चतुरंग आसन क्या होता है? by Manoj Mehra, Kiratpur


चतुरंग आसन क्या होता है? by Manoj Mehra, Kiratpur

आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल को नाश करना है ,क्योंकी शरीर में मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर का मन में स्थिरता का आविर्भाव होता है /शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है/ अतः शरीर के स्वस्थ रहने पर मन और आत्मा में संतोष मिलता है/

आसन क्या होता है?

हम आजकल बहुत ही ज्यादा एक शब्द सुन रहे हैं. योगासन, परंतु हम आसन के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं ।यदि हम जानना चाहे आसन क्या होते हैं तो हमें पता चलता है कि हमारे पुराने ऋषि मुनियों ने स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ इस प्रकार की क्रियाओं का आविष्कार किया था या खोजबीन की थी ताकि हम पूरे जीवन में अपने शरीर को कुछ विशेष प्रकार की मुद्राओं में बैठकर स्वस्थ रह सकें।
चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को हम आसन कहते हैं/
योग में यम और नियम के बाद आसन का तीसरा स्थान होता है /
आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल को नाश करना है ,क्योंकी शरीर में मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर का मन में स्थिरता का आविर्भाव होता है /शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है/ अतः शरीर के स्वस्थ रहने पर मन और आत्मा में संतोष मिलता है/

जो आसन हम करते हैं उनको उन्होंने पांच प्रकार में विभाजित किया है/ अब विभाजन उन्होंने कुछ इस प्रकार से किया कि कुछ पशुओं को देख कर, कुछ वस्तुओं को देख कर ,कुछ प्रकृति से प्रेरणा लेते हुए इस प्रकार से उन्होंने सभी आसनों का विभाजन किया है /

योगाभ्यास करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखने योग्य↠

  1. सर्वप्रथम किसी खुले स्थान पर जाएं जैसे पार्क या आपके घर की छत जहां पर ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में आ रही हो जमीन पर सूती चादर या कोई कपड़ा बिछा कर बैठे/
  2. अपने सर को किसी सूती वस्त्र से या कैप से ढक लें‍/
  3. खाली पेट हो टॉयलेट होकर जाए यदि पेट साफ ना हो रहा हो तो सुबह उठ कर दो गिलास गुनगुना पानी पी ले और शंखप्रक्षालन की क्रिया करें/
  4. यदि कोई ऑपरेशन हुआ हो तो डॉक्टर की सलाह के पश्चात तीन महीने अर्थात 90 दिन से पहले कोई व्यायाम ना करें/
  5. स्वास भर कर पीछे झुकने की एक्सरसाइज करते हैं स्वास् छोड़ते हुए आगे झुकते हैं/
  6. शरीर की क्षमता से अधिक कोई एक्साइज नहीं करते हैं/
  7. ब्रह्म मुहूर्त का समय एक्सरसाइज करने के लिए सबसे अच्छा होता है अर्थात सुबह 5:00 बजे के लगभग जब सूर्य निकलने वाला है/
  8. सर्वप्रथम व्यायाम करना चाहिए उसके पश्चात प्राणायाम करना चाहिए/
  9. शाम के समय भी एक्सरसाइज कर सकते हैं यदि सुबह नहीं कर पा रहे हैं परंतु कम से कम दो-तीन घंटे पहले खाना खाया हुआ हो खाने के पश्चात तो सिर्फ बज्रासन कर सकते हैं जो कि हमारे खाने को पचाने में सहायक होता है/
  10. अंत में सूक्ष्म क्रियाएं करनी चाहिए/
  11. कमर में दर्द हो आगे नहीं झुकना चाहिए गर्दन में दर्द हो तो आगे को झुकने वाली एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए/
  12. मुख हमेशा पूर्व दिशा में रखना चाहिए/
  13. आंखें बंद कर कर क्रिया पर ध्यान देना चाहिए पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना चाहिए/
  14. महिलाओं को अपने पीरियड के दौरान एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए/
  15. गर्भावस्था में भी एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार कुछ सूक्ष्म व्यायाम आदि कर सकती हैं/
  16. बिना सही विधि जाने कोई भी आसान प्राणायाम अथवा व्यायाम नहीं करना चाहिए अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है/
  17. किसी योग्य योग शिक्षक की देखरेख में ही प्रारंभ में व्यायाम ,आसन और प्राणायाम करने चाहिए जब आप पूरी तरह से दक्ष हो जाते हैं तब अपने आप कर सकते हैं क्योंकि सही विधि से ही आपको संपूर्ण लाभ होता है/
  18. हर आसन व्यायाम और प्राणायाम में सांसो का एक अलग सिस्टम होता है उसके आधार पर ही स्वास् को लेना और छोड़ना होता है यदि हम स्वास की क्रिया का ध्यान रखते हुए व्यायाम करते हैं तो हमें अच्छा लाभ होता है।

आसनों के प्रकार

१. पशुवत आसन - पशुवत आसन में वो आसन आते है जो की ऋषि मुनियों ने पशु पक्षियों के उठने -बैठने, चलने फिरने ,खाने के ढंग के आधार पर प्रेरित होकर आसनों की खोज की । इन आसनों में प्रमुख आसन होते हैं । वृश्चिक आसन, भुजंगासन ,सिंहासन, काक आसन , मार्जरासन , तितली आसन गोमुखासन, अधोमुख श्वानासन ,भुजंगासन, मकरासन आसन ,कुक्कुटासन मत्स्यासन ,गरुण आसन इत्यादि/इन आसनों के नाम से प्रतीत हो रहा है कि अलग-अलग जानवरों को उनकी क्रियाओं के आधार पर देखते हुए बनाए गए हैं ।

२. वस्तुवत आसन - विभिन्न वस्तुओं के आकार को देखकर ऋषि मुनियों ने प्रेरित होते हुए इन आसनो की खोज की थी/ जिसमें प्रमुख है हलासन, धनुरासन ,चक्रासन ,वज्रासन ,सुप्त वज्रासन, नौकासन, आदि 

३. प्रकृति प्रेरित आसन -  इसमें वृक्ष, पेड़ ,पौधों और प्रकृति के अन्य तत्वों पर आधारित करते हुए ऋषि मुनियों ने आसनों की खोज की जैसे वृक्ष आसन, चंद्रासन ,पद्मासन, ताड़ासन, तालाब आसान, पर्वतासन इत्यादि 

4. अंगों से प्ररित आसन - इस प्रकार के आसनों में हम विभिन्न अंगों को हष्ट पुष्ट करने के लिए अभ्यास करते हैं / जिनमें प्रमुख हैं शीर्षासन ,पादहस्तासन ,सर्वांगासन ,कर्णपीड़ासन गर्भासन, मलासन ,स्वशासन ,हस्तपादासन 

5. योगी नाम आसन - इसमें वह आसन होते हैं जो कि किसी भगवान या ऋषि ,अथवा योगी के नाम पर आधारित आसन होते हैं जैसे महावीरासन, हनुमानासन ,मत्स्येंद्रासन, भैरव आसन ,ब्रह्म मुद्राआसन , सिद्धासन ,नटराजासन, अष्ट वक्रआसन , मरीची आसन ,वीरासन ,वशिष्ठासन आदि 

कुछ और भी आसन उनमें प्रमुख हैं पश्चिमोत्तानासन सुखासन ,पद्मासन , त्रिकोणासन ,सेतुबंधासन ,कंधरासन ,बद्धकोणासन इत्यादि 

विशेष

यही सही है कि आसनसिद्धि के लिये स्वास्थ्य संबंधी कुछ नियमों का पालन आवश्यक है। जैसा श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है-
युक्ताहार बिहारस्य, युक्त चेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य, योगो भवति दु:खहा॥
खाने, पीने, सोने, जागने सभी का नियंत्रण करना होता है।
आसन का यदि हम शाब्दिक अर्थ ले तो ये पता चलता है की जो किर्या हम आसानी से कर सके उन्हें ही आसन कहना चाहिए/ अत ये विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए की प्रत्येक आसन को बहुत ही आसानी से करना चाहिये अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है। यदि संभव हो तो प्रत्येक आसन को करने से पहले किसी योग्य प्रशिक्षक से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त करे और फिर उनके मार्गदर्शन में ही अभ्यास करे ।

चतुरंग दण्डासन

चार शब्दों के मिलाप से बना हुआ है जिसमे चतुर अर्थात चार, अंग अर्थात शरीर का हिस्सा और दंड अर्थात डंडा तथा आसन है। यदि आपको बहुत ज्यादा ताकत की आवश्यकता है तो आप इस आसन को कर सकते हैं।आपको अपने भुज दण्ड बनाने की आवश्यकता है तो आपको इस आसन को अवश्य करना चाहिए।यदि आप को अपनी रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाना है तो फिर आपको इस आसन को अवश्य करना चाहिए/
आसन को FOUR LIMBED STAFF POSE और लो प्लैंक भी कहा जाता है।

चतुरंग दण्डासन के बारे में|

  • चतुरंग दण्डासन को प्रत्येक उम्र के व्यक्ति कर सकते है परन्तु 12वर्ष से कम औऱ 58 वर्ष से अधिक आयु होने पर किसी योग्य योग शिक्षक से परामर्श लेना चाहिए।अपने शरीर की क्षमता के  आधार पर ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।चतुरंग दंडासन हमारे शरीर को शक्ति और स्फूर्ति देता है।
  • किसी भी आसन को करने से पहले हमें साधारण सावधानियों  को भी ध्यान में रखना चाहिए ।
  • पेट दर्द को ठीक करता हैं और कंधों को मजबूती देता हैं।
  • सुबह के समय जल्दी उठकर योग का अभ्यास करना सबसे अच्छा है लेकिन, अगर आपके पास अन्य काम हैं, तो आप शाम को भी इसे कर सकते हैं। बस अपने भोजन और अपने अभ्यास के बीच में कम से कम 4 घंटे का अंतर होना ही चाहिए।
  • चतुरंग दण्डासन को करने की सरलतम विधि 
  • सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ।
  • अपने दोनों हाथों की हथेलियों और पैरों की उँगलियों पर अपने शरीर के पूरे वजन को व्यवस्थित कर दें।
  • हांथो को आगे लाकर छाती के दोनो ओर लाये। फिर कंधो का सहारा लेते हुए थोड़ा सा जमीन पर टिकने का प्रयासः करे।
  • इसके पश्चात कोहनियों पर वजन डालते हुए ऊपर उठे। साथ ही पैरो की भी उँगलियों के सहारे से शरीर का पिछला भाग भी ऊपर उठा ले।
  • ध्यान दे कि आपके फोर आर्म और अपर आर्म के मध्य 90 डिग्री का कोण बने।
  • ध्यान रहे की पीठ सीधी होनी चाहिए और सारा वजन हांथो और कंधो पर नहीं होना चाहिए।
  • सर को शरीर की सिधाई में रखे और दृष्टि सदैव सामने होनी चाहिए।
  • इस आसन में आप 30 से 60 सेकंड तक रुक सकते है। फिर धीरे धीरे समय बढ़ा सकते है।
  • प्रतिदिन3,5 से लेकर 7,11 बार तक इसका अभ्यास कर सकते हैं।

चतुरंग दण्डासन के फायदे

  • चतुरंग दण्डासन बाज़ुओं और कलाईयों को शक्ति प्रदान करता है। यह आपकी कलाई को अधिक मजबूत और अधिक लचीला बनाता हैI
  • चतुरंग दण्डासनको नियमित करने से मन शांत रहता है।
  • प्रतिदिन इस आसन को करने से कंधो को मजबूती मिलती है।
  • यह आसन पेट को कम करता है|
  • यह आसन पीठ की हड्डी को मजबूत कर देता है।
  • यह आसन हांथो के संतुलन के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
  • चतुरंग दण्डासन से पेट एकदम फिट लगता है।
  • चतुरंग दण्डासन के साथ निम्न आसनो का अभ्यास भी करना चाहिए।
  • भुजंगासन
  • उर्ध्व मुख श्वानासन
  • अधो मुख श्वानासन
  • उष्ट्रासन
  • अर्धचंद्रासन

चतुरंग दण्डासन मे सावधानी

यदि आप गर्भवती है तो यह आसान न करे।
यदि आपकी कलाइयों में या फिर कमर में दर्द है तो इस आसन को न करे|
अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त है तो भी इस आसन को करने से बचे|ओर अभ्यास करने से पहले किसी योग्य योग शिक्षक से यदि परामर्श कर ले तो बहुत लाभदायक सिद्ध होता है।
​इसके अलावा आपको प्रतिदिन व्यायाम प्राणायाम जैसे कपालभांति ,अनुलोम विलोम और आसन जैसे सर्वांगासन ,हलासन , उष्ट्रासन अर्धचंद्रासन ,धनुरासन , तितलिआसन ,मंडूकआसन, पवनमुक्तासन, वज्रासन ,,गौमुखासन आदि का अभ्यास भी करते रहना चाहिए 

Manoj Mehra, Kiratpur


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