बारिश में रहें सावधान इन रोगों से


बारिश में रहें सावधान इन रोगों से

गर्मी के जाते ही बरसात का मौसम शुरू हो जाता है। बारिश के आगमन से लोगों को गर्मी से राहत तो मिलती है, परंतु साथ ही उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
गर्मी के जाते ही बरसात का मौसम शुरू हो जाता है। बारिश के आगमन से लोगों को गर्मी से राहत तो मिलती है, परंतु साथ ही उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कई बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस मौसम में बाहर का चटपटा खाना जितना अच्छा लगता है वह उतना ही नुकसानदेह भी होता है।
इस मौसम में दूषित पानी तथा खाद्य पदार्थों के सेवन करने से हैजा (Cholera), टाइफ़ाइड (Typhoid), और फूडपाइजनिंग (Food Poisoning) जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं।

हैजा, टाइफ़ाइड, और फूडपाइजनिंग के मुख्य कारण

बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाने के कारण हैजा, टाइफ़ाइड, और फूडपाइजनिंग आदि रोगों के कीटाणु बढ़ जाते हैं। गंदा पानी पीने तथा खाना खाने से यह बीमारियां फैलती हैं। बाहर के खुले हुए खाद्य पदार्थों, बाजार की कटी हुई सब्जियों और फलों में इनके जीवाणु अधिक पाए जाते हैं। इसके साथ ही साफ सफाई न बरतने के कारण भी लोग इन रोगों की चपेट में आ जाते हैं।
  1. सिरदर्द व बदन दर्द
  2. भूख में कमी या भूख न लगना
  3. सुस्ती, कमजोरी और थकान महसूस होना
  4. दस्त होना
  5. पेट में ऐंठन महसूस होना
  6. उल्टी होना
  7. तेज बुखार
  8. मूत्र का रंग पीला होना
  9. धमनी और हृदय गति का बढ़ जाना
  10. हड्डियों के जोड़ों में दर्द
यदि आपको सिरदर्द व बदन दर्द के साथ उल्टी, दस्त और बुखार है तो, हो सकता है कि आप हैजा, टाइफ़ाइड या फूडपाइजनिंग से ग्रस्त हैं। इस स्थिति में रोग का पता लगाने के लिए बहुत जरूरी है कि आप जल्द से जल्द अपने खून और मल की जांच करावाएं। ऐसा करने से आप असहनीय पीड़ा से बच सकते हैं जो कभी-कभी नजरअंदाज करने पर जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

संक्रमण जनित रोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते हैं। इनसे बचने के लिए जरूरी है कि संक्रमण से एहतियात बरता जाए और कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत जांच एवं इलाज करवाया जाए। हैजा, टाइफ़ाइड, और फूडपाइजनिंग जैसी गंभीर बिमारियों के बाद इलाज करवाने से बेहतर है कि हम खुद को इनसे दूर रखें। ये बीमारियां बरसात में अधिक होती है इसलिए बरसात का मौसम शुरू होते ही अपना नियमित हैल्थ चैकप जरुर करवाएं। 
इसके अलावा हम कुछ सावधानियां बरतकर भी इन रोगों से दूर रह सकते हैं जो निम्नलिखित हैं:-
  • खाने की वस्तुओं जैसे फल, सब्जी आदि को अच्छी तरह से धोकर पकाना और खाना चाहिए।
  • बाजार से कटी हुई सब्जियों और फलों को नहीं खरीदना चाहिए।
  • पानी को संभव हो तो फिलटर करके या उबालकर पीना चाहिए।
  • पीने के पानी और खाने के समान को साफ सुथरे बर्तनों में ढंक कर रखना चाहिए।
  • कुछ भी खाने पीने से पहले आपने हाथों को जरूर धो लें।
  • रेहड़ी पटरी पर बिकने वाले चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए तथा घर के बने खाने को ही खाना चाहिए।
  • नियमित समय पर स्नान करना चाहिए तथा साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • घर और अपनी सफाई के साथ-साथ आस-पास की जगहों को भी साफ रखना चाहिए।
  • मांसाहारी भोजन खाने से भी बरसात के दिनों में बचना चाहिए।

मॉनसून सीजन में पेट खराब से परेशान हैं तो ट्राई करें ये डिश, यकीनन मिलेगा आराम

मॉनसून सीजन हर किसी को बेसब्री से इंतजार होता है. इस सीजन में होने वाली बारिश को हर शख्स एंजॉय करना चाहता है. ऐसे काफी लोग हैं जिन्हें इस मौसम में गर्मा गर्म पकौड़े खाना पसंद है. मॉनसून के दौरान पेट खराब होना एक आम समस्या है. वैसे हम यह बात जानते हैं कि इस मौसम में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है जिसके कारण हमें बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए. अब लोगों के जहन में सवाल आता है कि आखिर इस मौसम में क्या खाएं जिससे डाइजेशन ठीक रहे.

खिचड़ी 

खिचड़ी एक ऐसा ऑप्शन है जो पेट भरने के साथ सेहत के लिए फायदेमंद भी है. दाल-चावल से मिलकर बनी यह डिश पोषक तत्वों से भरी है. बदलते मौसम में अगर आपको भी पाचन संबंधी समस्‍याएं हो रही हैं, तो खिचड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. मानसून के दौरान इम्‍यूनिटी कमजोर हो जाती है. फूड पॉइजनिंग, इंफेक्शन और डायरिया आदि की समस्‍याएं इन दिनों देखने में आती हैं. जिसकी सबसे बड़ी वजह बरसात के मौसम में खाने की चीजों में फैलने वाला इंफेक्शन है. खिचड़ी डाइजेशन के लिए अत्यधिक स्वास्थ्यप्रद और पेट को आराम देती है.

देसी घी के तड़के के साथ बनी मूंग की दाल और चावल में की खिचड़ी सभी पोषक तत्वों के साथ एक हेल्‍दी डाइट है. घी और फाइबर चावल के हाई ग्लाइसेमिक को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक इस मौसम में बाहर के खाने के बजाय घर का बना सुपाच्य खाना खाना चाहिए. इसको टेस्‍टी और मजेदार बनाने के लिए आप इसमें अपनी पसंदीदा सब्जियां और टमाटर भी डाल सकते हैं.
  • मूंग की दाल की खिचड़ी काफी हल्‍की होती है.
  • खिचड़ी में हल्दी मिलाने से यह एंटीसेप्टिक का काम भी करती है. एक चुटकी हल्दी को ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लाभदायक कहा जाता है.
  • मूंग की दाल में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यह पेट के लिए काफी हल्‍की होती है.
  • दही के साथ मूंग की दाल की खिचड़ी खाने से यह आसानी से डाइजेस्‍ट हो जाती है और सुपाच्य भी रहती है.
  • खिचड़ी पौष्टिक भोजन है. मूंग की दाल में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस पाया जाता है जो शरीर को ताकत भी देता है.
हमारे लिए मानसून का मतलब है गर्म चाय और नाश्ता, बैकग्राउंड में बजता हुआ रेट्रो संगीत और खिड़की के शीशे पर बारिश की बूंदों की हलकी सी थपकी। लेकिन घर से बाहर कदम रखते ही किसी तस्वीर जैसी यह स्थिति मानो खिड़की से बाहर निकल जाती है। मानसून में अच्‍छा तो लगता ही है लेकिन बीमारी का भी प्रकोप रहता है। आपको 10 मानसून रोगों के बारे में जानने की ज़रूरत हैं जो इस मानसून में हो सकते हैं। कुछ का इलाज हो सकता है जबकि कुछ आपके जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

1: मलेरिया

शीर्ष सामान्य मानसून रोगों की सूची में मलेरिया पहले स्थान पर होता है। मादा एनोफेलीज़ मच्छर मलेरिया का कारण बनता है; वे अकसर जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रजनन करते हैं। इसलिए, मलेरिया से बचने के लिए अपनी पानी की टंकी को साफ करते रहिए। मलेरिया के आम लक्षण हैं- बुखार, कंपकंपाना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी। 

2 : डायरिया 

यह मानसून में होने वाला एक और सबसे आम रोग है, जो अस्वच्छ खाना या पानी लेने से होता है। डायरिया के दो मुख्य प्रकार हैं- तीव्र डायरिया और क्रोनिक डायरिया। इन दोनों को ही रोका जा सकता है और इलाज भी संभव है। आंत की इस समस्या को रोकने के लिए उचित स्वच्छता रखें, खाना खाने से पहले हाथ धोएं और पानी केवल उबालकर पिएं। 

3 : डेंगू 

डेंगू बुखार मच्छरों के कारण होने वाला एक मानसून रोग है। डेंगू के सामान्य लक्षण बुखार, शरीर में दर्द, जोड़ों का दर्द और दाने हैं। इस मच्छर से बचने के लिए इंसेक्ट रिपेलेंट का उपयोग करें और अपनेआप को ठीक प्रकार से कपड़ो से ढककर रखें। 

4 : चिकनगुनिया 

चिकनगुनिया संक्रमित एडीज़ एलबोपिकटस मच्छरों के काटने से होता है। ये मच्छर रुके हुए पानी में प्रजनन करते हैं और दिन के उजाले में काटते हैं। चिकनगुनिया के आम लक्षणों में अचानक होने वाला बुखार है जिसके साथ जोड़ों में दर्द भी होता है। मानसून की इस बीमारी से बचने के लिए पानी के कंटेनर को पियमित रूप से साफ करें और इंसेक्ट रिपेलेंट का उपयोग करें। 

5 : टायफायड 

टायफायड एक जल जनित रोग है जो मानसून के दौरान अधिक होता है। टायफी बैक्टीरिया टायफायड फैलाता है जो दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है। अस्वच्छता भी इस बीमारी को फैलाने का काम करती है। टायफायड के आम लक्षण हैं- बुखार, सिरदर्द, कमज़ोरी, दर्द और गले में ख़राश। इस बीमारी से बचने के लिए नियमित रूप् से अपने हाथ धोएं ओर सड़क के किनारे भोजन या पानी पीने से बचें और अधिक मात्रा में स्वस्थ तरल पदार्थ पिएं।

6 : वायरल बुखार 

हालांकि वायरल बुखार हर मौसम के दौरान होता है, लेकिन मानसून के दौरान यह अकसर होता है। वायरल बुखार के सामान्य लक्षण हल्के बुखार से लेकर गंभीर बुखार तक होता है जो सर्दी और खांसी के साथ 3 से 7 दिनों तक रहता है।

7 : हैजा 

हैजा मानसून की एक घातक बीमारी है। यह अकसर दूषित भोजन और पानी के कारण होता है। दस्त के साथ गंभीर डायरिया हैजा के सामान्य लक्षण है। साफ पानी पीकर और स्वच्छता रखकर आप हैजा से बचाव कर सकते हैं। 

8 : लेप्टोस्पाइरोसिस 

लेप्टोस्पाइरोसिस वेल सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है। यह गंदे पानी या गंदगी के संपर्क में आने पर होता है। लेप्टोस्पाइरोसिस के सामान्य लक्षण हैं- सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बुखार, कंपकंपाहट और सूजन। मानसून की इस बीमारी से बचने के लिए बाहर घूमते समय अपने पैरों को ठीक से ढककर रखें और हर प्रकार के घाव को ठीक से साफ करें। 

9 : पीलिया 

पीलिया वायरस आमतौर पर दूषित पानी और भोजन के कारण फैलता है। पीलिया के लक्षण कमज़ोरी, पीला मूत्र, उल्टी ओर यकृत रोग हैं। इस मानसून पीलिया रोग से दूर रहने के लिए उबला हुआ पानी पिएं और स्ट्रीट फूड खाने से बचें। 

10: पेट का संक्रमण 

मानसून अपने साथ गंभीर पेट संक्रमण जैसे गैस की समस्या भी लाता है जिसके कसरण उलटी, दस्त, डायरिया और पेट में दर्द हो सकता है। पेट की समस्याओं से बचने के लिए रोडसाइड फूड खाने से बचें, उबला हुआ पानी पिएं और अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पिएं।

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