3 डी होलोग्राफिक तकनीक बदलेगी दुनिया


3 डी होलोग्राफिक तकनीक बदलेगी दुनिया

कभी ऐसी तकनीक के बारे में सोचा है, जो न केवल आपका घर डिजाइन कर दे, बल्कि फटाफट उसे बना भी दे और भूख लगे तो आपका खाना भी तकनीक ही बनाए। आने वाले वक्त में 3डी प्रिंटिंग आपकी ऐसी कल्पनाओं को साकार कर सकती है।
आपको याद होगा कि मोदी ने 3 डी होलोग्राफिक तकनीक के जरिए जबरदस्त चुनाव प्रचार किया था. एक ही झटके में उन्होंने ना सिर्फ कई जगह अपना संदेश पहुंचा दिया बल्कि इसके जरिए उन्होंने युवाओं को भी अपना मुरीद बनाया. ऐसी में आज तक ने भी 3 डी होलोग्राफिक तकनीक के जरिए अहमदाबाद को दिल्ली में उतारने की कोशिश की. इस तकनीक के जरिए मोदी के परिवार के कई सदस्यों से बातचीत की. कभी ऐसी तकनीक के बारे में सोचा है, जो न केवल आपका घर डिजाइन कर दे, बल्कि फटाफट उसे बना भी दे और भूख लगे तो आपका खाना भी तकनीक ही बनाए। आने वाले वक्त में 3डी प्रिंटिंग आपकी ऐसी कल्पनाओं को साकार कर सकती है।

3डी प्रिंटिंग 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 3डी प्रिंटिंग के बारे में कुछ समय पहले कहा था कि ′इस तकनीक में हर चीज को बनाने की क्रांतिकारी क्षमता है।′ जिंदगी को आसान और आरामदायक बनाने के लिए तकनीक लगातार नई चीजें पेश कर रही है। इसी तकनीक में एक नाम 3डी प्रिंटिंग का भी है। माना जा रहा है कि खिलौने एवं फुटवियर्स से लेकर जेट विमान के पार्ट्स, कारें और इमारतें भी भविष्य में 3डी तकनीक से बनेंगी। 1984 में 3डी प्रिंटर चार्ल्स डब्ल्यू हुल ने डिजाइन किया था। अब इस तकनीक से मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में एक बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। 3डी प्रिंटिंग, प्रोडक्शन या प्रिंट करने की ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से कई तरह के फिजिकल मॉडल और प्रोडक्ट्स बनाए जा सकते हैं।

होलोग्राम
त्रिआयामी होलोग्राफी एक स्टेटिक किरण प्रादर्शी प्रदर्शन युक्ति होती है। इस तकनीक में किसी वस्तु से निकलने वाले प्रकाश को रिकॉर्ड कर बाद में पुनर्निर्मित किया जाता है, जिससे उस वस्तु के रिकॉर्डिंग माध्यम के सापेक्ष छवि में वही स्थिति प्रतीत होती है, जैसी रिकॉर्डिंग के समय थी। ये छवि देखने वाले की स्थिति और ओरियन्टेशन के अनुसार वैसे ही बदलती प्रतीत होती है, जैसी कि उस वस्तु के उपस्थित होने पर होती। इस प्रकार अंइकित छवि एक त्रिआयामि चित्र प्रस्तुत करती है और होलोग्राम कहलाती है। 

होलोग्राम का आविष्कार ब्रिटिश-हंगेरीयन भौतिक विज्ञानी डैनिस गैबर ने सन १९४७ में किया था, जिसे सन् १९६० में और विकसित किया गया। इसके बाद इसे औद्योगिक उपयोग में लाया गया। इसका उपयोग पुस्तकों के कवर, क्रेडिट कार्ड आदि पर एक छोटी सी रूपहली चौकोर पट्टी के रूप में दिखाई देता है। इसे ही होलोग्राम कहा जाता है। यह देखने में त्रिआयामी छवि या त्रिबिंब प्रतीत होती है, किन्तु ये मूल रूप में द्विआयामी आकृति का ही होता है। इसके लिये जब दो द्विआयामी आकृतियों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता जाता है। तकनीकी भाषा में इसे सुपरइंपोजिशन कहते हैं। यह मानव आंख को गहराई का भ्रम भी देता है।
होलोग्राम के निर्माण में अतिसूक्ष्म ब्यौरे अंकित होने आवश्यक होते हैं, अतः इसको लेजर प्रकाश के माध्यम से बनाया जाता है। लेजर किरणें एक विशेष तरंगदैर्घ्य की होती हैं। क्योंकि होलोग्राम को सामान्य प्रकाश में देखा जाता है, अतः ये विशेष तरंगदैर्घ्य वाली लेजर किरणें होलोग्राम को चमकीला बना देती हैं। होलोग्राम पर चित्र प्राप्त करने के लिए दो अलग अलग तरंगदैर्घ्य वाली लेजर किरणों को एक फोटोग्राफिक प्लेट पर अंकित किया जाता है। इससे पहले दोनों लेजर किरणें एक बीम स्प्रैडर से होकर निकलती हैं, जिससे प्लेट पर लेज़र किरणों का प्रकाश फ्लैशलाइट की भांति जाता है और चित्र अंकित हो जाता है। इससे एक ही जगह दो छवियां प्राप्त होती हैं। यानि एक ही आधार पर लेजर प्रकाश के माध्यम से दो विभिन्न आकृतियों को इस प्रकार अंकित किया जाता है, जिससे देखने वाले को होलोग्राम को अलग-अलग कोण से देखने पर अलग आकृति दिखाई देती हैं।

मानव आंख द्वारा जब होलोग्राम को देखा जाता है तो वह दोनों छवियों को मिलाकर मस्तिष्क में संकेत भेजती हैं, जिससे मस्तिष्क को उसके त्रिआयामी होने का भ्रम होता है। होलोग्राम तैयार होने पर उसको चांदी की महीन प्लेटों पर मुद्रित किया जाता है। ये चांदी की पर्तें डिफ्लैक्टेड प्रकाश से बनाई जाती हैं। होलोग्राम की विशेषता ये है कि इसकी चोरी और नकल करना काफी जटिल है, अतः अपनी सुरक्षा और स्वयं को अन्य प्रतिद्वंदियों से अलग करने के लिए विभिन्न कम्पनियां अपना होलोग्राम प्रयोग कर रही हैं। होलोग्राम के प्रयोग से नकली उत्पाद की पहचान सरलता से की जा सकती है। भारत में होलोग्राम की एक बड़ी कंपनी होलोस्टिक इंडिया लिमिटेड है।

iPhone यूजर्स फोन

एप्पल के आने वाले नए डिवाइस iPhone 8 और iPhone 7s 3डी फेस स्कैनिंग तकनीक से लैस हो सकता है। जानकारी के अनुसीर कंपनी 3डी सेंसर फेशियल रिकॉग्नाइजेशन तकनीक पर कार्य कर रही है। जिसकी मदद से iPhone यूजर्स फोन को अनलॉक करने के अलावा आॅथेंटिकेशन पेमेंट भी कर सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि 3डी सेंसर काफी तेज और सटीक है और इसे “focal points of the feature” भी कहा जा सकता है। इस नई तकनीक से यूजर्स को iPhone अनलॉक करने के लिए फिंगरप्रिंट की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि केवल फेस देखकर ही आपका डिवाइस अनलॉक हो जाएगा। यह तकनीक फोन को अनलॉक करने के अलावा लॉगइन करने और पेमेंट करने में लाभदायक होगी। यह तकनीक एक नए 3डी सेंसर द्वारा संचालित होगी। यह तकनीक यूजर के चेहरे को स्कैन कर चंद सेकंड में ही फोन को अनलॉक कर देगी। वहीं फोन को अनलॉक करने के लिए चेहरे को फोन के बिल्कुल पास लाने की जरूरत नहीं होगी।

नकली दवाओं की पहचान

नकली दवाओं की पहचान करने के लिए भारत की प्रमुख औषधि कंपनी ने ग्लैक्सो ने बुखार कम परने वाली औषधि क्रोसीन को एक त्री-आयामी होलोग्राम पैक में प्रस्तुत किया है।[2] यह परिष्कृत थ्री-डी होलोग्राम भारत में पहला एवं एकमात्र पीड़ानाशक एंटी पायेरेटिक ब्रांड है। होलोग्राम का प्रयोग करने वाली प्रसिद्ध भारतीय कंपनियों में हिन्दुस्तान यूनीलीवर, फिलिप्स इंडिया, अशोक लेलैंड, किर्लोस्कर, हॉकिन्स जैसी कंपनियां शामिल है। इसके अलावा रेशम और सिंथेटिक कपड़ा उद्योग के लिए होलोग्राफिक धागों के उत्पादन की योजना भी प्रगति पर है1 होलोग्राम कम होता खर्चीला है और इसके रहते उत्पादों के साथ छेड़छाड़ की जाये तो बड़ी सरलता से उसका पता लग जाता है। इसकी मदद से उत्पाद की साख और विशिष्टता बनी रहती है।[3] इसके अलावा मतदाता पहचान पत्र आदि में भी थ्री-डी होलोग्राम का प्रयोग किया जाता है। इसके लिये भारतीय निर्वाचन आयोग ने भी निर्देश जारी किये हैं। भारत के मतदाता पहचान पत्रों में भी होलोग्राम का प्रयोग होता है।[4] इसके अलावा विद्युत आपूर्ति मीटरों पर बिजली की चोरी रोकने हेतु भी होलोग्राम का प्रयोग होता है।


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