महिलाओं में थायराइड की समस्या

बदलते और गलत लाइफस्टाइल के कारण लोगों में थायरॉइड की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। मगर यह समस्या पुरूषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। थायराइड एक ऐसी बीमारी है, जो महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ-साथ देखने को मिलती है। थायराइड ग्लैंड में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाने के कारण यह समस्या होती है।

थायराइड

  • हाइपरथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि थायरोक्सिन (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन अधिक करती है।हाइपरथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि थायरोक्सिन (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन अधिक करती है।
  • थायरॉयड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो आपकी गर्दन के आगे वाले हिस्से में स्थित होती है। 
  • यह ग्रंथि टेट्रायोडोथायरोनिन (टी4) (Tetraiodothyronine) और ट्रीओडोथायरोनिन (टी3) (Triiodothyronine) बनाती है, जो दो प्राथमिक हार्मोन हैं। यह हार्मोन आपकी कोशिकाओं को ऊर्जा इस्तेमाल करने में नियंत्रित करते हैं। थायरॉयड ग्रंथि इन हार्मोनों के रिलीज के माध्यम से आपके चयापचय (Metabolism) को नियंत्रित करती है। थायरॉयड तब बढ़ता है जब थायरॉयड ग्रंथि टी4, टी3 या दोनों हार्मोन बहुत ज़्यादा बनाती है।
  • हाइपरथायरायडिज्म आपके शरीर की चयापचय (Metbolism) में तेजी ला सकता है, जिससे अचानक वजन घटना, तेज़ या अनियमित दिल की धड़कन, पसीना आना और घबराहट या चिड़चिड़ापन हो सकते हैं। हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण ग्रेव्स बीमारी, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक प्रचलित है।

थायराइड के प्रकार 

थायराइ विकार दो प्रकार के होते हैं -
  1. हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism; थायराइड कम होना)
  2. हाइपरथायराइडिज्म (Hyperthyroidism; थायराइड बढ़ना) 

थायराइड के कारण

महिलाओं को थायराइड की समस्या कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन न करने, ज्यादा नमक या सी फूड खाने और हाशिमोटो रोग के कारण हो सकती है। इसके अलावा शरीर में आयोडीन और विटामिन बी12 के कमी कारण भी महिलाओं में थायराइड का खतरा बढ़ जाता है।

ये होते हैं थायराइड के लक्षण
अगर आपको कमजोरी, थकान लगना, डिप्रैशन, तनाव, नींद न आना, सिर दर्द या गर्दन में दर्द हो तो यह थायराइड का संकेत है। महिलाओं में अनियमित पीरियड्स भी इसी बीमारी का लक्षण है। इसके अलावा इस बीमारी में पेट की गड़बड़ी, जोड़ो मे दर्द रहना, वजन का बढ़ना या कम होना, मांसपेशियों का कमजोर होना, आंखो और चेहरे पर सूजन रहना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।

थायराइड से ऐसे बचें-

  • स्वस्थ वजन बनाए रखने के लिए फाइबर से समृद्ध और कम वसा वाले आहार लें.
  • कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि करते रहें.
  • फिल्टर किया हुआ पानी पीएं, क्योंकि पानी में फ्लोराइड होता है जो थायरॉयड के जोखिम को बढ़ाता है।
  • तनाव से थायराइड विकारों को बढ़ने का मौका मिलता है, इसलिए तनाव से बचने की कोशिश करें.
  • धूम्रपान करना बंद कर दें।
  • आयोडीन युक्त आहार  का सेवन सीमित मात्रा में होना चाहिए, इसके अधिक सेवन से अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती है।

थायराइड में परहेज

सब्जियों में पालक, मूली, सरसों, ब्रोकोली, फूलगोभी, शलजम, फलों में स्ट्रॉबेरी, नट्स में मूंगफली फोलिक एसिड के धनी होते हुए भी ये सब थायराइड में नुकसानदायक हैं, इसलिए इनका सेवन नहीं करना चाहिए। पालक का जूस पी सकते है उसके लिए ऊपर एक नुस्खा बता दिया गया है |

थायराइड में ब्रोकोली, फूलगोभी, को या तो बिल्कुं ना खाएं या फिर बहुत ही कम मात्रा में खाएं तथा इनको उबालकर खाना चाहिए।

थायराइड में सोयाबीन और इससे बने सभी उत्पादों से दूर रहना चाहिए। एक अध्ययन के अनुसार, सोयाबीन में थायराइड विरोधी गुण पाए गए हैं और यदि किसी व्यक्ति के भोजन में पहले से ही आयोडीन की कमी चल रही है तो सोया का दुष्प्रभाव ज्यादा बढ़ जाता है। सोया उत्पादों में सोयाबीन, टोफू, सोया दूध, सोया बार समेत वे सभी उत्पाद आते हैं, जो किसी भी तरह से सोया से संबंधित हैं।

थाइराइड में वजन बहुत तेजी से बढ़ता है इसलिए कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेडेट फैट खाने से हर हाल में बचना चाहिए ।

थायराइड में ज्यादा चीनी, तला भोजन ठीक नहीं है ज्यादा चीनी का सेवन भी थायराइड की सुचारू कार्यप्रणाली के लिए नुकसानदायक होता है।

थायराइड में घी, डालडा या वनस्पति घी, तेल, रेड मीट, चिकनाई, वसा, क्रीम, जंक फूड, और फास्ट फूड से थायराइड में परहेज रखें |

तेज मिर्च, खटाई, इमली, ज्यादा मसाले वाले पकवान इन सभी खाद्य पदार्थो को थायराइड में नहीं खाना चाहिए |

सॉफ्ट ड्रिंक, पैन केक, जैम,जैली, कुकीज़, केक, पेस्ट्रीज, कैंडीज, और डिब्बाबंद भोजन से भी दूर रहें। ये खाद्य थायराइड में नहीं खाना चाहिए |

चाय, सिगरेट, तंबाकू, कॉफी शराब, और बीयर से भी से थायराइड में परहेज रखें |

रिफाइंड अनाज यानी मैदा, थायराइड में पॉलिश्ड सफेद चावल, सफेद ब्रेड, पास्ता, चौमिन, मैगी ,बर्गर, पिज़्ज़ा आदि भी नुकसान करेगा। इसलिए इन चीजो से भी थायराइड में परहेज रखें |

थायराइड में चावल नहीं खाने की सलाह दी जाती है परंतु फिर भी आप खाना चाहे तो पुराने चावलों को मकई के दानो के साथ उबालकर कम मात्रा में खा सकते है |

थायराइड में इन चीजों से भी दूर रहें

फल : आडू, स्ट्रॉबेरी, बाजरा, सब्जी : मूली, आलू, और मूंगफली | विशेषज्ञों के अनुसार इन सभी चीजों में फ्लेवोनॉयड नाम का तत्व काफी मात्रा में होता है, जो वैसे तो शरीर के लिए बहुत काम की चीज है, मगर कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ फ्लेवोनॉयड थायराइड की कार्यप्रणाली में बाधा पहुंचाते हैं, जिससे थायराइड हार्मोन का उत्पादन रुक जाता है। 


थायराइड ग्रंथि का क्या काम होता है

  • थायराइड हमारे शरीर के दूसरे अंगों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और ज़रूरत के मुताबिक हार्मोंस बनाने के लिए थायराइड आयोडीन प्रयोग करता है और शरीर के दूसरे अंगों में पहुँचाता है। ज़रूरत से अधिक या कम हारमोन बनने पर थाइरोइड के इलाज  की ज़रूरत है।
  • शरीर का तापमान कंट्रोल करने में मदद करती है।
  • जहरीले पदार्थ शरीर से बाहर करने में मदद करती है।
  • बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में थाइरोइड ग्रंथि का अहम् योगदान है।

हाइपर थायराइड के लक्षण : हार्ट बीट तेज होना, वजन कम होना, पसीना जादा आना, हाथ और पैरों में कप कपी होना

हाइपो थायराइड के लक्षण : वजन बढ़ना, भूख कम लगना, स्किन रूखी होना, ठंड जादा लगना, आवाज़ में भारीपन आना, आँखो और चेहरे पर सूजन, सिर, गर्दन में दर्द 

समझे हो गया है थायराइड

वजन बढ़ना

थायराइड के कारण मेटाबॉलिज्म की दर धीमी पड़ जाती है। इसका मतलब यह कि आप जो खाना खाती हैं, उसका आपकी एनर्जी की आवश्यकताओं के लिए उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप, आपकी बॉडी में फैट का अस्पष्ट जमाव और वजन बढ़ना शुरू हो जाता है। यहां तक कि किसी भी हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी के बाद भी व्यक्ति बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस करता है।हायपरथायराइड से पीडि़त लोगों में मांसपेशी और जोड़ों में दर्द हो सकता है, खासकर बांह और पैर में। इसके अलावा बांह के ऊपरी हिस्‍से में दर्द भी हो सकता है।

अस्वस्थ बाल, आखें और नाखून

यह सबसे पहला लक्षण है, जो नजर आता है। नाखून पतले और रूखे होने शुरू हो जाते हैं। इससे नाखूनों में दरार और वह जल्दी टूटने लगते हैं। इसके अलावा, नाखूनों में सफेद लाइन भी नजर आने लगती है।इस रोग से पीडि़त कई महिलाओं में आंखों की बीमारियां भी हो जाती हैं जैसे आंखें लाल होना, खुजली होना, आंखों में सूजन आदि। कई महिलाओं में पानी और शरीर के दूसरे फ्लूड्स का अत्यधिक अवरोधन शुरू हो जाता है, जो हाथों और पैरों में हल्के सूजन के रूप में नजर आता है. अंगूठी और चूड़ियां भी हल्की कस जाती हैं।

सेक्सुअल एक्टिविटी से घृणा 

थायराइड प्रतिकूल रूप से शारीरिक आवश्यकताओं पर भी असर डालता है। कुछ महिलाएं सेक्सुअल इंटरकोर्स या किसी दूसरे फिजिकल इंटीमेसी में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं लेतीं। समस्या तब और ज्यादा खराब हो जाती है जब उनके अंदर सेक्सुअल एक्टिविटी से घृणा बढ़ जाती है। जब महिलाएं बात करती हैं तो इरिटेटिंग क्वालिटी और कर्कशपन भी महसूस किया जा सकता है।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है

थाइराइड होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने के चलते उसे कई बीमारियां लगी रहती हैं। थाइराइड की समस्या से ग्रस्त आदमी को जल्द थकान होने लगती है। उसका शरीर सुस्त रहता है। वह आलसी हो जाता है और शरीर की ऊर्जा समाप्त होने लगती है।थाइराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। 

अनियमित पीरियड्स और अवसाद

महिलाओं में पीरियड्स में अनियमितताएं शुरू हो जाती है। यह पहले की तुलना में लाइटर या हेवियर रूप में हो सकता है। इसके अलावा, कई महिलाओं में  दो पीरियड्स के इंटरवल में भी अनियमितता शुरू हो जाती है जैसे 28 दिन का साइकिल 40 दिन का बन सकता है। इस रोग से डिप्रेशन की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। एक शोध के अनुसार मानसिक तनाव का संबंध थायराइड हार्मोन्स का कम उत्पादित होना है परंतु डिप्रेशन के रोगी थायराइड परीक्षण नहीं कराते जिससे इस रोग का पता नहीं चल पाता।
थायराइड रोग का पता ब्‍लड टेस्‍ट से चलता है। डाक्टर उन महिलाओं को थायराइड का परीक्षण कराने की सलाह देते हैं जिनमें इस प्रकार के लक्षण पाए जाते है। 

औरतें क्यों होती हैं थायराइड की ज्यादा शिकार?

बदलते और गलत लाइफस्टाइल के कारण लोगों में थायरॉइड की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। मगर यह समस्या पुरूषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखी जा रही है। थायराइड एक ऐसी बीमारी है, जो महिलाओं में बढ़ती उम्र के साथ-साथ देखने को मिलती है। थायराइड ग्लैंड में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाने के कारण यह समस्या होती है। ऐसे में आज हम आपको थायराइड के कुछ ऐसे कारण बताएंगे, जिससे सावधानी बरतकर आप इस बीमारी से बच सकती हैं। तो चलिए जानते किन कारणों से महिलाओं को होती है थायराइड की समस्या।

महिलाओं में थायराइड के कारण

  1. घर हो या ऑफिस, महिलाएं अक्सर छोटी-छोटी बातों के लिए ज्यादा टेंशन और स्ट्रेस ले लेती हैं। इससे थायराइड ग्रंथि पर बुरा असर पड़ता है और हार्मोन असंतुलित हो जाता है, जोकि आगे चलकर थायराइड का कारण बनता है।
  2. किसी दवाई के साइड इफेक्ट के कारण भी महिलाओं को यह समस्या हो सकती है। इसलिए किसी भी दवाई को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  3. काम के चक्कर में महिलाएं अपने खान-पान पर ध्यान नहीं देती, जिसके कारण शरीर में आयोडीन और दूसरे जरूर तत्वों की कमी हो जाती है। इसके कारण आप थायराइड की चपेट में आ जाती है।
  4. महिलाओं में थायराइड होने का एक कारण आनुवंशिक भी है। अगर परिवार के किसी सदस्य को थायराइड है तो उनसे यह बीमारी दूसरे सदस्यों को भी हो सकती है, जिसकी चपेट में सबसे ज्यादा महिलाएं ही आती हैं।
  5. प्रैग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को थायराइड होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। क्योंकि इस दौरान महिलाओं के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव आते हैं।
  6. जरूरत से ज्यादा सोया उत्पाद का सेवन भी आपको थायराइड का शिकार बना सकता है। सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर का सेवन महिलाओं को थायराइड का शिकार बना देता है।
  7. महिलाओं में रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है। क्योंकि रजोनिवृत्ति के समय महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल परिवर्तन होते है, जो कई बार थायराइड की वजह भी बनती है।
  8. क्या आपको पता है कि महिलाओं में होने वाला थायराइड सबसे ज्यादा प्रदूषण के कारण होता है। हवा में मौजूद बैक्टीरिया और कण मुंह में जाकर गले की ग्रंथि को नुकसान पहुंचाते हैं, जोकि थायराइड का कारण बनती है।
  9. सिर, गर्दन और चेस्ट की थैरेपी के कारण के कारण भी महिलाओं को थायराइड की समस्या हो सकती है। इसके अलावा टोंसिल्स, लिम्फ नोड्स, थाइमस ग्रंथि की समस्या या मुंहासे के लिए करवाया गया उपचार भी इस बीमारी की कारण बन सकता है।
  10. डाइट के चक्कर में अक्सर महिलाएं अपने खान-पान में गड़बड़ी कर लेती हैं। मगर कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और सोया सप्लीमेंट ज्यादा मात्रा में लेने से भी शरीर में थायराइड हार्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है।

महिलाओं में थायराइड की समस्या के लिए उपाय -

एंटी-थायराइड दवाएं - एंटी-थायराइड दवाएं हाइपरथायरायडिज्म को 6 सप्ताह से 3 महीने के भीतर नियंत्रण में ला सकती है। ये दवाएं नए थायराइड हार्मोन के उत्पादन में कमी करती हैं।

विटामिन ए का सेवन बढ़ाएं - आहार में विटामिन ए का सेवन बढ़ाएं। विटामिन ए बढ़ाने के लिए आप अपने आहार में पीली सब्जियां जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं। आपको गाजर, अंडे और सभी हरी सब्जियां खाने की ज़रूरत है क्योंकि ये सभी विटामिन ए के अच्छे स्रोत हैं।

आहार में सी फ़ूड का सेवन - सी फ़ूड आपको अपने थायराइड को नियंत्रण रखने में मदद करता है। सी फ़ूड में समाहित पोषक तत्वों और इलेक्ट्रोलाइट्स आपके मेटाबॉलिज्म दर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं जिससे थायराइड के प्रभाव को कम किया जाता है।

आहार में फल और सब्जियां- आहार में कई फलों और सब्जियां शामिल हो। आहार में आलू, पनीर, नट, मटर और सेम दाल जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना बेहतर होता है।

अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं- आप अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं। नियमित रूप से व्यायाम करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ जाती है जिससे थायराइड कम होता है।

आयोडीन का सेवन बढ़ाएं - थायराइड के मामले में आयोडीन के कार्बनिक सेवन को अद्भुत घरेलू इलाज़ माना गया है। आयोडीन के कुछ कार्बनिक स्रोतों में शामिल हैं - शतावरी, प्याज, जई, अनानास, पूरे चावल, टमाटर, वॉटरक्रेस गोभी, लहसुन और स्ट्रॉबेरी जैसे खाद्य पदार्थ।


थाइरोइड का  बेस्ट घरेलू उपचार

आयुर्वेद में थायराइड को बढ़ने से रोकने के बेहद सफल प्रयोग बताएं गए हैं। जिनमे से ज्यादातर उपचार की वस्तुएं हमारे किचन में ही मिल जाती हैं तो आइए जानते हैं थाइरोइड से छुटकारा पाने के लिए बेस्ट घरेलू उपचार।
  • हल्दी दूध: थायराइड को कण्ट्रोल करने के लिए आप रोजाना दूध में हल्दी मिलाकर और उसे पकाकर पिए। अगर हल्दी वाला दूध न पिया जाये तो हल्दी को भून कर इसका सेवन करे।
  • लौकी का जूस: रोजाना सुबह खली पेट लौकी का जूस पिने से भी थाइरोइड खत्म करने में मदद मिलती है। जूस पिने के आधे घंटे तक कुछ खाये पिए नहीं।
  • तुलसी और एलोवेरा: दो चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच एलोवेरा रस मिला कर इसका सेवन करना भी इस बीमारी से छुटकारा पाने का उत्तम उपाय है।
  • लाल प्याज: प्याज को बीच से काट कर दो टुकड़े कर ले और रात को सोने से पहले थायराइड ग्रंथि के आस पास मसाज करे। इसके बाद गर्दन से प्याज का रस को धोये नहीं।
  • हरा धनिया: थायराइड का घरेलू ट्रीटमेंट  करने के लिए हरा धनिया पीस कर चटनी बनाये और एक गिलास पानी में एक 1 चम्मच चटनी घोल कर पिए। इस उपाय को जब भी करे ताजी चटनी बना कर ही सेवन करे। ऐसा धनिया ले जिसकी सुगंध अच्छी हो।
 देसी नुस्खे को नियमित रूप से करने पर थायराइड कंट्रोल
  • काली मिर्च: काली मिर्च थायराइड का उपचार में काफी फयदेमंद है। किसी भी तरीके से ले आप काली मिर्च का सेवन करे आप को फायदा करेगी।
  • बादाम और अखरोट: बादाम और अखरोट में सेलीनीयम तत्व मौजूद होता है जो  थायराइड के इलाज में फायदा करता है। इस के सेवन से गले की सूजन से भी आराम मिलता है। हाइपोथायराइड में ये उपाय जादा फायदा करता है।
  • अश्वगंधा: रात को सोते वक़्त एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गाय के गुनगुने दूध के साथ सेवन करे।
  • टूना, ट्राउट जैसी ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्त मछलियों का सेवन करना
  • चावल ब्रैड और अनाज खाएं। ताजे फल और सब्ज़ियाँ।
  • एक्सरसाइज: रोजाना आधा घंटा एक्सरसाइज करे, इससे थाइरोइड बढ़ता नही है और कंट्रोल में रहता है।  .
  • निम्बू की पत्तियों का सेवन थाइरोइड को नियमित करता है, इसका सेवन करने से थाइरोक्सिन के अत्यधिक मात्रा में बनने पर रोक लगती है और इसकी पत्तियों की चाय भी बनाकर पी जाती है, आप इसकी चाय या रस पी सकते हैं.
  • गले को दें ठंडी गर्म सेंक : थायरइड की समस्या में गले को ठंडी-गर्म सेंक देने से फायदा मिलता है। इसके लिए आप गर्म पानी को एक बोतल में भर लें और अलग से ठंडे पानी को किसी बर्तन में भर लें। ठंडे पानी में एक तौलिया भी भिगों लें।और इसे इस तरह से गर्दन की सिकाई करें।
  • तीन मिनट गर्म पानी से सिकाई और फिर एक मिनट तक ठंण्डे पानी से सिकाई : एैसा आप तीन बार करें। और चौथी बारी में तीन मिनट ठण्डी और तीन मिनट गर्म पानी की सेंक करें। इस उपाय को आप दिन में कम से कम दो बारी जरूर करें।

थॉयरॉयड के उपचार के लिए दवाएं

  • एक ऑवर-एक्टिव थॉयरॉयड (Over-Active Thyroid) के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाएं ही वास्तव में 'हाइपोथायरायडिज्म' का कारण बनती हैं। ये दवाइयां जिनमें मेथिमाजॉल या टैपाजॉल (Methimazole/Tapazole) और प्रोपिलथ्योरॉसिल  (Propylthiouracil) शामिल हैं। 
  • साइकिएट्रिक दवाइयां (Psychiatric Medication) लिथियम (Lithium Eskalith, Lithobid) को थायरॉयड के कार्य को बदलने के लिए भी जाना जाता है जो 'हाइपोथायरायडिज्म' का कारण बनते हैं। 
  • खासतौर पर कुछ दवाओं में काफी मात्रा में आयोडीन होता है, जिनमें ऐमियोडेरोन (Amiodarone/ Cordarone), पोटाशियम आयोडाइड (Potassium iodide) और ल्यूगो सोल्यूशन (Lugol's solution) शामिल हैं, जिनके कारण से थायरॉयड के फंक्शन में बदलाव आ सकते हैं। जिसका परिणाम रक्त में  थायरॉयड हार्मोन का स्तर कम होना भी हो सकता है।


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