क्यों हम दिल्ली में अक्षर धाम देखें


क्यों हम दिल्ली में अक्षर धाम देखें

नई दिल्ली में स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम जो 10,000 वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति के प्रतीक को बहुत विस्मयकारी, सुंदर, बुद्धिमत्तापूर्ण और सुखद रूप से प्रस्तुत करता है। यह भारतीय शिल्पकला, परंपराओं और प्राचीन आध्यात्मिक संदेशों के तत्वों को शानदार ढंग से दिखाता है। अक्षरधाम एक ज्ञानवर्धक यात्रा का ऐसा अनुभव है जो मानवता की प्रगति, खुशियों और सौहार्दता के लिए भारत की शानदार कला, मूल्यों और योगदान का वर्णन करता है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम परिसर का निर्माण कार्य एचडीएच प्रमुख बोचासन के स्वामी महाराज श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के आशीर्वाद से और 11,000 कारीगरों और हज़ारों बीएपीएस स्वयंसेवकों के विराट धार्मिक प्रयासों से केवल पांच वर्ष में पूरा हुआ। गिनेज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज़ विश्व के सबसे बड़े विस्तृत हिंदू मंदिर, परिसर का उद्घाटन 6 नवंबर, 2005 को किया गया था।
क्या देखें

अक्षरधाम मंदिर

भगवान स्वामीनारायण को समर्पित एक पारंपरिक मंदिर भारत की प्राचीन कला, संस्कृति और शिल्पकला की सुंदरता और आध्यात्मिकता की झलक प्रस्तुत करता है।
नीलकण्ठ वर्णी अभिषेक
एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक परंपरा, जिसमें वैश्विक शांति और व्यक्ति, परिवार और मित्रों के लिए अनवरत शांति की प्रार्थनाएं की जाती हैं जिसके लिए भारत की 151 पवित्र नदियों, झीलों और तालाबों के पानी का उपयोग किया जाता है।
प्रदर्शनियां

हॉल 1 - हॉल ऑफ वैल्यूज़ (50 मिनट)

अहिंसा, ईमानदारी और आध्यात्मिकता का उल्लेख करने वाली फिल्मों और रोबोटिक शो के माध्यम से चिरस्थायी मानव मूल्यों का अनुभव।

हॉल 2 - विशाल पर्दे पर फिल्म (40 मिनट)

नीलकण्ठ नामक एक ग्यारह वर्षीय योगी की अविश्वसनीय कथा के माध्यम से भारत की जानकारी लें, जिसमें भारतीय रीति-रिवाज़ों को संस्कृति और आध्यात्मिकता के माध्यम से जीवन-दर्शन में उतारा गया है, इसकी कला और शिल्पकला का सौंदर्य तथा अविस्मरणीय दृश्यावलियों, ध्वनियों और इसके प्रेरक पर्वों की शक्ति का अनुभव करें।

हॉल 3 - कल्चरल बोट राइड (15 मिनट)

भारत की शानदार विरासत के 10,000 वर्षों का सफ़र कराती है। भारत के ऋषियों-वैज्ञानिकों की खोजों और आविष्कारों की जानकारी लें, विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय तक्षशिला देखें, अजंता-एलौरा की गुफाओं से होकर जाएं और प्राचीन काल से ही मानवता के प्रति भारत के योगदान की जानकारी लें।





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