पथरी रोग क्या है ?


पथरी रोग क्या है ?

आजकल गुर्दे और मूत्राशय में पथरी का बनना एक आम समस्या बन गई है। पथरी उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में पेशाब में यूरिक एसिड, फास्फोरस, कैल्शियम और ऑक्ज़िलिक एसिड की अधिकता होती है। ये तत्व आपस में मिलकर गोल, चपटी, चिकनी, खुरदरी मटर के दानों जैसी सख्त आकृति का रूप ले लेते हैं।

पथरी रोग कैसे पैदा होता है ? 

सब कुछ गुर्दो (किडनी) की खराबी से पैदा होते है। पथरी का इलाज जानने से पहले जरा किडनी की कार्य प्रणाली को समझ लेते है और यह भी जान लेते है की यह रोग आखिर क्यों और कैसे पैदा होता है ? गुर्दो की संरचना व कार्य प्रणाली– शरीर में दो किडनी होती हैं, एक दाईं तरफ व दूसरी बाईं तरफ | दोनों गुर्दो का काम एक जैसा होता है और ये साथ-साथ मिलकर कार्य करते हैं। गुर्दो का रंग भूरा तथा वजन लगभग 150 ग्राम होता है। आकार सेम के बीज की तरह होता है। प्रत्येक गुर्दे में दस लाख से ज्यादा बारीक फिल्टर होते हैं जिनसे होकर सारे शरीर का खून एक घंटे में दो बार साफ़ होता है। यह कार्य छननी की तरह होता है जहां से खून लगातार छाना जाता है ताकि गैरजरूरी, नुकसानदायक तत्त्वों को पेशाब द्वारा शरीर से बाहर निकाला जा सके | पेशाब पहले गुर्दो में इकट्ठा होता है, फिर गुर्दो से लगी नली यूरेटर द्वारा मूत्राशय (ब्लेडर) में आता है। शरीर में सोडियम व पोटैशियम की मात्रा में संतुलन रखने का कार्य गुर्दे ही करते हैं। इस संतुलन के बिगड़ते ही शरीर में बीमारियाँ पैदा होने लगती है जिनमे से पथरी रोग भी एक है | शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पानी की मात्रा का सही संतुलन बनाए रखना और रक्त में अम्ल (एसिड) या क्षार (एल्कली) की अधिकता को रोकने का काम भी गुर्दो का ही होता है। 

पथरी बनने का कारण

किडनी में कैल्शियम, फॉस्फेट, कार्बोनेट आदि तत्त्वों के लगातार जमा होने से पथरी बनती है। हालाँकि ये सभी तत्त्व पेशाब के साथ निकलते रहते हैं, लेकिन जब किसी कारण से नहीं निकल पाते तब ये किडनियों में इक्टठे होकर पथरी का निर्माण करने लगते हैं। जब पेशाब निकलने में रुकावट होती है तो बहुत तेज़ दर्द होता है जिससे रोगी को इस बीमारी का अनुभव होने लगता है |  पथरी का इलाज करवाने में देरी होने से कभी-कभी पेशाब के साथ पस व रक्त भी निकलने लगता है। रोगी का जी मिचलाता है और उलटी भी होने लगती है। पेशाब भी बूंद-बूंदकर निकलता है और बहुत जलन व दर्द होता है। यदि यह रुकावट शुरुवाती है तो इसका इलाज दवाई से या काफी हद तक घरेलू उपायों द्वारा हो सकता है लेकिन बीमारी के बढ़ जाने के बाद पथरी का इलाज करने के लिए ऑपरेशन ही इसका आखरी इलाज बचता है | इस आर्टिकल में हम ऐसे ही कुछ घरेलू उपचार बता रहे है जिनसे आपको जरुर लाभ मिलेगा | तो आइये जानते हैं पथरी का इलाज के कुछ घरेलू उपाय |

पथरी का इलाज आयुर्वेदिक उपायों द्वारा

  • बरना, गोखरू और काला सरिवा एक समान मात्रा में लेकर कुल 50 मि.ली. का क्वाथ बनाएँ तथा दिन में तीन-चार बार पिलाएँ। इससे पथरी के कारण होने वाले दर्द कम करता है तथा पथरी रोग को भी ठीक करता है।
  • इंद्रजी तथा निशोथ का बारीक पाउडर एक समान मात्रा में मिलाकर लगभग 3 ग्राम की मात्रा में दूध की लस्सी अथवा चावलों के मांड के साथ सुबह -शाम सेवन करने से पथरी के कण निकल जाते हैं तथा दर्द भी ठीक हो जाता है।

पथरी में खानपान को लेकर विशेष सावधानी की जरुरत होती है, हमारे आसपास खाने के कई फल और सब्जियां हैं, जिनसे पथरी तो नियंत्रित होती ही है, साथ ही ये किडनी के लिए भी अच्छे रहते हैं यानी इनका सेवन सामान्य अवस्था में तो करना ही चाहिए, पथरी की समस्या होने पर तो जरूर ही करना चाहिए।

गुर्दे (किडनी) संबंधी रोगों में गुर्दे में सूजन (नेफ्राइटिस), गुर्दे की पथरी (रेनल केल्कुलस), गुर्दे का दर्द (रेनल कोलिक), गुर्दे में पीव होना आदि आते हैं। आजकल गुर्दे और मूत्राशय में पथरी का बनना एक आम समस्या बन गई है।

पथरी के कारण 

पथरी उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में पेशाब में यूरिक एसिड, फास्फोरस, कैल्शियम और ऑक्ज़िलिक एसिड की अधिकता होती है। ये तत्व आपस में मिलकर गोल, चपटी, चिकनी, खुरदरी मटर के दानों जैसी सख्त आकृति का रूप ले लेते हैं। इसके अतिरिक्त शरीर में अतिरिक्त गर्मी का बढ़ना, गर्म जलवायु का असर, पानी कम पीना और परिश्रम की अधिकता से पसीना अधिक निकलना, विटामिन डी की विषाक्तता, थायराइड ग्रंथि की ज्यादा सक्रियता आदि कारण भी होते हैं।

पथरी के लक्षण

गुर्दे में पथरी होने पर लक्षणों के रूप में चेहरे व पैरों में सूजन, पेशाब करते समय दर्द, जलन, पेशाब का रुक-रुक कर आना, मूत्राशय में पथरी की उपस्थिति से बेचैनी, दर्द, बार-बार पेशाब करने की इच्छा, कमर में हलका या तेज़ दर्द आदि देखने को मिलते हैं।

पथरी का दर्द कैसे रोके

पथरी का इलाज करवाने के दौरान या इससे पहले भी कई बार अचानक दर्द बढ़ जाता है ऐसे हालात में आप इन घरेलू नुस्खो का उपयोग करके दर्द से राहत पा सकते है |
तुलसी की पत्तियां, अजवायन 10-10 ग्राम मात्रा में लेकर उसमें 5 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन सुबह और शाम 2-2 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से पथरी के दर्द से तुरंत राहत मिलती है।
दालचीनी का चूर्ण बनाकर 1 ग्राम चूर्ण जल के साथ सेवन करने से पथरी के दर्द से राहत मिलती है |
खरबूजे के बीजों की गिरी छीलकर, पीसकर जल में मिलाकर हल्का-सा गर्म करके पीने से पथरी के दर्द से राहत मिलती है |अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्तों को पीसकर पानी मिलाकर, छानकर पीने से पथरी के दर्द से तुरंत राहत मिलती है |

पथरी में भोजन

  • पथरी में फली वाली सब्जियां, गेहूं, जौ और चावल का चोकर लें : पथरी बनने का एक प्रमुख कारण भोजन में फाइबर की कम मात्रा का होना है। पथरी की समस्या उन लोगों में ज्यादा पाई गई है, जो भोजन में फाइबर तो कम लेते हैं, पर प्रोटीन ज्यादा-से-ज्यादा लेते हैं। इसलिए फाइबरयुक्त पदार्थ लें। 
  • फली (लेग्यूम्स) वाली ताजा सब्जियों (सूखी में नहीं), जो (ओट्स, दलिया) चावल के चोकर (ब्रान) में फाइटेट्स खास तौर से पाया जाता है। ये सभी चीजें संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी होती हैं। एक बार फिर दोहरा दें कि फली वाली सब्जी हरी हो, सूखी बींस नहीं होनी चाहिए।
  • पथरी में हरी सब्जियों में सहिजन, करेला, ताजी मटर की फलियां, शलगम, पुराना कद्दू , अदरक, ककड़ी, खीरा, चुकंदर,धनिया हल्दी, हरी मिर्च, हींग, अजवाइन, दालचीनी, छोटी इलायची, पत्ते वाली गोभी आदि को खाना चाहिए |
  • पथरी में फलों में आम, खरबूजा, तरबूज, अंगूर, पपीता, खीरा, नारियल, नाशपाती, अनन्नास, सेब, ककड़ी, गाजर आदि अपनी इच्छानुसार खाएं।
  • पथरी में आलू, इलायची तथा गन्ना भी फायदेमंद है।
  • पथरी में गेहूं के आटे से चोकर निकाल कर बनी चपाती खाएं।
  • पथरी के रोगी के आहार में जौ से बनी चीजें जैसे-चपाती, धानी, सत्तू को शामिल करें।
  • पथरी के दर्द के समय जौ, अलसी के बीजों का पानी पीना चाहिए |
  • गर्म पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में कई बार पीना चाहिए ।
  • पेशाब के निर्माण को बढ़ाता है तरबूज : तरबूज शरीर में जाकर पेशाब के निर्माण को बढ़ा देता है। इसी के साथ इसमें पोटेशियम भी होता है, जो किडनी स्टोन को घुलने में मदद करता है। इसलिए पथरी में तरबूज भी खाना चाहिए |

  • कैल्शियम स्टोन का खतरा कम करता है नींबू : नींबू का रस पेशाब में साइट्रेट का स्तर बढ़ा देता है, जो कैल्शियम स्टोन का खतरा कम करता है। साथ ही यह मौजूद पथरी को बड़ा भी नहीं होने देता, लेकिन ध्यान रखें कि नींबू का रस बिल्कुल शुद्ध हो यानी उसमें कुछ और चीज न मिली हुई हो। सेब, नींबू, और संतरे को मिलाकर बनाया गया जूस भी पथरी में लाभकारी है |

  • पथरी में अच्छा है नारियल पानी : नारियल का पानी किडनी की बेहतरी और पथरी के लिए बहुत अच्छा है।
  • नई पथरी बनने से रोकती है मूली : मूली न केवल किडनी में बन गई पथरी के मामले में राहत पहुंचाती है, बल्कि नई पथरी को बनने से भी रोकती है। पथरी में मूली का आधा कप रस रोज सुबह खाली पेट लेने की सलाह दी जाती है। मूली में काफी मात्रा में पोटेशियम होता है, जो यूरिनरी कैल्शियम को कम करके नई पथरी बनने से रोकता है। यह पेशाब का निर्माण बढ़ाकर किडनी की सफाई में भी मदद करती है। 
  • पथरी को रोकने की हर चीज है केले में : केले में विटामिन बी-6 है। इसमें नमक कम है और पोटेशियम ज्यादा है। इसमें फाइबर हैं और मैग्नीशियम है यानी केले में वे सारी चीजें हैं, जो पथरी में फायदा करती हैं। केला हमें किडनी के कैंसर से भी बचने में मदद करता है।
  • यूरिक एसिड को कम करती है हर्बल टी : हर्बल टी किडनी में बनने वाले यूरिक एसिड की मात्रा को कम करती है, जिससे पथरी बनने का खतरा कम होता है। इसलिए हर्बल टी का इस्तमाल पथरी में जरूर करना चाहिए।
  • किडनी के आकार को छोटा कर सकता है अनानास : पथरी या किडनी से जुड़ी समस्या में अनानास इसलिए लाभकारी है क्योंकि इसमें सबसे अलग एंजाइम होता है, जिसे ब्रोमेलिन कहते हैं। ब्रोमेलिन की खासियत यह है कि यह प्रोटीन को तोड़ने में मदद करता है। इसका अर्थ यह हुआ कि किडनी की स्थिति में अनानास पथरी के आकार को छोटा करने में मददगार बन सकता है। अनानास में विटामिन सी और पोटेशियम भी है, जिससे यह पथरी से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी है।
  • पथरी में बहुत लाभदायक है करेला : करेले में पोटेशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए पथरी की समस्या में करेला भी एक मददगार सब्जी है। यह लिवर और ब्लेडर को भी ठीक रखता है। करेले के जूस के 21 फायदे तथा जूस बनाने की विधि
  • पथरी में आडू भी है लाभदायक फल : आडू में आयरन, जिंक, मैग्नीशियम, मैगनीज, कैल्शियम, सल्फर और विटामिन ए, बी, सी और ई जैसे तत्व होते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। चूंकि इसके रस की तासीर क्षारीय होती है, इसलिए यह पेट संबंधी समस्याओं जैसे अपच, गैस, एसिडिटी, कब्ज आदि में फायदेमंद होता है। यह किडनी के लिए फायदेमंद है और किडनी व गॉल ब्लेडर की पथरी को घोलने की क्षमता रखता है।

पथरी तोड़ने के लिए जाना जाता है हॉर्स ग्राम (Horse gram)

हॉर्स ग्राम को पथरी में बहुत लाभदायक माना गया है। आयुर्वेद चिकित्सा में तो इसका नाम खास तौर से लिया जाता है। इसके दानों को रात में पानी में भिगोकर रखा जाता है और सुबह को पानी समेत इन्हें खाया जाता है। हॉर्स ग्राम को इस्तेमाल करने का एक तरीका और है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात में तीन किलो पानी में ढाई सौ ग्राम हॉर्स ग्राम भिगो दें। सुबह को पानी को धीमी आंच पर इतना गर्म करें कि पानी एक किलो ही रह जाए। अब 30 से 50 ग्राम मक्खन गरम करें और उसमें एक किलो पानी वाले हॉस ग्राम को मिला दें। उसमें थोड़ा काला नमक, काली मिर्च, हल्दी और जीरा भी डाल दें। अब इस सूप की करीब ढाई सौ ग्राम मात्रा दोपहर के वक्त भोजन के स्थान पर लें यानी भोजन न करें, केवल यही सूप लें। यदि भूख काबू में न आ रही हो तो एक रोटी खा सकते हैं। इस विधि को पथरी में रोजाना इस्तेमाल करें। विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्स ग्राम न केवल पथरी को तोड़ता है, बल्कि नई पथरी बनने से भी रोकता है। इसलिए पथरी में विशेष तौर पर इसका सेवन करना चाहिए |

जितना पानी ज्यादा, उतना ही फायदा 

पथरी से राहत पानी के बिना नहीं मिलेगी। जितना ज्यादा पानी पीएंगे, उतना ही फायदा होगा। पानी तो किसी समस्या के भी शरीर के लिए लाभकारी है, इसलिए खूब पानी पीएं। 10 से 12 गिलास पानी पथरी की समस्या में जरूर पीना चाहिए। रात को सोने से पहले भी पानी जरूरी पीएं। इससे काफी लाभ होता है। दिन में, शाम को, रात में, जब भी भोजन करें, लघुशंका के लिए जरूर जाएं। चाहे थोड़ा-सा ही पेशाब आए, लेकिन जरूर जाएं। इससे भी नई पथरी को बनने से रोकने में मदद मिलती है। यह भी ध्यान रहे कि पानी साफ और शुद्ध होना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, पथरी होने पर हमें ऐसा भोजन करना चाहिए, जिसमें ये पदार्थ कम हों- ऑक्सलेट, फास्फेट, सोडियम, प्रोटीन और विशुद्ध रूप से कैल्शियम के धनी पदार्थ । 
पोटेशियम-मैग्नीशियम : पथरी की समस्या से बचने के लिए हमें ऐसा भोजन ज्यादा करना चाहिए, जिसमें -पोटेशियम, मैग्नीशियम, तरल पदार्थ ज्यादा हों | किडनी स्टोन में भोजन की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता इसलिए अगर आप इस रोग से पीड़ित है तो दवाई से साथ साथ आहार का भी विशेष तौर पर ध्यान रखें | अगले पोस्ट में हम बताएँगे की पथरी में क्या नहीं खाना चाहिए |

पथरी में मरीजो द्वारा पूछे जाने वाले आम प्रश्न

सवाल : गुर्दे में बनी पथरी के अपने से निकलने की क्या संभावना होती है?
जवाब : यह पथरी के आकार और आकृति पर निर्भर करता है। पथरी अगर 7 मिलीमीटर से छोटी है तो उसके पेशाब के साथ अपने से निकल जाने की 90 प्रतिशत संभावना होती है। पर जैसे-जैसे आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे उसके अपने से निकलने की दर घटती जाती है।
सवाल : गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन करवा लेने पर क्या यह फिर से हो सकती है?
जवाब : हां। इसका काफी रिस्क होता है। इसका संबंध बहुत-कुछ खानपान से होता है। इस परेशानी से बचने के लिए रोज कम से कम 4-5 लीटर पानी और दूसरे पेय पदार्थ लें। साधारण पानी, जौ का पानी, शिकंजी और अनानास का जूस इस लिहाज से सबसे अच्छे हैं।
सवाल : गुर्दे की पथरी दुबारा न बनने देने के लिए क्या-क्या उपाय करना उपयोगी है?
जवाब : रोज 2-3 लीटर पानी और दूसरे पेय पदार्थ ग्रहण करें। गर्मियों के दिनों में शरीर में पानी की मात्रा पर विशेष ध्यान दें। भोजन में कैल्सियम की कुल मात्रा सीमित रखें। पहले हुई पथरी की रासायनिक जांच करा कर डाइटीशियन की सलाह से उन भोज्य पदार्थों का परहेज रखें जिनमें पथरी में पाए गए रसायनों की भरमार होती है। जो हमने भी अपनी वेबसाइट पर बताए हैं |



About allinoneindia.net


Welcome to All In One India | allinoneindia.net is a junction , where you opt for different service and information.

Follow Us


© 2016 to 2018 www.allinoneindia.net , All rights reserved.