धरती पर स्वर्ग “कश्मीर”


धरती पर स्वर्ग “कश्मीर”

कश्मीर घाटी के मध्य में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। श्रीनगर अपने मन्दिरों और मस्जिदों के लिए प्रसिद्ध है।  वुलर मीठे पानी की भारतवर्ष में विशालतम झील है, संपूर्ण कश्मीर दर्शनीय है।
कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है | सचमुच यदि धरती पर स्वर्ग का आनन्द लेना हो तो जाइए , कश्मीर घूम आइये | झीलों ,बागो ,हरे भरे वनों , झरनों-प्रपातो ,रंग बिरंगे फूल पौधों ने हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों के बीच बसे कश्मीर को अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य से सुशोभित कर दिया है | यहा आने पर स्वर्ग की कल्पना साकार हो उठती है | 

कश्मीर का इतिहास

हिन्दू साम्राज्य के अंतिम सम्राट ललितादित्य मुख्यायिद ने सन 1339 तक कश्मीर पर शाशन किया | इसके बाद 1420 से 1470 तक इस पर सम्राट गैस-उल-उदीन का शाषन रहा | वह संस्कृति का अच्छा जानकर था | कश्मीर के मुख्य नगर श्रीनगर के सौन्दर्य से अभिभूत होकर सम्राट अकबर ने यंहा कई खुबसुरत मुगल उद्यान लगवाये और मस्जिदे बनवाई | कश्मीर पर मुगलों का शाषन अधिक दिनों तक नही रह पाया था | सिख नरेश महाराजा रणजीत सिंह ने मुगलों को सन 1839 में यहा से उखाड़ फेंका | 1846 से डोगरा शाशको ने अमृतसर संधि के तहत 75 लाख रूपये में महाराजा रणजीत सिंह से इसे खरीद लिया था | भारत का विभाजन होने पर सन 1947 में जम्मू कश्मीर एक राज्य के रूप में भारत का अभिन्न अंग बन गया |  संस्कृत के प्रसिद्ध कवि कल्हण के अनुसार भारत में आर्यों के आगमन के पहले , ईसा से लगभग 3000 वर्ष पूर्व ,कश्मीर में राजाओ का शाषन था |

जम्मू का इतिहास 

तवी नदी के तट पतर स्थित जम्मू , कश्मीर घाटी का मुख्य द्वार और जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी है | नौवी शताब्दी में राजा जेकुलोचन ने इसका निर्माण करवाया था ,इसलिए उन्के नाम पर इसे जम्मू कहा जाने लगा | अनेक झीलों  ,मन्दिरों , पर्वतमालाओ ,एतेहासिक इमारतो और प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह एक आकर्षक पर्यटन स्थल बन गया है | यहा अनेकानेक विख्यात मन्दिर है , इसलिए इसे “मन्दिरों का नगर ” भी कहा जाता है | यहा जाने का सबसे अच्छा मौसम सितम्बर और मार्च के बीच है |

प्राकृतिक दृष्टि से कश्मीर को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है :
  1. जम्मू क्षेत्र की बाह्य पहाड़ियाँ तथा मध्यवर्ती पर्वतश्रेणियाँ,
  2. कश्मीर घाटी,
  3. सुदूर बृहत्‌ मध्य पर्वतश्रेणियाँ जिनमें लद्दाख, बल्तिस्तान एवं गिलगित के क्षेत्र सम्मिलित हैं।

कश्मीर धरती पर स्वर्ग

कश्मीर का अधिकांश भाग चिनाव, झेलम तथा सिंधु नदी की घाटियों में स्थित है। केवल मुज़ताघ तथा कराकोरम पर्वतों के उत्तर तथा उत्तर-पूर्व के निर्जन तथा अधिकांश अज्ञात क्षेत्रों का जल मध्यएशिया की ओर प्रवाहित होता है। लगभग तीन चौथाई क्षेत्र केवल सिंधु नदी की घाटी में स्थित है। जम्मू के पश्चिम का कुछ भाग रावी नदी की घाटी में पड़ता है। पंजाब के समतल मैदान का थोड़ा सा उत्तरी भाग जम्मू प्रांत में चला आया है। झेलम की घाटी में कश्मीर घाटी, निकटवर्ती पहाड़ियाँ एवं उनके मध्य स्थित सँकरी घाटियाँ तथा बारामूला-किशनगंगा की संकुचित घाटी का निकटवर्ती भाग सम्मिलित है। सिंधु नदी की घाटी में ज़ास्कर तथा रुपशू सहित लद्दाख क्षेत्र, बल्तिस्तान, अस्तोद एवं गिलगित क्षेत्र पड़ते हैं। कश्मीर घाटी में जल की बहुलता है। वुलर मीठे पानी की भारतवर्ष में विशालतम झील है। कश्मीर में सर्वाधिक मछलियाँ इसी झील से प्राप्त होती हैं। स्वच्छ जल से परिपूर्ण डल झील तैराकी तथा नौकाविहार के लिए अत्यंत रमणीक है। तैरते हुए छोटे-छोटे खत सब्जियाँ उगाने के व्यवसाय में बड़ा महत्व रखते हैं। कश्मीर अपनी सुंदरता के कारण नंदनवन कहलाता है। अखरोट, बादाम, नाशपाती, सेब, केसर, तथा मधु आदि का प्रचुर मात्रा में निर्यात होता है। कश्मीर केसर की कृषि के लिए प्रसिद्ध है।

जम्मू और कश्मीर के पर्यटन स्थल

  • श्रीनगर - श्रीनगर का जम्मू और कश्मीर के पर्यटन स्थलों में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। कश्मीर घाटी के मध्य में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। श्रीनगर एक ओर जहाँ डल झील के लिए प्रसिद्ध है वहीं दूसरी ओर विभिन्न मंदिरों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। स्वच्छ झील और ऊँचे पर्वतों के बीच बसे श्रीनगर की अर्थव्यवस्था का आधार लम्बे समय से मुख्यतः पर्यटन है। शहर से होकर नदी के प्रवाह पर सात पुल बने हुए हैं। इससे लगे विभिन्न नहरों एवं जलमार्गों में शिकारे भरे पड़े हैं। श्रीनगर अपने मन्दिरों और मस्जिदों के लिए प्रसिद्ध है। श्रीनगर से लगी एक पहाड़ी जिसको शंकराचार्य पहाड़ी कहते हैं, ऊपर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित शिवलिंग है। पहाड़ी की 2 मील कठिन चढ़ाई है। पर्वत के नीचे शंकरमठ है, इसे दुर्गानाग मंदिर कहते हैं। श्रीनगर में महाश्री का मंदिर चौथे पुल के पास तथा हरिपर्वत पर एक मंदिर है। संपूर्ण कश्मीर दर्शनीय है। नगर में पत्थर मस्जिद, नेहरू उद्यान दर्शनीय हैं और मुग़ल उद्यान तो अपने सौंदर्य के लिए ही प्रसिद्ध है। इन सब स्थानों पर मोटर बसें जाती हैं। श्रीनगर से मोटर बस से पहलगाँव जाते समय मध्य में अनन्तनाग है। मार्तण्ड मंदिर पर्वत पर है। 
  • डल झील - डल झील श्रीनगर, कश्मीर में एक प्रसिद्ध झील है। डल झील के मुख्य आकर्षण का केन्द्र है यहाँ के शिकारे या हाउसबोट। सैलानी इन हाउसबोटों में रहकर झील का आनंद उठा सकते हैं। नेहरू पार्क, कानुटुर खाना, चारचीनारी आदि द्वीपों तथा हज़रत बल की सैर भी इन शिकारों में की जा सकती है। इसके अतिरिक्त दुकानें भी शिकारों पर ही लगी होती हैं और शिकारे पर सवार होकर विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ भी खरीदी जा सकती हैं। तरह तरह की वनस्पति झील की सुंदरता को और निखार देती है। कमल के फूल, पानी में बहती कुमुदनी, झील की सुंदरता में चार चाँद लगा देती है। सैलानियों के लिए विभिन्न प्रकार के मनोरंजन के साधन जैसे कायाकिंग (एक प्रकार का नौका विहार), केनोइंग (डोंगी), पानी पर सर्फिंग करना तथा ऐंगलिंग (मछली पकड़ना) यहाँ पर उपलब्ध कराए गए हैं।
  • गुलमर्ग - प्रसिद्ध सौंदर्य, प्रमुख स्थान और निकटता श्रीनगर के गुलमर्ग का अर्थ है "फूलों की वादी"। जम्मू - कश्मीर के बारामूला जिले में लग - भग 2730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुलमर्ग, की खोज 1927  में अंग्रेजों ने की थी। यह पहले “गौरीमर्ग” के नाम से जाना जाता था, जो भगवान शिव की पत्नी "गौरी" का नाम है। फिर कश्मीर के अंतिम राजा, राजा युसूफ शाह चक ने इस स्थान की खूबसूरती और शांत वारावरण में मग्न होकर इसका नाम गौरीमर्ग से गुलमर्ग रख दिया। वैसे तो सैलानी साल के किसी भी मौसम में गुलमर्ग घूमने जा सकते हैं। पर गुलमर्ग की खूबसूरती देखने का सबसे बढिया समय मार्च और अक्टूबर के बीच है। गुलमर्ग का सुहावना मौसम, शानदार परिदृश्य, फूलों से खिले बगीचे, देवदार के पेड, खूबसूरत झीले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गुलमर्ग अपनी हरियाली और सौम्य वातावरण के कारण आज एक पिकनिक और कैम्पिंग स्पॉट बन गया है। निंगली नल्लाह, वरिनग और फिरोजपुर नल्लाह यहाँ के कुछ प्रमुख नल्लाहे हैं। कहा जाता है कि वरिनग नल्लाहे के पानी में कुछ औषधीय गुण मौजूद है, जिसके कारण यहाँ कई सैलानी आते हैं। बायोस्पीयर रिज़र्व भी गुलमर्ग का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।
  • सोनमर्ग या सोनामर्ग - भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के गान्दरबल ज़िले में ३,००० मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक पर्वतीय पर्यटक स्थल है। यह सिन्द नाले (सिन्धु नदी से भिन्न) नामक नदी की घाटी में है। सोनमर्ग से आगे ऊँचे पर्वत हैं और कई प्रसिद्ध हिमानियाँ (ग्लेशियर) स्थित हैं और यहाँ से पूर्व लद्दाख़ का रास्ता निकलता है। 2730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है,   गर्मियों के महीनों के दौरान एक प्रमुख स्थानीय आकर्षण है सोनमर्ग जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो समुद्र सतह से 2740 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। बर्फ से आच्छादित पहाड़ों से घिरा हुआ सोनमर्ग शहर जोजी-ला दर्रे के पहले स्थित है। सोनमर्ग का शाब्दिक अर्थ है “सोने के मैदान”। इस स्थान का नाम इस तथ्य के आधार पर पड़ा कि वसंत ऋतु में यह सुंदर फूलों से ढँक जाता है जो सुनहरा दिखता है।  पहाड़ों की ऊँची चोटियों पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो वे भी सुनहरी दिखती हैं। सोनमर्ग उन यात्रियों के लिए उचित गंतव्य है जो साहसिक गतिविधियों जैसे ट्रेकिंग या पैदल लंबी यात्रा में रूचि रखते हैं। सभी महत्वपूर्ण ट्रेकिंग के रास्ते सोनमर्ग से ही प्रारंभ होते हैं जो इसे ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय स्थान बनाते हैं। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है जिसमें झीलें, दर्रे और पर्वत शामिल हैं। सोनमर्ग अमरनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए प्रारंभ बिंदु की तरह है। कब सैर करें? इस स्थान की सैर के लिए उत्तम समय मई से नवंबर के बीच और नवंबर से अप्रैल के बीच होता है। मई से अक्टूबर के बीच का समय दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए उत्तम होता है। नवंबर से अप्रैल के बीच पर्यटक बर्फ़बारी का आनंद उठा सकते हैं। 
  • वैष्णो देवी मन्दिर- वैष्णो देवी मन्दिर जम्मू से 62 किमी दूर स्थित एक पवित्र गुफा मन्दिर है | रेलवे स्टेशन या टैक्सी द्वारा 48 किमी दूरी पर स्थित कटरा पहुचने पर पैदल ,घोड़े या पालकी द्वारा 14 किमी की चढाई के बाद मन्दिर तक पहुचा जा सकता है | पर्वतीय मार्ग के दोनों ओर रोशनी की अच्छी व्यवस्था है तथा खाने पीने की दुकाने दोनों ओर लगी रहती है | समुद्र तल से 2500 फीट उंचाई पर स्थित कटरा में कई होटल एवं धर्मशालाए है | कटरा से 1 किमी की दूरी पर दर्शनी दरवाजा और वहा से 100 फ़ीट की उंचाई पर बाणगंगा नदी है |कहा जाता है कि देवी ने यहा बाण चलाकर गंगा को प्रकट किया था | कटरा से लगभग 6 किमी आगे जाने पर पुरी यात्रा के बीच आदि या अर्ध्कुंवारी मन्दिर है | यहा गर्भजून है जंहा वैष्णो देवी ने नौ महीने तक तप किया था | यहा से लगभग 4 किमी की खडी चढाई के बाद समुद्र तल से 6700 फीट की ऊंचाई पर स्थित हाथी मत्था आता है | हाथी मत्था के बाद मार्ग ढलवा है | यहा से 2.5 किमी की दूरी पर वैष्णो देवी मन्दिर है | जम्मू में अमर महल, बहू फोर्ट, मंसर लेक, रघुनाथ टेंपल आदि देखने लायक स्थान हैं। कटरा के नजदीक शिव खोरी, झज्झर कोटली, सनासर, बाबा धनसार, मानतलाई, कुद, बटोट आदि कई दर्शनीय स्थल हैं।
  • पटनी टॉप- जम्मू से लगभग 112 किमी की दूरी पर 'पटनी टॉप' एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। सर्दियों में यहाँ आप स्नो फॉल का भी मजा ले सकते हैं। कटरा के नजदीक शिव खोरी, झज्झर कोटली, सनासर, बाबा धनसार, मानतलाई, कुद, बटोट आदि कई दर्शनीय स्थल हैं।
  • रणवीरेश्वर मन्दिर – यह भगवान शिव का प्राचीन मन्दिर है जिसे सन 1883 में महाराज रणवीर सिंह ने बनवाया था | मन्दिर में प्रस्तर निर्मित 15 से 38 सेमी के 12 पारदर्शी शिवलिंग की दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रुधालू हर समय आते रहते है |
  • डोगरा आर्ट गैलरी – गांधी भवन के नये सचिवालय के पास स्थित इस आर्ट गैलरी में डोगरी चित्रकला के उत्कृष्ट नमूने देखे जा सकते है | यहा एतेहासिक अस्त्र शस्त्रों तथा पुरातात्विक वस्तुओ का भी अच्छा संग्रह है |
  • बाहू किला – जम्मू नगर से 4 किमी दूर तवी नदी के तट पर यह 3000 वर्ष पुराना किला है जिसका निर्माण बाहुलोचन नामक राजा ने करवाया था | किले के अंदर कालीजी का प्राचीन मन्दिर और खुबसुरत बाग़ है |
  • अमर महल – बाहू किले से कुछ दूरी पर राजा अमर सिंह द्वारा निर्मित यह राजमहल उत्कृष्ट वास्तुकला की दृष्टि से देखने योग्य है | यहा एक संग्रहालय भी है |
    वासुकि कुंड – यह एक पवित्र कुंड भदेरवाह  से 22 किमी की दूरी पर स्थित है | जम्मू एवं कश्मीर वासियों के लिए यह अत्यंत पवित्र और धार्मिक स्थल है |
  • पीर खोह – सर्कुलर रोड पर स्थित इस स्थल पर एक प्राकृतिक शिवलिंग है | कहा जाता है कि शिवलिंग के सामने स्थित गुफा देश के बाहर किसी स्थान पर निकलती है |
  • मुबारक मंडी – यह पुराना सचिवालय है | इसका पुराना नाम मुबारक मंडी है | यह पहले राजमहल था ,जिसका अवशिष्ट भाग बहुत ही कलात्मक और सुंदर है |
  • बाग़ बाहुदीन – बाहू किल के नीचे यह पिकनिक के लिए बहुत सुंदर स्थान है | यहा से सारे शहर को देखा जा सकता है | यहा पर की जाने वाली रोशनी बहुत ही मोहक और सुवाह्नी प्रतीत होती है |
  • रघुनाथ मन्दिर – सन 1835 में राजा गुलाब सिंह द्वारा निर्मित इस मन्दिर की दीवारों पर रामकथा से सम्बन्धित अनेक देवी देवताओ की छोटी बड़ी कलात्मक प्रतिमाये दर्शनीय है |
  • झीले – मानसर झील और सुरिनसर झीले पिकनिक के लिए उत्तम स्थान है |

लेह लद्दाख

एक देश में भयानक भौतिक सुविधाएँ, एक विशाल और शानदार वातावरण में सेट abounding एक पहाड़ी रेगिस्तान के लिए 25,000 लद्दाख 9.000 फुट से लेकर ऊंचाई पर स्थित है है। दुनिया की ताकतवर पर्वत श्रृंखला, उत्तर में काराकोरम और हिमालय, दक्षिण में से दो से घिरा यह दो अन्य समानांतर चेन द्वारा, लद्दाख श्रृंखला और जांस्कर श्रेणी तय की है। लेह लद्दाख का दौरा इन स्थानों के रूप में प्राकृतिक सुंदरता का एक बहुत एक महान अनुभव किया जा सकता। यह सुंदर पहाड़ी क्षेत्र है, हर साल स्थानीय के रूप में अच्छी तरह से विदेशी पर्यटकों की एक बड़ी संख्या द्वारा दौरा किया है। यह दोनों एक लोकप्रिय गर्मियों के साथ ही एक शीतकालीन छुट्टी गंतव्य है। अपने अछूता सौंदर्य, बर्फ से ढंकी पर्वत चोटियों, हरियाली और एकांत जगहों भी हनीमून का एक बहुत आकर्षित। यह सब नहीं है। यह ट्रेकिंग जैसे, माउंटेन बाइकिंग, की पेशकश की है साहसिक गतिविधियों की सीमा के साथ राफ्टिंग, पर्वतारोहण और इतने पर, यह भी साहसिक उत्साही के बीच अच्छी तरह से जाना जाता है। तिब्बती हस्तशिल्प वस्तुओं, प्रार्थना पहियों सहित लद्दाख में बौद्ध मास्क और थंग्का चित्र खरीदा जा सकता है। तिब्बती चांदी के गहने और मरकत के साथ पारंपरिक लद्दाखी गहने भी पर्यटकों के साथ लोकप्रिय हैं। खुबानी कि बहुतायत से लद्दाख में विकसित एक अन्य लोकप्रिय उपहार है कि आप अपनी यात्रा के एक स्वादिष्ट स्मारिका के रूप में वापस करने के लिए लद्दाख ले जा सकते हैं कर रहे हैं। लेह से दिल्ली से एयर कनेक्ट किया गया है और यह दिल्ली से लेह तक पहुंचने के लिए लगभग 65 मिनट लेता है। जम्मू से सड़क मार्ग से श्रीनगर के लिए और फिर लेह, जो 430 किलोमीटर दूर से अधिक है करने के लिए सिर कर सकते हैं। यह के बारे में एक दो दिन की यात्रा श्रीनगर से कारगिल में एक रात पड़ाव के साथ है। श्रीनगर से लेह के लिए सड़क पर आप उच्च Zoji ला दर्रा पार, और पिछले Mulbek की यात्रा है, जहां मैत्रेय बुद्ध की एक विशाल छवि। Namika ला और Fotu ला गुजरता और स्पितुक गोम्पा श्रीनगर से लेह के लिए सड़क पर दर्शनीय आकर्षण हैं।

अगर आप लेह घूमना चाहते हैं  हम आपको नई दिल्‍ली से लेह तक चलने वाली बस सेवा के बारे में बताते हैं।
  • जी हां, हिमाचल सड़क परिवहन निगम हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली से लेह तक बस सर्विस शुरू कर दी है। दिल्‍ली से लेह की दूरी 1050 किलोमीटर है। जिसे ये बस 33 घंटो में पूरा करेगी। जी हां, हिमाचल सड़क परिवहन निगम हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली से लेह तक बस सर्विस शुरू कर दी है। दिल्‍ली से लेह की दूरी 1050 किलोमीटर है। जिसे ये बस 33 घंटो में पूरा करेगी।
  • ये बस आपको दिल्ली से चंडीगढ़ और यहां से लेह ले जाएगी। इस सफर को तीन ड्राइवर पूरा करते हैं। 36 घंटे के सफर में राज्य परिवहन निगम के तीन चालक इसे चलाते हैं। हम आपको बताते हैं कि आपका यह सफर किन पड़ावों से होकर गुजरेगा।  
  • ये सफर मनाली की खूबसूरत वादियों से होकर गुजरेगा। यहां की बर्फीली पहाड़ियां और हरियाली आपके सफर को और सुहाना बनाएंगी। ये सफर मनाली की खूबसूरत वादियों से होकर गुजरेगा। यहां की बर्फीली पहाड़ियां और हरियाली आपके सफर को और सुहाना बनाएंगी।
  • सफर का अगला पड़ाव होगा शिमला का मंडी जहां मौजूद पहाड़ियां आपके सफर में चार चांद लगा देंगी। सफर का अगला पड़ाव होगा शिमला का मंडी जहां मौजूद पहाड़ियां आपके सफर में चार चांद लगा देंगी।
  • लद्दाख में तांगलांग ला की 17,480 फीट की ये ऊंची पहाड़ी सफर का अगला पड़ाव होगा। लद्दाख में तांगलांग ला की 17,480 फीट की ये ऊंची पहाड़ी सफर का अगला पड़ाव होगा। तांगलांग ला की पहाड़ियों का सफर थोड़ा मुश्किल जरूर होता है लेकिन रोमांच से भरपूर होता है।
  • ऑक्सीजन की कमी के चलते यहां मुश्किलें होती हैं लेकिन यहां बुलेट से ड्राइव करना आपके रोमांच को बढ़ाता है। ऑक्सीजन की कमी के चलते यहां मुश्किलें होती हैं लेकिन यहां बुलेट से ड्राइव करना आपके रोमांच को बढ़ाता है।
  • लेह मनाली हाइवे पर मौजूद लाचूलोंग ला पहाड़ 16600 फीट ऊंचा है। यहां आपको सांस लेने में थोड़ी समस्या हो सकती है। लेह मनाली हाइवे पर मौजूद लाचूलोंग ला पहाड़ 16600 फीट ऊंचा है। यहां आपको सांस लेने में थोड़ी समस्या हो सकती है।  लेह मनाली हाइवे पर सरचू कैंप के लिए एक अच्छी जगह हो सकती है। लेह मनाली हाइवे पर सरचू कैंप के लिए एक अच्छी जगह हो सकती है। सरचू की खूबसूरती देख आपका मन करेगा कि यह सफर यहीं थम जाए बस सरचू की खूबसूरती देख आपका मन करेगा कि यह सफर यहीं थम जाए बस
  • जब आपकी बस पीर पांजल की वादियों से गुजरेगी तो आप वहां के अनोखे नजारे से रूबरू होंगे।   जब आपकी बस पीर पांजल की वादियों से गुजरेगी तो आप वहां के अनोखे नजारे से रूबरू होंगे।  यहां खूबसूरत हरियाली से सजी वादियों से गुजराना आपको किसी फिल्मी सीन की याद दिला सकता है। यहां खूबसूरत हरियाली से सजी वादियों से गुजराना आपको किसी फिल्मी सीन की याद दिला सकता है।
  • सफर का अगला पड़ाव बर्फ से ढकी हुई बारालाचा ला की वादियों होंगी।  
  • लाहौल में दर्चा एक अनोखा गांव है जो मनाली लेह हाइवे पर ही है। सफर के दौरान आप यहां से भी गुजरेंगे।  लाहौल में दर्चा एक अनोखा गांव है जो मनाली लेह हाइवे पर ही है। सफर के दौरान आप यहां से भी गुजरेंगे।
  • रोहतांग ला अपने विशालदर्शी दृश्यों के लिए जाना जाता है। 13000 फीट पर मौजूद इस जगह पर एक्सीडेंट भी बहुत होते हैं। रोहतांग ला अपने विशालदर्शी दृश्यों के लिए जाना जाता है। 13000 फीट पर मौजूद इस जगह पर एक्सीडेंट भी बहुत होते हैं। स्नोबॉल खेलने के लिए भी रोहतांग ला आपके लिए परफेक्ट जगह गो सकती है। स्नोबॉल खेलने के लिए भी रोहतांग ला आपके लिए परफेक्ट जगह गो सकती है।
भारत की जमीं पर स्वर्ग के नजारे प्रस्तुत करता कश्मीर हर वर्ग की पहली पसंदीदा जगह है। यहां के प्रसिद्ध झरने, बर्फीली चोटियां, खूबसूरत मठ,मंदिर इस जगह को और भी मनोरम बनाते है। जब भी बात कश्मीर की आती है, तो दिमाग में सबसे पहला नाम आता है, डल झील का। बर्फीली घाटियों से घिरी हुई डल झील की अपार सुदंरता हर पर्यटक को अपना दीवाना बनाती है। पर्यटक यहां के हाउसबोट या शिकारा पर बैठ कर सूर्योदय का आंनद लेते हैं। पर्यटक यहां आकर पानी में खेले जाने वाले गेम्‍स का भी मजा उठा सकते हैं जिनका आयोजन यहां अक्‍सर किया जाता है। स्विमिंग, वॉटर सर्फिंग, कायाकिंग, ऐंगलिंग और कैनोइंग, डल झील के प्रमुख वॉटर गेम्‍स हैं। लेकिन आज हम आपको अपने लेख से बताने जा रहे हैं, कश्मीर की अन्य खूबसूरत झीलों के बारे में, जिनके बारे में शायद पर्यटक अब तक रूबरू नहीं है, तो आइये नजर डालते हैं, श्रीनगर की खास झीलों पर 

नागिन झील  - नागिन झील डल झील की पृष्ठभूमि में स्थित , नागिन झील ' रिंग में गहना ' के रूप में हकदार है। एक संकीर्ण सेतु दो झीलों को अलग करती है। पर्यटकों के लिए कई शिकारे और हाउसबोट हाजिर किये जा सकते हैं। पानी स्कीइंग, नाव नौकायन की सुविधा इस झील में उपलब्ध है। नागिन झील डल झील की तुलना में थोड़ा अलग और बहुत क्लीन है। 

वुलर झील - भारत की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील वुलर झील, एशिया में सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में वुलर झील, अपने खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य के साथ पक्षियों की कई प्रजातियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। यह उन जगहों में से एक है जहाँ आपको कई प्रवासी पक्षियों का समुह सबसे ज़्यादा देखने को मिलेंगे। कई प्रकृति प्रेमी और पक्षियों के वैज्ञानिक वुलर झील पर व्यापक अनुसंधान के लिए भी आते हैं। इस झील की सैर करने आने वाले पर्यटक इस झील के किनारे नौकायान का मजा ले सकते हैं। भारत के इन पक्षी अभ्यारण की जरूर करें यात्रा कौसरनाग झील कश्मीर के कुलगाम जिले में स्थित कौसरनाग झील की खूबसूरती आपको अपने कंप्यूटर के वालपेपर की याद दिला सकती है। कौसरनाग झील तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को अहरबल नामक प्रसिद्ध जलप्रपात से ट्रेकिंग कर पहुंचना होता है। 

मानसबल झील - कश्मीर की घाटी में ले झीलों के बीच ट्रैकिंग का मजा मानसबल झील जो श्रीनगर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और वुलर झील की ओर जाने वाले रास्ते पर ही पड़ती है। मानसबल झील के झिलमिलाते पानी में खिलने वाले कमल के फूल इस झील को और खूबसूरत बनाने के साथ-साथ यहाँ रहने वाले लोगों के लिए रोज़ीरोटी के काम भी आता है। मानसबल झील विशाल और सुरम्य झील होने के साथ कई राजसी लोगों को अपनी और आकर्षित करता है, इसलिए इसे 'कश्मीर के झीलों का सबसे श्रेष्ठ रत्न' भी कहते हैं। 

गंगाबल झील - गंगाबल झील भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के गान्दरबल ज़िले में हरमुख पर्वत के चरणों में स्थित एक स्वच्छ पर्वतीय झील है। झेलम नदी का मुख्य स्त्रोत गंगाबल झील में कई ग्लेशियर्स और झरनों से पानी आता है तथा यह पास की नुन्दकोल झील की ओर बहती है और अंत में सिंध नाले में मिल जाती है। वे पर्यटक जो फिशिंग का आनंद उठाना चाहते हैं वे ट्राउट फिशिंग के लिए इस झील की सैर के लिए जा सकते हैं। जन्नत की सैर करनी हो तो, जम्मू-कश्मीर कि यात्रा ज़रूर करें 

सतसार झील - सात झीलों से मिलकर बनी सतसार झील सोनमर्ग के निकट स्थित है। पर्यटक इस झील की सैर सिर्फ गर्मी में कर सकते हैं, सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते यह झील पूरी तरह जम जाती है। गर्मियों के दौरान इस झील के किनारे कैम्पिंग करने के एक अलग ही अलग ही मजा है, इस झील के किनारे से पर्यटक नाग पर्वत और पीओके क्षेत्र भी देख सकते हैं।


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