जीवन में आने वाली समस्याओ का सामना


जीवन में आने वाली समस्याओ का सामना

हम अपने खिलाफ निर्मित हुए विपरीत माहौल से बहुत आहत हो जाते है, बहुत मेहनत करने के बाद भी जब कोई बड़ी कंपनी के मैनेजर को अपनी टीम के औसत परिणामों की वजह से उसके पद से हटा दिया जाता है ऐसे में हमारे लिए ये दौर घोर निराशा में ले जाने वाला होता है।

जीवन में आने वाली समस्याओ का सामना

हम सभी के जीवन में कुछ न कुछ समस्‍या अवश्‍य होती है और कभी-कभी तो इन समस्‍याओं का ग्राफ यहां तक पहुंच जाता है की हमें लगने लगता है की हमारे साथ कभी कुछ अच्‍छा हो ही नही सकता। हम अपने खिलाफ निर्मित हुए विपरीत माहौल से बहुत आहत हो जाते है, बहुत मेहनत करने के बाद भी जब कोई बैंकर को अपने कार्य के लिए असफल घोषित कर दिया जाता है या बड़ी कंपनी के मैनेजर को अपनी टीम के औसत परिणामों की वजह से उसके पद से हटा दिया जाता है ऐसे में हमारे लिए ये दौर घोर निराशा में ले जाने वाला होता है।

हमारे विचारों में नकारात्‍मकता हावी हो जाती है परंतु हम भूल जाते है की मनुष्‍य अपने प्रयासों से किसी भी समस्‍या का समाधान कर सकता है मनुष्‍य के पास जो शक्ति है वह उसका आत्‍मविश्‍वास है क्‍योंकि मनुष्‍यों ने ही कई असंभव समझे जाने वाले कार्यो को भी संभव करके इस दुनिया की तस्‍वीर बदली है।

जिसका सबसे बेहतर उदाहरण है महान वैज्ञानिक थोमस अल्‍वा एडिशन का जिन्हें सब मंदबुद्धि समझते थे और उनके प्रयासों को पागलपन कह कर उनका उपहास उड़ाया करते जबकि इसी जूनूनी से थोमस एल्‍बा एडिशन ने अपने कठिन परिश्रम और मेहनत से दुनिया को रोशनी से रूबरू कराया । अपनी इस प्रवृत्ति के चलते एडिशन ने सिर्फ बल्‍ब का ही अविष्‍कार नही किया बल्कि और कई अविष्‍कारों से दुनिया को यह दिखा दिया की मेहनत और लगन से किसी भी कार्य को किया जा सकता है।

ऐसी कई विभुतियां है जो हार से निराश न होते हुए पुन: अधिक प्रयास करके विश्‍वभर में अपना परचम लहराने में सफल हुई और यह सब संभव हुआ उनकी हार से, हार न मानने वाली सोच से क्‍योंकि हार तो जीत के रास्‍ते में मिलने वाली वस्‍तु है  जिससे आपकी जीत का उत्‍साह और भी बढ़ जाता है। इसिलए हमें सदैव अपनी कमजोरी को पीछे छोड़कर अपनी जीत का एक और प्रयास करना चाहिए जिससे हमारी जीत निश्चित होती ही है।

जीवन की समस्याओं पर विजय प्राप्त करने के विभिन्न मार्ग

यदि हम अपने जीवन को तटस्थ रूप से देखें, तो हमें ज्ञात होगा कि हमारा पूरा दिन सुख, संतुष्टि तथा उपभोग की प्राप्ति में व्यतीत होता है अथवा किसी न किसी विशिष्ट समस्या पर विजय प्राप्त करने में हमारा समय व्यतीत होता है । जीवन में हम निरंतर सुखप्राप्ति का प्रयास करते हैं, वस्तुत: हम अपने जीवन में सुख से अधिक दु:ख अनुभव करते हैं ।

प्रत्येक के जवीन में समस्याएं विविध प्रकार का रूप लेती हैं ।

  • आर्थिक
  • अपने प्रिय व्यक्ति को खो देना
  • वैवाहिक जीवन में तनाव
  • संतान प्राप्ति न होना
हमारे दैनिक जीवन में हमें निरंतर किसी न किसी समस्या तथा चुनौती का सामना करना पडता है । कभी-कभी हमारे जीवन में एक से अधिक समस्याएं होती हैं । उदा. आर्थिक समस्या के साथ-साथ वैवाहिक जीवन असंतुलित होना । जब सारी समस्याएं एक साथ हम पर टूट पडती हैं, तब हमारे लिए सब कुछ अत्यंत कठिन हो जाता है । तब हम नीरसता, उदासीनता अनुभव करते हैं तथा कभी-कभी हमारे मन में आत्महत्या के विचार भी आते हैं ।

हम अपने जीवन की अडचनों तथा समस्याओं पर कैसे मात करते हैं ?

साधारणतः हम अपने जीवन की समस्याओं के निराकरण हेतु तीन मार्ग अपनाते है :-

  1. ऊपरी उपाय
  2. आधुनिक विज्ञान पर आधारित किसी विशेषज्ञ की सलाह से
  3. धर्म के माध्यम से

ऊपरी उपाय

इस मार्ग से, हम समस्या का सामना नहीं करते, अपितु अपना ध्यान मूल समस्या से हटा कर किसी और कार्य में लगाते हैं जिससे स्थिति से निर्माण होनेवाला दुख घट जाए । उदा. पति-पत्नी में कलह के उपरांत पत्नी खरीदारी करने चली जाती है तथा पति इस दु:ख को भुलाने के लिए शराब पीने चला जाता है । परंतु इससे समस्या का निराकरण नहीं होता । समस्या अभी भी वहीं की वहीं है, उसका निराकरण केवल ऊपरी रूप से हुआ है, समस्या समाप्त नहीं हुई । हममें से अधिकांश लोग ऐसे उपायों को अपनाते हैं, मुख्य रूप से तब जब समस्या के मूल तक पहुंचना बहुत दुखदायी हो ।

आधुनिक विज्ञान द्वारा

हममें से कई लोग समस्या का मूल कारण ढूंढकर, आधुनिक विज्ञान की सहायता से उस पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं । जिसमें जानकारों उदा. वकील, वित्तीय सलाहकार, मनोवैज्ञानिक आदि की सलाह सम्मिलित है ।

उदा. : यदि किसी व्यक्ति ने दूषित भोजन ग्रहण किया जिससे पेट में दर्द हुआ, तो जीवाणुनाशक औषधि लेकर उसका पेट दर्द ठीक होगा । यहां पर उसने तीन चरणों में अपनी समस्या का हल निकाला है ।
  • पहला चरण – समस्या को समझना – पेट में दर्द
  • दूसरा चरण – समस्या का कारण समझना – दूषित भोजन
  • तीसरा चरण – समाधान करना – जीवाणुनाशक औषधि लेना
आधुनिक विज्ञान प्रत्येक समस्या पर इन्हीं तीन चरणों की प्रक्रिया से विजय प्राप्त करता है 

धर्म

कुछ लोग धर्म की ओर मुडते हैं : अपना दु:ख घटाने के लिए
एक अंतिम उपाय के रूप में जब सारे उपाय निरर्थक हो जाते हैं । बहुत लोगों को किसी तीर्थक्षेत्र पर जाने से, किसी विशिष्ट प्रार्थना, मन्नत से, तथा साधु-संतों से मिलने पर चमत्कारी अनुभव हुए हैं । आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध किया है कि जो लोग, धार्मिक होते हैं, वे समस्याओं से अधिक सुरक्षित होते हैं तथा उनके आत्महत्या जैसी चरम सीमा तक जाने की संभावना अल्प होती है । नैशनल सेंटर ऑन एडिक्शन एंड सब्सटंस अब्युस (सी.ए.एस.ए) कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक शोध में यह पाया गया कि, जो लोग धार्मिक सेवा-कार्यों से जुडे नहीं थे प्रत्येक सप्ताह धार्मिक सेवा करनेवालोंकी तुलना में उनके गांजा सेवन करने की संभावना ८ गुना अधिक थी ।

समस्या को लोजीकली सुलझाना 

आप किसी भी चैलेंज का किस तरह से सामना करते हैं, ये अक्सर ही आपकी सफलता और खुशी का राज़ खोलता है। अगर आप भी किसी समस्या के हल को ढूँढने में अटके हुए हैं, तो पहले इसे समझने की और इसे छोटे-छोटे भागों में बांटने की कोशिश करें। तय करें, कि उस समस्या को लोजीकली सुलझाना है या फिर आप पहले ये सोचना चाहते हैं, कि इसका परिणाम आप पर कैसा प्रभाव डालेगा। लोगों के साथ मिलकर और आपकी समस्या के लिए एक अलग ही नजरिया अपनाकर आपकी समस्या को सुलझाने के क्रिएटिव रास्तों की तलाश करें।

लोगों के पास जाना (Approaching the Problem)

आपकी समस्या को समझें: असली समस्या की पहचान करें, न कि सिर्फ कुछ ऐसे लक्षणों की, जो कि समस्या की वजह से सामने आ रहे हैं। समस्या को समझने के दौरान, किसी भी ऐसी बात पर बेवजह गौर ना करें, जिसका आपकी समस्या से कोई लेना-देना ही न हो, सिर्फ असली समस्या पर ही ध्यान दें। बाकी की बातों को आप बात पर भी विचार कर सकते हैं। आपकी समस्या के साथ एकदम परिचित हो जाएँ, फिर इसे अच्छी तरह से समझ लें।

जैसे कि, अगर आपका कमरा हमेशा ही बिखरा हुआ रहता है, तो इसमें असली समस्या ये नहीं है कि आप एक अव्यवस्थित टाइप के इंसान हैं। ऐसा भी हो सकता है, कि आपके पास में सामान रखने के लिए ज्यादा जगह, कंटेनर या बॉक्स नहीं हैं।

आपकी समस्या को पहचानते वक़्त आपसे जितना बन सके स्पष्ट और समझदारी दिखाने की कोशिश करें। अगर ये किसी पर्सनल वजह से हो रहा है, तो अपनी समस्या के इस असली कारण को पहचानने के लिए भी अपने साथ एकदम ईमानदार रहें। अगर ये कोई लोजिकल समस्या है, तो इस बात पर गौर करने की कोशिश करें, कि इस समस्या की असली वजह क्या है और ये कब सामने आती है।

तय करें, कि आपकी समस्या असली है या फिर आपके मन का भ्रम। क्या आपको इस समस्या को सुलझाने की सच में जरूरत है या फिर ये कोई ऐसी चीज़ है, जिसे आप खुद ही चाहते हैं? चीजों को अपने दृष्टिकोण में रखने से आपको समस्या सुलझाने की प्रोसेस में मदद मिलेगी।

पहले कुछ महत्वपूर्ण निर्णय करें: आपको जो निर्णय करने की जरूरत हैं, उन्हें पहचानें और कैसे वो आपकी समस्या को सुलझाने में मदद करने वाले हैं, इसे भी तय करें। निर्णय लेने से आपको आपकी समस्या के हल की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी, तो पहले कहाँ ध्यान लगाना चाहिए, क्या करना चाहिए और आप इसे कैसे करने वाले हैं, इन सबका निर्णय लेते हुए ही शुरुआत करें।

उदाहरण के लिए, आपके पास में सुलझाने के लायक बहुत सारी समस्याएँ हो सकती हैं और आपको पहले ये तय करना है, कि कौन सी समस्या को पहले सुलझाया जाए। किसी एक समस्या का हल, आपको टेंशन से या फिर दूसरी समस्याओं पर होने वाले स्ट्रेस से बचा सकता है।

एक बार निर्णय ले लेने के बाद, अपने ऊपर शक ना करें। इस पॉइंट से सिर्फ आगे ही देखें, न कि कुछ ऐसा सोचने लग जाएँ, कि अगर ऐसा तय किया होता, तो कैसा होता।

समस्या को आसान बनाएँ: एक बहुत ज्यादा जटिल समस्या आपको बहुत ज्यादा परेशान कर सकती है और इसे हल करना आपके लिए काफी कठिन भी हो सकता है। अगर आपके सामने एक-से ज्यादा समस्याएँ हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे भागों में बाँट लें और फिर एक-एक कर के उनका सामना करें। अगर आप अपनी समस्या को छोटे-छोटे भागों में बाँट लेंगे, तो इससे आपको इनके हल की तलाश करने में आसानी होगी।

जैसे कि, अगर आपको किसी क्लास को पास करने के लिए बहुत सारे असाइनमेंट्स पूरे करने हैं, तो पहले इस बात पर ध्यान लगाएँ, कि आपको कितने असाइनमेंट पूरे करने हैं, फिर उन्हें एक-एक कर के पूरा करने की कोशिश करें।

जब कभी भी आप से हो सके, तो किसी भी समस्या को एक करके और फिर हल करने की कोशिश करें। जैसे कि, अगर आपके पास में पढ़ाई करने के लिए वक़्त नहीं बचा है, तो फिर क्लास की तरफ जाते वक़्त रिकॉर्ड हुए लेक्चर को सुनें या फिर डिनर का इंतज़ार करते हुए आपके नोट्स ही पढ़ लें।

आपको क्या पता है और क्या नहीं, इसे भी तय करें: आपके पास पहले से मौजूद ज्ञान और जानकारी में खुद को और भी मजबूत कर लें। फिर इस बात का पता लगाएँ, कि आपको क्या चाहिए। अपने आपको हर जरूरी जानकारी से अवगत कराएँ, फिर इन सभी को कुछ ऐसे इकट्ठे करें, जो आपके काम आए।

उदाहरण के लिए, अगर आप किसी टेस्ट को पास करना चाहते हैं, तो पहले ये तय करें, कि आपको पहले से कितना आता है और आपको कितना और पढ़ना है। पहले आपको पहले से मालूम जानकारी को दोहरा लें, फिर आपके नोट्स, टेक्स्टबुक या आपके लिए मददगार अन्य सोर्स से और भी ज्यादा जानकारी अपने की कोशिश करें।

मिलने वाले परिणाम की आशा करें: अपने साथ में एक और दूसरा प्लान (या और भी) लेकर चलें ताकि आप सिर्फ किसी एक ही समाधान पर न अटके रह जाएँ। जैसे ही आपको सारे संभावित समाधान मिल जाएँ, इन हर से मिलने वाले परिणामों के बारे में सोचना शुरू कर दें। हर एक संभावित परिणाम के बारे में विचार करें और किस तरह से ये आपको और आपके आसपास के लोगों को प्रभावित करेगा, सोचें। आपकी कल्पनाओं के लिए एक बेस्ट-केस सिनारियो और एक वर्स्ट केस-सिनारियो तैयार करें। इन सिनारियो को जानने में आपको कैसा महसूस होता है, उस पर ध्यान दें।

आपके रिसोर्स को बाँट लें: आपके रिसोर्स में आपका समय, आपका पैसा, आपके प्रयास, ट्रैवल आदि शामिल हैं। अगर समस्या का समाधान आपकी पहली प्राथमिकता है, तो आपको इस समस्या को सुलझाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा से ज्यादा रिसोर्स की जरूरत पड़ेगी। आपके पास कितने रिसोर्स हैं, इस पर विचार करें और आप आपकी समस्या को सुलझाने के लिए किन-किन रिसोर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, सोचें।

उदाहरण के लिए, अगर आपको कोई एक डैडलाइन दी गई है, तो आप डिनर बनाना छोड़ सकते हैं या फिर जिम जाना छोड़ सकते हैं, ताकि आप आपके प्रोजेक्ट को आपका पूरा वक़्त दे सकें।

जितना हो सके, उतना गैर-जरूरी काम को छोड़ते जाएँ। जैसे कि, आप समय बचाने के लिए आपके घर पर ही ग्रोसरी आइटम मंगा सकते हैं। फिर आप इस वक़्त को अन्य दूसरे जरूरी काम में लगा सकते हैं।.

एक क्रिएटिव अप्रोच अपनाना (Taking a Creative Approach)

अलग-अलग समाधान के बारे में विचार करें: आपकी समस्या को सुलझाने के लायक, अलग-अलग तरीके के बारे में विचार करें। इस बात को जानकर, कि आपके पास आपकी समस्या के लिए एक से ज्यादा हल मौजूद हैं, आपके लिए मददगार साबित हो सकता हैं। जैसे ही आप आपके लिए कुछ अन्य छोटे-छोटे विकल्पों की तलाश कर लें, फिर तय करें कि इनमें से कौन सा आपके लिए सुलभ है और किसे आप बिलकुल भी नहीं देखना चाहते।

अगर आप कुछ कठिन निर्णय ले रहे हैं, आपके अन्य विकल्पों को लिखकर रख लें। इस तरह से, आप किसी भी विकल्प को नहीं भूल पाएंगे और जब भी आपको कोई समाधान कठिन लगे, तब आप इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं।

जैसे कि, हो सकता है, कि आपको भूख लगी है और आप खाने के लिए कुछ तलाश रहे हैं। तो विचार करें कि क्या आप खाना पकाना चाहते हैं, फास्ट फूड चाहते हैं, बाहर से ऑर्डर करना चाहते हैं या फिर किसी रेस्तरां में जाना चाहते हैं।

किसी भी समस्या के लिए, अलग-अलग अप्रोच अपनाकर देखें: अगर आप किसी सीधी समस्या को सुलझा रहे हैं, तो ऐसे में एनालिटिकल या लोजिकल स्किल आपकी मदद कर सकती है। बाकी के समय में आपको सही दिशा पाने के लिए आपके इमोशन्स पर निर्भर करना होगा। अक्सर ही, समस्याओं में किसी भी हल तक पहुँचने के लिए आपके सोचने की काला, आपकी भावनाएँ और आपके किसी भी हल तक पहुँचने की काबिलियत के मेल की जरूरत पड़ती है। आपकी समस्याओं से निपटने के इन सभी तरीकों को अपनाने से ना घबराएँ, लेकिन इन सभी को इस्तेमाल करके जरूर देखें और देखें कि इनमें से कौनसा तरीका आपके लिए सही साबित होता है।

कुछ इस तरह की समस्याएँ, जैसे कि एक अच्छी जॉब और सैलरी के लिए दुनिया के किसी भी कोने में जाने को तैयार रहना, लेकिन ये भी सोचना कि इसकी वजह से आप आपकी फैमिली से दूर चले जाएंगे, इनसे निपटने के लिए कुछ अलग तरह की अप्रोच अपनाने की जरूरत होती है। किसी एक लोजिकल समाधान के बारे में विचार करें, लेकिन आपकी भावनाओं, विचारों और आपका निर्णय किस तरह से दूसरे लोगों को प्रभावित करेगा, सोचना न भूलें।

दूसरों से सलाह ले लीजिये: अगर आपकी समस्या को एकदम फौरन नहीं सुलझाना है, तो दूसरे लोगों से सलाह की मांग करें। हो सकता है, कि आप किसी ऐसे इंसान को जानते हों, जिसने भी पहले इसी तरह की समस्या का सामना किया था, जो आपकी मदद करने के साथ-साथ आपको कुछ फीडबैक भी दे सके। फिर चाहे आप उनकी सलाह को मानें या ना मानें, ये पूरी तरह से आप पर है, हालांकि अलग-अलग तरह के दृष्टिकोण आपकी काफी मदद कर सकते हैं।

जैसे कि, अगर आप एक नया घर ले रहे हैं, और आपके आखिरी निर्णय को लेकर आशंकित हैं, तो किसी दूसरे घर के मालिक से उनके विचारों या घर खरीदने के पछतावे के बारे में पूछें।

आपकी प्रगति पर ध्यान दें: अगर आप किसी एक लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं, तो ध्यान रखें, कि आपको किस तरह की चीजों का सामना हो रहा है। अगर आप प्रगति कर रहे हैं, और एक पॉज़िटिव दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो बढ़ते रहें। अगर आपको लगता है, कि आपकी अप्रोच कुछ ज्यादा सही नहीं है, तो फिर समस्या को किसी दूसरी तरह से सुलझाने के बारे में सोचें। आपको और भी बेहतर ढंग से अपनी समस्याएँ सुलझाने के लिए और भी नयी-नयी स्ट्रेटजी अपनानी होंगी।

उदाहरण के लिए, अगर आपको पैसे से जुड़ी कोई समस्या हो रही है, तो ध्यान दें, कि आपके प्रयास किस तरह से धन के आगमन को और खर्च को प्रभावित कर रहे हैं। अगर एक बजट तैयार करने से आपको मदद मिलती है, तो ऐसा ही करें। अगर पैसे को अलग तरह से इस्तेमाल करने में परेशानी है, तो इसके लिए दूसरे तरीके तलाश कर लें।

अपनी प्रगति, सफलता और चैलेंज का रिकॉर्ड रखने के लिए, एक जर्नल (डायरी) तैयार करें। अब जब कभी भी आप हतोत्साहित महसूस करें, तब आप इस जर्नल पर नजर डाल सकते हैं।

परेशानियों का सामना करते हुए आपके इमोशन्स को संभालना 

(Managing Your Emotions While Confronting Difficulties)

आपके इमोशन्स को शांत करें: अगर आप किसी समस्या के समाधान को लेकर पहले से ही काफी चिंतित या नर्वस हैं, तो ऐसे में आपके लिए किसी भी समस्या को सुलझाना या निर्णय लेना कठिन हो सकता है। अगर आपका डर आपके किसी समस्या को सुलझाने की काबिलियत को कम कर रहा है, तो शांत होने के लिए एक पल के लिए ठहरें। गहरी सांस लें, ताकि समस्या के ऊपर विचार करने से पहले आप शांत और रिलैक्स महसूस कर सकें।

अगर आप चाहें, तो एक वॉक पर भी जा सकते हैं, या फिर जर्नल में भी लिख सकते हैं। इसका असली मकसद तो आपके डर को कम करना और आपके मन में शांति की भावना को जगाना है।

अक्सर ही पहला कदम उठाना सबसे डरावना लगता है। शुरुआत करने के लिए कुछ बेहद छोटी चीज़ करने की कोशिश करें। जैसे कि, अगर आप और भी एक्टिव बनने की कोशिश कर रहे हैं, डेली वॉक पर जाना शुरू कर दें।

किसी भी तरह की छिपी हुई समस्या को समझने की कोशिश करें: सामने दिखने वाली किसी भी समस्या के पीछे छिपी हुई छोटी-छोटी समस्याएँ होती हैं, जिन्हें सुलझाना ज्यादा बेहतर होगा। अगर आपने पहले कभी किसी ऐसी ही समस्या को सुलझाया है, फिर भी ये हर बार आपके सामने आती रहती है, तो इस बात का पता लगाने की कोशिश करें की कहीं इसके पीछे कोई और छिपी हुई वजह तो नहीं। आप फिर आपकी समस्या को बेहतर ढंग से सुलझा सकेंगे।

उदाहरण के लिए, अगर आप आपके करने वाले बाकी काम की लिस्ट को देखकर परेशान हैं, तो शायद हो सकता है, कि आपकी समस्या का असली कारण ये लिस्ट नहीं, बल्कि उन चीजों के लिए “नहीं” ना कह पाने की आदत है, जिन्हें आप नहीं कर सकते।

अगर आप स्ट्रेस फील कर रहे हैं, गुस्से में हैं या परेशान हैं, तो आप एकदम तिलमिला सकते हैं। उन सभी चीजों की एक लिस्ट तैयार कर लें, जिनसे आपको स्ट्रेस और हताशा हो रही है। आने वाले समय में उन्हें नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करें। अगर आप वापस खुद को परेशान महसूस करते हैं, तो ये इस बात का इशारा है, कि आपको अपने नज़रअंदाज़ करने की क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है।

किसी थेरेपिस्ट से सलाह-मशवरा करें: अगर आपको अभी भी किसी भी निर्णय को लेने में परेशानी हो रही है या फिर किसी समस्या को सुलझाने के बाद भी आपको अपने ऊपर भरोसा नहीं हो रहा है, तो ऐसे में किसी मेंटल हैल्थ प्रोफेशनल से सलाह लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। हो सकता है, कि आप आत्म-विश्वास की कमी से जूझ रहे हों, जिसकी वझ से आपको खुद पर विश्वास करने में परेशानी हो रही है या आप हारा हुआ महसूस कर रहे हैं। आपके थेरेपिस्ट आपके अंदर झाँक सकेंगे और आपको स्वयं को और भी पॉज़िटिव और वास्तविक तरीके से देखना सिखाएगा।

आपके लोकल मेंटल हैल्थ क्लीनिक में या आपके इंश्योरेंस प्रोवाइडर के जरिये किसी थेरेपिस्ट की तलाश करें। आप चाहें तो आपके किसी फ्रेंड या फिजीशियन से भी इनकी सलाह ले सकते हैं। अगर आप बहुत ज्यादा परेशान या हताश महसूस कर रहे हैं, तो कुछ पल का ठहराव लें। इस बात को समझें, कि हर एक समस्या का कोई ना कोई हल जरूर होता है, लेकिन कभी-कभी आप इनमें इतने उलझे होते हैं, कि आपको आपकी समस्या के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आता।

आपकी समस्याओं से भागने की कोशिश न करें। ऐसा करने से ये बाद में फिर लौटकर आएगी और उस वक़्त आपका इसे सुलझाना और भी मुश्किल हो जाएगा। आपका कॉमन सेंस आपको परेशानी को हल्का करने में जरूर मदद करेगा।

कमरे में जलाएं एक तेजपत्ता

मनुष्य जीवन परेशानियों से भरा हुआ है। हर किसी के जीवन में किसी ना किसी तरह की समस्या लगी रहती है। कोई आर्थिक समस्याओं से परेशान है तो कोई शारीरिक समस्याओं से परेशान है। हर व्यक्ति यही चाहता है कि उसका जीवन ख़ुशी-ख़ुशी बीते और उसके जीवन में किसी तरह की कोई समस्या ना हो। लेकिन ऐसा संभव नहीं है। चाहकर भी व्यक्ति अपने जीवन की समस्याओं से मुक्ति नहीं पा पाता है। लेकिन कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान आसानी से किया जा सकता है।

आज के समय में लोगों को काम और उनकी लाइफ स्टाइल की वजह से तनाव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह एक ऐसी समस्या है, जिससे लगभग हर व्यक्ति परेशान है। हर कोई तनाव में है। किसी को काम की वजह से तनाव है तो किसी को परिवार की चिंता से तनाव हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव बहुत ही गंभीर समस्या है। लोग इसे नजरंदाज करते हैं, लेकिन इसका असर व्यक्ति के दिमाग पर पड़ता है। तनाव में रहने वाले व्यक्ति की काम करने की क्षमता कम होने लगती है।

बहुत कम लोगों को पता है कि घर में सब्जियों में तड़का देने के काम में आने वाला तेजपत्ता तनाव भगाने में असरदार है। इसके धुएं से टेंशन से मुक्ति पायी जा सकती है। अगर आप हर रात को सोने से पहले अपने कमरे में तेजपत्ते का धुंआ कर लेते हैं तो आपको टेंशन से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही व्यक्ति की सांस सम्बन्धी और त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ भी दूर हो जाती हैं। तेजपत्ता जलाने से और भी कई फायदे होते हैं। लेकिन इसको कमरे में कैसे जलाना है, इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए।

सबसे पहले एक अच्छा सूखा हुआ तेजपत्ता लें। तेजपत्ते को एक कटोरे में रखकर घर के बाहर ही जला लें। जब तेजपत्ता जलकर धुँआ निकलने लगे तो इसे कमरे में 15 मिनट के लिए लायें। इससे तेजपत्ते की महक पुरे कमरे में फ़ैल जाएगी। जैसे ही तेजपत्ते की महक पुरे कमरे में फैलेगी आपको काफी रिलैक्स और रिफ्रेशिंग महसूस होगा। आपको बता दें तेजपत्ते का इस्तेमाल प्राचीनकाल से आयुर्वेद में किया जा रहा है। इअसे कई बिमारियों को ठीक करने का काम पहले से ही किया जाता रहा है।

इन बिमारियों को भी दूर करता है तेजपत्ता

तेजपत्ता एंटीइंफ्लेमेटरी होता है। जों लोगों को मिर्गी की समस्या है, उन्हें इसके धुएं के बीच रहना चाहिए। आयुर्वेद के विशेषज्ञों के अनुसार यह मिर्गी के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। तेजपत्ते में मिर्गी की बीमारी को जड़ से ख़त्म करने की क्षमता होती है। इसलिए अगर आपके घर में या आस-पास कोई मिर्गी की बीमारी से परेशान है तो उसे यह उपाय जरुर बताएं।

हर घर में कॉकरोच की समस्या होती है। घर की नमी वाली जगहों पर कॉकरोच आसानी से पनपते हैं। यह कई बिमारियों को भी घर में ले आते हैं। अगर घर में ज्यादा कॉकरोच हो गए हों तो उन्हें भगाने के लिए आप तेजपत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए तेजपत्ता जलाकर उस जगह पर रख दें, जहाँ सबसे ज्यादा कॉकरोच आते हों। ये नुकसान रहित भी है।

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