कितना जरुरी है लक्ष्य बनाना


कितना जरुरी है लक्ष्य बनाना

जीवन में बिना लक्ष्य के काम करने वाले लोग हमेशा सफलता से दूर रह जाते हैं जबकि सच तो ये है कि तरह के लोग कभी सोचते ही नहीं कि उन्हें क्या करना है? 
अचानक एक चौराहे पर जाकर जाकर वो रुक गया उस चौराहे पे चार सड़क थीं जो अलग रस्ते पे जाती थीं। एक बूढ़े व्यक्ति से उस आदमी ने पूछा - सर ये रास्ता कहाँ जाता है ? बूढ़े व्यक्ति ने पूछा- आपको कहाँ जाना है? आदमी - पता नहीं, बूढ़ा व्यक्ति - तो कोई भी रास्ता चुन लो क्या फर्क पड़ता है । 
एक बार एक आदमी सड़क पर सुबह सुबह दौड़ (Jogging) लगा रहा था, अचानक एक चौराहे पर जाकर जाकर वो रुक गया उस चौराहे पे चार सड़क थीं जो अलग रस्ते पे जाती थीं। एक बूढ़े व्यक्ति से उस आदमी ने पूछा - सर ये रास्ता कहाँ जाता है ? बूढ़े व्यक्ति ने पूछा- आपको कहाँ जाना है? आदमी - पता नहीं, बूढ़ा व्यक्ति - तो कोई भी रास्ता चुन लो क्या फर्क पड़ता है । वो आदमी उसकी बात को सुनकर निःशब्द सा रह गया, कितनी सच्चाई छिपी थी उस बूढ़े व्यक्ति की बातों में। सही ही तो कहा जब हमारी कोई मंजिल ही नहीं है तो जीवन भर भटकते ही रहना है।

जीवन में बिना लक्ष्य के काम करने वाले लोग हमेशा सफलता से दूर रह जाते हैं जबकि सच तो ये है कि तरह के लोग कभी सोचते ही नहीं कि उन्हें क्या करना है? हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में किये गए सर्वे की मानें तो जो छात्र अपना लक्ष्य बना कर चलते हैं वो बहुत जल्दी अपनी मंजिल को प्राप्त कर लेते हैं क्यूंकि उनकी उन्हें पता है कि उन्हें किस रास्ते पर जाना है।

1. लक्ष्य एकाग्र बनाता है - अगर हमने अपने लक्ष्य का निर्धारण कर लिया है तो हमारा दिमाग दूसरी बातों में नहीं भटकेगा क्यूंकि हमें पता है कि हमें किस रास्ते पर जाना है? सोचिये अगर आपको धनुष बाण दे दिया जाये और आपको कोई लक्ष्य ना बताया जाये कि तीर कहाँ चलना है तो आप क्या करेंगे, कुछ नहीं तो बिना लक्ष्य के किया हुआ काम व्यर्थ ही रहता है। कभी देखा है की एक कांच का टुकड़ा धूप में किस तरह कागज को जला देता है वो एकाग्रता से ही सम्भव है।

2. आपकी प्रगति का मापक है लक्ष्य - सोचिये की आपको एक 500 पेज की किताब लिखनी है, अब आप रोज कुछ पेज लिखते हैं तो आपको पता होता है कि मैं कितने पेज लिख चूका हूँ या कितने पेज लिखने बाकि हैं। इसी तरह लक्ष्य बनाकर आप अपनी प्रगति(Progress) को माप(measure) सकते हैं और आप जान पाएंगे कि आप अपनी मंजिल के कितने करीब पहुंच चुके हैं। बिना लक्ष्य के नाही आप ये जान पाएंगे कि आपने कितना progress किया है और नाही ये जान पाएंगे कि आप मंजिल से कितनी दूर हैं?

3. लक्ष्य आपको अविचलित रखेगा - लक्ष्य बनाने से हम मानसिक रूप से बंध से जाते हैं जिसकी वजह से हम फालतू की चीज़ों पर ध्यान नहीं देते और पूरा समय अपने काम को देते हैं। सोचिये आपका कोई मित्र विदेश से जा रहा हो और वो 9:00 PM पे आपसे मिलने आ रहा हो और आप 8 :30 PM पे अपने ऑफिस से निकले और अगर स्टेशन जाने में 25 -30 मिनट लगते हों तो आप जल्दी से स्टेशन की तरफ जायेंगे सोचिये क्या आप रास्ते में कहीं किसी काम के लिए रुकेंगे? नहीं, क्यूंकि आपको पता है कि मुझे अपनी मंजिल पे जाने में कितना समय लगेगा। तो लक्ष्य बनाने से आपकी सोच पूरी तरह निर्धारित हो जाएगी और आप भटकेंगे नहीं।

4.लक्ष्य आपको प्रेरित करेगा - जब भी कोई व्यक्ति सफल होता हैं, अपनी मंजिल को पाता है तो एक लक्ष्य ही होता है जो उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। आपका लक्ष्य आपका सपना आपको उमंग और ऊर्जा से भरपूर रखता है।

तो मित्रों बिना लक्ष्य के आप कितनी भी मेहनत कर लो सब व्यर्थ ही रहेगा जब आप अपनी पूरी energy किसी एक point एक लक्ष्य पर लगाओगे तो निश्चय ही सफलता आपके कदम चूमेगी।

नौजवान पूछते हैं मैं अपने लक्ष्य कैसे हासिल कर सकता हूँ?

आप अपनी ज़िंदगी में क्या पाना चाहेंगे?
● ज़्यादा आत्म-विश्‍वास
● ज़्यादा दोस्त
● ज़्यादा खुशी

दरअसल आप तीनों पा सकते हैं! कैसे? इनका लक्ष्य रखने और हासिल करने के ज़रिए। नीचे दी बातों पर गौर कीजिए।

ज़्यादा आत्म-विश्‍वास : जब आप छोटे-छोटे लक्ष्य रखते हैं और उन्हें हासिल कर लेते हैं, तो आपमें बड़े-बड़े लक्ष्यों को हासिल करने का आत्म-विश्‍वास आएगा। साथ ही आप पूरे विश्‍वास के साथ रोज़-ब-रोज़ आनेवाली चुनौतियों का सामना कर पाएँगे, जैसे साथियों की तरफ से आनेवाले दबाव का सामना। इससे एक और फायदा होगा कि दूसरे आपका आत्म-विश्‍वास देखकर आपकी इज़्ज़त करने लगेंगे। हो सकता है, कुछ लोग आप पर गलत काम करने का दबाव डालना छोड़ दें और आपकी तारीफ करने लगें।

ज़्यादा दोस्त : अकसर लोग उनके साथ दोस्ती करना पसंद करते हैं, जो अपने लिए लक्ष्य रखते हैं। यानी जो जानते हैं कि उन्हें ज़िंदगी में क्या चाहिए और उसके लिए मेहनत करने को तैयार रहते हैं। जब दूसरे आपके लक्ष्यों की वजह से आपकी ओर खिंचे चले आते हैं, तो वे दरअसल आपके लक्ष्य पाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

ज़्यादा खुशी : अगर हम यह सोचकर हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहें कि ज़िंदगी में कुछ दिलचस्प होगा, तो बेशक आपकी ज़िंदगी नीरस बन जाएगी। लेकिन अगर आप लक्ष्य रखें और उन्हें पाने की कोशिश करें, तो आपको इस बात से खुशी मिलेगी कि आपने कुछ कर दिखाया है। यही वजह है कि पहली सदी के एक मसीही प्रेषित पौलुस ने एक बार कहा: “मैं लक्ष्यहीन-सा नहीं दौड़ता।” और याद रखिए, आपका लक्ष्य जितना बड़ा होगा, उसे हासिल करने पर आपको खुशी भी उतनी ज़्यादा मिलेगी!

अपने लक्ष्य कैसे हासिल करें पहचानिए

“बड़े लक्ष्य रखने से मत डरिए। अगर दूसरों ने उन लक्ष्यों को हासिल किया है, तो आप भी कर सकते हैं।”
  1. सोचिए कि आप अपने लिए कौन-से लक्ष्य रख सकते हैं। इसे मज़ेदार बनाने की कोशिश कीजिए। जैसे ज़्यादा सोचिए मत; जो लक्ष्य मन में आएँ उन्हें लिख लीजिए। देखिए कि क्या आप कम-से-कम 10 या 20 लक्ष्य रख सकते हैं।
  2. अपने लक्ष्य जाँचिए। कौन-से लक्ष्य सबसे दिलचस्प लगते हैं? कौन-से मुश्‍किल? किस लक्ष्य को हासिल करके आप गर्व और खुशी महसूस करेंगे? याद रखिए, लक्ष्य वही सबसे अच्छे होते हैं, जो आपके लिए मायने रखते हैं।
  3. अहमियत के हिसाब से लक्ष्य रखिए। सबसे पहले कुछ छोटे लक्ष्य चुनिए जिन्हें आप कुछ दिनों में हासिल कर सकें। फिर कुछ बड़े लक्ष्य, जिन्हें हासिल करने में शायद आपको कई हफ्ते या महीने लग जाएँ। अपने लक्ष्यों को उस क्रम में रखिए, जिस क्रम में आप उन्हें हासिल करना चाहते हैं।

लक्ष्यों के कुछ नमूने

दोस्ती अपने से बड़े या छोटे उम्र के इंसान से दोस्ती करना। ऐसे किसी पुराने दोस्त से दोबारा दोस्ती करना, जिसके साथ काफी समय से आपकी बातचीत बंद है।
सेहत हर हफ्ते 90 मिनट कसरत करना। हर रात आठ घंटे की नींद लेना।
स्कूल गणित में ज़्यादा नंबर लाना। जब दूसरे बच्चों की तरफ से नकल करने का दबाव आता है, तो सही बात के लिए डटे रहना।
आध्यात्मिकता हर दिन 15 मिनट बाइबल पढ़ाई करना। इस हफ्ते अपनी क्लास के एक बच्चे को अपने विश्‍वास के बारे में बताना।

योजना बनाइए 

“लक्ष्य रखना अच्छी बात है, लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए योजना बनाने की ज़रूरत होती है वरना लक्ष्य, लक्ष्य ही रह जाएँगे और उन्हें हासिल करने की खुशी आपको कभी नहीं मिलेगी।
आपने जो लक्ष्य रखे हैं, हरेक के लिए नीचे दिए कदम उठाइए:
  1. अपना लक्ष्य लिखिए।
  2. तय कीजिए कि आप उसे कितने समय में हासिल करेंगे। अगर आप कोई समय तय न करें, तो आपका लक्ष्य सिर्फ ख्वाब बनकर रह जाएगा!
  3. योजना बनाइए कि उन्हें हासिल करने के लिए आपको क्या-क्या करना होगा।
  4. सोचिए कि कौन-कौन-सी रुकावटें आ सकती हैं। फिर सोचिए कि आप उन्हें कैसे पार कर सकते हैं।
  5. ठान लीजिए। खुद से वादा कीजिए कि आप अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश करेंगे। इसे एक कागज़ पर लिखकर हस्ताक्षर कीजिए और तारीख भी लिखिए।

काम कीजिए! 

  • “अपने लक्ष्यों को आप आसानी से भूल सकते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि आप लगातार उनके बारे में सोचें और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करते रहें।”
  • फौरन शुरू कीजिए। खुद से पूछिए, ‘अपना लक्ष्य पाने के लिए आज मैं क्या कर सकता हूँ?’ माना कि अभी तक आपने बारीकी से सोचा नहीं होगा कि इसे पूरा करने के लिए आप क्या-क्या कदम उठाएँगे, लेकिन इस वजह से देर मत कीजिए, तुरंत शुरू हो जाइए। क्यों? क्योंकि जैसा बाइबल कहती है, “यदि कोई व्यक्‍ति पूरी तरह से उत्तम मौसम का इंतजार करता रहता है तो वह अपने बीज बो ही नहीं सकता है और इसी तरह कोई व्यक्‍ति इस बात से डरता रहता है कि हर बादल बरसेगा ही तो वह अपनी फसल कभी नहीं काट सकेगा।” सोचिए कि आप लक्ष्य हासिल करने के लिए आज क्या कदम उठा सकते हैं, फिर चाहे वह कदम छोटा ही क्यों न हो।

हर दिन अपने लक्ष्य जाँचिए। खुद को याद दिलाइए कि हर लक्ष्य क्यों आपके लिए अहमियत रखता है। आप अपने लक्ष्य के कितने करीब पहुँच रहे हैं, यह जानने के लिए आप जब भी कोई कदम उठा लेते हैं, तो उसके आगे ✔ का निशान लगाइए (या तारीख लिखिए)।

फेरबदल करने के लिए तैयार रहिए। भले ही आपकी योजनाएँ बहुत अच्छी हों, लेकिन हो सकता है कि आगे चलकर आपको उनमें कुछ फेरबदल करने पड़ें। इसमें कोई बुराई नहीं है। यह मत सोचिए कि आपने जैसा सोचा था आपको बिलकुल वैसा ही करना चाहिए। आप सिर्फ अपने लक्ष्य को ध्यान में रखिए और उसे हासिल करने की कोशिश कीजिए।

कल्पना कीजिए। कल्पना कीजिए कि आपने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। उसे पाने की खुशी का अनुभव कीजिए। फिर दोबारा मन की आँखों से देखिए कि आप कैसे एक-एक कदम पार कर रहे हैं और लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। और सोचिए, जब आखिरकार आप अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगे तो आप खुद पर कितना गर्व करेंगे। तो अब “शुरू हो जाइए!”

आपके हमउम्र क्या कहते हैं 

  • “अगर आपकी ज़िंदगी नीरस है और आपके पास करने को कुछ नहीं है, तो आप आसानी से निराशा में डूब सकते हैं। लेकिन अगर आप लक्ष्य रखेंगे और उन्हें हासिल करेंगे, तो आप खुद के बारे में अच्छा महसूस करेंगे।”
  • “अगर आप अपना लक्ष्य, तय वक्‍त में या उस तरीके से हासिल नहीं कर पा रहे जिस तरीके से आपने सोचा था, तो खुद को धिक्कारिए मत। यह एहसास आपको कभी आगे बढ़ने नहीं देगा। इसलिए बिना हिम्मत हारे कोशिश करते रहिए!”
  • “आपने जो लक्ष्य रखे हैं, वैसे लक्ष्य अगर पहले किसी और ने हासिल किए हैं, तो उससे बात कीजिए। वह आपको कारगर सलाह दे सकता है और आपका हौसला बढ़ा सकता है। अपने परिवार को भी अपने लक्ष्यों के बारे में बताइए, वे भी आपकी मदद कर सकते हैं।”

एक सफल उद्योयगपति दीप कालरा को यह समझने में आठ वर्ष लग गए कि असल में वे क्या करना चाहते हैं। वे कहते हैं काम कितना भी छोटा या बड़ा हो उसे अच्छा और ऐसा बनाइए जिस पर आपको गर्व हो।
संस्थापक : दीप कालरा, आईआईएम ग्रेजुएट  
खास : देश को ऑनलाइन टिकट बुकिंग का पहला अनुभव दिया।  
 
सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से ग्रेजुएश्न और आईआईएम अहमदाबाद से बिजनेस मैनेजमेंट की  डिग्री लेकर दीप कालरा ने पहली नौकरी के लिए बैंकिंग सेक्टर चुना। उन्हें यह समझने में आठ वर्ष लग गए कि असल में वे क्या करना चाहते हैं। एबीएन एमरो बैंक में तीन साल काम करने के बाद उन्होनें निर्णय लिया की पूरी ज़िंदगी बैंक की नौकरी के साथ बिताना नहीं चाहता। दीप बताते हैं, यह समझने के लिए कि आगे क्या करना है, उन्होनें एबीएन एमरो छोड़कर एक साल का ब्रेक लेने का फ़ैसला लिया। इस ब्रेक के दौरान उन्हें कॉपोर्रेट वर्ल्ड में शानदार जॉब के कई ऑफर मिले। 
 
इस बार उन्होनें ऐसा काम चुना जिसमें चुनौती अधिक थी। उन्होनें एएमएफ बोलिंग इंक को भारत लाने का काम हाथ में लिया। चार साल कि मशक्कत और संघर्ष के बाद उन्होने इस काम को भी अलविदा कह दिया, दीप के अनुसार, वित्तीय दुर्घटना होने के बावजूद यह आंत्रप्रेन्योरशिप के लिहाजा से अद्भुत अनुभव था। अपना काम शुरू करने के लिए उन्हे अभी और कॉपोर्रेट अनुभव कि जरूरत महसूस हुई। उनका अगला जॉब जीई कैपिटलके साथ रहा। अपना उद्यम स्थापित करने की चाह उनमें बरकरार थी। यह वह दौर था जब इंटरनेट भारत में पैर जमा रहा था। दीप ने भारतीए पर्यटन उधयोग का अध्ययन किया तो पाया कि हमारे देश में ऑनलाइन यात्रा टिकट बुक नहीं होते। इस तथ्य के साथ उन्होने तय किया कि वे इसी दिशा में काम करेंगें। वर्ष 2000 में दीप कालरा ने ऑनलाइन बुकिंग सर्विस शुरू करने के लिए वेबसाइट लॉन्च कि मेकमायट्रिप डॉट कॉम। 
 
लो कॉस्ट हवाई सेवाओं कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग से सुरुआत करने वाले दीप कालरा को दुर्दिनों का सामना भी करना पड़ा। उस दौरान हमारे देश में लोग ऑनलाइन बुकिंग कॉनसेप्ट के साथ सहज नहीं थे। ऐसे में 18 माह तक मैंने और मेरे दो सीनियर मैनेजर्स ने बिना वेतन मेकमायट्रिप डॉट कॉम को किसी तरह जीवित रखा। स्थिति में बदलाव तब आया जब भारतीये रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवा शुरू की। इसके बाद ऑनलाइन बुकिंग को लोंगों ने बेहतर तरह से आजमाया। अगले पांच सालों में मेकमायट्रिप डॉट कॉम इतना कारोबार करने लगी कि दीप ने अपनी कंपनी को शेयर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करवा लिया। वे कहते हैं काम कितना भी छोटा या बड़ा हो उसे अच्छा और ऐसा बनाइए जिस पर आपको गर्व हो।

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