महंगाई के दौर में बचत कैसे करें?


महंगाई के दौर में बचत कैसे करें?

कई लोग सोचते हैं कि अपने पास नकदी जमा करना भी बचत का ही एक तरीका है. वास्तव में बचत करना आसान नहीं है. जब आपके हाथ में खर्च करने योग्य पैसा हो तब उसे खर्च करने से खुद को रोकना बहुत मुश्किल है. हालांकि, बचत का यह तरीका वास्तव में खराब है.

महंगाई के दौर में बचत कैसे करें?

  • जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तब अमूमन यह माना जाता है कि केवल पेट्रोल और डीजल की कीमत पर ही असर पड़ेगा, हालांकि यह केवल आधा सच है क्योंकि बढ़ती तेल की कीमतें अन्य मैक्रो इकॉनमी पर भी खासा प्रभाव डालती है.
  • बढ़ते पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच लोगो का ब्लड प्रेशर भी सामान मात्रा से बढ़ता जा रहा है क्योंकि तेल के दामों में बढ़ोतरी से घर का बजट गड़बड़ा रहा है. पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह वैश्विक बाज़ार में बढ़ते कच्चे तेल की कीमतें है. 
  • यहां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें केवल देश की अर्थव्यवस्था पर ही बुरा प्रभाव नहीं डाल रही है बल्कि देश के आम जन का बजट भी खराब कर रही है.
  • जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तब अमूमन यह माना जाता है कि केवल पेट्रोल और डीजल की कीमत पर ही असर पड़ेगा, हालांकि यह केवल आधा सच है क्योंकि बढ़ती तेल की कीमतें अन्य मैक्रो इकॉनमी पर भी खासा प्रभाव डालती है.
  • मुद्रास्फीति, ब्याज दर, व्यापार घाटा, रुपये की विनिमय दर और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे कुछ उदाहरण है जहां खासा असर देखा जाता है. इंडिया इन्फोलिन की एक शोध रिपोर्ट ने हाल ही में कहा है कि तेल की बढ़ती कीमतें देश की अर्थव्यवस्था के लिए और व्यक्तिगत घरेलू बजट के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.
ऐसे महंगाई के दौर में घर का बजट सम्भालना मुश्किल हो जाता है लेकिन जहां चाह वहां राह. इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ सरल सुझाव हे हैं जिसे ध्यान रखकर आप अपने घर का बजट सुधार सकते हैं.

हरेक खरीददारी पर ध्यान रखें

भुगतान की सभी खरीद और बिल सूचीबद्ध करें. सभी खर्चों पर पैनी निगाह रखें जैसे क्रेडिट-डेबिट कार्ड और नकद के द्वारा हुई खरीद. राइट होरिजन के संस्थापक और सीईओ अनिल रेगो कहते हैं कि, “अगर आप अपने होने वाले खर्चों पर बारीकी से नज़र रखते है तो आप समझ पाएंगे कि आप कहां ज्यादा खर्च कर रहे है.”

बेतुके खर्च करना बंद करें

महंगाई के इस दौर में आपको किसी भी तरह के अनावश्यक व्यय से बचना चाहिए. आपके यूटिलिटी बिल, होम लोन, किराया भुगतान और मेडिकल बिल आवश्यक खर्चों में से एक हैं जबकि स्नैक्स, कॉफी बिल, मूवी टिकट और अनावश्यक बाहर खाना आपके अनावश्यक खर्चों में शामिल हैं, इनसे बचकर रहें.

आमदनी बढ़ाएं

सूचना क्रांति के इस दौर में बाज़ार में ऐसी बहुत सी कंपनी है जो घर बैठे कमाने का मौका देती हैं. अगर आप अपनी आय से ज्यादा खर्च करते है तो आप ऐसी कंपनी से संपर्क करें जहां एक्स्ट्रा इनकम हो सके. रेगो कहते हैं, “यदि आपके खर्च काबू में नहीं आ रहे हैं तो आप वीकेंड के दौरान फ्रीलान्स वर्क या पार्ट टाइम जॉब कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.”

लाइफस्टाइल बदलें

अर्थव्यवस्था की धीमी विकास दर के कारण हो सकता है आपको एक बेहतर पार्ट टाइम जॉब न मिले. ऐसे समय में आपको अपनी जीवन शैली में बदलाव करना चाहिए जिससे आपके जेब पर ज्यादा बोझ ना पड़े. जब घर में हो तो जितना कम हो सके बिजली का उपयोग करें, इससे बिजली का बिल कम आएगा. ज्यादा बाहर घूमने न जाएं, किराने की खरीदारी आदि के दौरान सस्ते उत्पाद खरीदें, यह कुछ उदहारण हैं जिनका उपयोग कर आप अपने खर्च काबू में रख सकते हैं.

खर्च को कम करें

आपकी एक तिहाई इनकम से ज्यादा पैसा आपके कर्ज के भुगतान में नहीं जाना चाहिए. अमूमन देखा गया है हमारी आय का अधिकांश भाग कर्ज़ चुकाने में चला जाता है. रेगो बताते हैं, “आपको एक प्रबंधनीय स्तर तक डेब्ट आउटफ्लो को कम करना चाहिए. साथ ही साथ, जब आपकी आय बढ़े तो अधिक कर्ज़ न ले. अपनी आय का कम से कम एक-तिहाई बचाने की कोशिश करें. वह आगे कहते हैं इन बातों को ध्यान रखकर आप कठिन समय को आसानी से पार कर पाएंगे.”

आप बचत में रखें महंगाई का ध्यान

कई लोग सोचते हैं कि अपने पास नकदी जमा करना भी बचत का ही एक तरीका है. नोटबंदी के बाद यह चीज देखने को मिली. आपको भी ऐसे कई उदारहण दिख जाएंगे, जिसमें किसी गृहिणी या बुजुर्ग ने काफी नकदी अपने पास जमा किया होगा. मैंने ऐसे दो मामले देखे हैं, जिनमें इस तरह कई लाख रुपये जमा किए गए थे. खास बात यह है कि यह कालाधन नहीं था. यह सैलरी से बचाया गया पैसा था, जिस पर टैक्स चुकाया गया था. यह रकम कई सालों में धीरे-धीरे इकट्ठा की गई थी. 

"बचत के मामले में ज्यादातर लोगों का व्यवहार एक जैसा होता है. वास्तव में बचत करना आसान नहीं है. जब आपके हाथ में खर्च करने योग्य पैसा हो तब उसे खर्च करने से खुद को रोकना बहुत मुश्किल है. हालांकि, बचत का यह तरीका वास्तव में खराब है. इस तरह से बचत करने वाले ये लोग अपना पैसा एक तरह से फेंक रहे थे. "

हर साल 5 से 10 फीसदी घट जाती है पैसे की वैल्यू 

इसकी वजह यह है कि महंगाई बढ़ने से हर साल 5 से 10 फीसदी पैसा बर्बाद हो जाता है. एक दशक की अवधि में इस पैसे का मूल्य जितना होना चाहिए, उसके मुकाबले घटकर सिर्फ आधा रह जाता है. इसके बावजूद इस तरह से बचत करने वाले लोगों को दोष देना ठीक नहीं है. उनके दिमाग में उनका पैसे का मूल्य एक जैसा बना रहता है, जबकि चीजें महंगी होती जाती हैं. इनमें से किसी के मुद्रास्फीति के कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) असर को समझने की उम्मीद नहीं की जा सकती.

खास बात यह है कि ऐसे कई लोग जो कैश जमा नहीं करते और वित्तीय इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं, वे भी वास्तव में कंपाउंडिंग के फायदे को नहीं समझते. हम लोगों में से ज्यादातर यह याद करते हैं कि कई साल पहले चीजें कितनी सस्ता हुआ करती थीं. कैसे हर महीने 10,000 रुपये की आमदनी वाला 4 लोगों का परिवार आराम से रहता था. लेकिन, भविष्य में इस असर को समझना मुश्किल काम है.

रिटायर होने वाले लोग ध्यान रखें 

  • साल 2050 में चार लोगों के एक परिवार को आराम में रहने के लिए शायद हर महीने 10 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी. यह सुनने में अटपटा नहीं लगता, क्योंकि हर साल लोगों की सैलरी में निश्चित दर से बढ़ोतरी होती है. इस सच्चाई के बावजूद कि आज मध्यम वर्ग के एक परिवार का मासिक खर्च 10,000 रुपये से बढ़कर एक लाख रुपये हो गया है, आज पहले से ज्यादा लोग खुशहाल हैं.
  • मेरा यह पक्का विश्वास है कि यह चीज जारी रहेगी और आज के मुकाबले 2050 में ज्यादा भारतीय खुशहाल होंगे. हालांकि, मैं रिटायर होने वाले लोगों के लिए बहुत आशावान नहीं हूं. अगर आज आप 45 साल के हैं तो 2050 में उम्र 75 साल हेने पर आप आज से ज्यादा नहीं कमा रहे होंगे.
  • एक तरह से आप कुछ भी नहीं कमा रहे होंगे, क्योंकि तब आप निवेश पर मिलने वारे रिटर्न से खर्च चला रहे होंगे. यह निवेश उस पैसे से होगा, जो आप आज कमाने के साथ बचा रहे हैं. सवाल यह है कि क्या यह काफी होगा? क्या आज की गई बचत 2050 में हमारे खर्च के लिए पर्याप्त होगी? आज हमें जरूर यह सवाल करना चाहिए और इसका जवाब देना चाहिए.

बचत बढ़ाना है जरूरी

आइए आंकड़ों पर गौर करते हैं. अगर आज आपको लगता है कि आपके लिए 2 करोड़ रुपये 20 साल बाद पर्याप्त होंगे तो वास्तव में आपके पास तब करीब 10 करोड़ रुपये होने चाहिए. अगर आप इस रकम के बारे में सोचें तो 8 फीसदी रिटर्न के साथ आपको हर महीने करीब 1.7 लाख रुपये बचत करने होंगे. अगर रिटर्न 10 फीसदी है तो आपको थोड़ा कम हर महीने 1.3 लाख रुपये बचाने होंगे. 

इसके बारे में ठीक से सोचें. जो लोग बैंक डिपॉजिट जैसै माध्यम में बचत करते हैं, जिस पर मुद्रास्फीति के मुकाबले थोड़ा ही ज्यादा रिटर्न मिलता है, उन्हें बुजुर्ग होने पर मुश्किलों से बचने के लिए ज्यादा बचत करने की जरूरत है. हम लोगों में से कई लोगों के पास मुद्रास्फीति से सुरक्षित आय (जैसे मकान के किराये से होने वाली आय) का कोई जरिया नहीं हैं. ऐसे में हमें इस गणित को जितना जल्द हो सके समझ लेना चाहिए. हो सकता है कि अभी यह आपको बहुत जरूरी नहीं लगे और आप इसे कल के लिए टाल दें. लेकिन आप इस हफ्ते के अंत में छुट्टी के दौरान जो भी करने के बारे में सोच रहे हैं, उससे यह ज्यादा जरूरी है. 

महंगाई से बचने के 10 उपाय

कंज्यूमर और इनवेस्टर्स अभी अच्छे दिन का इंतजार ही कर रहे थे कि महंगाई बेकाबू हो गई। मई में होलसेल इनफ्लेशन 6.01 पर्सेंट रही, जो पिछले महीने में 5.2 पर्सेंट थी। हालांकि फूड प्राइसेज कम रहने से मई में कंज्यूमर प्राइस इनफ्लेशन कंट्रोल में रही, लेकिन एनालिस्टों को डर है कि इसमें भी आगे चलकर बढ़ोतरी होगी। उनका कहना है कि सरकार ने हाल में रेलवे किराये में बढ़ोतरी की है, जिसका असर कंज्यूमर प्राइस इनफ्लेशन पर पड़ सकता है। जब भी माल भाड़े में बढ़ोतरी होती है, इसका सभी प्रॉडक्ट्स और कमोडिटी पर असर पड़ता है। जून में कम बारिश के चलते पहले ही सब्जियों के दाम बढ़ने लगे हैं। इराक संकट भी सामने है, जिससे इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ रहे हैं। शुगर इंपोर्ट पर पाबंदी से डोमेस्टिक मार्केट में इसकी कीमत भी बढ़ रही है। 

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है? पहली बात तो यह है कि खाने पर आपका खर्च आने वाले महीनों में बढ़ने वाला है। आप इनफ्लेशन को कंट्रोल नहीं कर सकते और ना ही मॉनसून पर आपको जोर चलेगा। ऐसे में आप स्मार्ट तरीके से पैसे खर्च करें तो इसके असर से बचा जा सकता है। यह खाने के सामान सोच-समझकर खरीदने और स्मार्ट इनवेस्टमेंट का भी टाइम है। हम यहां 10 ऐसे उपाय बता रहे हैं, जिनसे कंज्यूमर्स और इनवेस्टर्स को महंगाई के असर से बचने में मदद मिलेगी। 

1. एडवांस में शॉपिंग की प्लानिंग करें

पहले घर में देखिए कि कौन सा सामान है और किन चीजों की खरीदारी करनी है। इसके बाद उन सामानों की लिस्ट बनाइए, जो आपको खरीदने हैं। लिस्ट बनाने के बाद ही मार्केट जाना चाहिए। आवेग में आकर कुछ खरीदने का फैसला ठीक नहीं होता। कई बार बाजार में कॉम्बो डील ऑफर की जाती हैं। कभी-कभी आप अट्रैक्टिव डिस्प्ले के चक्कर में फालतू की चीज खरीद लेते हैं। मनोविज्ञान कहता है कि आपको खाली पेट कभी भी ग्रॉसरी खरीदने नहीं जाना चाहिए। अगर आप बगैर कुछ खाए ग्रॉसरी खरीदने जाते हैं, तब फूड प्रॉडक्ट्स आपको बहुत अपील कर सकते हैं। ऐसे में आप एक्सट्रा चिप्स या मफीन खरीद सकते हैं। इससे आपका बजट बिगड़ सकता है। इसलिए सुपरमार्केट जाने से पहले खाना खाइए। अगर आप कंप्लसिव शॉपर हैं, तो क्रेडिट कार्ड के बजाय कैश लेकर मार्केट जाइए। क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग में आसानी होती है, लेकिन इसमें खर्च की रकम को कंट्रोल करना संभव नहीं होता। रिसर्च से पता चलता है कि कैश पेमेंट करने पर पैसा हाथ से जाने का अहसास होता है। ऐसे में आप सोच-समझकर शॉपिंग करेंगे। 

2. ब्रांड के चक्कर में मत पड़िए

एफएमसीजी कंपनियां विज्ञापन पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करती हैं। वे इसका पैसा आपकी जेब से ही वसूलती हैं। विज्ञापन पर ज्यादा पैसा खर्च करने वाली कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स के दाम ज्यादा रखती हैं। अगर आप रिटेल चेन के होम ब्रांड्स या लोकल किराना दुकान से अनब्रांडेड प्रॉडक्ट्स खरीदें तो ये सस्ते पड़ेंगे। साबुन, टूथपेस्ट या कुछ फूड प्रॉडक्ट्स पर यह बात लागू नहीं होती, लेकिन अन-ब्रांडेड फ्लोर क्लीनर्स और डिटर्जेंट की खरीदारी की जा सकती है। पैकेज्ड मसालों पर भी ज्यादा पैसा खर्च करने से बचिए। हालांकि जब आप खुला सामान खरीद रहे हैं, तब आपको क्वॉलिटी पर ध्यान देना होगा।

3. सेल सीजन में खरीदारी करिए

सोच-समझकर शॉपिंग करने वालों को सेल से काफी फायदा हो सकता है। कई हाइपरमार्केट्स अलग-अलग सामान पर पूरे साल में अच्छा डिस्काउंट देते हैं। आप भले ही एक साथ ज्यादा फूड प्रॉडक्ट्स नहीं खरीद सकते, लेकिन सेल में मिल रहे ऐसे सामान एकमुश्त खरीदे जा सकते हैं, जो खराब न होते हों। पेपर टावल, साबुन, डिटर्जेंट और इस तरह के कई सामान को महीनों तक स्टोर किया जा सकता है। इसी तरह क्लोदिंग बिल में भी सेल सीजन के दौरान खरीदारी से 25-30 पर्सेंट की कमी की जा सकती है। हालांकि इसके नुकसान भी हैं। आपको पुराने डिजाइन के कपड़े अगले साल पहनने होंगे। एक शर्ट पर 20 पर्सेंट डिस्काउंट, बाय 2 गेट 1 फ्री ऑफर से ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि फ्री के चक्कर में अक्सर आप ज्यादा कपड़ों की खरीदारी कर बैठते हैं। बाय 2 गेट 1 फ्री वाले ऑफर में यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कम कीमत वाला सामान ही मुफ्त में ऑफर किया जाता है। 

4. मिनी को-ऑपरेटिव बनाइए और थोक में खरीदारी करिये

होलसेल मार्केट में सामान अक्सर सस्ते होते हैं। चीनी की होलसेल कीमत 32-33 रुपये किलो है, जो रिटेल मार्केट के मुकाबले 20 पर्सेंट कम है। हालांकि थोक में आपको ज्यादा मात्रा में खरीदारी करनी पड़ती है। होलसेल में आपको 50 किलो चीनी खरीदनी पड़ सकती है। इससे बचने के लिए मिनी को-ऑपरेटिव बनाइए। इसमें 3-4 दोस्त और पड़ोसी मिलकर खरीदारी करते हैं और सामान आपस में बांट लेते हैं। थोक में खरीदारी करने के लिए हर हफ्ते एक दोस्त मंडी जा सकता है। 

5. घर पर खाना बर्बाद मत करिए

होलसेल में फूड आइटम्स सस्ते पड़ते हैं। हालांकि सभी सब्जियां थोक में नहीं खरीदी जा सकतीं। कुछ के बर्बाद होने का डर होता है। अगर ऐसी सब्जी ज्यादा खरीद ली जाए तो पैसा बेकार हो सकता है। आलू और प्याज की थोक खरीदारी की जा सकती है। आप इन्हें कई दिनों या हफ्तों तक स्टोर कर सकते हैं। हरी सब्जियों को 4-5 दिनों से ज्यादा समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता। पालक और मेथी जैसी पत्तेदार सब्जियां तो एक या दो दिन में ही बेकार हो जाती हैं। इनकी खरीदारी कम मात्रा में और जरूरत पड़ने पर ही करनी चाहिए। थोक बाजार के मुकाबले इसके लिए भले ही ज्यादा कीमत चुकानी पड़े, लेकिन सब्जियां बेकार नहीं होंगी। 
एक अनुमान के मुताबिक, भारत के शहरों में रहने वाला औसत परिवार हर साल 15-20 पर्सेंट फूड बर्बाद कर देता है। अगर यह मान लिया जाए कि शहर का मिडल क्लास परिवार महीने में 15,000 रुपये फूड पर खर्च करता है तो इसका मतलब यह है कि वह 2,250-3,000 रुपये के सामान बर्बाद कर रहा है। खाने की बर्बादी पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, लेकिन आप इसे कम कर सकते हैं। 

6. कार पूल बनाइए

क्या फ्यूल की महंगाई आपको परेशान कर रही है? कार पूल बनाने की कोशिश करिए। जो लोग एक ही रूट पर यात्रा करते हैं, वे एक ही कार शेयर करके फ्यूल पर काफी पैसा बचा सकते हैं। अगर आप पेट्रोल या डीजल पर हर महीने अभी 4,000 रुपये खर्च कर रहे हैं तो 2-3 दूसरे लोगों के साथ कार शेयर करने पर यह कॉस्ट 1,800-2,000 रुपये हो सकती है। इसका एक फायदा यह है कि कार में जाते वक्त आप ईमेल चेक कर सकते हैं, अगर आप ड्राइव नहीं कर रहे हों तो। आप इस दौरान न्यूजपेपर भी पढ़ सकते हैं। कुछ कंपनियां अपने एंप्लॉयीज को कार पूल के लिए बढ़ावा देती हैं। इसके लिए फोरम बनाने को कहा जाता है। कुछ ऐसी वेबसाइट्स भी हैं, जो आपके एरिया में रहने वाले लोगों का पता लगाती हैं, जिन्हें कार पूल में शामिल किया जा सकता है। कार पूलिंग से आपको पार्किंग चार्जेज और टोल फी बचाने में भी मदद मिलती है। 

7. लंच लेकर ऑफिस जाइए

सुनने में यह बहुत सिंपल लगता है, लेकिन इससे आपको काफी पैसे बचाने में मदद मिल सकती है। जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उसमें औसत लंच की लागत 80-150 रुपये प्रति व्यक्ति तक हो सकती है। अगर आप फास्ट फूड खाएंगे तो लागत कुछ कम आएगी। घर से लंच ले जाने पर आप काफी पैसे बचा सकते हैं। हमने अनुमान लगाया है कि इस तरह से हर महीने कम से कम 2,800-3,000 रुपये बचाए जा सकते हैं। अगर आप इस पैसे को किसी इक्विटी फंड में हर महीने लगाते हैं तो कल्पना करिए कि कितना फायदा हो सकता है। इससे आपका समय भी बचता है। आपको खाने के लिए ऑफिस से बाहर नहीं निकलना पड़ता। दूसरा फायदा यह है कि घर का खाना हेल्दी होता है। 

8. सेविंग एकाउंट में पैसा बेकार पड़े न रहने दें

अगर आपको पैसा बैंक में पड़ा है, तब भी यह सेफ नहीं है। इनफ्लेशन की वजह से इसकी वैल्यू लगातार कम होती रहती है, जिससे इसकी परचेजिंग पावर कम होती है। अगर आपने पैसा लॉकर में रखा है तो नुकसान ज्यादा होगा, लेकिन सेविंग्स एकाउंट में भी पैसा रखना फायदे का सौदा नहीं है। यहां हम बता रहे हैं कि 10 पर्सेंट इनफ्लेशन का आपकी बचत पर क्या असर हो सकता है। 
अगर सेविंग एकाउंट में आपने 50,000 रुपये रखे हैं, तो साल भर बाद यह 52,000 रुपये हो जाएगा। हालांकि 10 पर्सेंट इनफ्लेशन का मतलब यह है कि साल भर बाद इस पैसे से आप 47,270 रुपये का ही सामान खरीद पाएंगे। इसलिए पैसे को सेविंग एकाउंट में नहीं रखना चाहिए, भले ही कुछ बैंक आपको इस पर 6-7 पर्सेंट रिटर्न का वादा कर रहे हों। परचेजिंग पावर बनाए रखने के लिए पैसे की वैल्यू महंगाई से ज्यादा बढ़नी चाहिए। स्वीप-इन एकाउंट की सुविधा लीजिए। आप ज्यादा रिटर्न के लिए पैसा शॉर्ट टर्म डेट फंड में भी रख सकते हैं। 

9. अगर आपको रिस्क पसंद नहीं है, तब भी शेयर बाजार की पूरी तरह अनदेखी मत करिए

अक्सर कहा जाता है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए डावर्सिफाइड पोर्टफोलियो होना चाहिए। इससे आपको इनफ्लेशन के असर से भी बचने में मदद मिलती है। अगर आप परचेजिंग पावर बनाए रखना चाहते हैं तो शेयर बाजार में इनवेस्ट करने से मत झिझकिए। जिन लोगों को रिस्क उठाना बिल्कुल पसंद नहीं है, उन्हें भी 10-15 पर्सेंट पैसा शेयर बाजार में लगाना चाहिए। अगर आपने पूरा पैसा डेट प्रॉडक्ट्स में लगाया है, तो इस पर हमेशा इनफ्लेशन से कम रिटर्न मिलेगा। यही वजह है कि मंथली इनकम प्लान भी 10-20 पर्सेंट रकम स्टॉक्स में लगाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड अब पहले की तरह सुरक्षित नहीं रह गया है। 

10. टैक्स बेनेफिट लें

दिलचस्प बात यह है कि इनवेस्टर्स को ज्यादा महंगाई वाले दौर में फायदा होता है। उसकी वजह यह है कि इससे उनकी कैपिटल गेंस टैक्स लायबिलिटी में कमी आती है। टैक्स रूल इनवेस्टर्स को होल्डिंग पीरियड के दौरान एसेट की कॉस्ट में इनफ्लेशन घटाने की इजाजत देते हैं। इससे असल टैक्स देनदानी कम होती है। 2013-14 के लिए कॉस्ट इनफ्लेशन नंबर 939 है। इसका मतलब यह है कि इस साल यह 10 पर्सेंट अधिक यानी 1,032 हो सकता है। अगर आपको इनवेस्टमेंट से पिछले पांच साल में 10 पर्सेंट सालाना का रिटर्न मिला है और आपने इंडेक्सेशन को चुना है तो आपको एक भी पैसा टैक्स नहीं देना पड़ेगा। अगर इनवेस्टमेंट से रिटर्न इनफ्लेशन की तुलना में कम है तो आप नोशनल लॉस भी बुक कर सकते हैं, जिसे आगे के साल में टैक्स लायबिलिटी से घटाया जा सकता है। यह सुविधा 8 फाइनेंशियल ईयर के लिए है। हालांकि इंडेक्सेशन का फायदा डेट फंड्स, एफएमपी, गोल्ड फंड्स और डेट ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड्स पर भी मिलता है।

पोस्ट ऑफिस की स्कीम में लगाएं पैसा

आज के दौर में जब लोगों की जरूरतें बढ़ रही हैं तो बहुत से लोग छोटी बचत योजनाओं की जगह ऐसी जगह पैसा लगाना चाहते हैं, जहां कम समय में ज्यादा रिटर्न मिल जाए। लेकिन फाइनेंशियल मार्केट में ऐसे निवेश जरूरी नहीं हैं कि सुरक्षित हों। इस कंडीशन में खासतौर से नौकरीपेशा वालों को अपना निवेश सोच समझकर ऐसी जगह करना चाहिए जो सुरक्षित होने के साथ ज्यादा फायदा भी दे। नौकरीपेशा वालों में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनकी मंथली बचत बहुत कम हो पाती है। ऐसे में उनके लिए यह छोटी बचत योजना बड़ा कमाल करने वाली साबित हो सकती है।

हम आपको एक ऐसी ही छोटी बचत योजना के बारे में बता रहे हैं जो आप अपने पैसों पर ज्यादा फायदा पाएंगे। यह योजना पोस्ट ऑफिस की है तो यहां हर एक पैसे पर सुरक्षा की गारंटी सरकार की है। ये स्कीम कम सैलरी वालों के साथ ज्यादा इनकम वालों सभी के लिए बेहतर साबित हो सकती है। खास बात है कि इस स्कीम में आप सिर्फ 10 रुपए से भी निवेश शुरू कर सकते हैं।

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