नौकरी के पीछे भागना छोड़ें


नौकरी के पीछे भागना छोड़ें

योजना का मकसद ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवक व युवतियों का शहरों की पलायन रोकना है। ऐसे युवाओं को गांव में ही रोजगारपरक बनाने के लिए उ.प्र. शासन द्वारा जिला सेक्टर के अंतर्गत पूंजी निवेश पर ग्रामोद्योग की इकाइयां ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित कराना है। 

नौकरी के पीछे भागना छोड़ें

यदि आप मिडिल पास भी है तो बेरोजगारी के दंश से उबर सकते हैं। शासन स्तर से कक्षा आठ से इंटरमीडिएट तक उत्तीर्ण बेरोजगार ग्रामीणों के लिए संचालित मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना से एक लाख से 10 लाख रुपये का ऋण लेकर कुटीर उद्योग लगाया जा सकता है। ऋण का ब्याज सिर्फ सामान्य वर्ग के पुरुष अभ्यर्थी के चार प्रतिशत देना होगा। अन्य वर्गों के लिए बिना ब्याज के लोन मिलेगा। रोजगारपरक बनने के लिए सामान्य वर्ग को प्रोजेक्ट लागत का 10 फीसदी व आरक्षित वर्ग को पांच फीसदी का अंशदान करना होगा।

वित्तीय वर्ष 2005-06 से वजूद में आई मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का मकसद ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवक व युवतियों का शहरों की पलायन रोकना है। ऐसे युवाओं को गांव में ही रोजगारपरक बनाने के लिए उ.प्र. शासन द्वारा जिला सेक्टर के अंतर्गत पूंजी निवेश पर ग्रामोद्योग की इकाइयां ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित कराना है। इस योजना के तहत एक लाख से 10 लाख रुपए तक का ऋण मुहैया कराया जाता है। 

आवेदक को योजना का लाभ उठाने के लिए कक्षा आठ, हाई स्कूल अथवा इंटरमीडिएट पास होना अनिवार्य है। आवेदनकर्ता को राशन कार्ड या पहचान की फोटो कापी लगानी अनिवार्य है। 10 रुपए के नोटरी हलफनामा में मिलने वाली इस सुविधा के लिए कुटीर उद्योग लगाने के इच्छुक अभ्यर्थी को निजी जमीन का कोई कागजी ब्यौरा नहीं देना होता है। बशर्ते अगर उद्योग के लिए किराए की जमीन का इस्तेमाल किया जाना है तो ऐसी दशा में किरायानामा लगाना जरूरी है। प्रमाणिकता के लिए आवेदक को चार फोटो प्रधान/सभासद से प्रमाणित करानी अनिवार्य हैं। इसके बाद यह प्रोजेक्ट रिपोर्ट चार्टड एकाउटेंट के पास भेजी जानी होती है।

भारत में लोग सरकारी नौकरी के पीछे क्यों भागते हैं?

नौजवान सरकारी नौकरियों के लिए नेताओं के पीछे न भागें. बल्कि अपना खुद का काम शुरू करें. 'नौजवान सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों तक पार्टियों के पीछे भागते रहते हैं और अपने जीवन का कीमती वक्त खराब करते हैं. अगर यही युवा पार्टियों के पीछे भागने के बजाय अपनी पान की दुकान शुरू करता तो उसके खाते में 5 लाख रुपये होते.' 'यह धारणा है कि ग्रेजुएट खेती-किसानी नहीं कर सकते, मुर्गी पालन नहीं कर सकते या सुअर पालन नहीं करते, क्योंकि इससे उनका रुतबा गिर जाएगा.' लेकिन पढ़े-लिखे लोगों का परंपरागत काम न करने वाली मानसिकता के चलते संकट पैदा होता है.

मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद किसी को सिविल सर्विसेज में नहीं जाना चाहिए. उनके मुताबिक, मैकेनिकल के बजाय सिविल इंजिनियर्स को सिविल सर्विसेज ज्वाइन करनी चाहिए, क्योंकि उनके पास प्रबंधन निर्माण और समाज से जुड़ी ज्यादा जानकारी और अनुभव होता है। जितना भी समझा और जाना है, उससे यह सब बातें निकल कर आती हैं -

  • सरकारी नौकरी सबसे ज्यादा सुरक्षित और आजीवन रहने वाली नौकरी है।
  • आपको हर महीने पैसे आपके खाते में बिना किसी झंझट के मिलते हैं, इसका कोई भी अपवाद नहीं है।
  • सुस्त शारीरिक व्यवस्था : यह थोड़ी आराम की नौकरी मानी गई है जिसमें लोगों को लगता है के ज्यादा काम ना कर के भी पैसा अच्छा मिलता है, शायद इसीलिए भी लोग भागे चले जाते हैं।
  •  इसमें दूसरी जाती (जनरल के अलावा) वाले लोग ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं क्यों के उनको जल्दी प्रोमोशन मिलते हैं और आरक्षण के बारे में तो आप जानते ही हैं।
  • अगर entry level नौकरियों की बात की जाए, तो एक साधारण नौकरी पाने वाले को सरकारी नौकरी में ज्यादा पैसा मिलता है और प्राइवेट में कम।
  • हमारे समाज में सरकारी नौकरियों की आज भी बहुत सराहना होती है, इसीलिए लोग अपनी “सराहना” करवाने और यह दिखाने के वो कुछ पा चुके हैं, इसलिए भी सरकारी नौकरी में जाते है।
आराम की नौकरी का उद्देश्य
  1. शारीरिक निष्क्रियता भारत में काफी ज्यादा है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि देश में करीब 54.4 फीसदी लोग शारीरिक गतिविधियों को लेकर सक्रिय नहीं हैं. 
  2. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक शारीरिक निष्क्रियता, दुनिया भर में होने वाली मौतों का चौथा बड़ा कारण हैं. लगभग 6 फीसदी मौतें इसके चलते होती हैं.
  3. भारत में हर पांच में से एक वयस्क और हर पांच में से चार किशोर, जरूरी शारीरिक गतिविधियों में शामिल नहीं होते. 
  4. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े बताते हैं कि यह सुस्त शारीरिक व्यवस्था पर 54 अरब डॉलर का बोझ डालती है.

नौकरी पाने के नहीं बल्कि देने के काबिल बने नौजवान

ढ़े लिखे नौजवानों को सरकारी नौकरी पाने की मनोदशा से बाहर आना होगा। उन्हें ऐसे अवसर तलाशने चाहिये कि वे नौकरी पाने की बजाय दूसरों को रोजगार मुहैया करा सकें। केंद्र सरकार नौजवानों को स्वावलंबी बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। स्टार्टअप, स्टैंडअप योजना का लाभ देश भर के नौजवान ले रहे हैं। मुहम्मदाबाद के चार छात्र नौकरी ढूंढऩे के बजाय स्टार्टअप योजना के तहत आज हरी मिर्च और हरी मटर का निर्यात खाड़ी देशों को कर रहे हैं। नौजवानों के कौशल विकास के लिए वह खुद प्रयासरत हैं। यूबीआई के अलावा दूरसंचार विभाग भी कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के काम में जुटा है। ग्राम स्वराज योजना के तहत गांवों को चयनित कर उन्हें भी केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से संतृप्त कराया जाए।

लघु, कुटीर व घरेलू उद्योग परियोजनाएं 

उद्यमिता मार्गदर्शिका

उद्यम ही सफलता की कुंजी है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति एवं विकास में लघु एवं कुटीर उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे अविकसित क्षेत्रों में जहां औद्योगीकरण अब तक नहीं हो पाया है, लघु, कुटीर एवं घरेलू उद्योग स्थापित करके पूंजी तथा विकास में वृद्धि की जा सकती है। विकासशील देशों के लिए लघु व कुटीर उद्योग बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ है क्योंकि इनकी स्थापना कम पूंजी द्वारा की जा सकती है तथा इनके लिए उच्च प्रौद्योगिक शिल्प की आवश्यकता भी नहीं होती। हमारे देश के कुल निर्यात का एक बड़ा भाग लघु उद्योगों से ही प्राप्त होता है। ऐसे में लघु उद्योग की स्थापना करना लाभकारी सिद्ध होगा । लघु उद्योग (Small Scale Industry), स्वरोजगार (Self Employment) व प्रबन्ध क्षेत्रों में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं। लघु, कुटीर व घरेलू उद्योग परियोजनाएं नए उद्यमी व संभावित उद्यमियों को उद्योग - व्यवसाय की स्थापना व संवर्द्धन की दिशा में प्रेरित करती हैं जिससे वे देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान बढ़ा सकें।

एक नजर 

सामान्य वर्ग के पुरुष अभ्यर्थी को छोड़कर योजना ब्याज रहित है। इसके अलावा सामान्य वर्ग की महिला, पिछड़े वर्ग के पुरुष व महिला अभ्यर्थी, अनुसूचित जाति व जनजाति के पुरुष व महिला अभ्यर्थी के अलावा अल्पसंख्यक, विकलांग एवं भूतपूर्व सैनिक को ऋण का कोई ब्याज नहीं देय होता है। 
कौन-कौन से उद्योग लगाए जा सकते हैं 

  1. खनिज उद्योग(चूना पत्थर, प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण, बर्तन धोने का पाउडर, कृत्रिम आभूषण, वार्निश, पेंट, डिस्टेंपर आदि)
  2. वनाधारित उद्योग (कत्था, गोंद, रेजिन का निर्माण, दियासलाई, पटाखा उद्योग, बांस बेंत बनाना, झाड़ू, फोटो फ्रेमिंग और जूट निर्माण आदि)।
  3. कृषि एवं खाद्य उद्योग (दाल मसाला पैकिंग विपणन, गुण उत्पादन, मधुमक्खी पालन, फल सब्जी प्रसोधन, घानी उद्योग, रेशा, मकई, दोना, नूडल बनाना, आटा चक्की आदि)।
  4. बहुलक और रसायनिक उद्योग (कुटीर साबुन उद्योग, रबर वस्तुओं का निर्माण, हाथी दांत समेत, सींग और हड्डी उत्पाद, मोमबत्ती, कपूर, मोहर वाली मोम का निर्माण, शैंपू, केशतेल, मेंहदी निर्माण)।
  5. इंजीनियरिंग और गैर परपंरागत उद्योग (बढ़ईगीरी, लोहारी, कागज पिन, क्लिक, सेफ्टी पिन, स्टोव पिन बनाना, सजावटी बल्ब, बोतल, ग्लास, छाता बनाना)।
  6. वस्त्रोद्योग (पाली वस्त्र, सिलाई और रेडीमेड पोशाक, खिलौने, गुड़िया निर्माण, चोट वाली पट्टी का निर्माण, धागे का गोला, ऊनी गोला आदि)।
  7. सेवा उद्योग (धुलाई, नाई, बिजली वायरिंग, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स की मरम्मत, डीजल, पंप, इंजन सेटा की मरम्मत, आयोडीन नमक आदि)।

स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया

स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया, भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिये सरकार द्वारा चलाया गया नया अभियान है। ये अभियान देश के युवाओं के लिये नये अवसर प्रदान करने के लिये बनाया गया है। ये पहल युवा उद्यमियों को उद्यमशीलता में शामिल करके बहुत बेहतर भविष्य के लिये प्रोत्साहित करेगी। ये पहल भारत का सही दिशा में नेतृत्व के लिये आवश्यक है। स्टार्ट अप इंडिया स्टैंड अप इंडिया योजना का मुख्य उद्देश्य उद्यमशीलता को बढ़ावा देना हैं जिससे देश में रोजगार के अवसर बढ़े | यह एक ऐसी योजना हैं जिसके तहत नये छोटे-बड़े उद्योगों को शुरू करने के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जायेगा जिसमे ऋण सुविधा, उचित मार्गदर्शन एवं अनुकूल वातावरण आदि को शामिल किया गया हैं।

इस का उद्देश्य प्रशासन द्वारा बनाई गयी उद्योग प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी उद्यमियों तक पहुंचाना है ताकि वे उपलब्ध अवसरों / सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ प्राप्त कर सकें। इस का प्रमुख उद्देश्य देश में उद्यमिता विकास से संबंधित जानकारियों द्वारा नए उद्यमियों को उद्योग / व्यवसाय स्थापित करने के लिए जानकारी प्रदान करना है तथा कार्यरत लघु उद्यमियों की कार्यकुशलताओं में वृद्धि करना और उद्यमिता एवं स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना है। इस में कम पूंजी से शुरू होने वाले लाभदायक उद्योग का सम्पूर्ण विवरण है। इस अभियान में लघु क्षेत्र में संचालित होने वाले ऐसे प्रमुख उद्योग के विषय में हर वह जानकारी दी गयी है, जिसकी सहायता से कोई भी व्यक्ति सफलता के पथ पर अग्रसर हो सकता है। 

इस अभियान में प्रोजेक्ट प्रोफाइल्स का विवरण है और इन प्रोजेक्ट प्रोफाइल्स के माध्यम से विभिन्न उत्पादों की निर्माण विधि, बाज़ार सर्वेक्षण / संभावनाएं, कर्मचारियों की संख्या, कुल भूमि क्षेत्र, उद्योग को शुरू करने में लगने वाली पूंजी तथा उद्योग से प्राप्त कुल लाभ आदि की जानकारी दी गयी है। साथ ही कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं (Raw Material Suppliers), संयंत्र और मशीनरी के आपूर्तिकर्ताओं (Plant & Machinery Suppliers) के पते तथा चित्र (Photographs) दिए गए है जिससे उद्यमी ज्यादातार लाभ उठा सकें। 

प्रस्तुत योजना में उपलब्ध प्रोजेक्ट प्रोफाइल्स इस प्रकार है :- आटा उत्पादन उद्योग, बेकरी उद्योग, हर्बल शैम्पू उद्योग, सेवई उद्योग, नूडल निर्माण उद्योग, सैनिटरी नैपकिन उद्योग, बिस्कुट उद्योग, कॉर्न (Corn) फ्लैक्स उद्योग, आलू चिप्स उद्योग, मैकरोनी उद्योग, पॉपकॉर्न उद्योग, केक एवं पेस्ट्री उद्योग, आइसक्रीम कोन उद्योग, फिनाइल उद्योग, वर्मीकल्चर उद्योग, लिपस्टिक उद्योग, अगरबत्ती उद्योग, हवाई चप्पल उद्योग, फेस पाउडर उद्योग, मॉस्किटो कॉयल उद्योग, सर्जिकल कॉटन उद्योग, वुडन टूथपिक उद्योग, डिटर्जेंट पाउडर, मसाला उद्योग आदि। 
नये उद्यमियों, व्यवसायिओं, तकनीकी परामर्शदाताओं आदि के लिए यह पुस्तक अमूल्य मार्गदर्शक सिद्ध होगी।

खादी तथा ग्रामोद्योगी योजना

"खादी" का अर्थ है कपास, रेशम या ऊन के हाथ कते सूत अथवा इनमें से दो या सभी प्रकार के सूतों के मिश्रण से भारत में हथकरघे पर बुना गया कोई भी वस्त्र।
"ग्रामोद्योग" का अर्थ है, ऐसा कोई भी उद्योग जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हो तथा जो विद्युत के उपयोग या बिना उपयोग के कोई माल तैयार करता हो या कोई सेवा प्रदान करता हो तथा जिसमें स्थायी पूँजी निवेश (संयंत्र तथा मशीनरी एवं भूमि भवन में) प्रति कारीगर या कर्मी 50 हजार रूपये से अधिक न हो। इस हेतु परिभाषित "ग्रामीण क्षेत्र में" समस्त राजस्व ग्राम तथा 20 हजार तक की आवादी वाले कस्बे सम्मिलित है।
निगरानी : निगरानी राज्य/अंचल/राष्ट्रीय स्तर पर की जाएगी।

ग्राम उद्योग समूह

खादी और ग्रामोद्योग आयोग के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले निम्नलिखित ग्रामोद्योग/परियोजना को सात प्रमुख समूहों में बांटा गया है।

खनिज आधारित उद्योग समूह

(1) कुटीर कुम्हारी उद्योग (2) चेकर्स टाइल्स/सीमेन्ट जॉली/इन्टरलॉकिंग ब्रिक्स उद्योग (3) मन्दिरों और भवनों के लिए पत्थर कटाई,पिसाई, नक्कासी तथा खुदाई (4) पत्थर से बनी हुई उपयोगी वस्तुएं (5) स्लेट और स्लेट पेंसिल का निर्माण (6) चाँदी, पत्थर सीपी और कृत्रिम सामग्रियों से आभूषण का निर्माण (7) गुलाल रंगोली का निर्माण (8) चूड़ी निर्माण (9) पेंट, रंजक, वार्निश और डिस्टेंपर का निर्णाण (10) शंख के खिलौनों का निर्माण (11) सजावटी शीशों की कटाई, डिजाइनिंग, पॉलिशिंग (12) रत्न कटाई।

वनाधारित उद्योग समूह

(13) हाथ कागज (14) कत्था निर्माण (15) गोंद और रेजिन निर्माण (16) लाख निर्माण (17) कुटीर दियासलाई उद्योग, पटाखे और अगरबत्ती निर्माण, (18) बांस और बेंत कार्य (19) कागज के प्लेट-तश्तरी, झोले और कागज के डिब्बे का निर्माण (20) कॉपियों की जिल्दसाजी, लिफाफा, निर्माण और कागज से बनाई जाने वाले अन्य लेखन सामग्रियाँ (21) खस टट्टी और झाडू निर्माण (22) वनोत्पादों का संग्रह प्रशोधन और पैकिंग (23) फोटो जड़ना (24) जूट उत्पादों का निर्माण (रेशा उद्योग के अन्तर्गत)

कृषि आधारित और खाद्य उद्योग समूह

(25) अनाज, दाल, मसाला, चटपटे मसाले आदि का प्रशोधन, पैकिंग और विपणन (26) नूडल निर्माण (27) विद्युत आटा चक्की (28) दलिया निर्माण (29) चावल का छिलका उतारने की छोटी इकाई, मिनी राइस मिल, दाल मिल (30) ताड गुड़ निर्माण और अन्य ताड़ उत्पाद उद्योग (31) गन्ना गुड़ और खांडसारी निर्माण (32) भारतीय मिष्ठान निर्माण (33) रसवन्ती गन्ना रस-इकाई (34) मधुमक्खी पालन (35) अचार सहित फल और सब्जी का प्रशोधन, परिरक्षण एवं डिब्बा बंदी (36) धानी तेल उद्योग (37) नारियल जटा का रेशा (38) मेन्थॉल तेल (39) औषधीय कार्यों के लिए जड़ी बूटियों का संग्रह (40) मक्का और रागी का प्रशोधन (41) सज्जा कार्य, सज्जा चटाइयों और हार आदि का निर्माण (42) काजू प्रशोधन (43) पत्ते का दोना बनाना (44) दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाई (45) पशु चारा, मुर्गी चारा निर्माण।

बहुलक और रसायन आधारित उद्योग समूह

(46) पशु श्वाच्छेदन, चर्म शोधन तथा खाल व त्वचा से सम्बन्धित अन्य सहायक उद्योग एवं कुटीर चर्म उद्योग (47) कुटीर साबुन उद्योग (48) रबर वस्तुओं का निर्माण (डिप्ड लेटेक्स उत्पाद) (49) रेग्जीन पी०वी०सी० से बने उत्पाद (50) हाथी दाँत समेज सींग और हड्डी उत्पाद (51) मोमबत्ती, कपूर और मोहर वाली मोम का निमार्ण (52) प्लास्टिक की पैकेजिग वस्तुओं का निर्माण (53) मेंहदी निर्माण (54) इत्र निर्माण (55) शैम्पू निर्माण (56) केश तेल निर्माण (57) डिटरजेंट और धुलाई पाउडर निर्माण (अविषाक्त)

इन्जीनियरिंग और गैर परम्परागत ऊर्जा समूह

(58) बढ़ई गिरी (59) लोहारी (60) अल्युमिनियम के घरेलू बर्तनों का उत्पादन (61) गोबर और अन्य अपशिष्ट उत्पाद जैसे मृत पशु के मांस और मल से खाद और मेथेन (गोबर) गैस का उत्पादन और उपयोग (62) कागज पिन क्लिपन सेफ्टी पिन (63) स्टोव पिन आदि का निर्माण (64) केचुआ पालन तथा कचरा निपटारा (65) सजावटी बल्बों बोतलों ग्लासों आदि का निर्माण (66) छाता उत्पादन (67) सौर तथा पवन ऊर्जा उपकरण (68) हस्त निर्मित कांसे के बर्तनों का निर्माण (69) हस्त निर्मित तांबे के बर्तनों का निर्माण (70) पीतल, तांबे और कांसे से अन्य वस्तुओं का निर्माण (71) रेडियो निर्माण, कैसेट रिकार्डर का निर्माण (72) लकड़ी पर नक्कासी और कलात्मक फर्नीचर निर्माण (73) इलेक्ट्रानिक घड़ियों और अलार्म घड़ियों का निर्माण (74) लकड़ी पर नक्कासी और कलात्मक फर्नीचर निर्माण (75) टीन कार्य (76) मोटर बाइंडिंग (77) तार की जाली बनाना (78) लोहे का झंझरी (प्रिल) निर्माण (79) ग्रामीण यातायात वाहनों जैसे हाथ गाड़ी बैलगाड़ी, छोटी नाव, दुपहिया साइकिल/साइकिल रिक्शा, मोटर युक्त गाड़ियों का निर्माण (80) संगीत साजों का निर्माण।

वस्त्रोद्योग समूह

(81) होजरी (82) सिलार्इ और सिली–सिलाई पोशाक तैयार करना (83) छींटकारी (84) खिलौने और गुड़िया निर्माण (85) धागे का गोला,ऊनी गोला तथरा लच्छी निर्माण (86) कशीदाकारी (87) शल्प चिकित्सीय पट्टी निर्माण(88) स्टोब की बत्तियाँ।

सेवा उद्योग समूह

(89) धुलार्इ (90) नार्इ (91) नलसाजी (92) बिजली की वायरिंग और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत (93) डीजल इंजनों, पंप सेटों आदि की मरम्मत (94) टायर वल्कनीकरण (रिट्रीडिंग) इकाई (95) छिलकाव (97) पंप सेटों आदि के लिये कृषि सेवा कार्य (98) लाउस्पीकर (99) ध्वनि प्रसारक, माइक आदि प्रमणालियों को किराये पर देना (100) राजगीर (101) बैंड मंडली (102) शाकाहारी ढाबा शराब रहित (104) चाय की दुकान (105) आटो मोबाइल वर्कशाप आदि।

About allinoneindia.net


Welcome to All In One India | allinoneindia.net is a junction , where you opt for different service and information.

Follow Us


© 2016 to 2018 www.allinoneindia.net , All rights reserved.