सीबीआई में संकट, अब अदालत का ही आसरा


सीबीआई में संकट, अब अदालत का ही आसरा

महान भारत के बेख़बर बाशिंदों, सुनो इस बात को. हर किसी को हर किसी पर शक है. घर-घर शक है. दफ़्तरों में शक है. अधिकारियों में शक है. दिल्ली में रहते हैं तो बिना कॉलर वाली क़मीज़ पहनकर चलें. वर्ना किस अफ़सर का आदमी किस आदमी को अफ़सर समझकर कॉलर पकड़ ले. दिल्ली में रात और दिन दोनों महफ़ूज़ नहीं हैं. रात को कुर्सी चली जाती है. दिन में कोई सड़क पर पटक देता है.

CBI vs CBI

सीबीआई (CBI vs CBI) में छिड़ी जंग के बीच आज यानी शुक्रवार को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा (Alok Verma) की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जब सार्वजनिक हो गया, तब केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया. मगर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और सीवीसी जांच के लिए महज दो सप्ताह का वक्त दिया. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दो सप्ताह के भीतर सीवीसी जांच पूरी हो जानी चाहिए. साथ ही इसकी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में केंद्र को देना होगा. दरअसल, आलोक वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने तथा अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी तथा एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है.

सीबीआई मामले से जुड़ी 10 अहम बातें

  • सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दो सप्ताह के भीतर सीवीसी जांच पूरी हो जानी चाहिए. साथ ही इसकी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में केंद्र को देना होगा. साथ ही सीजेआई ने कहा कि इस मामले की अब अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी. 
  • आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से बहस कानून के दिग्गजों ने की. आलोक वर्मा की ओर से जहां वरिष्ठ वकील और प्रख्यात कानूनविद फली एस नरीमन पेश हुए, वहीं DoPT केंद्र की ओर से AG के के वेणुगोपाल. इसके अलावा, CVC की ओर से रहेंगे SG तुषार मेहता. 
  •  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि CBI के अंतरिम प्रमुख कोई नीतिगत फैसले नहीं लेंगे. इस दौरान वह सिर्फ रूटिन के काम काज को ही देखेंगे. सीजेआई ने पहले दस दिन के भीतर जांच पूरी करने की बात कही थी. मगर केंद्र की मांग के बाद दो सप्ताह का समय दे दिया गया. सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एके पटनायक की निगरानी में यह जांच होगी.  
  • जांच एजेंसी सीबीआई के निदेशक ने आलोक वर्मा  ने अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि एजेंसी के प्रमुख और विशेष निदेशक को छुट्टी पर भेजने के अलावा संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे अधिकारियों को भी बदल दिया गया है. 
  • न्यायालय में आलोक वर्मा का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बुधवार को तत्काल सुनवाई की मांग की और उल्लेख किया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने कल सुबह छह बजे वर्मा के अधिकार वापस लेने का फैसला किया. 
  • सीबीआई (CBI) ने इस मामले पर सफ़ाई देते हुए कहा कि आलोक वर्मा (Alok Verma) अभी भी सीबीआई डायरेक्टर हैं, जबकि राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) स्पेशल डायरेक्टर. इन अफ़सरों को हटाया नहीं गया है. इन्हें सिर्फ जांच से अलग करके छुट्टी पर भेजा गया है. दरअसल, दोनों अधिकारियों से सारे अधिकार वापस ले लिए गए हैं.
  • सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा इन दोनों अधिकारियों से जुड़े मामले की जांच पर फैसला किए जाने तक एम नागेश्वर राव सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था हैं. आलोक वर्मा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उन्होंने 23 अक्टूबर की रात आए सरकार के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके जरिए उनका और अस्थाना के सारे अधिकार वापस ले लिए गए और राव को निदेशक पद की जिम्मेदारियां सौंप दी गई.
  • सरकार ने आलोक वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है. सीबीआई के 55 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. केंद्र ने भ्रष्टाचार रोधी संस्था सीवीसी से मिली एक सिफारिश के बाद यह फैसला लिया. दरअसल, सीवीसी ने यह महसूस किया कि वर्मा आयोग के कामकाज में जानबूझ कर बाधा डाल रहे हैं, जो सीबीआई निदेशक के खिलाफ अस्थाना की शिकायतों की जांच कर रहा है. सारे अधिकारों से वंचित किए जाने के बाद वर्मा ने शीर्ष न्यायालय का रुख कर दलील दी कि रातों रात उनके सारे अधिकार वापस ले लिया जाना सीबीआई की स्वतंत्रता में दखलंदाजी के समान है.
  • दरअसल, CBI ने अपने स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एक FIR दर्ज कराई है. इस FIR में अस्थाना पर मीट कारोबारी मोइन क़ुरैशी के मामले में जांच के घेरे में चल रहे एक कारोबारी सतीश सना से दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है. सीबीआई में नंबर दो की हैसियत रखने वाले. राकेश अस्थाना इस जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख हैं. कारोबारी सतीश सना का आरोप है कि सीबीआई जांच से बचने के लिए उन्होंने दिसंबर 2017 से अगले दस महीने तक क़रीब दो करोड़ रुपए रिश्वत ली.
  • केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक को छुट्टी पर भेजने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ कांग्रेस शुक्रवार को दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय तथा राज्यों की राजधानियों में सीबीआई के कार्यालयों के सामने धरना- प्रदर्शन किया. राजधानी दिल्ली में इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी शामिल होने की संभावना है. कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी सीबीआई निदेशक वर्मा के खिलाफ आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे प्रकरण पर देश से माफी मांगने की मांग करेगी.

सीबीआई में संकट, अब अदालत का ही आसरा

सीबीआई के दो बड़े अफसरों के झगड़े में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ. दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर आलोक वर्मा के घर के बाहर से चार इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोगों को पकड़ लिया. हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया. मगर उनको यह कहकर पकड़ा गया कि वे आलोक वर्मा की जासूसी कर रहे थे.

आपको याद दिला दूं अपने देश में इसी तरह जासूसी की बात कहकर राजीव गांधी ने चंद्रशेखर सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. तब राजीव गांधी के घर के बाहर दिल्ली पुलिस के दो सिपाही घूमते हुए पाए गए थे. कहने का मतलब यह है कि सीबीआई के इस संकट में लोग एक-दूसरे की धरपकड़ करने में लगे हुए हैं.

इस पूरे मामले में दो अहम किरदार हैं राकेश अस्थाना और मोईन कुरेशी. इनके बारे में कुछ अहम चीज बताता हूं. अस्थाना का नाम पहली बार तब आया था जब गुजरात की दवा कंपनी स्टरलिंग वॉयोटेक पर छापेमारी की गई थी.  इस दौरान एक कागजात में अस्थाना का नाम सामने आया था. इस कंपनी के मालिक नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा आंध्रा बैंक से 5000 करोड़ से अधिक का लोन लेकर विदेश फरार हो गए. कहा जाता है कि संदेसरा भारत से भागकर नाईजीरिया चला गया. इस कंपनी पर अस्थाना की बेटी की शादी में पैसा खर्च करने का आरोप है. माना जाता है कि महंगे होटल, गाड़ियों और खानपान के लिए खर्च करने का भी आरोप है. इसी आधार पर तब आलोक वर्मा ने राकेश अस्थाना को सीबीआई में स्पेशल डॉयरेक्टर बनाने से मना कर दिया था. मगर अस्थाना की पहुंच देखिए कि सीवीसी यानि मुख्य सतर्कता आयुक्त ने सीबीआई निदेशक की सिफारिश को दरकिनार करते हुए अस्थाना को  पदोन्नति दे दी. वहीं से सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना के बीच तलवारें खिंच गईं.

यही नहीं राकेश अस्थाना ने सीबीआई में अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए अपनी एक अलग से लिस्ट भी तैयार कर रखी थी. जो कि जाहिर है सीबीआई के मुखिया होने के नाते आलोक वर्मा को यह अच्छा नहीं लगा क्योंकि उनको लगा कि जो नाम अस्थाना दे रहे हैं उनमें से कई दागी अफसर हैं. फिर सीबीआई चीफ वर्मा ने सीवीसी को लिखा कि राकेश अस्थाना  किसी भी मीटिंग में सीबीआई का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे और अब जो हुआ वह जग जाहिर है. मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है और सरकार ने साफ किया है कि भले ही नागेश्वर राव को अंतरिम सीबीआई प्रमुख बनाया गया है मगर सुप्रीम कोर्ट में वर्मा और अस्थाना ही होंगे.

टिप्पणियां थोड़ी सी चर्चा उस शख्स की जिसने तीन-तीन सीबीआई निदेशकों को भ्रष्ट बना दिया या कहें सरेआम घूस खिलाई. मीट का व्यापारी जो 70 लाख की हेराफेरी छिपाने के लिए दो करोड़ तक की घूस दे देता है, वह भी सीधे बड़े अफसरों को...अब सब जगजाहिर हो चुका है. मामला सुप्रीम कोर्ट में है सबकी आस्था उसी में बची है और सबको उम्मीद है कि अदालत जो कहेगी वही सही होगा, इसी में सबकी भलाई है. शायद इससे सीबीआई में सबका एक बार भरोसा जग जाए.

राहुल गांधी ने CBI चीफ को छुट्टी पर भेजने का मामला राफेल डील से जोड़ा

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई से पहले आज सीबीआई (CBI) ने इस मामले पर सफ़ाई देते हुए कहा कि आलोक वर्मा (Alok Verma) अभी भी सीबीआई डायरेक्टर हैं, जबकि राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) स्पेशल डायरेक्टर. इन अफ़सरों को हटाया नहीं गया है. इन्हें सिर्फ जांच से अलग करके छुट्टी पर भेजा गया है. दरअसल, दोनों अधिकारियों से सारे अधिकार वापस ले लिए गए हैं.

सीबीआई  (CBI Crisis) में चल रहे संग्राम के बीच कांग्रेस लगातार मोदी सरकार (Modi Govt) पर हमलावर है. सीबीआई चीफ आलोक वर्मा (Alok Verma) को छुट्टी पर भेजे जाने को राफेल डील (Rafale Deal) में कथित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बार फिर पीएम मोदी पर हमला बोला. राहुल गांधी ( Rahul gandhi) ने सीबीआई चीफ को रात के 2 बजे छुट्टी पर भेजे जाने को देश के लोगों और संविधान का अपमान बताया. उन्होंने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति 3 लोगों की समिति करती है. पीएम, नेता विपक्ष और सीजेआई. उन्होंने कहा, 'सीबीआई डायरेक्टर को पीएम ने रात 2 बजे हटाया, यह भारत के संविधान, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, विपक्ष के नेता और भारत के लोगों का अपमान है. 

कांग्रेस अध्यक्ष ने आलोक वर्मा को रात के 2 बजे छुट्टी पर भेजे जाने को राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश बताया. राहुल गांधी ने कहा कि पूरा देश जानता है कि प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार किया है. प्रधानमंत्री जानते हैं कि यदि राफेल की जांच शुरू हो गई तो वह खत्म हो जाएंगे और यही उनकी घबराहट है. उन्होंने कहा कि अगर सीबीआई जांच शुरू हो जाती तो दूध का दूध, पानी का पानी हो जाता और इससे घबराकर, डरकर प्रधानमंत्री ने सीबीआई डायरेक्टर को हटा दिया. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ सीबीआई डायरेक्टर को हटा नहीं रहे हैं बल्कि, सबूतों को मिटाने का काम भी कर रहे हैं. ये देश प्रधानमंत्री को उनके भ्रष्टाचार को भूलने नहीं देगा.

 इससे पहले कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार राफेल 'घोटाले' को 'दबाने' के लिए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की 'जासूसी' का सहारा ले रहे हैं.  लोकसभा में कांग्रेस के नेता नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने आरोप लगाया कि 'राफेल-ओ-फोबिया' से पीड़ित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीबीआई की जासूसी और निगरानी में शामिल हैं. इन आरोपों पर प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी. खड़गे ने वर्मा को हटाए जाने पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है.

टिप्पणियां खड़गे और सिंघवी ने आरोप लगाया कि खुफिया ब्यूरो 'ऐसे अधिकारी की जासूसी कर रहा था जो राफेल घोटाले में संदेहास्पद लेन-देन का खुलासा करने वाले थे.' कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विटर पर लिखा, 'सीबीआई निदेशक को रात में दो बजे अवैध रूप से हटा दिया गया. आज, आईबी के चार सदस्य उनके घर के बाहर घूमते हुए पकड़े गए.' उन्होंने इसे रोमांचक मोड़ बताया जहां अपराध और राजनीतिक कुचक्र का मेल होता है.

आलोक वर्मा ने किया सरकार के सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप की ओर इशारा

सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा  ( Alok Verma) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में इशारा किया है कि सरकार ने सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश की. 23 अक्तूबर को रातोंरात रेपिड फायर के तौर पर CVC और DoPT ने तीन आदेश जारी किए. यह फैसले मनमाने और गैरकानूनी हैं, इन्हें रद्द किया जाना चाहिए.

आलोक वर्मा की ओर से दाखिल की गई याचिका में शामिल प्रमुख बिंदु :-  

  • सीबीआई से उम्मीद की जाती है कि वह एक स्वतंत्र और स्वायत्त एजेंसी के तौर पर काम करेगी. ऐसे हालात को नहीं टाल जा सकता, जब उच्च पदों पर बैठे लोगों से सम्बंधित जांच की दिशा सरकार की मर्जी के मुताबिक न हो. हालिया दिनों में ऐसे केस आए जिनमें जांच अधिकारी से लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर/ डायरेक्टर तक किसी खास एक्शन तक सहमत थे, लेकिन सिर्फ स्पेशल डायरेक्टर की राय अलग थी.
  • सीवीसी, केंद्र ने रातोंरात मुझे सीबीआई डायरेक्टर के रोल से हटाने का फैसला लिया और नए शख्स की नियुक्ति का फैसला ले लिया, जो कि गैरकानूनी है.
  • सरकार का यह कदम DSPE एक्ट के सेक्शन  4-b के खिलाफ है, जो सीबीआई डायरेक्टर की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए दो साल का वक्त निर्धारित करता है.
  • DSPE एक्ट के सेक्शन 4 A के मुताबिक सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति  प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की कमेटी करेगी. सेक्शन 4b(2) में सीबीआई डायरेक्टर के ट्रांसफर के लिए इस कमेटी की मंजूरी ज़रूरी है. सरकार का आदेश इसका उल्लंघन करता है.
  • इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी सीबीआई को सरकार के प्रभाव से मुक्त करने की बात कर चुकाहै. सरकार के इस कदम से साफ है कि सीबीआई को DOPT से स्वतंत्र करने की ज़रूरत है.
  • मुझे संस्थान (CBI) के अधिकारियों पर पूरा भरोसा है, और इस तरह का गैरकानूनी दखल अधिकारियों के मनोबल को गिराता है.

सीबीआई विवादः केंद्र के पूर्व सचिव बोले- जब योग्यता नहीं वफादारी पर चुने जाएंगे तो भुगतेंगी संस्थाएं

भारत सरकार के पूर्व शिक्षा सचिव अनिल स्वरूप (Anil Swarup) ने सीबीआई में विवाद( CBI feud) के बीच संस्थाओं में योग्यता की जगह वफादारी के आधार पर नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं. 

सीबीआई में इन दिनों दो शीर्ष अफसरों के बीच मचे घमासान ( CBI feud)  और इस पर जांच एजेंसी के कामकाज में पैदा हुए गतिरोध का का मामला चर्चा-ए-खास है. विवाद के कारणों को लेकर तरह-तरह के निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं. सबकी अपनी-अपनी राय है. फिलहाल केंद्र के दखल पर सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना फोर्स लीव पर हैं. नागेश्वर राव अंतरिम निदेशक के तौर पर सीबीआई का कामकाज संभाल रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार के पूर्व शिक्षा सचिव अनिल स्वरूप (Anil Swarup) ने गंभीर बात कही है. इसी साल 30 जून को रिटायर हुए 1981 बैच के आईएएस अफसर अनिल स्वरूप ने संस्थाओं में योग्यता को दरकिनार कर हो रहीं नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं. 

अनिल स्वरूप ने अपने ब्लू टिक वाले आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, "यदि चयन और प्रोत्साहन योग्यता और निष्पक्षता नहीं बल्कि वफादारी पर आधारित होते हैं तो संगठनों को इसे भुगतना होगा. जो सक्षम होते हैं वे आत्मसम्मान रखते हैं और अवसर आने पर  स्पष्ट भी रहते हैं. उनकी वफादारी एक कारण होती है. वे किसी भी पोजीशन पर कब्जे का कदम नहीं उठाते. ..पसंद हमारा है."

यूं तो अनिल स्वरूप ने यह ट्वीट बहुत संभलकर किया है. उनके ट्वीट में न 'सीबीआई' का जिक्र है न किसी 'अफसर' शब्द का जिक्र है. फिर भी सीबीआई के अफसरों के बीच हुए भारी विवाद के बाद जिस तरह से संस्था के रूप में सीबीआई की विश्वसनीयता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं, उसी दौरान अनिल स्वरूप के आए इस ट्वीट को जोड़कर देखा जा रहा है. अनिल स्वरूप ने अपने ट्वीट में आर्गनाइजेशन शब्द का इस्तेमाल किया है. माना जा रहा है कि उन्होंने सीबीआई के मौजूदा हालात की तरफ इशारा किया है. 

अनिल स्वरूप की गिनती अपने जमाने के तेजतर्रार आईएएस अफसरों में होती है. 1981 बैच के यूपी काडर के आईएएस अफसर रहे हैं. पिछले 30 जून को भारत सरकार के शिक्षा सचिव पद से रिटायर हुए. कोयला घोटाले की आंच का सामना कर रहे कोयला मंत्रालय के सचिव का जब चुनौतिया भरा पद संभाला तो उसे संकट से उबारने का श्रेय अिल स्वरूप को जाता है. कोल सेक्रेटरी रहने के दौरान अनिल स्वरूप ने ईमानदार अफसरों की टीम तैयार कर माफियाओं के तंत्र पर चोट किया. रिकॉर्ड कोयला उत्पादन बढ़ाकर शार्टेज की समस्या दूर की. जिससे माफियाओं का तंत्र कमजोर हुआ. कोयला का उत्पादन बढ़ने से माफियाओं की कमर तोड़ दी. दरअसल पहले कम कोयले के उत्पादन के कारण माफिया हावी रहते थे और कोल ब्लॉक आवंटन में खेल चलता था. 

राजनीति विज्ञान से एमए अनिल स्वरूप करीब तीन दशक भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहे. 1990 के दशक में खीरी के डीएम रहे और तीन दशक के करियर में यूपी में औद्योगिक विभाग के सचिव सहित कई पदों पर रहे.  फिर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हुए.  2006 से 2013 के बीच वह श्रम मंत्रालय में रहे. ज्वाइंटर और एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी स्कीम शुरू कराई. जिसके जरिए नौ करोड़ से ज्यादा लोगों को लाभ मिला. 



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