दुनिया के सबसे आलसी देशों में भारत


दुनिया के सबसे आलसी देशों में भारत

यदि कहीं विश्व में आलसीपन और शॉर्टकट का कॉन्पिटिशन हो तो भारत वाले पहले नंबर पर आते हैं क्योंकि भारत में कई तरह की दुर्घटना आलस्य के कारण ही होती है कई बार आलस्य ही व्यक्ति को बड़ी परेशानियों में डाल देता है, हिंदुस्तान की चुस्ती-फुर्ती में नंबर वन हो सकता था लेकिन हिंदुस्तान में बसने वाले लोग शॉर्टकट पर ज्यादा भरोसा करते हैं । 

सबसे आलसी देशों की लिस्ट में है भारत

हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं कि यदि कहीं विश्व में आलसीपन और शॉर्टकट का कॉन्पिटिशन हो तो भारत वाले पहले नंबर पर आते हैं क्योंकि भारत में कई तरह की दुर्घटना आलस्य के कारण ही होती है कई बार आलस्य ही व्यक्ति को बड़ी परेशानियों में डाल देता है कई बार व्यक्ति कह भी देता कि यहा सबसे आलसी व्यक्ति रहते हैं लेकिन ऐसा नहीं है, कई बार जब व्यक्ति को नौकरी से निकाल दिया जाता है या फिर गर्लफ्रेंड  छोड़ कर चली जाती है या फिर कुछ भी समस्या होती है तो उस व्यक्ति को यही कारण बताया जाता है कि उसकी आलसपन के कारण ही उसके साथ यह सब कुछ हुआ लेकिन एक रिसर्च में यह ज्ञात हुआ है कि भारत आलसीपन में भी दूसरे देशों से हार गया है । 

भारत आलसीपन में नंबर वन नहीं है बल्कि दूसरे देश आलसीपन में नंबर वन है वैज्ञानिकों ने 46 देशों के करीब 7 लाख  स्मार्टफोन यूजर के डाटा को संग्रहित कर एक लिस्ट तैयार की है जिसके अंतर्गत उन्होंने यह बताया है कि कौन सा देश सबसे फुर्तीला है और कौन सा देश के लोग सबसे ज्यादा आलसी और सुस्त है। विश्व में हांगकांग एकमात्र ऐसा देश है जहां के व्यक्ति यह कह सकते हैं कि वहां के सभी व्यक्ति सबसे ज्यादा चुस्त है आपको आश्चर्य होगा कि वहां रहने वाला हर नागरिक प्रतिदिन 6 किलोमीटर चलता है सबसे सुस्त देशों में हांगकांग सबसे पहले नंबर पर आता है और विश्व में सबसे सुस्त देश की बात की जाए तो सबसे पहला नाम आता है इंडोनेशिया, इंडोनेशिया के लोग सबसे ज्यादा सुस्त और थकाऊ होते हैं, इंडोनेशिया के लोग रोज सिर्फ 2  से 3 किलोमीटर ही चल पाते हैं वह  भी  ब मुश्किल 

जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि यह अब तक की सबसे अनोखी और सबसे बड़ी स्टडी है इससे पहले ना ही किसी ने इस बात की जानकारी इकठ्ठा की थी और ना ही इस पर रिसर्च हुआ है स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्कॉट डेल्प की स्टडी में बताया गया है कि ब्रिटेन के निवासी अमेरिका के व्यक्तियों से ज्यादा अच्छे दोस्त होते हैं वही चाइना की लोग जापान के लोगों से ज्यादा फुर्ती रखते हैं वह ज्यादा चुस्त होते हैं। हिंदुस्तान की चुस्ती-फुर्ती में नंबर वन हो सकता था लेकिन हिंदुस्तान में बसने वाले लोग शॉर्टकट पर ज्यादा भरोसा करते हैं इसलिए वह चुस्ती और फुर्ती में पिछड़ गए यदि भारत के लोग शॉर्टकट पर भरोसा करना छोड़ दें तो वह भी  विश्व में नंबर वन बन सकते हैं. 

आधे से अधिक भारतीय हैं आलसी

अच्छी सेहत की चाह सबको होती है, लेकिन इसके लिए जरूरी कोशिशें करने में लोगों को आलस आता है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट कहती है कि आधे से अधिक भारतीय सुस्ती और आलस का शिकार हैं.
  • लाइफस्टाइल : रिपोर्ट में कहा गया है कि शारीरिक निष्क्रियता भारत में काफी ज्यादा है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि देश में करीब 54.4 फीसदी लोग स्वास्थ्य गतिविधियों को लेकर सक्रिय नहीं हैं.
  • पुरुष सक्रिय : रिपोर्ट कहती है कि देश के पुरुष महिलाओं के मुकाबले ज्यादा सक्रिय होते हैं. वहीं महज 10 फीसदी लोग ही मनोरंजक शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकाल पाते हैं. इसके अलावा लोगों काफी वक्त अपने काम और दफ्तर की भाग-दौड़ में लगाते हैं.
  • बढ़ता स्वास्थ्य खर्च : इसी शारीरिक सुस्ती के चलते लोगों में गंभीर बीमारियों के खतरे में इजाफा हुआ है. इसके अलावा यह सुस्ती कुल क्षमता को प्रभावित करती है. साथ ही स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को भी बढ़ाती है.
  • मौत का जोखिम : डब्ल्यूएचओ के मुताबिक शारीरिक निष्क्रियता, दुनिया भर में होने वाली मौतों का चौथा बड़ा कारण हैं. लगभग 6 फीसदी मौतें इसके चलते होती हैं.
  • दुनिया का हाल : रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में हर पांच में से एक वयस्क और हर पांच में से चार किशोर, जरूरी स्वास्थ्य गतिविधियों में शामिल नहीं होते. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े बताते हैं कि यह सुस्ती स्वास्थ्य व्यवस्था पर 54 अरब डॉलर का बोझ डालती है.
  • कैंसर का खतरा : रिपोर्ट में कहा गया है, स्तन और कोलन कैंसर के करीब 21-25 फीसदी मामलों में, डायबिटीज के 27 फीसदी और दिल से जुड़ी बीमारियों के 30 फीसदी मामले में शारीरिक निष्क्रियता को जिम्मेदार माना जाता है.

भारत के 42 करोड़ लोग आलसी 

पैसे कमाने की दौड़ में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि टेंशन से निजात पाने के लिए वे सिर्फ नेट सर्फिंग का सहारा ले रहे हैं। खासतौर पर भारत में जहां परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है यहां भी लोग परिवार में बैठकर बात करने की बजाय फोन पर नेट चलाने में ही बिजी रह रहे हैं। सारे सप्ताह के बिजी शेड्यूल के कारण लोग वीकैंड को तवज्जो तो देते हैं लेकिन घूमने फिरने की बजाय आराम करने लग पड़ते हैं और इसी कारण वे आलसी बनते जा रहरे हैं। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक आलस की वजह से लोगों में कई गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। 

डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 35 फीसदी (42 करोड़) से ज्यादा लोग शारीरिक श्रम करने में आलस करते हैं  डब्ल्यूएचओ के एक सर्वेक्षण के अनुसार, शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता नहीं दिखाने के कारण इन लोगों को दिल की बीमारी के साथ-साथ कैंसर, मधुमेह और मानसिक रोगों का खतरा बना रहता है। 2016 में भारत में शारीरिक श्रम कम करने वाली महिलाएं करीब 50 फीसदी थीं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 25 फीसदी था. दुनियाभर में तीन में से एक महिला पर्याप्त वर्कआउट नहीं करती है, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा चार में से एक है।

तो इसलिए है भारत में आलसी लोग

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट कहती है कि आधे से अधिक भारतीय सुस्ती और आलस का शिकार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि शारीरिक निष्क्रियता भारत में काफी ज्यादा है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने रिपोर्ट की हवाला देते हुए लिखा है कि देश में करीब 54.4 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य कार्य को सक्रिय नहीं हैं। देश के पुरुष महिलाओं के मुकाबले अधिक सक्रिय होते हैं। वैसे महज 10 प्रतिशत लोग ही मनोरंजक शारीरिक सेवा के लिए समय निकाल दिया जाता है। इसके अलावा लोग अपने काम और दफ्तर की भाग-दौड़ में लगाते हैं। 

भारत में महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम पैदल चलती हैं, यदि दूरी तय करने के लिए भारतीयों को पैदल चलने और कार ड्राइव करने का विकल्प दिया जाए तो ज्यादातर भारतीय कार का विकल्प चुनेंगे. पैदल दूरी तय करने को लेकर कराए गए एक सर्वेक्षण में भारतीय दुनिया के सर्वाधिक आलसी देशों में शुमार है. 46 देशों में कराए गए एक सर्वे के मुताबिक आलस्य के मामले में भारत 39वें नंबर पर है. भारत में लोग एक दिन में औसतन 4,297 कदम चलते हैं. 

सबसे कम आलसी हैं चीन के लोग

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से कराए गए इस सर्वे में कई बातें सामने आई हैं. सर्वे के लोगों ने लोगों की वॉकिंग एक्टिविटी का पता लगाने के लिए 46 देशों के करीब 7 लाख लोगों के स्मार्टफोन्स में ट्रैकिंग डिवाइस लगायी. पत्रिका 'जर्नल' में प्रकाशित सर्वे के मुताबिक सबसे कम आलसी चीनी खासकर हॉंग कॉंग के लोग पाए गए. हॉंग कॉंग में लोग एक दिन में औसतन 6,880 कदम चलते पाए गए.
पैदल चलने के मामले में सबसे बुरी स्थिति इंडोनेशिया की है जहां एक दिन में लोग औसतन 3,513 कदम चलते हैं. जबकि वैश्विक औसत एक दिन का 4,961 पाया गया. अमेरिकी लोग एक दिन में औसतन 4,774 कदम चलते हैं. इस सूची में टॉप देशों में हॉन्ग कॉन्ग, चीन, यूक्रेन, जापान शामिल हैं। ये औसतन 6 हजार कदम चलते हैं। वहीं लिस्ट में नीचे के देशों में मलेशिया, इन्डोनेशिया, सउदी अरब शामिल हैं, जहां पर लोग औसतन 3900 कदम चलते हैं।  सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक भारत में महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम पैदल चलती हैं. भारत में महिलाएं एक दिन में औसतन मुश्किल से 3,684 कदम चलती हैं जबकि पुरुष प्रतिदिन 4,606 कदम चलते हैं.

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट

15 साल में भारत में घटने की बजाय 2% बढ़ गए आलसी; फिजिकल एक्टिविटी में चीन, पाकिस्तान, नेपाल से भी पीछे हम

  • 50% से ज्यादा युवा आबादी वाला भारत आरामतलब हो रहा है। भारतीय लोग शारीरिक रूप से चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार के लोगों से भी कम एक्टिव हैं। ये नतीजा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट से निकला है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक- देश के 34% लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव (शारीरिक रूप से बेहद कम सक्रिय) हैं। इससे पहले 2001 में ऐसा अध्ययन किया गया था। तब भारत के 32% लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव थे। फिर डब्ल्यूएचओ ने अगले अध्ययन के लिए 15 साल डेटा इकट्‌ठा किए। 2016 में हिसाब किया गया तो भारत के आलसी लोगों की संख्या घटने की बजाय उल्टा 2% बढ़ गई। 
  • डब्ल्यूएचओ ने दुनिया भर के लोगों की फिजिकल एक्टिविटी जानने के लिए 168 देशों के करीब 19 लाख लोगों पर अध्ययन किया। इनमें भारत के करीब 77 हजार लोग शामिल थे। अध्ययन में भारत को 168 देशों में 52वां स्थान मिला। डब्ल्यूएचओ के इस स्टडी को लैनसेट ने जारी किया है।
  • शारीरिक रूप से कम एक्टिव होने की वजह से दुनिया की करीब डेढ़ करोड़ युवा आबादी पर 6 तरह की बीमारियों का खतरा है। इनमें कार्डियोवेस्कुलर डिसीज, हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज, ब्रेस्ट और आंत का कैंसर और डिमेंशिया जैसी बीमारियां शामिल हैं। भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं और भी कम एक्टिव हैं। 24.7% पुरुष तो 43.3% महिलाएं कम एक्टिव हैं। भारत में मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित कई और राज्यों के लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया।
  • 2001 से अब तक दुनिया में नहीं बढ़ी फिजिकल एक्टिविटी : डब्ल्यूएचओ का कहना है कि- ‘हमने 2025 तक दुनियाभर की फिजिकल एक्टिविटी को 10% और 2030 तक 15% बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन फिलहाल जो स्तर दिख रहा है, उससे ये लक्ष्य पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है। कुछ देशों को छोड़कर 2001 के बाद से दुनिया के लोगों की फिजिकल एक्टिविटी का स्तर ज्यों का त्यों है। इसमें कोई इजाफा नहीं हुआ।’
  • कुवैत के लोग सबसे आलसी, युगांडा के सबसे एक्टिव : कुवैत के सबसे ज्यादा 67% लोग फिजिकली इनएक्टिव हैं। इसके बाद अमेरिकन समोआ (53.4%, सऊदी अरब (53%) और इराक (52%) का नंबर आता है। वहीं युगांडा में सबसे ज्यादा 94.5% लोग एक्टिव हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि- हफ्ते में 75 से 150 मिनट एक्सरसाइज करना इंसान को शारीरिक तौर पर एक्टिव रखता है।

दुनिया के सबसे आलसी देशों में भारत

नेचर जर्नल में छपी रिपोर्ट से साफ है कि युवाओं के देश भारत को अपनी आलसी प्रवृत्तियों का त्याग करना होगा। भारत में पुरुष जहां औसतन 4606 कदम चलते हैं, तो वहीं महिलाएं 3684 कदम चलती हैं वो भी इसलिए चलते है कि कार्यक्षेत्र में बहुत कम्पटीशन हो गया है, अगर सरकारी नौकरी मिल जाये तो बिल्कुल न चलें। विशेषज्ञों और डायटिशन के अनुसार फिट रहने के लिए प्रतिदिन 10 हजार कदम चलना जरुरी है। लोगों को लगता है कि सुबह एक घंटे की वॉकिंग से एक्सरसाइज़ पूरी हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है, पूरा दिन ऐक्टिव रहना जरुरी है।

  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के ताजा शोध के मुताबिक भारतीय वैश्विक औसत से अधिक आलसी हैं। भारतीय रोजाना वैश्विक औसत से भी कम चलते हैं। 
  • नेचर जर्नल में छपी इस रिपोर्ट से साफ है कि युवाओं के देश भारत को अपनी आलसी प्रवृत्तियों का त्याग करना होगा। 
  • अगर हम सुबह की सैर या शारीरिक श्रम से तौबा करेंगे तो वो न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नुकसानदेह होगा, बल्कि भारत के आर्थिक विकास पर भी असर पड़ेगा। 
  • भारत इन देशों में 39वीं रैंकिंग पर है। यहां पर लोग औसतन एक दिन में 4297 कदम चलते हैं। डेटा के अनुसार भारतीय महिलाएं, पुरुषों से कम चलती हैं।
  • दुनियाभर में भारतीय बहुत ही आलसी माने गए हैं. 46 देशों पर की गई. रिसर्च में से भारत पर सबसे लेजी देश माना गया है.
  • हाल ही में आई एक रिसर्च के मुताबिक, भारतीय देशभर में बहुत ही आलसी माने गए हैं. स्टैनफोर्ड रिसर्च के मुताबिक, दुनियाभर में भारतीय बहुत ही आलसी माने गए हैं. 46 देशों पर की गई. रिसर्च में से भारत 39वें पद पर सबसे लेजी देश माना गया है.

कार से जाना है पसंद-

रिसर्च के मुताबिक, एक दिन में भारतीय लगभग 4,297 कदम ही चलता है. ज्यादातर भारतीय चलने से ज्यादा कार से जाना पसंद करते है.

कैसे की गई रिसर्च-

  1. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने रिसर्च के दौरान विश्व के 46 देशों के 7 लाख लोगों को शामिल किया गया. इन लोगों ने अपने स्मार्टफोन में स्टेप काउंट ऐप डालकर अपने दिनभर के कदमों को रिकॉर्ड किया. रिसर्च में पाया गया कि दुनियाभर में सबसे कम आलसी लोग चाइना और हॉन्‍ग-कॉन्ग के हैं. यहां के लोग लगभग 6,880 कदम चलते हैं.
  2. सबसे कम चलने वाले देशों में इंडोनेशिया शामिल है. यहां के लोग औसतन दिनभर में 3,513 स्टेप्स चलते हैं. सबसे ज्यादा वॉक करने वाले देशों में हॉन्ग –कॉन्ग और चाइना के अलावा युक्रेन और जापान भी शामिल है. वहीं सबसे कम वॉक करने वाले देशों में इंडोनेशिया के अलावा, मलेशिया, सउदी अरेबिया शामिल है.
  3. आंकड़ें बताते हैं कि भारतीय महिलाएं भारतीय पुरुषों से कम वॉक करती हैं. जहां दिनभर में महिलाएं 3,684 कदम चलती हैं तो पुरुष 4,606 कदम.
  4. रिसर्च में ये बात सामने आई कि जो महिलाएं और पुरुष सबसे अधिक चलते हैं उनमें मोटापे की समस्या कम देखी गई. इसके अलावा जिन महिलाओं में मोटापा बढ़ रहा था उनकी वॉक और भी तेजी से कम हो रही थी.
  5. दिल्ली की डायटिशियन रितिका समादार का कहना है कि फिट रहने के लिए दिनभर में कम से कम 10,000 कदम चलना चाहिए. वे कहती हैं कि लोग साचेते हैं अगर उन्होंने सुबह एक घंटा वॉक कर ली है तो उनकी फीजिकल एक्सरसाइज खत्म हो गई. लेकिन आपको दिनभर में एक्टिव रहना जरूरी है.

किस राशि के लोग होते हैं ‘महा-आलसी’

  • आप कितना भी इनकार क्‍यों ना करें लेकिन सभी में थोड़ा बहुत आलस तो होता ही है।
  • कुछ लोग ज्‍यादा आलसी होते हैं, इन्‍हें अपने लिए कुछ करने में भी आफत लगती है। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे आलसी लोग भी होते हैं जो इस तरह की परिस्थिति में जैसे-तैसे अपने मन को मनाकर काम पर लग जाते हैं। 
  • वहीं कुछ लोगों लाइफ में आलस की कोई जगह ही नहीं होती है लेकिन आज के दौर में ऐसे लोग कम ही देखने को मिलते हैं।
आज हम आपको उन 5 राशियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार सबसे ज्‍यादा आलसी मानी जाती हैं। इन 5 राशियों के लोगों को महा आलसी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं कि इस लिस्‍ट में आपकी राशि है या नहीं …

कर्क राशि

महा आलसी की लिस्‍ट में सबसे ऊपर कर्क राशि का नाम आता है। आलसी होने का खिताब कर्क राशि को जाता है। आलस तो जैसे इनका दोस्‍त होता है। कर्क राशि के लोग दिनभर एक ही जगह बैठकर अपना समय बर्बाद करने का हुनर रखते हैं। ऐसे समय पर अगर इन्‍हें कुछ खाने की चीज़ें भी दे दी जाएं तो इन्‍हें हिला पाना मुश्किल होता है। आराम फरमाना इनका बैस्‍ट टाइमपास होता है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के लोगों को काम करने से डर लगता है। ये तभी काम करते हैं जब इन्‍हें यकीन हो जाए कि इनके द्वारा किया गया काम इनके अनुकूल है और तब ये घंटों तक भी उस पर काम करते हुए परेशान नहीं होने वाले हैं। ये मेहनती होते हैं लेकिन जब तक इन्‍हें अपनी पसंद का काम नहीं मिलता है तब तक ये आलस से बंधे रहते हैं।

वृश्चिक राशि

आलस के मामले में ये लोग भी वृषभ राशि के जातकों जैसे ही होते हैं। आलस को लेकर ये थोड़े मूड होते हैं। मन हो तो आलस को पीछे छोड़कर ये लगन और मेहनत से काम करना शुरु कर देते हैं।

मीन राशि

कई बार इस राशि के लोगों की जीवन का स्‍थायी हिस्‍सा बन जाता है आलस। दिल पर कोई बात लग जाए तो ये खुद को दुनिया से अलग कर लेते हैं और ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां बस आलस हो। ऐसा ना हो तो किसी भी काम को करने में ये आलस नहीं दिखाते हैं।

सिंह राशि

वैसे तो सिंह राशि के लोगों को एक्‍टिव माना जाता है लेकिन अपने मूड की वजह से ये आलसी बन जाते हैं। अगर इन्‍हें इस बात का अहसास हो जाए कि ऑफिस या घर में इनके लायक कोई खास वातावरण नहीं बना हुआ है तो ये पूरी तरह से आलसी व्‍यवहार करने लगते हैं। फिर तो दुनिया में कोई भी इंसान से इनसे काम नहीं करवा सकता है।
ऐसा नहीं है कि ये 5 राशियां ही आलसी होती हैं और बाकी की 7 राशियों वाले लोग बहुत मेहनती होते हैं। ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार 12 राशियों में से ये 5 राशियां सबसे ज्‍यादा आलसी होती हैं। वैसे हमने आपको पहले भी बताया है कि थोड़ा-बहुत आलस तो सभी में होता है और आराम करने के लिए लिमिट में आलस होना जरूरी भी है।

भारत में 35 प्रतिशत फीसदी लोग शारीरिक श्रम करने में करते है आलस, हो रहे कई बीमारियों के शिकार

  • डब्ल्यूएचओ के एक सर्वेक्षण के अनुसार, शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता नहीं दिखाने के कारण इन लोगों को दिल की बीमारी के साथ-साथ कैंसर, मधुमेह और मानसिक रोगों का खतरा बना रहता है। भारत में 35 फीसदी से ज्यादा लोग शारीरिक श्रम करने में आलस करते हैं।  
  • सर्वेक्षण के ये नतीजे 'द लांसेट ग्लोबल हेल्थ' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं, जिसमें बताया गया है कि 2016 में भारत में शारीरिक श्रम कम करने वाली महिलाएं करीब 50 फीसदी थीं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 25 फीसदी था।
  • दुनियाभर में तीन में से एक महिला पर्याप्त शारीरिक क्रियाकलाप नहीं करती है, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा चार में से एक है।
  • उच्च आय वाले देशों में शारीरिक श्रम कम करने वालों का आंकड़ा 37 फीसदी है, जबकि मध्यम आय वाले देशों में 26 फीसदी। वहीं, निम्न आय वाले देशों में यह आंकड़ा 16 फीसदी है।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो कम शारीरिक क्रियाकलाप करनेवालों की तादाद 2025 तक घटाकर 10 फीसदी करने का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाएगा।
  • शोध के प्रमुख लेखक रेगिना गुथोल्ड ने कहा, 'दुनियाभर में अन्य प्रमुख स्वास्थ्य के खतरों की तरह शारीरिक क्रियाकलाप कम करने वालों के स्तर में कमी नहीं हो रही है।'

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