घर का सपना अब कम बजट में


घर का सपना अब कम बजट में

घर बनाना इतना महंगा नहीं है, जितना लोगों ने मान लिया है। अक्‍सर लोग बना बनाया घर खरीद लेते हैं या बनाने का ठेका दे देते हैं। ऐसे घरों में खर्च ज्‍यादा आता है और गुणवत्‍ता की गारंटी भी नहीं रहती है। अगर प्‍लानिंग बनाकर अपना घर खुद बनाया जाए  तो यह 10 से 15 फीसदी तक सस्‍ता हो सकता है। 

घर का सपना अब कम बजट में

घर बनाना इतना महंगा नहीं है, जितना लोगों ने मान लिया है। अगर प्‍लानिंग बनाकर घर का कंस्‍ट्रक्‍शन किया जाए तो यह 10 से 15 फीसदी तक सस्‍ता हो सकता है। जानकारों के अनुसार अक्‍सर लोग बना बनाया घर खरीद लेते हैं या बनाने का ठेका दे देते हैं। ऐसे घरों में खर्च ज्‍यादा आता है और गुणवत्‍ता की गारंटी भी नहीं रहती है। इससे अच्‍छा है कि अपना घर खुद बनाया जाए जिससे यह मजबूती के साथ-साथ सस्‍ता भी पड़े।

1000 वर्ग फुट के प्‍लाट की घर की योजना

1000 वर्ग फुट के प्‍लाट पर 800 वर्ग फुट का घर बनाया जा सकता है। इस घर को अगर ठेके पर बनाया जाए तो आमतौर पर सामान के साथ 1600 रुपए वर्गफुट की लागत आती है। इस प्रकार इसकी लागत करीब 12.80 लाख रुपए हुई। लेकिन ऐसे घरों में अक्‍सर कुछ न कुछ अतिरिक्‍त काम भी कराना पड़ता है जिसके बाद इसकी लागत करीब 13.50 लाख रुपए तक पहुंच जाती है। वर्ग फीट के हिसाब से देखेंगे तो आपको यह रहने लायक करीब 1687 रुपए में पड़ता है।

कैसे कम कर सकते हैं इस खर्च को

इस काम को करने के लिए पहले एक अच्‍छा आर्किटेक्‍ट खोजें। इससे न सिर्फ नक्‍शा तैयार कराएं बल्कि यह भी प्‍लान करें कि घर बनाने के किस स्‍टेज में कितने सामान की जरूरत पड़ेगी। एक बार यह योजना बन गई तो आपको अंदाजा हो जाएगा कि घर बनाने में कितनी ईंट, सीमेंट, सरिया और अन्‍य सामान लगेगा। सुनने में सामान्‍य सी लगने वाली यह बात आपको बड़ा फायदा करा सकती है।

कैसे इस जानकारी का फायदा उठाएं

इस जानकारी का दो तरह से फायदा उठाया जा सकता है। पहला तरीका हो सकता है कि निर्माण के दौरान जितने सामान की जरूरत हो उसका बाजार में बड़े दुकनदारों से एक साथ खरीद का समझौता कर लें। इससे सामान सस्‍ता मिल जाएगा और पैसा भी जितना सामान लेते जाएंगे, उतने का देना होगा। दूसरा तरीका हो सकता है कि लोग अपने आर्किटेक्‍ट से निमार्ण के दौरान देखरेख का भी कांट्रेक्‍ट कर लें। मामूली फीस देकर ऐसा किया जा सकता है। इससे आर्किटेक्‍ट पूरे निमार्ण कार्य की देखरेख भी करता है और बाजार में दाम निगोशिएट कराने में मदद भी करता है।

सस्ता हुआ मकान बनाना

महंगाई के चलते कठिन हुआ अपने घर का सपना अब कम बजट में ही साकार हो सकता है। बाजार में भवन निर्माणी के भाव में आई बड़ी गिरावट के चलते कम लागत में भवन बन रहे हैं। पिछले तीन सालों के भाव में वर्तमान में 25 से 30 प्रतिशत लागत कम हो गई है। जानकार इसकी अलग-अलग वजह बता रहे हैं लेकिन इसका सीधा फायदा आम व्यक्ति को मिल रहा है। हालांकि गिरावट के बाद भी प्रॉपर्टी के क्षेत्र में तेजी के संकेत कम ही दिख रहे हैं।

भवन निर्माण सामग्री में आई गिरावट के चलते प्रॉपर्टी के बड़े प्रोजेक्ट की लागत कम होने से नए मकान अब कम कीमत में मिल सकते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने से रंग रोगन सहित अन्य सामग्री के भाव पर भी असर पड़ा है। इसके चलते सामान्यतः 1100 से 1200 रूपए वर्गफीट में होने वाला निर्माण अब 900 से 1000 वर्गफीट की लागत में किया जा रहा है। इसमें भी सर्वाधिक हिस्सा मजदूरी का है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बजट आने के बाद मार्च-अप्रैल में नए मकानों की मांग व निर्माण बढ़ सकती है।

भवन निर्माण सामग्री

सरिया : वर्ष 2014 में सरिए के भाव 42 रुपए तक पहुंच गए थे जो अब 32 रुपए प्रति किली हो गए हैं। नवंबर-दिसंबर माह में ही सरिए के भाव में 4 से 5 रुपए किलो की गिरावट आई है। इस दौरान भाव 30 रुपए तक गिरने के बाद वापस 2 रुपए चढ़े। भवन निर्माण में करीब 10 प्रतिशत लागत सरिए की मानी जाती है। इसी तरह शेड बनाने के उपयोग में आने वाले लोहे के पाइप के भाव भी 55 से घटकर 42 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं।

सीमेंट : मकान निर्माण की लागत में सीमेंट की कीमतें भी अहम रहती हैं। वर्ष 2013-14 में 300 से 320 रुपए प्रति बैग तक पहुंची सीमेंट की कीमत अब 225 से 250 रुपए है। गत दो महीने पहले प्रति बैग 280-85 रुपए में मिल रहा था जो घटकर 225 से 250 रुपए तक हो गया है। इस कमी के चलते पहले से चल रहे प्रोजेक्ट की लागत भी कम हो रही है।

ईंट : ईंट की कीमत 4 रुपए से घटकर 3.5 रुपए हो गई है जबकि गिट्टी का एक डंपर जो पहले 7500 से 8 हजार रुपए में आता था वो अब 6 हजार रुपए में मिल रहा है। इसी तरह रेत के भाव में भी कमी आई है।

यह है कारण

वैश्विक स्तर पर मांग में आई कमी के चलते सरिए के भाव कम हुए हैं। देश में भी सूखा व अन्य घरेलू कारणों से निर्माण कार्यों की चाल धीमी होने का असर सीमेंट की कीमतों पर पड़ा है। सीमेंट कंपनियों का आपसी गठजोड़ टूटने से भी कीमतें कम हो रही हैं।

मांग कम होने से गिरे भाव

बाजार में मांग कम होने से सरिए व सीमेंट के भाव कम हुए हैं। गत दो माह में इनमें 20 से 25 प्रतिशत गिरावट आई है। कम लागत में निर्माण के लिए वर्तमान समय बेहद अच्छा है।

रायल्टी में कोई कमी नहीं

गिट्टी-रेत को खदानों से बाजार तक लाने की लागत पहले जैसी है लेकिन पर्याप्त मांग नहीं होने से भाव कम हुए हैं। शासन की रायल्टी में भी कोई कमी नहीं हुई है।

ठेके की दर में भी कमी

मजदूरी की दरें तो पहले से बढ़ गई हैं। निर्माण सामग्री के भाव जरूर कम हुए हैं। इससे ठेके की दरों में भी 10 से 15 प्रतिशत की कमी आई है।

किन तरीकों से घट सकती है घर की निर्माण लागत !

सभी अपने सपनों के आशियाने को खूबसूरत और आकर्षक बनाना चाहते हैं. पर बढ़ती कंस्‍ट्रक्‍शन लागत का ख्‍याल आते ही हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि यह सपना कैसे पूरा होगा. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कंस्‍ट्रक्‍शन कॉस्‍ट में बढ़ोत्तरी के बावजूद कैसे कम खर्च में मकान बनाया जा सकता है. इसके लिए आपको बहुत कुछ नहीं करना है, बल्कि छोटी-छोटी बातों का ख्‍याल रखना होगा.

नक्शे का चयन  

घर का निर्माण कार्य पूरा करने में डिजाइन (नक्‍शे) का अहम रोल होता है. घर का डिजाइन फाइनल करने से पहले इंजीनियर से कई तरह के नक्शे बनाने को कहें. फिर एक नक्शे से दूसरे नक्शे की तुलना करें. तुलना करते वक्‍त यह देखें की नक्शे का कुल क्षेत्रफल कितना है और इस्‍तेमाल होने वाला यूजेबल स्पेस कितना है. उनमें से जिस नक्‍शे में खाली स्‍पेस कम और यूजेबल स्‍पेस अधिक हो, उसे ही फाइनल करें. इससे घर का बजट आश्‍चर्यजनक रूप से कम हो जाएगा और कम खर्च में भी स्पेसियस घर का निर्माण करने में मदद मिलेगी.

नक्शे में बदलाव न करें 

घर के निर्माण के दौरान ज्‍यादातर लोग किचिन, बाथरूम, डाइनिंग रूम आदि के डिजाइन में बदलाव कराते हैं.इससे बचें, क्‍योंकि यह कंस्ट्रक्शन और लेबर कॉस्ट को बढ़ा देता है. निर्माण के दौरान बदलाव से बचने के लिए नक्शे का 3डी डिजाइन ले सकते हैं. 3डी डिजाइन नक्‍शा आज कल आसानी से उपलब्‍ध है और इसको देखकर आप अपने घर की वास्तविक स्थिति का आसानी से आकलन कर सकते हैं. इससे निर्माण के दौरान बदलाव करने की जरूरत भी नहीं होगी.

वर्गाकार घर बनाएं

विशेषज्ञों के अनुसार वर्गाकार घर के निर्माण में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट कम आती है. विशेषज्ञ बाताते हैं कि एक ही साइज के आयताकार और वर्गाकार घर में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 15 से 20 फीसदी का अंतर होता है. वर्गाकार घर की कंस्‍ट्रक्‍शन कॉस्‍ट कम होती है.इसके अलावा सिंगल फ्लोर घर बनाने की बजाय छोटे साइज के डबल स्‍टोरी घर का निर्माण करना चाहिए. इससे 25 फीसदी कंस्‍ट्रक्‍शन लागत कम हो जाएगी, क्‍योंकि ऊपरी फ्लोर पर कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में बचत होती है.

घर में कम हो दीवारों की संख्या 

घर के अंदर दीवारों की संख्‍या कम से कम होनी चाहिए. इसके साथ ही बाहरी दीवार की तुलना में भीतरी दीवार की मोटाई भी कम रखें. इससे घर स्पेसियस होगा और कंस्‍ट्रक्‍शन खर्च में भी कमी आएगी. घर के अंदर दरवाजों और खिड़कियों की जगह मेहराब का इस्‍तेमाल करें. दरवाजे और खिड़की की संख्‍या कम होने से घर की लागत कम जाती है और लुक भी खूबसूरत लगता है.

बिल्डिंग मटेरियल्स 

घर की कुल लागत में 65 फीसदी खर्च मेटेरियल्स पर होता है. घर बनाने में सही मेटेरियल्स का चयन कर खर्च कम कर सकते हैं. फ्लोर, किचिन, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, वुडन वर्क आदि में लगने वाला मेटेरियल कहां से कम कीमत में बेहतर मिल सकता है,इसका पता करें. इसके साथ ही सही प्रोडक्‍ट का चुनाव करें. मार्केट में एक ही तरह के ब्रांडेड और साधारण प्रोडक्ट की कीमतों में बड़ा अंतर होता है. ध्यान रखें कि घर में कहां पर ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की जरूरत है और कहां पर साधारण प्रोडक्ट्स से काम चल सकता है. इससे भी खर्च को कम कर सकते हैं.

अनुभवी ठेकेदार 

का चयन आम तौर पर होता है कि घर के निर्माण में लोग इंजीनियर से नक्शा बनवाने के बाद खुद से काम करना शुरू कर देते हैं. ऐसा न करें. इससे घर की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है, क्‍योंकि आपके पास निर्माण से जुड़ी जानकारी नहीं होती है. इस चक्‍कर में मेटेरियल की खपत और बरबादी ज्यादा होती है. लेबर पर भी अधिक खर्च होता है. इससे लागत बढ़ जाती है जबकि एक अनुभवी ठेकेदार को कंस्ट्रक्शन से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी होती है. वह कम लेबर में अधिक काम निकाल लेगा. मेटेरियल की बरबादी भी कम होती है.

भवन निर्माण के वास्तु टिप्स:

  • हर कोई चाहता है कि उसका अपना एक घर हो, जिसमें सुकून के दो पल व्यतीत किये जाए, लेकिन इस मंहगाई के दौर में भवन बनाना वाकई बहुत मुश्किल काम है।
  • अगर आप-अपना आशियाना बनवाने जा रहे है तो हम आपको कुछ ऐसे वास्तु टिप्स बताने जा रहे है, जिन्हें अपनाकर आप-अपने भवन में खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकते है। 
  • प्राथमिक रूप से भवन निर्माण के लिए वर्गाकार या आयताकार भूमि का चयन करना चाहिए। विकृत भूमि का चयन न करें जिससे भवन में सकारात्मक उर्जा का प्रवाह न हो सके। 
  • दो विशाल भूखंड के मध्य छोटा संकरा भूखंड कभी उत्तम नहीं माना जाता है। 
  • भवन निर्माण करते समय यह ध्यान रखें कि भूमि सूर्यवेधी या चन्द्र वेधी इसका विचार किसी वास्तु मर्मज्ञ से करना चाहिए। 
  • रहने योग्य भूखंड में सारी दिशाओं का तालमेल इस प्रकार से होना चाहिए कि घर में सकारात्मक उर्जा प्रवाहित होती रहे। 
  • भूखण्ड के सामने किसी भी प्रकार का अवरोध जैसे-टीला, बड़ा वृ़क्ष, बिजली का खंभा और मन्दिर आदि नहीं होना चाहिए। 
  • भवन में ईशान दिशा की ढाल का होना अति-आवश्यक है। भवन में दरवाजे व खिड़कियों की पवचयस्य की ऊॅचाई एक सीध में होनी चाहिए। 
  • यदि किसी भवन पर मन्दिर की छाया पड़ रही हो तो उस भवन में निवास करना उत्तम नहीं माना जाता है। ऐसे मकान में निवास कदापि नहीं करना चाहिए जो बन्द रास्ते का आखिरी मकान हो। 
  • पढ़ने वाले तथा अध्यात्म में रूचि रखने वाले तथा वृद्धों को पूर्व दिशा की ओर सिर रखकर शयन करना चाहिए। 
  • मुख्य रूप से गृह निर्माण के समय दरवाजे खिड़कियॉ, चूल्हा, समर सेबल आदि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • भूमिगत जल का संग्रह पूर्व, या ईशान अर्थात पूर्व-उत्तर कोण में ही करना चाहिए। टयूबवेल या हैंडपंप पूर्व या ईशान कोण की दिशा मे ही बनवाना उत्तम होता है। 
  • भोजनालय कक्ष कभी भी उत्तर या ईशान कोण की दिशा में नहीं बनवाना चाहिए। 
  • बिना दरवाजे के, बिना पूर्ण छत के घर में प्रवेश कभी भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घर में विपत्तियॉ का वास होता है। 
  • रविवार, मंगलवार या शनिवार को गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से घर में रोग हावी रहते है। 
  • उत्तर दिशा की दीवार पर झरना का चित्र न लगाये अन्यथा परिवार की आर्थिक स्थिति में गिरावट आती है।



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