कैसे होता है बवासीर ?


कैसे होता है बवासीर ?

कब्ज (constipation) होने पर आपको मल (stools) करते वक़्त ज़ोर लगाना पड़ता है, जिसकी वजह से गुदा में दबाव पड़ता है| लम्बे समय तक कब्ज होने पर वहाँ बवासीर बन सकतें हैं | बवासीर के इलाज में ज़्यादा देरी न करें| ज़्यादा रक्त बहने से आपके शरीर में रक्त की कमी (anemia) हो सकती है जिसकी वजह से थकान महसूस होने लगता है और चक्कर आने लगते हैं|

कैसे होता है बवासीर (how does piles happen)?

“कब्ज (constipation) होने पर आपको मल (stools) करते वक़्त ज़ोर लगाना पड़ता है, जिसकी वजह से गुदा में दबाव पड़ता है| लम्बे समय तक कब्ज होने पर वहाँ बवासीर बन सकतें हैं |

कब कराए बवासीर का इलाज

  • यदि गुदा से रक्तस्त्राव होना शुरू हो जाए|
  • लम्बे समय तक गुदा (पाख़ाना की जगह) में दर्द और असुविधा महसूस होना|
  • अगर आपके गुदा से मास निकला हुआ महसूस हो रहा हो|
  • यदि दवाओं, मरहम, और अन्य उपचारों से बवासीर का इलाज (piles treatment in hindi) नहीं हो पा रहा हो|
  • बवासीर के इलाज में ज़्यादा देरी न करें| ज़्यादा रक्त बहने से आपके शरीर में रक्त की कमी (anemia) हो सकती है जिसकी वजह से थकान महसूस होने लगता है और चक्कर आने लगते हैं|
  • “गंभीर स्थितियों में आपको हॉस्पिटल में भर्ती होकर रक्त चढ़ाने की ज़रुरत भी पड़ सकती है|”

कैसे होता है बवासीर का इलाज?

“समयपूर्वक इलाज (timely treatment) करवाने से सर्जरी की ज़रुरत नहीं पढ़ती|”

बिना सर्जरी के 
“यदि आपने जाँच सही समय से करवाया हो तो दवाओं, इंजेक्शन या banding से इलाज किया जा सकता है|”

सर्जरी द्वारा 
सही समय पर डॉक्टर से जाँच करवाने से ही आपको बवासीर का उचित उपचार पता चलेगा| अगर बवासीर गंभीर स्थिति में हो तो कभी-कभी सर्जरी करवाने की ज़रुरत भी पड़ सकती है|
“ऑपरेशन से डरिए मत – सर्जरी की प्रक्रिया एक दिन की है (day-care surgery) और आप रोज़ का कार्य अगले दिन से ही आरंभ कर सकते हैं|” “बवासीर के उपचार का सबसे पहला कदम है कब्ज से बचना| इसके लिए फाइबर-युक्त खाद्य-पदार्थ जैसे हरी सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, और फलों का ज़्यादा मात्रा में सेवन करना चाहिए|”

बवासीर का घरेलू उपचार 

पाइल्स का घरेलू उपचार है छाछ बवासीर के लिए सबसे अच्छा उपाय है। एक चुटकी नमक और एक चौथाई चम्मच अजवाइन  को एक गिलास छाछ में मिलाएँ। इसे रोजाना पिएं और अपने बवासीर को प्रभावी रूप से ठीक करें।

बवासीर के घरेलू उपाय है मूली

मूली  बवासीर के लिए सबसे प्रभावी गृह उपचार में से एक है और बवासीर के इलाज में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। आधा गिलास मूली के रस में एक चुटकी नमक डालें। इसे दिन में दो बार पिएं। इसके अलावा शहद  के साथ इसके पेस्ट को मिक्स करके दर्द और सूजन को कम करने के लिए गुदा खोलने के आसपास लगाएँ।

बवासीर के घरेलू नुस्खे में काला जीरा का उपयोग

काला जीरा​ बवासीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है और इसे व्यापक रूप से भारत में भी इस्तेमाल किया जाता है। जीरा पाउडर और पानी से गढ़ा पेस्ट बनाएँ और 15 मिनट के लिए सूजन वाली जगह पर लगाए। यह उपाय बवासीर के लक्षणों को कम करने में बहुत प्रभावी है।

बवासीर से बचने के घरेलू उपाय करें लहसुन से

लहसुन आपके दर्दनाक बवासीर के लिए एक आदर्श समाधान है। इसमें उत्कृष्ट सूजन को कम करने वाले, विरोधी बैक्टीरियल और कसैले गुण होते हैं। यह दर्द और सूजन को राहत देता है और शौच की प्रक्रिया को आसान बनाता है। आप रोज़ रोज कच्चे लहसुन के लहसुन खा सकते हैं या इसे सपोसिटरी के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।

बवासीर के घरेलू उपचार है पपीता

पपीता विटामिन और खनिजों  का एक समृद्ध स्रोत है और इसमें एक शक्तिशाली पाचन एंजाइम-पपैन होता है जो कब्ज और रक्तस्राव बवासीर का इलाज करने के लिए एक शक्तिशाली फल माना जाता है। आप अपने नाश्ते में इसे खा सकते हैं या आंत्र आंदोलन को कम करने के लिए गुदा क्षेत्र पर इसके रस को लगा सकते हैं। आप अपने सलाद में कच्चा पपीता भी शामिल कर सकते हैं।

बादाम है खूनी बवासीर के लिए घरेलू उपाय

बादाम  भी आहार फाइबर का स्रोत  हैं और आँतो के कार्य में मदद करता है। रोज सुबह तीन बादाम खाने से बवासीर का अच्छा इलाज होता है। बेहतर और प्रभावी परिणाम के लिए बादाम को ठीक से कम से कम 50 गुना चबाएं। आप सूजन और खुजली को दूर करने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर बादाम का तेल भी लगा सकते हैं।  बादाम का तेल  त्वचा को शांत करता है और बाहरी बवासीर के लिए एक अच्छा उपाय है।

बवासीर का देसी उपाय करें बर्फ से

10 मिनट के लिए सूजन वाले क्षेत्र पर बर्फ को रगड़ने से दर्द, खुजली और सूजन से त्वरित राहत मिलती है। यह उस क्षेत्र में रक्त के प्रवाह को सुन्न और धीमा कर देता है और कई मिनटों तक दर्द को राहत देता है।

ईसबगोल है बवासीर का रामबाण इलाज

सभी बवासीर रोगियों के लिए ईसबगोल  रामबाण इलाज है जो एक घुलनशील आहार फाइबर का समृद्ध स्रोत है। गर्म पानी  या दूध  के एक गिलास में ईसबगोल भूसी का एक चम्मच मिलाएँ और सोते समय रोजाना इसे पिएं। यह शौच की प्रक्रिया को कम करता है और मल को निकालते समय दर्द को कम करता है।

बवासीर की देशी दवा है जिमीकंद

जिमीकंद  बवासीर के लिए एक और शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है और इसे बवासीर के दुश्मन के रूप में जाना जाता है। यह पाचन प्रक्रिया में सुधार और कब्ज से मुक्त करता है। इसका गुदा क्षेत्र पर सुखदायक और कसैला प्रभाव पड़ता है। 5 ग्राम जिमीकंद पाउडर को बवासीर के इलाज के लिए कुछ दिनों तक छाछ के साथ दैनिक रूप से लिया जा सकता है।

पाइल्स का आयुर्वेदिक उपचार करे बेल फल 

सूजन को कम करने, कब्ज का इलाज करने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में बेल  फल की प्रभावशीलता इसे बवासीर के लिए एक आदर्श हर्बल उपाय बनाती है। यह टेनिन का एक अच्छा भंडार है जो पाचन तंत्र में हानिकारक आक्रमणकारियों को मारने के लिए अपने सक्रिय कार्यों के लिए जाना जाता है। यह एक अच्छे रेचक के रूप में भी काम करता है और बिना ज्यादा दर्द के मल को निकालने में मदद करता है। रोजाना बेल का पीना बवासीर के लिए एक सिद्ध उपाय है।

बवासीर में क्या खाएं क्या ना खाएं 

बवासीर में व्यक्ति को काफी पीड़ा पहुंचती है। मल द्वार की शिराओं के फूलने से यह बीमारी होती हैं |आयुर्वेद में अर्श और आम भाषा में बवासीर (Piles) के नाम से जाना जाता है। यह रोग बादी और खूनी बवासीर के नाम से दो प्रकार का होता है। बादी बवासीर में गुदा में पीड़ा, खुजली और सूजन होती है, जबकि खूनी बवासीर में मस्सों से रक्तस्राव होता है।

कारण : 

पाइल्स होने के प्रमुख कारणों में कब्ज अजीर्ण की शिकायत, ज्यादा शराब पीने, नशीली चीजें खाना, मिर्च-मसालेदार, तले हुए गरिष्ठ पदार्थों कार्य करना, श्रम व व्यायाम न करना, देर रात तक जागना,  पेट की खराबी, घुड़सवारी आदि होते हैं। बवासीर में खानपान का विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए खासतौर पर क्या नहीं खाना चाहिए | इससे आप इस बीमारी की तकलीफों से बच सकते हैं |

फाइबर से भरपूर फल-सब्जियों का सेवन जरूरी

चूंकि फलों और सब्जियों में अनेक पोषक तत्वों के अलावा फाइबर भी होते हैं, इसलिए ये रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाते ही हैं, कब्ज की स्थिति को भी सुधारते हैं। इसी के साथ ये शौच के वक्त दबाव और दर्द को भी कम करने में मदद करते हैं। वैसे तो सभी फलों में फाइबर होते हैं, इसलिए सभी लाभदायक हैं, पर ज्यादा फाइबर वाले फलों में बेरी, सेब, आलूबुखारा, नाशपाती, एवोकैडो, अंजीर, बेल, अनार, चीकू, अंगूर, पपीता, संतरा, बब्बूगोशा, मीठा नींबू, मौसमी,माल्टा खाएँ।
  • अपने खाने में कच्चा नारियल, केला, सेब, पालक, संतरे, आड़ू, मशरूम, आंवला भी शामिल करें ।
  • भोजन में ताजा फल, कच्ची सब्जियाँ, सलाद आदि बहुत बढ़ा दें। फल वृक्ष पर पके ही अच्छे रहते हैं।
  • ज्यादा फाइबर वाली सब्जियों में हाथीचक (आर्टीचोक), मटर, ब्रोकोली, हरी पत्तेदार सब्जियां, बींस शामिल हैं। तुरई, चौलाई, शलजम, टमाटर, खीरा, भिंडी, परवल, कुलथी, टमाटर, गाजर, जिमीकंद, पालक, मटर, दालें, ओट मील काले चने, चुकंदर नियमित खाएं।
  • बवासीर में रिफाइंड अनाजों (सफेद आटा, सफेद चावल, मैदा) के बजाय ज्यादा-से-ज्यादा साबुत अनाजों (दलिया, ब्राउन राइस, होल ग्रेन ब्रेड, जौ, सामान्य पिसा आटा, चौलाई, बाजरा, भुट्टा, पॉपकॉर्न आदि) का सेवन करना चाहिए।
  • बवासीर में गेहूं, ज्वार के आटे की चोकर सहित बनी रोटी, दलिया, जौ, पुराने चावल, अरहर, मूंग की दाल भोजन में खाएं।
  • पाइल्स में प्रतिदिन भोजन के साथ मूली खाएं। भोजन के बाद 2-3 अमरूद खाएं।
  • दोपहर में नियमित रूप से पपीता खाएं ताकि कब्ज ना बने |
  • बवासीर में दही को बनाए अपना साथी : दही हमारे पेट और आतों को प्रोबायोटिक (लाभदायक बैक्टीरिया) मुहैया कराती है। ये बैक्टीरिया न केवल पाचन-तंत्र को दुरुस्त करते हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ावा देते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के अध्ययन के अनुसार, दही बवासीर को रोकने या इसके इलाज में बहुत मददगार साबित होती है।

बवासीर रोगियों के लिए विशेष उपाय 

  • एक कटोरी में दही लें। कुछ काली सरसों के दाने लें और उन्हें पीसकर दही में डाल दें। इस दही को खा लें। उसके बाद एक गिलास मट्ठा पी लें। रोज ऐसा करें, बवासीर में बहुत फायदा होगा।
  • तरल पदार्थ बहुत ही आवश्यक : बवासीर में राहत के लिए शरीर को ज्यादा-से-ज्यादा तरल पदार्थ देना जरूरी है। व्यक्ति को रोजाना आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। 
  • साथ ही मलाई निकला दूध, मट्ठा और फलों का रस भी लेते रहना चाहिए।
  • करेले का रस या छाछ (थोड़ा नमक व अजवाइन मिला कर) या दही की लस्सी पिएं।
  • बवासीर में खून जाने की तकलीफ हो, तो धनिए के रस में मिस्री मिलाकर सुबह-शाम पिएं।
  • बवासीर में पानी का सेवन अधिक करें।
  • बकरी के दूध की दही और गाजर का रस : खासकर खूनी बवासीर में इसके तहत बकरी के दूध की रात भर में जमी करीब एक पाव (250 मिली लीटर) दही लें। इसमें इतनी ही मात्रा में गाजर का रस मिलाएं और पी जाएं।

पाइल्स (बवासीर) रोग में जल्दी आराम के लिए खाएं ये फल और सब्जियां

जीरे के दाने और एक गिलास पानी : एक चम्मच जीरे के दाने भून लें। भूनने के बाद इनमें एक चम्मच सादा जीरे के दाने और मिला लें। इस मिश्रण को एक गिलास पानी में डालकर अच्छी तरह से मिला लें और दानों समेत पी जाएं। रोजाना एक बार पीएं, बहुत लाभ होगा।
पाइल्स में अंजीर भी है बहुत असरकारक : कुछ अंजीर लें और उन्हें रात भर के लिए पानी में रख दें। इसके बाद सुबह उठकर खाली पेट आधे अंजीर खा लें और आधा ही पानी पी लें। बाकी अंजीर और पानी का सेवन शाम को करें। रोजाना सुबह-शाम ऐसा करें।
मट्ठा के साथ करेले का जूस : करेले का जूस बनाएं और इसे मट्ठा के साथ पी जाएं। रोज ऐसा करें, विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे बवासीर की समस्या में बहुत फायदा होगा।
बवासीर में चीनी के साथ प्याज का सेवन करें : खूनी बवासीर के लिए एक प्याज लें और उसे अच्छी तरह से धोकर, छीलकर और काटकर तीन चम्मच चीनी के साथ सेवन कर जाएं। ऐसा दिन में दो बार करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा नियमित कर सके तो यह बवासीर में बहुत लाभ होगा |
बवासीर में आम की गुठली और शहद खाने के फायदे : कच्चे आम की गुठली को ग्राइंडर में पीस लें। इसके बाद इस पाउडर की दो मिली ग्राम मात्रा दिन में दो बार शहद के साथ लें। 
कब्ज का काम तमाम करता है खजूर : खजूर एक प्राकृतिक कब्ज नाशक है। बवासीर के रोगी को यह कब्ज नहीं होने देगा, इसलिए बवासीर में खजूर का सेवन भी बहुत राहत देने का काम करता है।
सुबह और शाम एक मूली को कद्दूकस कर लें और फिर उसमें शहद मिला लें। इसके बाद 60 से 90 मिलीलीटर मात्रा में सेवन करें। रोजाना दो वक्त ऐसा करने से बहुत लाभ होगा।
बवासीर में रोजाना सुबह के वक्त जामुन को नमक लगाकर खाने से भी बवासीर के रोगी को काफी फायदा होता है। 

बवासीर में क्या खाएं ना खाएं : बवासीर में परहेज

  1. बवासीर में भारी, उष्ण, तीक्ष्ण, गरिष्ठ, मिर्च-मसालेदार, चटपटे पदार्थ भोजन में न खाएं।
  2. बवासीर में बासी भोजन, उड़द की दाल, मांस, मछली, अंडा, चना, खटाई का सेवन न करें।
  3. बवासीर में बैगन, आलू, सीताफल, गुड़, डिब्बा बंद आहार (Processed foods) से परहेज करें।
  4. कैफीन : बवासीर में कॉफी और कैफीनयुक्त चाय से दूर रहें। चाय के बजाय Herbal Tea का सेवन करें। जानिए चाय पीने के फायदे और नुकसान
  5. ज्यादा चीनी और उससे बने उत्पाद, घुइयाँ, खटाई, पकौड़े, चाट-टिकिया, समोसे से परहेज करें।
  6. बवासीर में शराब का भी परहेज रखें।
  7. ज्यादा तला भोजन : ऐसा भोजन रोगी की समस्या बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं करेगा।
  8. मसाले : भोजन में कम-से-कम मसालों का इस्तेमाल करें।
  9. मांस-अंडा : पाइल्स में दोनों ही पदार्थों से रोगी को दूर रहना चाहिए।
  10. घी-मक्खन-पनीर : कम-से-कम सेवन करें।
  11. आइसक्रीम : इससे भी दूर ही रहें।
  12. जैली, चॉकलेट, कैंडी, कुकीज, केक, ब्रेड, पास्ता, सफेद चावल, मैदा और सभी फास्ट फूड।
बवासीर में आजमाएं ये उपाय :
  1. प्रतिदिन सुबह-शाम घूमने जाएं।
  2. अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें।
  3. पीड़ा दूर करने के लिए रोजाना शौच के बाद बादाम का तेल या जैतून का तेल लगाएं।
  4. सप्ताह में एक बार एनिमा अवश्य लगाएं। फिस्टुला और बवासीर की अचूक दवा पतंजलि बाबा रामदेव
  5. बवासीर के लिए योगासन में पादांगुष्ठासन एवं उत्तानपादासन नियमित रूप से करें।
  6. मल, मूत्र आदि के वेगों को न रोकें।
  7. कठोर आसन पर बहुत देर तक न बैठे और न बहुत देर तक खड़े ही रहें। 
  8. साइकिल अधिक न चलाएं। घोड़े की सवारी न करें।
  9. देर रात तक ना जागें ।
  10. व्रत भी ना करें।

पाइल्स (बवासीर) रोग में जल्दी आराम के लिए खाएं ये फल और सब्जियां

  • तौरई कब्ज दूर करती है। इसकी सब्जी रोजाना खाने से कब्ज नहीं बनती हैं।
  • जब तक मौसम में बथुए का साग मिलता रहे, रोजाना इसकी सब्जी खायें। बथुए का रस पीयें, उबाला हुआ पानी पीयें। इससे बवासीर ठीक हो जाते हैं।
  • बवासीर के मस्से चुकन्दर खाते रहने से झड़ जाते हैं।
  • कच्ची गाजर खाने या रस पीने से बवासीर में लाभ होता है, जब तक गाजर मिलती रहे, लगातार सेवन करें।
  • गाजर का रस तीन भाग और पालक का रस एक भाग मिलाकर पीने से पाइल्स में आराम मिलता है।
  • कुछ दिनों तक अमरूद खाने से पाइल्स रोग में लाभ मिलता हैं।
  • प्याज रक्तस्रावी और बिना रक्त वाली दोनों प्रकार के पाइल्स रोग में लाभ मिलता हैं। रोजाना एक कच्चा प्याज खाना चाहिए।
  • कच्ची मूली खाने से बवासीर से गिरने वाला रक्त बन्द हो जाता है। इसके अतिरिक्त, एक कप मूली का रस लें, इनमें एक चम्मच देशी घी मिलायें। हिलाकर सुबह-शाम दो बार रोजाना पीयें लाभ होगा।
  • एक सफेद मूली को काटकर नमक लगाकर रात को ओस में रख दें। इसे सुबह खाली पेट खायें।
  • 125 ग्राम मूली के रस में 100 ग्राम देशी घी की जलेबी एक घण्टा भीगने दें। फिर जलेबी खाकर रस पी जायें। इस तरह एक सप्ताह सेवन करने से पाइल्स रोग में लाभ मिलता हैं।
  • मूली के टुकड़ों को भी घी में तल कर चीनी के साथ खायें।
  • गेहूँ के पौधे का रस पीना हर प्रकार के पाइल्स में लाभदायक है।
  • 60 ग्राम काले तिल खाकर ऊपर से ठण्डा पानी पीने से बिना रक्त वाले अर्श ठीक हो जाते हैं।
  • समान मात्रा में सौंठ और गुड़ मिला आधा चम्मच सुबह-शाम रोजाना खाने से बवासीर में लाभ होता है।
  • फूलगोभी और जमीकन्द की सब्जी कम मसाले डालकर खाने से लाभ होता है।
  • गरम दूध के साथ ईसबगोल की भूसी को सोते समय लें। इससे कब्ज दूर होगी और बवासीर में लाभ होगा।
  • छाछ में नमक और पीसी हुई अजवाइन मिलाकर पीने से पाइल्स में लाभ होता है। छाछ के उपयोग से यह बीमारी ठीक होने के बाद फिर से नहीं होती है। सेंधा नमक ज्यादा लाभ करता है। छाछ भोजन करने के अन्त में पीयें।
  • जीरा-जीरा और मिश्री पीसकर पानी से फांकी लेने से अर्श का दर्द दूर हो जाता है।
  • 10 नीम की निबौली की गिरी, सेंधा नमक या मिश्री के साथ ठण्डे पानी से सुबह शाम फेंकी लेने से लाभ होता है। चार दिन लेने के बाद से आराम होने लगेगा। भगन्दर (Fistula) भी इससे ठीक हो जाता है।
  • बवासीर में तेज दर्द, रक्तस्राव होने पर उपवास रखें और ताजा पानी में नींबू पीयें। चार कप अलग-अलग धारोष्ण दूध से भर लें। इनमें क्रमश: आधा-आधा नीबू निचोड़कर पीते जायें। एक सप्ताह सेवन करने से हर प्रकार के पाइल्स नष्ट हो जायेंगे।

रक्तस्रावी पाइल्स में आजमायें खानपान के ये उपाय : (Best food items in Bleeding Piles)

  • नींबू गरम दूध में आधे नीबू का रस डालकर तुरन्त हर तीन घण्टे से पिलायें।
  • सूखे आँवले को बारीक पीसकर एक चाय की चम्मच सुबह-शाम दो बार छाछ या दूध से लेने से खूनी पाइल्स में लाभ होता है। दूध गर्म होना चाहिए ।
  • सुबह-शाम ताजा पानी में 8 ग्राम अनार के पिसे हए छिलकों को फांकी से लें।
  • रक्तस्रावी पाइल्स में प्रतिदिन दोपहर में पपीता खाना लाभदायक है। पपीता अच्छा, पका हुआ होना चाहिए। कच्चे पपीते की सब्जी भी खानी चाहिए।
  • प्याज का सेवन रक्तस्रावी और अरक्तस्रावी, दोनों प्रकार के पाइल्स में लाभदायक है।
  • एक चम्मच करेले का रस शक्कर मिलाकर दो बार रोजाना पीने से लाभ होता है।
  • सिके हुए गरमा-गरम चने खाने से रक्तस्रावी बवासीर में लाभ होता है।
  • रक्त वाली पाइल्स में प्रात: के भोजन के साथ मसूर की दाल खाने और एक गिलास खट्टी छाछ पीने से लाभ होता है।
  • 60 ग्राम काले तिल चबा-चबाकर खाकर दही का सेवन करने से पाइल्स से रक्त गिरना बन्द हो जाता है।
  • जब तक बवासीर से रक्त आता रहे तब तक केवल दही ही खाते रहें, अन्य कोई चीज न खायें। रक्तस्राव बन्द हो जायेगा।
  • मेथी दाना मेथी का काढ़ा या इसे दूध में उबाल कर पीने से बवासीर में रक्त आना बन्द हो जाता है।
  • एक चम्मच ईसबगोल की भूसी गरम पानी या गरम दूध के साथ रात को सोते समय लें।
  • जीरा, सौंफ, धनिया प्रत्येक एक चम्मच को एक गिलास पानी में उबालें। आधा पानी रहने पर छान कर एक चम्मच देशी घी मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से पाइल्स से रक्त गिरना बन्द हो जाता है। यह गर्भवती स्त्रियों के बवासीर में अधिक लाभदायक है।
  • मिश्री मिलाकर हरे धनिये की पत्तियों का रस दो बार पियें यह भी पाइल्स में लाभदायक है।


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