से बागों और खुले हिस्से के साथ समायोजित किये गये हैं। कोई फीस नहीं. 
  • आम्रपाली वाटर पार्क साल 2002 में शुरू हुआ, लखनऊ के टॉप पाँच वाटर पार्कों में गिना जाता है। पानी से संबंधित खेलों और कौतुक के लिए एक बेहतरीन जगह है। 
  • कुकरैल घड़ियाल अभयारण्य  
  • ड़ा इमामबाड़ा और भूल-भुलैया एक बहुत बड़ा और खूबसूरत मकबरा है, जिसका निर्माण वर्ष 1783 में किया गया था। आप इसमें आसानी से इसकी खूबसूरती देखने और इसके बारे में जानने में अपना आधा दिन बिता सकते हैं। यदि आप किसी मार्गदर्शक को मार्ग दिखाने के लिए चुनते हैं तो उससे उम्मीद न करें कि उसे भी अच्छी तरह जगहों का मार्ग पता होगा। कई लोग रास्ता भूल भी जाते हैं। आपको इसमें आने के साथ साथ छोटे इमामबाड़ा में प्रवेश हेतु भी अनुमति मिल जाता है। यहाँ एक भूलभुलैया भी है। इस बात का ध्यान रखें कि बिना किसी मार्गदर्शक के आपको भूलभुलैया में जाने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा जूते चप्पल को अन्दर ले जाने की भी अनुमति नहीं है। आपको जूते चप्पल बाहर ही छोड़ना पड़ेगा। इसके लिए ₹1 रुपये देने होते हैं, जिससे कोई आपके जूते को सहेज कर रख सके। ₹500 विदेशियों के लिए. 
  • छोटा इमामबाड़ा इसका निर्माण अवध के तीसरे नवाब ने 1837 में किया था। या बड़ा इमामबाड़ा के पास ही स्थित है और यहाँ प्रवेश के लिए बड़ा इमामबाड़ा का टिकट ही पर्याप्त होता है। इसे रोशनियों का महल भी कहते हैं क्योंकि यहाँ झूमरों के द्वारा बहुत सुंदर प्रकाश-व्यवस्था की गयी है और ख़ास मौक़ों पर इसे और अच्छे से सजाया जाता है। 
  • ला मार्टिनेयर कालेज एक विद्यालय है। इसके भवन को "कुस्तुन्तुनिया" के नाम से जाना जाता है। यह ऐतिहासिक कालेज और इमारत है जिसका निर्माण 1840 में हुआ और विद्यालय 1845 में शुरू किया गया। भवन अभी भी अच्छी अवस्था में है और स्थापत्य अवश्य देखने योग्य है। 
  • वनस्पति उद्यान (बॉटनिकल गार्डेन्स)  लखनऊ के केन्द्रीय भाग में मौजूद लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत उद्यान है जहाँ शोध करने वालों, विद्यार्थियों और उद्यान-प्रेमी लोगों के लिए काफी कुछ देखने लायक है। यहाँ देसी और अन्य सजावटी पौधों की लगभग 6,000 प्रजातियाँ प्रदर्शित की गयी हैं। यह गोमती नदी के किनारे है और इसका संचालन एनबीआरआई द्वारा किया जाता है। 
  • लखनऊ रेजीडेंसी और संग्रहालय यह भवन और इसके खंडहर एक रक्त-रंजित इतिहास के गवाह हैं। 1857 के ग़दर के जमाने के, तोपों के गोलाबारी के निशान आज भी इसकी दीवालों पर देखे जा सकते हैं। हालाँकि, वर्तमान में यह एक शांतिपूर्ण स्थान है और यहाँ के एकांत में जोड़े समय बिताते देखे जा सकते हैं। शहर की धूल-गर्द से मुक्त यह हिस्सा शांत वातावरण में कुछ समय बिताने के लिए अत्यंत उपयुक्त है। यहाँ वैसे तो फोटो लेना मना है और कैमरा ले जाने पर ₹25 की फीस है, लेकिन एक बार कैमरे के साथ अंदर जाने के बाद कोई आपको रोकेगा नहीं। ₹100 विदेशी पर्यटकों हेतु, ₹5 भारतीय नागरिको हेतु. 
  • रूमी दरवाजा (रूमी गेट), हुसैनाबाद लखनऊ  
  • फिरंगी महल विक्टोरिया चौक पर एक सुंदर इमारत है। यहाँ यूरोपीय लोगों का निवास था जिसके कारण इसे यह नाम मिला है। भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी यहाँ कुछ दिन रुके थे। खिलाफत आन्दोलन में भी यहाँ के उलेमाओं का योगदान रहा। 
  • शहीद समारक  
  • हुसैनाबाद घंटाघर (घंटा घर), हुसैनाबाद लखनऊ अंग्रेजों के जमाने का एक सुंदर स्थापत्य। यह एक छोटे से पार्क में स्थित है और यहाँ से चित्र गैलरी भी है लेकिन बहुत अच्छी तरह इसका प्रबंधन नहीं किया। शाम से समय यह बहुत सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है और बड़ा इमामबाड़ा का टिकट ही यहाँ भी काम कर जाता है। 
  • 5 इंदिरा गांधी तारामंडल, 9, नबीउल्लाह रोड, सूरज कुण्ड मार्ग, यह शनि ग्रह के आकृति में बनायी गई सुंदर इमारत है। गोमती के किनारे मौजूद हाथी पार्क से भारतीय मेडिकल एसोसियेशन के ओर जाने पर, सूरज कुण्ड मार्ग पर स्थित है। तारामंडल की स्थापना 1988 में ही थी और वर्ष 2003 में इसका उद्घाटन हुआ

खरीदें

  • हजरतगंज बाजार - इसमें काफी नई चीजें आपको मिल जाएंगी। कई चीजें दूसरे देशों से आयात की गई होती हैं।
  • अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल - गोमती नगर
  • अमीनाबाद बाजार - एक बहुत पुराना बाजार है। हाथ से की गई कारीगरी हेतु भी यह जगह काफी अच्छा है। यहाँ चमड़े के जूते और बैग भी मिलते हैं। इसके अलावा यहाँ चाट और मिठाई भी मिलता है। इस पूरी गली में एक बहुत बड़ा पुस्तकों का बाजार है।
  • चौक - यहाँ से आप घर में उपयोग होने वाली चीजें खरीद सकते हैं। इसमें खरीदने हेतु शाम को जाना ठीक रहेगा।
  • इनोक्स - इसमें सिनेमा घर भी है और खरीदने के लिए मॉल भी है।
  • निशातगंज - राजमार्ग 24 में स्थित है। यहाँ फलों और सब्जियों का बहुत बड़ा बाजार है। यहाँ से आप बहुत से नए कपड़े भी खरीद सकते हैं।

लखनऊ मेट्रो

लखनऊ के लिए उच्च क्षमता मास ट्रांज़िट प्रणाली यानि लखनऊ मेट्रो की योजना अंतिम रूप ले चुकी है। इसके लिए दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ही योजनाएं बना रहा है और यह काम श्रेई इंटरनेशनल को दिया है। वर्तमान में लखनऊ एवं कानपुर में हर महीने लगभग १००० नए चौपहिया वाहनों का पंजीकरण कराया जाता रहा है। लखनऊ में सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर बाइपास बना दिए जाने के बावजूद सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण से यहां मेट्रो का त्वरित निर्माण अत्यावश्यक हो गया है। लखनऊ शहर में आरंभ में चार गलियारे निश्चित किये गए हैं:
  1. अमौसी से कुर्सी मार्ग,
  2. बड़ा इमामबाड़ा से सुल्तानपुर मार्ग,
  3. पीजीआई से राजाजीपुरम एवं
  4. हज़रतगंज से फैज़ाबाद मार्ग

लखनऊ में यातायात

1. सड़क यातायात

शहर में सार्वजनिक यातायात के उपलब्ध साधनों में सिटी बस सेवा, टैक्सी, साइकिल रिक्शा, ऑटोरिक्शा, टेम्पो एवं सीएनजी बसें हैं। नगर बस सेवा को लखनऊ महानगर परिवहन सेवा संचालित करता है। यह उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की एक इकाई है। शहर के हज़रतगंज चौराहे से चार राजमार्ग निकलते हैं: राष्ट्रीय राजमार्ग २४ – दिल्ली को, राष्ट्रीय राजमार्ग २५ – झांसी और मध्य प्रदेश को, राष्ट्रीय राजमार्ग ५६ – वाराणसी को एवं राष्ट्रीय राजमार्ग २८ मोकामा, बिहार को। प्रमुख बस टर्मिनस में आलमबाग का डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर बस टर्मिनस आता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख बस टर्मिनस केसरबाग, चारबाग आते थे, जिनमें से चारबाग का बस टर्मिनस, जो चारबाग रेलवे स्टेशन के ठीक सामने था, नगर बस डिपो बना कर स्थानांतरित कर दिया गया है। 

2. रेल यातायात

चारबाग रेलवे स्टेशन

लखनऊ में कई रेलवे स्टेशन हैं। शहर में मुख्य रेलवे स्टेशन चारबाग रेलवे स्टेशन है। इसकी शानदार महल रूपी इमारत १९२३ में बनी थी। मुख्य टर्मिनल उत्तर रेलवे का है (स्टेशन कोड: LKO)। दूसरा टर्मिनल पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) मंडल का है। (स्टेशन कोड: LJN)। लखनऊ एक प्रधान जंक्शन स्टेशन है, जो भारत के लगभग सभी मुख्य शहरों से रेल द्वारा जुड़ा हुआ है। मुख्य रेलवे स्टेशन पर वर्तमान में १५ प्लेटफ़ॉर्म हैं  यहां और १३ रेलवे स्टेशन हैं: आलमनगर, मल्हौर, उत्तरटिया, ट्रांस्पोर्ट नगर, दिलखुशा, गोमतीनगर, बादशाह नगर, मानक नगर, अमौसी, ऐशबाग जंक्शन, लखनऊ सिटी, डालीगंज और मोहीबुल्लापुर अन्य उपनगरीय स्टेशनों में निम्न स्टेशन हैं:-
  1. बख्शी का तालाब
  2. काकोरी
  3. हवाई अड्डा

अमौसी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर का मुख्य विमानक्षेत्र है और शहर से लगभग २० किलोमीटर दूरी पर स्थित है। लखनऊ वायु सेवा द्वारा नई दिल्ली, पटना, कोलकाता एवं मुंबई एवं भारत के कई मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है। यह ओमान एयर, कॉस्मो एयर, फ़्लाई दुबई, साउदी एयरलाइंस एवं इंडिगो एयर तथा अन्य कई अंतर्राष्ट्रीय वायु सेवाओं द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों से जुड़ा हुआ है। इन गंतव्यों में लंदन, दुबई, जेद्दाह, मस्कट, शारजाह, सिंगापुर एवं हांगकांग आते हैं। हज मुबारक के समय यहां से हज-विशेष उड़ानें सीधे जेद्दाह के लिए चलती हैं।

धार्मिक सौहार्द

लखनऊ में वैसे तो सभी धर्मों के लोग सौहार्द एवं सद्भाव से रहते हैं, किंतु हिन्दुओं एवं मुस्लिमों का बाहुल्य है। यहां सभी धर्मों के अर्चनास्थल भी इस ही अनुपात में हैं। हिन्दुओं के प्रमुख मंदिरों में हनुमान सेतु मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, अलीगंज का हनुमान मंदिर, भूतनाथ मंदिर, इंदिरानगर, चंद्रिका देवी मंदिर, नैमिषारण्य तीर्थ और रामकृष्ण मठ, निरालानगर हैं। यहां कई बड़ी एवं पुरानी मस्जिदें भी हैं। इनमें लक्ष्मण टीला मस्जिद, इमामबाड़ा मस्जिद एवं ईदगाह प्रमुख हैं। प्रमुख गिरिजाघरों में कैथेड्रल चर्च, हज़रतगंज, इंदिरानगर (सी ब्लॉक) चर्च, सुभाष मार्ग पर सेंट पाउल्स चर्च एवं असेंबली ऑफ बिलीवर्स चर्च हैं। यहां हिन्दू त्यौहारों में होली, दीपावली, दुर्गा पूजा एवं दशहरा और ढेरों अन्य त्यौहार जहां हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं, वहीं ईद और बारावफात तथा मुहर्रम के ताजिये भी फीके नहीं होते। साम्प्रदायिक सौहार्द यहां की विशेषता है। यहां दशहरे पर रावण के पुतले बनाने वाले अनेकों मुस्लिम एवं ताजिये बनाने वाले अनेकों हिन्दू कारीगर हैं।

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