महिलाओं में माहवारी रुकने की समस्या


महिलाओं में माहवारी रुकने की समस्या

मासिक धर्म रुक जाने के कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में महिलाओं की दिनचर्या माहवारी न आने का कारण होती है। जबकि कुछ मामलों में किसी बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाओं के वितरीत प्रभाव व कई अन्य चिकित्सीय समस्याएं मासिक धर्म रुकने का कारण होती हैं। 

माहवारी रुकने की समस्या

महिलाओं में माहवारी रुकने या पीरियड से जुडी कठिनाइयाँ एक आम समस्या है | अधिकतर मामलो में माहवारी नहीं आने या माहवारी रुकने के कई कारण होते हैं, लेकिन महिलाओं को इस बात का डर बैठ जाता है कि कहीं फिर से गर्भावस्था तो नहीं हो गयी है | यह डर महिलाओं में तनाव को बढ़ाता है | अचानक माहवारी रुकने होने पर महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है. यह कई अन्य कारणों से भी हो सकता है तथा आप इसे अपने भोजन में मामूली बदलाव करके तथा कुछ घरेलू नुस्खो की सहायता से आसानी से पीरियड नियमित कर सकती है |

मासिक धर्म का न आना या बंद होने की स्थिति को चिकित्सीय भाषा में एमेनोरिया (Amenorrhea) कहा जाता है। मासिक धर्म न होने का सबसे आम कारण है गर्भावती होना। यदि लगातार तीन पीरियड्स या मासिक धर्म चक्र न हो तो इसको सेकेंडरी एमेनोरिया (secondary amenorrhea) माना जाता है। इसके अलावा 15 वर्ष तक की लड़कियों में मासिक धर्म की शुरुआत न होने को प्राथमिक एमेनोरिया कहा जाता है।
अगर आपका सिर्फ एक मासिक चक्र न हुआ हो तो ऐसा जरूरी नहीं है कि ये किसी गंभीर परेशानी का संकेत है। लेकिन उससे ज़्यादा अवधि तक अगर माहवारी न आये तो ये किसी स्वास्थ्य समस्य का लक्षण हो सकता है। इसके कारणों को जानकर आप एमेनोरिया का इलाज करवा सकती हैं। 

मासिक धर्म बंद होने के लक्षण

मासिक धर्म रुकने से महिलाओं के शरीर में कई तरह की तकलीफ सुरु हो जाती है । पैर व कमर में दर्द, गर्भाशय के हिस्से में दर्द, बाल झड़ना, भूख न लगना, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, सांस लेने में तकलीफ, नींद न आना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं ।

मासिक धर्म न आने के कारण

मासिक धर्म रुक जाने के कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में महिलाओं की दिनचर्या माहवारी न आने का कारण होती है। जबकि कुछ मामलों में किसी बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाओं के वितरीत प्रभाव व कई अन्य चिकित्सीय समस्याएं मासिक धर्म रुकने का कारण होती हैं। इसके अन्य कारणों को नीचे विस्तार से बताया जा रहा है।

प्राकृतिक कारणों की वजह से पीरियड्स का न आना

  • महिलाओं के सामान्य जीवन में कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब उनके पीरियड्स प्राकृतिक रूप से रुक जाते हैं। ये परिस्थितियां हैं -
  • गर्भधारण होने पर
  • जिन दिनों आप स्तनपान करा रहीं हों
  • रजोनिवृत्ति शुरू होने पर

पीरियड्स रुकने का कारण हो सकती हैं गर्भनिरोधक गोलियां

गर्भनिरोधक गोलियां लेने से भी कई महिलाओं को पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं। इतना ही नहीं इन महिलाओं के द्वारा गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन बंद करने पर भी ओवुलेशन और महावारी को नियमित होने में थोड़ा समय लगता है। इसके अलावा अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए शरीर के अंदर गर्भनिरोधक के अन्य विकल्पों को लगाने से भी यह समस्या हो सकती है।

माहवारी का न आना दवाओं की वजह से 

कई तरह की दवाओं के इस्तेमाल से मासिक धर्म का चक्र प्रभावित होता है, और कई बार मासिक धर्म बंद हो जाते हैं। इसमें शामिल दवाओं के प्रकार हैं -
  • मानसिक रोग की दवा
  • कीमोथेरेपी में ली जानें वाली दवाएं
  • तनाव की दवा
  • ब्लड प्रेशर की दवा
  • संक्रमण की दवा

मासिक धर्म बंद होने का कारण हो सकती है आपकी जीवनशैली

वजन बहुत कम होना – वजन कम होने से भी आपको मासिक धर्म न आने की समस्या हो सकती है। आपकी लंबाई के अनुसार निश्चित वजन से 10 प्रतिशत वजन कम होना भी आपके शरीर की हार्मोनल प्रक्रिया को असंतुलित कर देता है। इससे ओवुलेशन प्रक्रिया पर असर पड़ता है।
अधिक एक्सरसाइज करना – कई महिलाएं अपने वजन को कम करने के लिए कई घंटे एक्सरसाइज करती हैं। जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना भी महिलाओं के मासिक धर्म को रोकता है। 
तनाव – तनाव के कारण मासिक धर्म चक्र को नियमित करने वाले दिमागी हिस्से पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे ओवुलेशन व महावारी बंद हो जाती है।

मासिक धर्म न आने का कारण है हार्मोनल अंसुतलन

कई तरह की चिकित्सीय स्थिति महिलाओं के हार्मोनल अंसतुलन का कारण होती हैं।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम -  (Polycystic Ovary Syndrome, PCOS) – यह स्थिति महिला के सामान्य हार्मोन स्तर को बढ़ा देती है। जिसका असर मासिक धर्म चक्र पर पड़ता है।
थायराइड – थायराइड ग्रंथि से स्त्रावित होने वाले थायराइड का कम या ज्यादा होने से महिलाओं का मासिक धर्म अनियमित हो जाता है या मासिक धर्म आना बंद ही हो जाता है। 
पिट्यूटरी ट्यूमर – यह पिट्यूटरी ग्रंथि में होने वाला कैंसर-मुक्त ट्यूमर है। इससे महिलाओं का हार्मोनल स्तर अनियंत्रित होता है।
समय से पहले मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) – मेनोपॉज की स्थिति सामान्यतः महिलाओं में 50 आयु के बाद होती है। लेकिन कुछ महिलाओं में 40 के बाद ही ओवुलेशन होना बंद हो जाता है, जिसके कारण उनको मासिक धर्म नहीं होता है।

मासिक धर्म रूकने के लिए जिम्मेदार शारीरिक समस्याएं

महिलाओं के यौन अंगों की समस्याओं के कारण भी उनको माहवारी न आने की परेशानी हो सकती है। इसमें शामिल हैः
जन्म से प्रजनन अंग में समस्या होना – महिलाओं में जन्म से ही प्रजनन अंग न होने से भी यह समस्या हो सकती है। देखा जाता है कि कई महिलाओं को जन्म से गर्भाशय और योनि में समस्या होती है। जिस कारण उनको मासिक धर्म होने में परेशानी आती है या यह नहीं भी होते हैं।
योनि की बनावट में विकार – योनि की सामान्य बनावट में होने वाले विकार के कारण मासिक धर्म होने में बाधा हो सकती है। योनि के अंदर बनी झिल्ली में विकार होने से कई बार गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा से आने वाला रक्त बाहर नहीं आ पाता है। 

मासिक धर्म के रुकने पर किए जाने वाले परीक्षण

मासिक धर्म न आने के मुख्य कारणों में महिलाओं के प्रजनन अंगों में आने वाली समस्या या हार्मोनल बदलाव शामिल किया जाता है। इनकी जांच के लिए निम्न परीक्षण किए जाते हैं।
  • खून की जांच   – मासिक धर्म न होने पर हार्मोनल बदलावों की मौजूदा स्थिति को जांचने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। इसमें थायराइड हार्मोन, प्रौलेक्टिन हार्मोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन, आदि के स्तर को देखा जाता है।
  • अल्ट्रासाउंड, एमआरआई,  व सीटी स्कैन – इस तरह के परीक्षण से महिलाओं के प्रजनन प्रक्रिया और मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि की जांच की जाती है।
मासिक धर्म रुकने पर होने वाली जटिलताएं
  • बांझपन – आपके शरीर में ओवुलेशन प्रक्रिया न होने पर आपको मासिक धर्म नहीं होता है। इसमें ओवुलेशन प्रक्रिया न हो पाने के कारण आप प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं और 
  • ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis/ हड्डियों की कमजोरी/ अस्थिसुषिरता) – मासिक धर्म न होने पर आप ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो सकती है। इसमें आपकी हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं।

माहवारी न होने का इलाज 

मासिक धर्म न होने के कारणों का सही पता आपके टेस्ट के नतीजों से लगता है। इसके बाद ही आपका इलाज शुरू किया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि आपको माहवारी न आने का कारण पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome, PCOS) है तो डॉक्टर आपको प्रोजेस्टेरोन से युक्त दवाओं को खाने की सलाह देगें। इसके अलावा यदि समय से पहल मेनोपॉज होना आपके गर्भाशय की सामान्य क्रिया में होने वाली समस्या की ओर इशारा करता है। ऐसे में डॉक्टर आपको गर्भनिरोधक दवाओं व हार्मोन प्रत्यारोपण की थेरेपी (Hormone Replacement Therapy) करवाने की सलाह देते हैं। यदि पीरियड्स न आने के लिए थायराइड का असामान्य स्तर सामने आता है तो डॉक्टर थायराइड का इलाज करेंगे।

खून की कमी इन पदार्थों से दूर करें

  1. खुबानी, केला, कीवी, सेब, आडू, स्ट्रॉबेरी जैसे फल खाएं।
  2. सेम और अन्य फलीदार सब्जियां खाएं।
  3. हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल करें।
  4. चुकंदर को भी अपनी डाइट में शामिल करें |
  5. शकरकंद, कढू, लौकी, टिंडे, गाजर जैसी सब्जियों को भी भोजन में जरूर लें।
  6. राजमा, उड़द, मसूर, मूंग और अन्य दालों को भी उपलब्धता के अनुसार नियमित लें।
  7. अंकुरित अनाज (स्प्राउट) जरूर खाएं। इनसे बहुत अच्छा पोषण मिलता है।
  8. दूध, दही, पनीर भी जरूरी हैं। खा सकें तो अंडा भी जरूर खाएं।

महावारी लाने के उपाय और घरेलू नुस्खे

महावारी लाने के उपाय घरेलू नुस्खों द्वारा कैसे आप इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं. नीचे कुछ उपचार दिए गए हैं. अगर आप इन्हें आजमाएंगे तो निश्चित रुप से आपको महावारी की समस्या खत्म हो सकती है. अपने बालों को झड़ने से कैसे रोके इसके लिए उपाय यहाँ जानें.
काली मिर्ची और शहद:- लगभग 3 ग्राम काली मिर्ची का चूर्ण शहद के साथ चाटने से कुछ ही समय में रुके हुए मासिक धर्म को चालू कर देता है.
दूब का रस:- रुके हुए मासिक धर्म को चालू करने के लिए आप प्रतिदिन एक छोटा चम्मच दूब का रस पिया करें ऐसा करने से आप की रुकी हुई माहवारी खुल जाती है.
पपीते के द्वारा मासिक धर्म का उपचार:- महावारी चालू करने के लिए आप रोजाना कच्चे पपीते का सेवन कर सकते हैं या फिर पपीते की सब्जी बनाकर भी कुछ दिनों तक खाने से आपका रुक हुआ मासिक धर्म खुलकर आने लगता है.

माहवारी जल्दी लाने के घरेलू उपचार

एलोवेरा से  महावारी लाने के उपाय

दोस्तों एलोवेरा जिसको हम बोलचाल की भाषा में ग्वारपाठा भी बोलते हैं आप लगभग 2 सप्ताह तक ग्वारपाठे के रस का दो चम्मच प्रतिदिन भूखे पेट सेवन करने से आपकी अनियमित महावारी सही हो जाती है, और खुलकर आने लगती है.

काली मिर्च, शक्कर और पीपल

लगभग 10 ग्राम तिल और 2 ग्राम काली मिर्च और दो छोटे पीपल इन तीनों को थोड़ी शक्कर लेकर मिला लें और इनका उबालकर अच्छी तरह काढ़ा बना ले और ठंडा हो जाने पर इसको पिएं, इस तरह का काढ़ा पीने पर आपको मासिक धर्म खुलकर आने लगता है या महावारी से संबंधित कोई समस्या होती है तो वह भी ठीक हो जाती है.

देसी घरेलू नुस्खे द्वारा महावारी लाने के उपाय

  • रुके हुए मासिक धर्म को चालू करने के लिए यहां जो देसी घरेलू नुस्खा बता रहे हैं इसके लिए आपको सोंठ, बायबिडंग, जौ और गुढ़ की जरूरत पड़ेगी. तो सबसे पहले आप 50 ग्राम सोंठ ले लें और 30 ग्राम के लगभग गुढ़ और 5 ग्राम बायविडंग तथा 5 ग्राम जौ इन सबको मिलाकर दरदरा यानी के मोटा सा कूट लें.
  • और इसमें एक गिलास पानी मिलाकर इसको अच्छे से उबालें. और जब पानी आधा रह जाए तो इस काढ़े का ठंडा होने के बाद सेवन करें. इस दवाई से आप का रूका हुआ मासिक धर्म खुलकर आने लगता है.

बरगद, मैथी और काली मिर्च से महावारी लाने के उपाय

  • बरगद मतलब बड़ का पेड़ जिसकी लंबी-लंबी जटाएं लटकी रहती हैं. वह जटाएं और मैथी व कलौंजी यह तीनों चीजें एक समान मात्रा में तीन तीन ग्राम के लगभग इन सारी चीजों को मिलाकर मोटा दरदरा कूट लें.
  • और फिर इस में दो गिलास पानी मिलाकर इसका काढ़ा बना लेना और जब पानी लगभग आधा या इससे कम रह जाए तो इस पानी को छानकर शक्कर मिला लें. और ठंडा होने के बाद इस पानी को पीने से आप की रुकी हुई महावारी खुलकर आने लगती है. और महावारी से संबंधित समस्याएं भी सही हो जाती हैं.

माहवारी रुकने की समस्या में क्या खाना चाहिए तथा क्या नहीं

माहवारी रुकने की कठिनाई में आपको संतुलित आहार लेना चाहिए जैसे साबुत अनाज, गिरियाँ, बीज, खासकर अंकुरित रूप में, भी शामिल करने चाहिए। रोगी महिला को लो ब्लड शुगर की परेशानी से बचने के लिए थोड़े-थोड़े समय के अंतर से पाँच बार खाते रहना चाहिए। दिन में एक या दो बार भरपेट खाना हानिकारक हो सकता है, विशेषकर मासिक धर्म के दिनों में, क्योंकि इन दिनों महिला को ब्लड शुगर कम हो जाता है।

माहवारी रुकने पर उपाय

  • माहवारी रुकने की समस्या में पपीता बड़े काम की चीज है। रोजाना पपीते का रस पीएं। खासकर कच्चे पपीते की सब्जी का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है।
  • 50 ग्राम मेथी और इससे थोड़े-से ही कम मूली के बीजों को एक साथ पीसकर चूर्ण बनाएं। दस दिन तक रोजाना इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा पानी के साथ लें।
  • करेले का दो चम्मच रस रोजाना थोड़ी-सी चीनी मिलाकर लें। करेले की सब्जी का भी सेवन करें।
  • रोजाना चार-पांच काली मिर्ची का चूर्ण बनाएं और करीब 25 दिन तक एक चम्मच शहद के साथ सेवन करें।
  • माहवारी रुकने पर बराबर मात्रा में मेथी, मूली और गाजर के बीज लें और तीनों को मिलाकर चूर्ण बना लें। अब करीब दस ग्राम चूर्ण रोजाना पानी के साथ खाएं।
  • चुकंदर उपलब्ध हो तो रोजाना इसका एक कप रस निकालें और उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर दस दिन तक पीएं।
  • रोजाना सुबह-शाम आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ चाटें। एक माह तक ऐसा करें, काफी फायदा होगा।
  • माहवारी रुकने पर सौंठ, गुग्गुल और गुड़ की बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बनाएं और रोज रात को सोने से पहले पी जाएं।
  • 10-15 दिन तक रोजाना भोजन के साथ पुदीने की चटनी खाएं।
  • गाजर के बीजों को पीस लें और 20-25 दिन तक रोजाना थोड़ा-सा चूर्ण मिश्री मिलाकर खाएं।
तिल और गुड़: तिल में जरूरी फैटी एसिड होते जो हारमोन संबंधी किसी भी समस्या को ठीक करने में मदद करता है। गुड़ शरीर में गर्मी पैदा कर मासिक धर्म को नियमित करता है। तिल को थोड़ा भून ले और उसमे बराबर की मात्रा में गुड़ मिला कर पीस ले। पीरियड चालू होने से 15 दिन पहले रोजाना 1 चम्मच खाली पेट खाये। कम से कम 2 महिना खाये। मासिक धर्म के दौरान इसको नहीं खाना है।
पीरियड्स न हो तो क्या करे : – हल्दी एक ऐसा मसाला है जो न सिर्फ आपके मासिक धर्म को नियमित करने में मदद करता है बल्कि हार्मोन संबंधी समस्या से निजात दिलाने में भी मदद करता है। इसका इमानेगोज (Emmenagogue) गुण माहवारी रुकने संबंधी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसका एन्टी,इन्फ्लेमटोरी गुण मासिक धर्म के दौरान दर्द से भी राहत दिलाने में मदद करता है। विधि, एक चौथाई छोटा चम्मच हल्दी को एक गिलास दूध में डालें और उसमें स्वाद लाने के लिए थोड़ा शहद या गुड़ डाल सकते हैं। जब तक कि समस्या से निजात न मिल जायें कुछ हफ्तों तक इसको पी सकते हैं।

माहवारी रुकने की समस्या में क्या नहीं खाना चाहिए

  • माहवारी के दिनों में मैदा और मैदा से बने पदार्थ, शक्कर, टॉफी, चॉकलेट, केक, पैस्ट्री, मिठाइयाँ, साफ की गई दालें और मांसाहार, घी-तेलयुक्त गरिष्ठ पदार्थ, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, कड़क चाय, कॉफी, शराब, सिरका, अचार, चटनी इत्यादि खाद्य पदार्थों से एकदम परहेज करना चाहिए।
  • यदि कोई महिला धुम्रपान की आदी है तो उसे वह भी छोड़ देना चाहिए, क्योंकि धुम्रपान से मासिक संबंधी विकार बढ़ते हैं।
  • माहवारी रुकने की बीमारी में सादा भोजन करें।
  • मिर्च-मसाले वाला, ज्यादा तैलीय भोजन न करें।
  • रोजाना हल्का व्यायाम करें। आधा घंटा तेज चलें।
  • माहवारी रुकने या अन्य मासिक धर्म सम्बंधी बिमारियों में चिकित्सक को कब दिखाएं
  • कभी माहवारी के बहाव में बाधा हो सकती है. इस तरह की स्थिति बहुत कम आती है। लेकिन अगर हो तो डॉक्टर से मिलना चाहिए |
  • मासिक धर्म से सबन्धित समस्याएँ होना साधारण बात है अक्सर माहवारी की अनियमित्ता हो जाती है, अर्थात कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार माहवारी रूक जाती है |
  • कभी-कभी ऐसा भी होता है की ये 2-3 दिन होना चाहिए लेकिन 1 ही दिन होता है, और कई बार 15 दिन में ही दुबारा आ जाता है. और कई बार 2 महीने तक नहीं आता. तब डाक्टर के पास जाना जाहिए |
  • यदि स्व-उपचार से लगातार तीन महीने में दर्द ठीक न हो या रक्त के बड़े-बड़े थक्वे निकलते हों तो डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए |
  • यदि माहवारी होने के पांच से अधिक दिन पहले से दर्द होने लगे और माहवारी के बाद भी होती रहे तब भी डाक्टर के पास जाना जाहिए.
माहवारी चक्र का रिकॉर्ड रखें- कब खत्म हुए, कितना स्राव हुआ (कितने पैड में काम में आए उनकी संख्या नोट करें और वे कितने भीगे थे) और अन्य कोई लक्षण आप ने महसूस किया हो तो उसे भी शामिल करें, यदि तीन महीने से ज्यादा समय तक समस्या चलती रहे तो डाक्टर से परामर्श करें |

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