अपने-पराए


अपने-पराए

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

अपने-पराए

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। 

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।
 
हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।
 
आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है।
 
पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफां का, तेवरी तन गई।

अटल बिहारी वाजपेयी




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