यमुना नदी का प्रदूषण


यमुना नदी का प्रदूषण

दिल्ली की यमुना में इन्डस्ट्रियल वेस्ट की वजह से उस पर सफेद झाग की परत जम गई है। नदी के पानी में मानव व जानवरों के मल से भरपूर हजारों लीटर दूषित सीवर का पानी बिना साफ किए रोजाना छोड़ा जा रहा है. यमुना किनारे पूर्वी व दक्षिण दिल्‍ली में उगाई जाने वाली सब्जियों में उच्‍च मात्रा में धातु सामग्री और मलीय पदार्थ होते हैं जिन्‍हें खाने से पेट की गंभीर समस्‍याएं हो सकती हैं.

यमुना नदी का प्रदूषण

दिल्ली की यमुना में इन्डस्ट्रियल वेस्ट की वजह से उस पर सफेद झाग की परत जम गई है। एक्सपर्ट का कहना है कि औद्योगिक कचरे से यमुना का प्रवाह थम गया है। जानकारी के मुताबिक ये नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। कुछ साल पहले इस नदी की कुछ फोटोज भी सामने आई थीं। इनमें महिलाएं छठ पूजा भी इसी झाग वाले प्रदूषित पानी में कर रही थीं। इस पूजा के लिए उनको नदी में कमर तक उतरना होता है लेकिन प्रदूषित होने के बाद भी महिलाओं ने इस नदी में पूजा की थी। 

पक्षियों की संख्या भी हुई कम... 
  • यमुना का प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि यहां पक्षियों की संख्या करीब 80 फीसदी तक गिर गई है।
  • यह आंकड़े एशियन वाटर बर्ड-2018 की गणना में सामने आए हैं।
  • इन आंकड़ों के मुताबिक यमुना क्षेत्र में वजीराबाद से निजामुद्दीन तक इस साल मात्र 594 पक्षी देखे गए, जबकि साल 2016 में यहां पक्षियों की संख्या 2640 थी।
  • इस तरह यहां इस साल करीब 78 फीसदी कम पक्षी देखे गए।

2000 से 99 रह गई पक्षियों की संख्या

  • दिल्ली में एशियन वाटर बर्ड गणना के कॉर्डिनेटर टीके रॉय ने बताया कि इस बार यमुना क्षेत्र में पक्षियों की गणना में ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट की संख्या ही 100 के पार है।
  • रॉय ने बताया कि पिछले साल ब्लैक हेंडेड गुल की संख्या करीब 2000 के पास थी, लेकिन इस बार इनकी संख्या 99 ही है।
  • उन्होंने कहा कि यमुना बुरी तरह से प्रदूषित है और जलीय जीवन का हैबिटेट तेजी से बिगड़ रहा है। यह भी कारण है कि पक्षियों की संख्या घट रही है। 
  • यमुना किनारे पक्षियों में रेड वेंटलेड लैपविंग भी शामिल है। ये प्रवासी पक्षी हैं, इस साल संख्या में कमी दर्ज की गई। 

यमुना के पानी में उगे जहरीले फल व सब्जियां

दिल्‍ली के बीच से बहने वाली यमुना नदी के आसपास सड़क के किनारे बिकने वाली सब्जियां हो सकता है आपको भी ताजा और मंडी के मुकाबले सस्‍ती लगती हों. लेकिन इनकी ताजगी के पीछे के सच को जानने के बाद शायद आप इनकी तरफ देखना भी न चाहें. ये सभी सब्जियां यमुना किनारे उसी का पानी इस्‍तेमाल करके उगाई जाती हैं और आप तो जानते ही हैं कि यमुना का पानी किस हद तक गंदा हो चुका है.

दिल्ली विश्‍वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज के तीन एसोसिएट प्रोफेसरों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि नदी के पानी में मलीय पदार्थ की मात्रा तेजी से बढ़ी है. यह मात्रा 2009 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निष्कर्षों के बाद से तेजी से बढ़ी है. मानव और पशुओं के मल में उपलब्ध जीवाणु- मलीय कॉलिफोर्म (Fecal coliform) की मात्रा सीपीसीबी के निष्‍कर्षों के मुकाबले 30 प्रतिशत बढ़ चुकी है.

मलीय कॉलिफोर्म के इस खतरनाक स्‍तर को देखते हुए अंदाजा लगाया जा सकता है कि नदी के पानी में मानव व जानवरों के मल से भरपूर हजारों लीटर दूषित सीवर का पानी बिना साफ किए रोजाना छोड़ा जा रहा है. यमुना किनारे पूर्वी व दक्षिण दिल्‍ली में उगाई जाने वाली सब्जियों में उच्‍च मात्रा में धातु सामग्री और मलीय पदार्थ होते हैं जिन्‍हें खाने से पेट की गंभीर समस्‍याएं हो सकती हैं.

इस एक साल तक चलने वाले अध्‍ययन की शुरुआत पिछले साल जून में की गई थी और हर तीन महीने में नमूने इकट्ठे करके टेस्‍ट किए जाते हैं. दिसंबर में हुए टेस्‍ट के अनुसार निजामुद्दीन पुल के पास प्रति 100 मिली लीटर पानी में 9.3 करोड़ मलीय कॉलिफोर्म पाए गए. ओखला बैराज के पास सबसे कम मलीय सामग्री पाई गई और यह प्रति 100 मिली लीटर 5.2 करोड़ थी. इससे पहले सीपीसीबी की जांच में यह 57 लाख और 30 लाख प्रति 100 मिली लीटर पायी गई थी. मलीय कॉलिफोर्म सीवर से आता है और सीवर को सीधे यमुना में छोड़ दिया जाता है. ज्‍यादातर लोगों को तो इस बात जानकारी भी नहीं है कि इससे उनकी सेहत पर कितना बुरा असर पड़ता है. यही नहीं यमुना के पानी में ज्‍यादातर जगहों पर ऑक्‍सीजन शून्‍य पायी गई, इसका मतलब यह हुआ कि इस पानी में कोई जीव जीवित नहीं रह सकता.

यमुना के पानी में उगी सब्जियों का धड़ल्‍ले से व्‍यापार

दीन दयाल उपाध्‍याय कॉलेज के कैमिस्‍ट्री विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर विनोद कुमार के अनुसार जब यमुना पल्‍ला से दिल्‍ली में आती है तो पानी की गुणवत्ता बेहतर है. विनोद कुमार के साथ इस अध्‍ययन में कैमिस्‍ट्री और बॉटनी विभाग से डॉ. महावीर और डॉ. राजकुमारी सनमैया भी शामिल हैं. उन्‍होंने बताया कि यमुना के पानी में अगर कोई जीवित है तो वह जलकुंभी है, जिसे कुछ साल पहले प्रदूषण को अवशोषित करने के लिए लगाया गया था.

इसके अलावा यमुना का पानी अब सीवर के पानी से किसी भी सूरत में बेहतर नहीं है. यमुना के इसी पानी को सब्जियां व फल उगाने, मंडियों में सब्जियां धोने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है, जहां से इन्‍हें शहर के अन्‍य हिस्‍सों में बेचने के लिए भेजा जाता है. यमुना के पानी में उगी सब्जियों का धड़ल्‍ले से व्‍यापार हो रहा है. उदाहरण के लिए ओखला मंडी में आने वाली सब्जियां और और फल ओखला बैराज के आसपास और वजीराबाद में यमुना नदी के पास उगाई जाने वाली सब्जियां आजादपुर मंडी में बिकती हैं.

मलीय सामग्री सीवर के पानी के साथ बढ़ती रहती है और दिल्‍ली के विभिन्‍न इलाकों से सीवर का पानी सीधे यमुना में छोड़ दिया जाता है. टॉक्सिक्‍स लिंक के संस्‍थापक रवि अग्रवाल कहते हैं कि मलीय सामग्री निजामुद्दीन पुल के बाद शिखर पर पहुंच जाते हैं. यहां से आगे उगने वाली सब्जियां ओखला मंडी से दक्षिण दिल्‍ली, फरीदाबाद और गुडगांव के बाजारों में बिकती हैं. डॉक्‍टरों ने चेतावनी दी है कि सभी सब्जियों को विशेषकर हरी पत्तेदार सब्जियों को अच्‍छी तरह धोकर ही पकाएं ताकि बै‍क्‍टीरिया आपके पेट के साथ खेल न पाएं. इस तरह का भोजन करना उल्‍टी, डायरिया, पेट में जलन, रक्‍त संक्रमण, डिहाइड्रेशन, मूत्र संक्रमण और किडनी रोगों का कारण बन सकता है.

डॉक्‍टरों के अनुसार इस तरह के मरीजों की संख्‍या हाल ही में तेजी से बढ़ी है. हरी पत्तेदार सब्जियों को बार-बार धोकर पकाना चाहिए और कच्‍ची सब्जियां खाने से बचना चाहिए. यहां तक कि पूर्वी दिल्‍ली में बिक रहे अमरूद और सलजम को भी यमुना के पानी में धोया जा रहा है. निजामुद्दीन और गीता कॉलोनी में लोग इन सब्जियों को खरीदते हुए मिल जाएंगे. हालांकि पकाकर खाने से मलीय सामग्री अच्‍छे से नष्‍ट हो जाती है लेकिन लोग इन्‍हें कच्‍चा भी खाते हैं.

आगरा-दिल्ली वालों को धीरे-धीरे नपुंसक बना रही है यमुना नदी

जरूरी नहीं है कि आप अगर यमुना नदी से सटे इलाकों में रहते हैं, तभी आप पर खतरा मंडरा रहा है। सच तो यह है कि पूरी दिल्ली और आगरा, मथुरा जैसे शहरों के लोगों के लिये यमुना नदी स्लो प्वाइंजन बन चुकी है। यह बात हम नहीं बल्क‍ि दि एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट कह रही है। रिपोर्ट की गहरायी में जायेंगे तो आपको पता चलेगा कि यमुना नदी आगरा, दिल्ली और सटे हुए शहरों के लोगों को धीरे-धीरे नपुंसक बना रही है।

सबसे पहले हम आपको दिल्ली की सब्जी मंडी में लेकर चलते हैं, जहां हरी भरी साग सब्जियां आपको अपनी ओर खींचती हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि इन सब्जि‍यों को पैदा करने से लेकर धुलाई तक में और सिंचाई से छिड़काव तक जिस पानी का इस्तेमाल हो रहा है, वो जहरीला हो चुका है। वो जहर जो आपके शरीर में कैंसर पैदा कर सकता है। दिल्ली से गुजरने वाली यमुना नदी का पानी इतना दूषित हो चुका है कि वहां आस पास के इलाकों में हो रही धड़ल्ले से खेती का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। यहां उगाई जा रही सब्जियां दिल्ली और आसपास के इलाकों में पहुंच तो जाती हैं पर यमुना नदी के जिस पानी से होकर ये सब्जियां गुजरती हैं, वह बिल्कुल भी साफ नहीं है।

वजीराबाद पुल से लेकर कालिंदी कुंज तक करीब 22 किलोमीटर की दूरी में 3000 हेक्टेयर पर खेती की जा रही है। इससे मौसमी सब्जियां दिल्ली की अलग-अलग मंडियों में पहुंच तो रही हैं, लेकिन न तो नदी का पानी साफ है और न ही ग्राउंड वाटर। दी एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट यानी टेरी की रिपोर्ट तो इस बात की तरफ भी इशारा करती है कि यमुना के आसपास की मिट्टी भी खेती के लिहाज से खराब हो चुकी है।

अब बात इस मिट्टी और पानी से उगने वाली साग-सब्जियों की। गोभी, बैंगन, मूली, गाजर, बथुआ, मेथी, पालक, हरी मिर्च, धनिया और इसके अलावा मौसमी सब्जियां इस जमीन की अहम पैदावार में से हैं। इतना ही नहीं कई जगहों पर तो यमुना के पानी में ही इन सब्जियों की धुलाई भी की जाती है तो दूसरी तरफ किसानों ने खेतों में ट्यूबवेल लगा रखा है, लेकिन जमीन से निकलने वाला पानी भी मापदंड पर खरा नहीं उतरता। इस पानी पर भी यमुना के प्रदूषण का असर है।

कालिंदीकुंज से जैतपुर जाने के लिए जैसे ही मुड़ेंगे तो दाहिनी तरफ यमुना से निकलने वाली नहर में हरी सब्जियों का काला सच आपको दिखेगा। जहां बने घाट पर हर तरह की साग सब्जियां गंदे पानी में धुलती नजर आएंगी। 

वजीराबाद से लेकर जैतपुर तक यमुना में 22 नाले गिरते हैं। दरअसल, जब पानी और फिर मिट्टी में जहर मौजूद हो तो सब्जियां इससे अछूती कैसे रह सकती है।

दि एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में सामने आयीं ये बातें- 
  • यमुना के आसपास के आसपास की मिट्टी भी खेती के लिहाज से खराब हो चुकी है। 
  • यहां जो भी सब्जी उगाई जाती हैं उनमें वो धातु पाये जा रहे हैं, जो नदी किनारे पाये जाते हैं। 
  • गोभी, बैंगन, भिंडी, पालक यह कुछ ऐसी सब्जियां हैं जिनकी पैदावर यहां अधिक है। 
  • यमुना के पानी में निकेल, लेड, मैगनीज, क्रोमियम सरीखे हेवी मेटल खतरे की तय सीमा से कई गुना बढ़ गये हैं। 
  • इस प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण आसपास में मौजूद कारखाने हैं, जहां से निकलने वाले अपश‍िष्ट नदी में मिलते हैं।

यमुना नदी की गाद

  1. यमुना नदी में भारी धातु यमुना की गाद में औसतन लेड 57 मिग्रा/किग्रा, कैडमियम 0.38मिग्रा/किग्रा है। 
  2. इस गाद में क्रोमियम 796मिग्रा/किग्रा और आर्सेनिक की मात्रा 11मिग्रा/किग्रा मौजूद है। इसी में उगायी जाती हैं सब्ज‍ियां ये खतरनाक तत्व यहां उगाई जाने वाली सब्जि‍यों में भी पाये जा रहे हैं। भले वह बारिश के पहले हो या बाद में। 
  3. सब्ज‍ियों के माध्यम से यही धातु हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। ये सब्जी है खतरनाक यमुना में हेवी मेटल्स की मात्रा इतनी ज्यादा हैं कि इन सब्जियों को अच्छे से धोने और उबालने के बावजूद कहीं न कहीं यह हानिकारक धतु रह जाते हैं।

इन सब्जि‍यों को खाने से क्या-क्या हो सकता है और कौन-कौन सी बीमारियां लग सकती हैं?

  1. लेड के कारण नपुंसकता लेड के कारण नपुंसकता बढ़ती है और यौन समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। लेड की वजह से हृदय रोग, किडनी डैमेज, एनीमिया हो सकता है। लेड के कारण किडनी व लीवर डैमेज हो सकता है। लेड के कारण हमारा नर्वस सिस्टम ही बिगड़ सकता है। 
  2. कैडमियम के कारण त्वचा रोग कैडमियम की वजह से त्वचा रोग हो सकते हैं। कैडमियम के कारण तेज़ बुखार होने लगता है, जो जल्दी उतरता नहीं। कैडमियम के कारण आर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है। कैडमियम के कारण सूंघने की क्षमता कम होने लगती है। 
  3. मूत्र में जलन आर्सेनिक की वजह से ब्लड कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आर्सेनिक की वजह से मूत्र में जलन, मूत्राशय में कैंसर पैदा हो सकता है। आर्सेनिक की वजह से त्वचा में सफेद दाग पड़ने लगते हैं। आर्सेनिक की वजह से उल्टी दस्त होने लगते हैं। 
  4. आंखों में जलन क्रोमियम की वजह से आंखों में ग्लूकोमा हो जाता है। मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रोल बढ़ता है जिससे हृदय रोग हो सकता है। पेट संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। मासिक धर्म थम जाता है महिलाओं के शरीर में पहुुंचने के बाद क्रोमियम कैलश‍ियम की कमी पैदा करने लगता है और हड्ड‍ियां कमजोर पड़ने लगती हैं। यही नहीं इसके कारण मासिक धर्म अनियमित होने लगता है और ज्यादा गंभीर होने से थम जाता है।

टॉक्सिक्स लिंक

टॉक्सिक्स लिंक के एक शोध के मुताबिक, यमुना के गाद में मौजूद हेवी मेटल्स पोषक तत्वों के साथ सब्जियों में पहुंच रहे हैं। यमुना की गाद को लेकर शोध प्री मॉनसून भी किया गया और पोस्ट मॉनसून भी। कायदे से पोस्ट मॉनसून में खतरनाक तत्वों की मात्रा कम होनी चाहिए थी, लेकिन हैरान करने वाली बात है कि कई खतरनाक तत्वों की मात्रा पोस्ट मॉनसून में बढ़ी आई और अगर औसत की बात की जाए या फिर तत्वों की मौजूदगी की तो यमुना की गाद में लेड 57 mg\ किलोग्राम तक मिला। वहीं कैडमियम 0.38 mg\ किलोग्राम, क्रोमियम 796 mg\ किलोग्राम तक। पारा करीब 5 mg\ किलोग्राम और आर्सेनिक 11 mg प्रति किलोग्राम की मौजूदगी मिली।

टॉक्सिक्स लिंक के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉक्टर प्रशांत राजंकर ने बताया कि एक चीज तो इस शोध में साफ हो गई कि खतरनाक तत्वों की मौजूदगी लगातार बनी है। वह बारिश के पहले हो या फिर बाद में। और साग सब्जी इन तत्वों से अछूती नहीं रह सकती जो यमुना के किनारे उगाई जा रही हैं और हेवी मेटल्स अगर एक बार सब्जी में पहुंच जाएं तो धो लीजिए या फिर सब्जी को उबाल लीजिए, उनकी मौजूदगी रहेगी ही। यानी इन इलाकों में उगने वाली साग-सब्जियां स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक हैं। और अगर ऐसी सब्जियों को हम खा रहे हैं तो हमारे नर्वस सिस्टम में दिक्कत आ सकती है, मांसपेशियों में दर्द या फिर जोड़ों में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कमजोरी, थकावट, पेट दर्द, कब्जियत ये सब तो बड़ी सामान्य शिकायत हो सकती है। थायरॉइड, बांझपन, बच्चों में बर्थ डिफेक्ट, किडनी की समस्या, हार्ट को लेकर भी दिक्कत हो सकती है। 

चिंता नहीं नेताओं को 

  • यमुना नदी में इतना खतरनाक प्रदूषण हो रहा है और दिल्ली के चुनावों में इसका जिक्र नाम मात्र का है। केजरीवाल हों या मोदी या किरण बेदी या फिर अजय माकन, यमुना नदी को प्रदूषण रहित बनाने की बात कोई नहीं कर रहा है।
  • पर्यावरण के जानकार मनोज मिश्रा के अनुसार इसके लिए किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता यमुना के प्रदूषण के लिए बड़ी बड़ी इंडस्ट्री और शहर के नाले हैं।
  • जल्द ही ये रिपोर्ट उप-राज्यपाल के पास भेजी जायेगी। उप-राज्यपाल से हरी झंडी मिलते ही सरकार अंतिम फैसला लेगी। लेकिन इसके साथ ही ये सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यमुना साफ क्यों नहीं हो पा रही है। यमुना को इस हाल में पहुंचाने का जिम्मेदार कौन है?
  • सरकार के इस फैसले से हजारों किसानों के रोजगार पर असर पड़ेगा जिसे ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार की इस कमेटी ने ऐसे किसानों को फूलों की खेती करने सुझाव दिया है। लेकिन सब कुछ निर्भर करता है कि इन सिफारिशों पर उप-राज्यपाल क्या फैसला करते हैं।

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