चिंता को दूर करने के आसान तरीके


चिंता को दूर करने के आसान तरीके

 काम पर ध्यान न होना, दैनिक जीवन में चिंता के शारीरक और भावनात्मक लक्षण ह्रदय की धड़कन का बढ़ना, लगातार सोते रहना, पढाई में ध्यान न होना और दोस्त, परिवार और अपने सहकर्मियों की बातो पर ध्यान ना होना है।
हम कभी-कभी डरावने अनुमानों के साथ भविष्य का अंदाज़ा लगाते है जो कभी भी सच के आधार पर नही होते। काम पर ध्यान न होना, दैनिक जीवन में चिंता के शारीरक और भावनात्मक लक्षण ह्रदय की धड़कन का बढ़ना, लगातार सोते रहना, पढाई में ध्यान न होना और दोस्त, परिवार और अपने सहकर्मियों की बातो पर ध्यान ना होना है।

हम कभी-कभी डरावने अनुमानों के साथ भविष्य का अंदाज़ा लगाते है जो कभी भी सच के आधार पर नही होते। काम पर ध्यान न होना, दैनिक जीवन में चिंता के शारीरक और भावनात्मक लक्षण ह्रदय की धड़कन का बढ़ना, लगातार सोते रहना, पढाई में ध्यान न होना और दोस्त, परिवार और अपने सहकर्मियों की बातो पर ध्यान ना होना है। चिंता और दुःख भविष्य में आने वाली मुश्किलों की पहले से दी हुई शारीरिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया है। चिंता की वजह से हमारे जीवन में कयी मुश्किलें आती है और इसके चलते हम कयी भूल भी कर देते है जैसे कही बाहर जाते समय चाबी भूल जाना और सुबह बिना वजह की घाई करना इत्यादि। आप यह आसान उपाय अपनाकर अपनी चिंता को आसानी से दूर कर सकते हो।

– चिंता को दूर करने के आसान उपाय –

1. स्वप्न फलक बनाने की कोशिश करे –
चिंता हमेशा भविष्य को लेकर ही होती है जो हमें डरावना और काला दिखायी देता है इसीलिए अपने दिमाग के विचारो को बदलने की कोशिश करते रहे। जब भी आपको लगे की कोई चिंता आपको सताये जा रही है तब दिमाग में भविष्य को लेकर अच्छे सपने देखने की कोशिश करे, इससे आपकी 90% चिंता दूर हो जाती है। सपने देखने की जगह आप भविष्य में अपने लिए किसी अच्छे और खुबसूरत लक्ष्य का निर्माण भी आप अपने दिमाग में कर सकते है।

2. पर्याप्त नींद ले –
पर्याप्त नींद ना होने की वजह से आपको कभी-कभी गंभीर समस्या भी हो सकती है। इसका असर सिर्फ आपके शारीरिक स्वास्थ ही नही बल्कि पूरी नींद ना होने से आपकी चिंता और तनाव और भी बढ़ जाती है। और कभी-कभी तो इससे कष्टदायक समस्या भी हो सकती है और चक्कर भी आ सकते है। इसीलिए जब भी आपको चिंता हो तो 7 से 9 घंटो तक सोने की कोशिश करे। ऐसा करने से आपका दिन चिंतामुक्त हो जायेगा।

3. दिमाग को अस्त-व्यस्त ना करना –
 दिमाग में एकसाथ बहुत सारे काम होने से आराम करना मुश्किल हो जाता है और आप लगातार कभी न खत्म होने वाले काम करते रहते हो। इसीलिए कामो को बाटकर उन्हें पर्याप्त समय देने की कोशिश करे और हर काम होने के बाद थोडा सा आराम कर लेवे। इससे आपके दिमाग पर ज्यादा प्रेशर नही पड़ेगा और आप और आपका दिमाग दोनों ही चिंतामुक्त रहेंगे। ऐसा करने से आपका दिमाग भी स्वस्थ रहेगा और चिंता की भी कोई गुंजाईश नही होगी।

4. साँस लेने की कोशिश करना –
दर्द भरे अटैक से बचने के लिए साँस महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। जब भी आपको चिंता या तनाव की अनुभूति हो। तब धीरे-धीरे साँस लेते रहे, इससे आपका दिमाग और आपका शरीर दोनों शांत रहेंगे। लगातार और लंबी साँस लेते रहने से आपके दिमाग को शांत रहने का संदेश मिलता है। अभ्यास से यह पता चला है की साँस लेने के तरीके का सीधा असर आपके दिमाग और आपके शरीर पर होता है।

5. शांत रहे –
जब आप पूरी तरह से चिंता से ग्रस्त हो तब शांत ही रहने की कोशिश करे। मतलब ना ही किसी फोन का उपयोग करे, ना ईमेल करे, ना टीवी देखे, ना न्यूज़ देखे और कुछ भी ना करे। लोगो को इस बात का अंदाज़ा होने दीजिये की आप चिंता में नही है और फ्री है। क्योकि अभ्यास से यह पता चला है की शोरगुल से आपकी चिंता का स्तर और भी बढ़ जाता है। इसीलिए दैनिक जीवन में काम करने के साथ-साथ कुछ समय शांत रहना भी बहुत जरुरी है।

6. सही और अच्छा खाना खाये –
चिंता सीधे हमारे शरीर पर प्रहार करती है – हमारी भूख बदल सकती है या हम लगातार किसी खाद्य पदार्थ की लालसा करते रहते है। लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपको न्यूट्रीशन से भरपूर खाद्य जैसे विटामिन बी और ओमेगा 3 एस से युक्त खाद्य और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने की जरुरत है। अभ्यास से यह पता चला है की विटामिन बी मानसिक स्वास्थ के लिए अच्छा है और ओमेगा 3 एस से आपकी चिंता भी दूर होती है। जबकि कार्बोहाइड्रेट से आपका शरीर शांत और स्वस्थ रहता है। और अभ्यास से यह भी पता चला है की शक्कर युक्त खाद्य पदार्थ खाने से आपकी चिंता और आपका तनाव और भी बढ़ सकता है।

7. खेलने की कोशिश करे –
चिंता के समय आप कयी पालतू जानवरों के साथ समय बिता सकते हो या उनके साथ खेल भी सकते हो। जबतक ऑफिस से हमें रिसेस (भोजन) की छुट्टी नही मिलती तबतक आपको खुद की जिम्मेदारी स्वयं ही उठानी पड़ेगी। इसके लिए आप अपने किसी दोस्त के पालतू कुत्ते को कही बाहर टहलने भी ले जा सकते हो या फिर किसी नवजात शिशु के साथ खेल भी सकते हो।

 व्यक्तित्व विकास 

आज व्यक्तित्व विकास का हमारे जीवन में बहोत महत्त्व है। लेकिन व्यक्तित्व विकास मतलब क्या? क्या इसका मतलब आप कैसे दीखते है या कैसे बोलते है? से है या कितनी आसानी से आप लोगो से जुड़ते हो? से है. देखा जाये तो व्यक्तित्व विकास इनमे से कुछ नही है। आज के आधुनिक युग में हमें समय के साथ-साथ स्मार्ट और तेज़ बनने की जरुरत है। अब वो युग नही रहा की आप अपने कामो को करने में कितनी मेहनत करते हो बल्कि आज का युग प्रतियोगिता का युग है और यहाँ व्यक्तित्व विकास बहोत मायने रखता है।

हाव-भाव की भाषा (Body Language) पर काम करे
  • एक अच्छे श्रोता बने
  • हमेशा अपनी राय (सलाह) रखे
  • अपने बाह्य रूप में सकारात्मकता बनाये रखे
मजबूत फौलादी शरीर बनाने के लिए प्रयोग करें हल्दी का कैल्शियम हमारे शरीर के लिए एक बहुत ही जरुरी मिनरल है। जिसकी थौड़ी सी भी कमी हमें प्रोब्लम में डाल सकती है। अतः यह जरुरी है कि हम अपनी डाइट में पर्याप्त रुप से इसे रखें। वरना अनेक रोगों से ग्रसित होने के लिए तैयार रहें।

यह कैल्शियम ही है जो हमारे शरीर में हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है और हमारे दाँत भी कैल्शियम से ही निर्मित हैं। कैल्शियम की कमी हड्डियों को कमजोर बना कर रिकेट्स नामक रोग तो पैदा करती ही है साथ ही हमारी मसल्स में भी अकड़ाव के लिए कैल्शियम ही जिम्मेदार है। इसी की कमी से जब मसल्स अकड़ जाती हैं तो ज्वाइंट पैन शुरु हो जाता है और यह लगातार बना रह सकता है। कैल्शियम की कमी से महिलाओं में तो अनेकों रोग पैदा होते हैं क्योंकि एक युवा औरत को युवक से ज्यादा कैल्शियम की जरुरत होती है । अतः यह जरुरी है कि हम अपनी डाइट में पर्याप्त रुप से कैल्शियम को शामिल करें।
हल्दी पुराने समय से ही हमारी चिकित्सा पद्धति में प्रयोग होती रही है और खासकर हड्डियों व मसल्स के रोगों के लिए जानी जाती है थोड़ी सी भी चोट लगी हमारी माँ या दादी माँ तुरन्त ही हल्दी दूध के साथ लेने की सलाह देती सुनी जाती है अगर चोट खुली है तो हल्दी व तेल का बना मरहम लगा दिया जाता है और वाकई इसका कमाल का काम होता है। 

सेवन से लाभ

इस हल्दी का प्रयोग आपकी  कुपोषण, बीमारी व भोजन की अनियमितता व संतुलित मात्रा में न लिए गये पोषक तत्वों की पूर्ति में सहायक होगा जिसके कारण शरीर में कैल्शियम की कमी बहुत जल्दी दूर हो जाती है और शरीर में जोड़ों का  दर्द  भी ठीक हो जाता है।
बढ़ते बच्चों को अपेक्षाकृत अधिक कैल्शियम की जरुरत होती है यह नुस्खा बहुत ही अधिक लाभदायक है क्योंकि उनकी मिनरल्स की कमीं की पूर्ति करके उन्हैं पूर्णतः निरोगी बनाने में मदद करता है।यह एक ऐसा टाँनिक है जो आपके बच्चे का पूर्ण विकास करता है। यह नुस्खा टूटी हड्डी को जोड़ने व जोड़ों कमर व अन्य स्थानों पर हो रहे वात जनित दर्द में भी रामवाण का कार्य करता है। कई बार रात में सोते सोते कमर व गर्दन में एक ही तरफ लेटे रहने के कारण असहनीय पीड़ा होती है यह हल्दी वहाँ भी बहुत फायदा करके आपको जल्दी ही स्वास्थ्य लाभ कराती है।



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