मानसिक तनाव दूर करने के उपाय


मानसिक तनाव दूर करने के उपाय

ब्रेन को भी आराम की ज़रूरत होती है, जब इस पर कार्य क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है, तो यह उसके भार को वहन नहीं कर पाता। लोगों को खुद भी इस बात का अंदाज़ा नहीं होता था कि वाकई उन्हें तनाव हो रहा है और उनकी परेशानी की असली वजह क्या है ?
ब्रेन को भी आराम की ज़रूरत होती है, जब इस पर कार्य क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है, तो यह उसके भार को वहन नहीं कर पाता। आजकल हम जब भी किसी का हाल पूछते हैं तो उसका एक ही जवाब होता है, क्या बताऊं, बहुत टेंशन में हूं, मेरा मूड खराब हो गया, मैं इतने स्ट्रेस में था कि मुझे रात भर नींद नहीं आई....ये कुछ ऐसे आम जुमले हैं, जिनका इस्तेमाल ज्य़ादातर लोग अपनी बोलचाल मे अकसर करते हैं। लोगों को खुद भी इस बात का अंदाज़ा नहीं होता था कि वाकई उन्हें तनाव हो रहा है और उनकी परेशानी की असली वजह क्या है।

तनाव (स्ट्रेस) क्या है?

तनाव यह शब्द अभी भी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालांकि यह कहना सुरक्षित है कि कुछ हासिल करने के लिए परेशानी या चिंता करना निश्चित रूप से आपको अपने लक्ष्य की ओर ले जाता है, लेकिन अगर आप अपने जीवन में भावनात्मक तनाव महसूस करते हैं तो यह एक स्वस्थ संकेत नहीं है। बहुत अधिक तनाव मानसिक समस्याओं का मूल कारण हो सकता है।
शरीर के अन्य हिस्सों की तरह ब्रेन को भी आराम की ज़रूरत होती है। जब इस पर कार्य क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है तो यह उसके भार को वहन नहीं कर पाता। जब इसके न्यूरोट्रांस्मीटर्स समस्याओं का हल ढूंढते हुए थक जाते हैं तो सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षणों के रूप में व्यक्ति का तनाव प्रकट होता है। हालांकि तनाव सापेक्षिक है। अर्थात इसे किसी निश्चित पैमाने से मापना मुश्किल है। हर व्यक्ति के लिए इसका स्तर अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोग छोटी-छोटी बातों से तनावग्रस्त हो जाते हैं तो कुछ बड़ी मुश्किलों को भी बहुत आसानी से हल कर लेते हैं।

सेहत पर प्रभाव-

तनाव की वजह भले ही मनोवैज्ञानिक हो लेकिन व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। हमारे शरीर में ब्रेन मास्टर कंप्यूटर की तरह काम करता है। जब व्यक्ति किसी वजह से तनावग्रस्त होता है तो इससे उसे कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं परेशान करने लगती हैं, जो इस प्रकार हैं : - 

अनिद्रा :-
तनाव का सबसे पहला असर व्यक्ति की नींद पर पड़ता है। जब इससे लडऩे के लिए ब्रेन में मौज़ूद सिंपैथेटिक नर्व ट्रांस्मीटर्स अधिक सक्रिय जाते हैं तो इससे व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या होती है। 
 
सर्दी-ज़ुकाम और बुख्रार :-
जो लोग अकसर परेशान रहते हैं, उनके ब्रेन के न्यूट्रांस्मीर्टस तनाव से लड़कर दुर्बल हो जाते हैं। इससे शरीर बुखार का इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ जाता है। यही वजह है कि तनाव होने पर सर्दी-ज़ुकाम और बुखार जैसी समस्याएं बार-बार परेशान करती हैं।  

हाई ब्लडप्रेशर :- 
तनाव में शरीर की ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाती हैं और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। ऐसे में रक्त प्रवाह का तेज़ होना स्वाभाविक है, जिससे व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। अगर सही समय पर इसे नियंत्रित न किया जाए तो यही समस्या हृदय रोग का भी कारण बन जाती है। 

डायबिटीज़ :-
 तनाव की वजह से शुगर को ग्लूकोज़ में परिवर्तित करने वाले आवश्यक हॉर्मोन इंसुलिन के सिक्रीशन में रुकावट आती है और इससे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। 
श्वसन-तंत्र संबंधी समस्याएं :- तनाव की स्थिति में सांसों की गति बहुत तेज़ हो जाती है। इससे कई बार व्यक्ति में एस्थमा जैसे लक्षण नज़र आते हैं। अगर किसी को पहले से ही यह बीमारी हो तो तनाव इसे और भी बढ़ा देता है। 

माइग्रेन :- 
जब स्थितियां प्रतिकूल होती हैं तो ब्रेन को एडजस्टमेंट के लिए जयादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे व्यक्ति को स्ट्रेस होता है। तनाव से लडऩे के लिए ब्रेन से कुछ खास तरह के केमिकल्स का सिक्रीशन होता है और उसकी नव्र्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे व्यक्ति को अस्थायी लेकिन तेज़ सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  
स्पॉण्डिलाइटिस :-
जब व्यक्ति बहुत ज्य़ादा तनावग्रस्त होता है तो उसकी गर्दन और कंधे  की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं। इससे उसे तेज़ दर्द महसूस होता है। गंभीर स्थिति में नॉजि़या और वोमिटिंग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।     
पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं :- जब व्यक्ति जयादा टेंशन में होता है तो प्रतिक्रिया स्वरूप आंतों से हाइड्रोक्लोरिक एसिड का सिक्रीशन असंतुलित ढंग से होने लगता है। ऐसी स्थिति में लोगों को आईबीएस (इरिटेटिंग बावल सिंड्रोम) की समस्या हो जाती है। पेट दर्द, बदहज़मी, लूज़ मोशन या कब्ज़ जैसी परेशानियों के रूप में इसके लक्षण नज़र आते हैं। एसिड की अधिकता से लूज़ मोशन और उसकी कमी से कब्ज़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

ओबेसिटी :-
लोगों को खुद भी इस बात का अंदाज़ा नहीं होता पर तनाव की स्थिति में अकसर वे बार-बार फ्रिज खोल कर चॉकलेट, पेस्ट्री और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसी नुकसानदेह चीज़ों का सेवन करने लगते हैं। इससे उनका वज़न बढ़ जाता है।  

त्वचा संबंधी समस्याएं :-
तनाव की वजह से व्यक्ति की त्वचा भी प्रभावित होती है। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार जब व्यक्ति अधिक चिंतित होता है तो उसके शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन कार्टिसोल का स्राव बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति को त्वचा में जलन की समस्या हो सकती है। इससे बचाव के लिए यह हॉर्मोन त्वचा की फैट ग्लैंड्स को एंटी-इंफ्लेमेट्री ऑयल के सिक्रीशन का निर्देश देता है। इसी वजह से तनाव की स्थिति में लोगों को एक्ने और स्किन एलर्जी जैसी समस्याएं होती हैं।  
    
डिमेंशिया :-
स्ट्रेस की वजह से जब व्यक्ति की नींद पूरी नहीं होती तो उसके ब्रेन में स्मृतियों का संग्रह नहीं हो पाता, जिससे रोज़मर्रा के कामकाज में वह ज़रूरी बातें भी भूलने लगता है। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो कुछ समय के बाद यही समस्या अल्ज़ाइमर्स जैसी गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेती है। 
   
प्रजनन तंत्र पर प्रभाव :-
तनाव की वजह व्यक्ति के शरीर में हॉर्मोन संबंधी असंतुलन पैदा होता है। इससे स्त्रियों को पीरियड्स में अनियमितता, पुरुषों में प्रीमच्योर इजैक्युलेशन के अलावा सेक्स के प्रति अनिच्छा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मानसिक तनाव दूर करने के उपाय

चिकित्सा प्रक्रिया को समझने के लिए पहले इस समस्या को समझना होगा।, आजकल ऐसे व्यक्ति की कल्पना करना असंभव है, जो मानसिक तनाव का अनुभव ना करता हो। फिर चाहे वह व्यक्तिगत, सामाजिक या आर्थिक समस्या ही क्यों ना हो। अधिकांश लोगों को इन समस्याओं से जूझने में तनाव के दौर से गुजरना पड़ता है। मानसिक तनाव या स्ट्रेस भी तन और मन दोनों पर बुरा असर डालता है जिससे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियां जन्म लेती हैं।

तनाव से दूर रहनें के लिए Omega Life और Head Care Apparatus का प्रयोग करें और हमेशा तनाव से होने वाली बीमारियों से दूर रहें। 

स्वस्थ आहार का सेवन है मन को शांत करने का तरीका 

जब आप तनाव में रहते है तो आपको फास्ट फूड और अतिरिक्त मीठा भोजन का सेवन करने का मन करता है। पर आपको स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए। जंक फूड के सेवन से लंबे समय में स्थिति बिगड़ सकती है। आपको डार्क चॉकलेट खानी चाहिए क्योंकि यह तनाव से लड़ने में मदद करती है। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां , ब्लूबेरी आदि का सेवन करें। गर्म  दूध का सेवन भी तनाव को दूर करने में मदद करता है। जंक फूड के सेवन से बचें और हमेशा स्वस्थ आहार के सेवन की कोशिश करें।

मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए नियमित दिनचर्या है ज़रूरी
  • तनाव जैसी समस्या से निजात पाने में बहुत महत्वपूर्ण है कि आप हमेशा नियमित दिनचर्या से चलें। यदि आप नियमित दिनचर्या से नहीं चले तो आपका तनाव लगातार बढ़ता जाएगा। 
  • आपके लिए अच्छी नींद लेना भी बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह आपके शरीर और मन को आराम देगी। 
  • सुबह जल्दी उठें और सूर्य उदय और प्रकृति का आनंद लें, इससे आपको खुशी महसूस होगी। 
  • अपना नाश्ता कभी न छोड़ें। दिन की अच्छी शुरुआत आपके पूरे दिन को बेहतर बनाती है और आपके तनाव को दूर करने में मदद करती है।
  • शराब, ड्रग्स और कैफीन का सेवन कम करना ये पदार्थ तनाव को रोकने में मदद नहीं करते बल्कि और भी बदतर बना सकते हैं। इनका सेवन कम करें या हो सकें तो ना करें। 
  • सही पोषण लें बहुत से फल और सब्जियों के साथ एक स्वस्थ, संतुलित आहार तनाव के समय प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने में मदद करता है। खराब आहार से तनाव और बढ़ेगा।
श्वास व्यायाम करें और विश्राम करें - ध्यान करने से, प्राणायाम से, और  योग से तनाव में राहत मिल सकती हैं। अगर इनका अभ्यास सही तकनीक से किया जाए तो ये मन को शांत करती हैं और आपको आराम करने में मदद करती है।

बातचीत करें - परिवार, दोस्तों से अपने विचारों और चिंताओं के बारे में बात करने से आपको तनाव में मदद मिलेगी। यह सब करने से आपको यह पता चलेगा कि आप अकेले नहीं हैं, जिसे तनाव है। आपको यह भी पता चलेगा की आपकी परेशानियों को दूर करने का एक बहुत ही सरल तरीका था, जिसके बारे में आपने कभी सोचा ही नहीं।

लक्षणों को स्वीकार करना - व्यक्ति अपनी समस्याओं के बारे में इतना चिंतित हो जाता है (जिससे तनाव पैदा हो रहा है) कि वे अपने शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर ध्यान नहीं दे पाता। लक्षणों पर ध्यान देना एक्शन लेने का पहला कदम है। अपने डीस्ट्रेसर (उन चीज़ों को करना जिनसे आपको तनाव में राहत मिले) का पता लगाएं - ज्यादातर लोगों को निम्लिखित चीज़ें करके आराम मिलता है। जैसे कि -
  1. कोई पुस्तक पढ़ना
  2. सैर पर जाना
  3. मनपसंद संगीत सुनना
  4. किसी दोस्त के साथ समय व्यतीत करना
  5. जिम जाना

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