बेरोजगार ऐथलीट मनजीत सिंह ने गोल्ड मेडल जीता


बेरोजगार ऐथलीट मनजीत सिंह ने गोल्ड मेडल जीता

बेरोजगार और अनजान ऐथलीट मनजीत सिंह ने मंगलवार को ट्रैक पर धूम मचाई तथा एशियाई खेलों की पुरुष 800 मीटर दौड़ में प्रबल दावेदार हमवतन जिनसन जॉनसन को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता। भारत ने इस स्पर्धा में पहले दो स्थान हासिल किए। मनजीत को पदक का दावेदार नहीं माना जा रहा था।

कंपनी ने 'खेल खत्म' बताकर निकाला, गोल्ड से दिया जवाब

एक बड़ी पब्लिक सेक्टर कंपनी ने 2014-15 में एक ऐथलीट को यह कहकर स्पोर्ट्स कॉन्ट्रैक्ट से निकाल दिया था कि अब उनमें बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश नहीं रही है। हालांकि उस ऐथलीट को उम्मीद थी कि कंपनी उसे परमानेंट कर देगी, लेकिन कंपनी ने उसे बेरोजगार ही कर दिया। ऐथलीट बहुत हताश हुआ और उसने इसका जवाब बातों से देने के बजाय मेडल से देने की ठान ली। यह ऐथलीट और कोई नहीं, बल्कि इंडोनेशिया में चल रहे एशियाड में 800 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीतने वाले मनजीत सिंह हैं। 

मनजीत ने बताया, 'जब मेरी नौकरी गई तो मैं थोड़ी देर के लिए हताश हुआ था पर मुझे साबित करना था कि मैं अभी चुका नहीं हूं। अभी मेरे अंदर खेल बाकी है। मुझे एक बड़ी लकीर खींचनी थी। मैं यहां खुद को गोल्ड का दावेदार नहीं मान रहा था। मैंने जो पिछले 2 साल तैयारी की थी, बस उसी का निचोड़ यहां झोंकना था। मैं उस कंपनी को कोई जवाब नहीं देना चाहता। उन्होंने उस समय जो किया शायद वह उनके हिसाब से सही था।' एशियाड में गोल्ड के बाद बेरोजगार मनजीत नौकरी को लेकर आश्वस्त हैं। उन्हें उम्मीद है हरियाणा सरकार उन्हें एक अच्छी नौकरी देगी। 

5 महीने के बेटे को अभी तक नहीं देखा 

मनजीत जब एशियाड की तैयारी ऊंटी में कर रहे थे, तभी उन्हें बेटा हुआ था। घरवालों और पत्नी ने कहा, एक दिन की छुट्टी लेकर बेटे का चेहरा देख जाओ। मनजीत ने जवाब दिया, 'एशियाड में अगला मौका फिर चार साल बाद आएगा। अभी मेरे लिए वही सब कुछ है। मैं अपना एक दिन भी खराब नहीं करना चाहता।' इतना सुनने के बाद उनकी पत्नी ने कहा कि जब इतना त्याग कर रहे हो तो अपने बेटे के लिए अब गोल्ड ही लेकर आना। मनजीत ने कहा कि गोल्ड बेटे के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए लाऊंगा। 

ऊंचाई पर ट्रेनिंग से मिला फायदा 

मनजीत बताते हैं कि ऊंटी और भूटान में 1600 और 1700 मीटर की ऊंचाई पर प्रैक्टिस का बहुत फायदा मिला है। ऐसी जगहों पर ऑक्सिजन कम होती है और ऐथलीट को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। भूटान में इतनी ऊंचाई पर सिंथेटिक ट्रैक पर भी अभ्यास किया। इतनी ऊंचाई पर सिंथेटिक ट्रैक कहीं नहीं है। इसके अलावा मनजीत सेना के कोच अमरीश के बहुत आभारी हैं। जिन्होंने उन पर पूरा भरोसा दिखाते हुए उन्हें पिछले 2 साल से ट्रेनिंग दी। 

  • बेरोजगार और अनजान ऐथलीट मनजीत सिंह ने मंगलवार को ट्रैक पर धूम मचाई तथा एशियाई खेलों की पुरुष 800 मीटर दौड़ में प्रबल दावेदार हमवतन जिनसन जॉनसन को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता। भारत ने इस स्पर्धा में पहले दो स्थान हासिल किए। मनजीत को पदक का दावेदार नहीं माना जा रहा था लेकिन उन्होंने अनुभवी जॉनसन को पीछे छोड़कर एक मिनट 46.15 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक जीता। 
  • केरल के एशियाई चैंपियनशिप के पदक विजेता जॉनसन एक मिनट 46.35 सेकंड का समय लेकर दूसरे स्थान पर रहे। भारत ने 800 मीटर में आखिरी बार 1982 दिल्ली एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। तब चार्ल्स बोरोमियो ने यह उपलब्धि हासिल की थी। यह एशियाई खेलों में केवल दूसरा अवसर है जबकि भारतीय ऐथलीट 800 मीटर दौड़ में पहले दो स्थानों पर रहे। उनसे पहले नई दिल्ली में 1951 में पहले एशियाई खेलों में रंजीत सिंह और कुलवंत सिंह ने यह कारनामा किया था। 
  • सेना के अमरीश कुमार से कोचिंग लेने वाले मनजीत ने एक मिनट 46.24 सेकंड के अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सुधार किया जो उन्होंने गुवाहाटी में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था। कोई भी मंजीत को स्वर्ण पदक का दावेदार नहीं मान रहा था लेकिन उन्होंने कहा कि वह खुद को साबित करने के लिये प्रतिबद्ध थे। 
जींद में रहने वाले मनजीत ने कहा, ‘मैंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी दौड़ के विडियो देखे और गलतियों का आकलन किया। मैं अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिये प्रेरित था।’ यह पहला अवसर नहीं है जबकि मनजीत ने जॉनसन को पीछे छोड़ा। इससे पहले पुणे में 2013 में भी उन्होंने केरल के ऐथलीट को हराया था। मनजीत ने कहा, ‘मैं आशान्वित था। मैंने अपने हिसाब से तैयारी की और कभी राष्ट्रीय रेकॉर्ड तोड़ने के बारे में नहीं सोचा। मैं केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता था। मेरे पास नौकरी नहीं है लेकिन मेरा कोच सेना से जुड़ा है।’ मनजीत ने कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से ऊटी में अभ्यास कर रहे थे और एशियाई खेलों से पहले तीन महीने भूटान में भी अभ्यास किया। 

उन्होंने कहा, ‘मैंने अच्छी तैयारी की थी। मेरी रणनीति शुरू में धावकों का अनुसरण करना और फिर अंतिम 100-150 मीटर में तेजी दिखाना था। मैंने ऐसा किया और मैं अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहा।’ मध्यपूर्व के कई देशों ने अफ्रीकी ऐथलीटों को अपनी टीमों से जोड़ा है लेकिन मनजीत ने कहा कि वह उन्हें पीछे छोड़ने के प्रति प्रतिबद्ध थे। उन्होंने कहा, ‘भारतीय एथलीट अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। तेजिंदरपाल सिंह तूर और नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीते जिससे मुझे प्रेरणा मिली। यहां तक कि जिन्होंने रजत पदक जीते उन्होंने राष्ट्रीय रिकार्ड बनाये।’ 

जॉनसन ने कहा कि मनजीत का प्रदर्शन बेजोड़ था और वह जीत का हकदार था। उन्होंने कहा, ‘उसने वास्तव में शानदार दौड़ लगायी और इसलिए वह पहले स्थान पर रहा। उसका प्रदर्शन बेजोड़ था।’ कतर के अब्दुल्ला अबुबाकर एक मिनट 46.38 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। 




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